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कार्लसन को आनंद की दोबारा चुनौती

पांच बार के वल्र्ड चैंपियन भारत के विश्वनाथन आनंद ने सभी आलोचकों को गलत साबित करते हुए रूस के सर्जेई कार्जाकिन को 13वें दौर में ड्रॉ पर रोककर रूस में आयोजित ख्यान्ति मनसियस्क कैंडिडेट्स शतरंज टूर्नामेंट का खिताब जीत लिया। टूर्नामेंट जीतकर फॅार्म में लौटे विश्वनाथन आनंद अब दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी नार्वे के मैग्नस कार्लसन के साथ इसी वर्ष नवंबर मे शतरंज की बिसात पर दो-दो हाथ करेंगे।

13 वें दौर के पहलेआराम के दिन का भरपूर लाभ आनंद को मिला और मैच के दिन वह पूरी तरह तैयार दिखे। उन्होंने कर्जाकिन के साथ साढ़े पांच घंटे से अधिक समय तक मुकाबला खेला। पूरे टूर्नामेंट में आनंद को केवल 13वें दौर में कुछ चुनौती मिली। कर्जाकिन के साथ खेले इस दिलचस्प मुकाबले को आनंद ने 91 चालों में ड्रॉ कर दिया। एक समय ऐसा लग रहा था कि कर्जाकिन कोई उलटफेर कर सकते हैं। लेकिन आनंद ने अपने अनुभव, कौशल और जबरदस्त फॅार्म का परिचय देते हुए बाजी ड्रॉ करवा दी।

अच्छे खेल के साथ खिलाड़ी को किस्मत का साथ भी चाहिए। आनंद के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ इस ड्रॉ से आनंद के आठ अंक हो गए थे और उन्हें टूर्नामेंट के सबसे बड़े उलटफेर का फायदा मिला, जब शीर्ष वरीयता प्राप्त आर्मेनिया के लेवोन आरोनियन को रूस के दिमित्री आंद्रेकिन के हाथों शिकस्त का सामना करना पड़ा।

मैच के बाद आनंद ने कहा कि ‘मुझे पता है कि नवंबर में मुझे दोबारा कार्लसन के साथ खेलना है इसी लिए मैंने अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है लेकिन मैं अपनी रणनीति का खुलासा नहीं करूंगा। अभी इसके बारे में बात नहीं करना चाहूंगा। वह मैच काफी महत्वपूर्ण होगा। सब कुछ सकारात्मक लग रहा है लिहाजा मैं नहीं बताऊंगा कि मेरी रणनीति क्या होगी। उन्होंने कहा कि इस तरह की जीत अहम है और परिदृश्य बदलने में इससे मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि हालात पूरी तरह से नहीं बदले हैं लेकिन एक अच्छे नतीजे से सब कुछ बदल जाता है। ऐसी जीत जरूरी होती है। इससे सब सकारात्मक हो जाता है। मैंने सोचना शुरू कर दिया है कि मुझे कैसे खेलना है। अगले कुछ महीने मैं अपने विचारों को ठोस रूप देकर रणनीति बनाऊंगा।’

पांच बार के विश्व चैंपियन आनंद को पिछले साल नवंबर में मैग्नस कार्लसन ने विश्व चैंपियनशिप मैच में हराया था। अब 2014 फाइड कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतकर फॉर्म में लौटे आनंद के पास बदला चुकाने और छठी बार विश्व चैंपियन बनने का मौका है। टूर्नामेंट से पहले आनंद को जीत का दावेदार नहीं माना जा रहा था। इसकी बड़ी वजह लंदन और ज्यूरिख में उनका ढ़ीला प्रदर्शन था। लंदन में खेले गए क्लासिक टूर्नामेंट में उनके खेल में काफी कमियां दिखीं और वे क्वार्टर फाईनल में हार गए। ज्यूरिख में तो उनका प्रदर्शन निम्न स्तर का रहा और वे आखिरी स्थान पर रहे। हालांकि ज्यूरिख क्लासिक के बिलिट्ज में जरूर वे तीसरे स्थान पर रहे, लेकिन उनके खेल से विश्व चैंपियन वाली बात नदारद ही थी।

कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के शुरूआती दौर से ही आनंद अपनी लय में दिखे। आर्मेनिया के लेवोन आरोनियन को विशि ने बड़ी चतुरता से मात दी। उनकी चालों में पुराने आनंद की झलकियां दिखीं। दूसरे राउंड में आनंद ने बुल्गारिया के टोपोलोव को ड्रॉ पर ही सीमित रखा। आनंद के खेल से साफ नजर आ रहा था कि उन्हें लय मिल गई है। अपनी लय और फॅार्म को बरकरार रखते हुए उन्होंने काले मोहरों के साथ खेलते हुए अजरबैजान के मामेदय्रोव को करीब ढ़ाई घंटे के खेल में 30 चालों में ही मात दे दी। आंनद ने इस कदर लय पकड़ी कि इसके बाद हुए लगातार पांच राउंड्स तक उन्होंने किसी को जीतने नहीं दिया। हांलाकि ये सारे राउंड्स ड्रॉ रहे, लेकिन खेल में आनंद का दबदबा साफ दिखा।

विशेषज्ञों और पुराने दिग्गज खिलाडिय़ों ने टूर्नामेंट से पहले कहा था कि आनंद पर दबाव होगा और अन्य खिलाड़ी उनके विरूद्ध आक्रामक शतरंज का प्रदर्शन करेंगे। लेकिन आनंद ने अपने आलोचकों और खेल के पंडितों को गलत साबित करते हुए अपने चिर-परिचित खेल का प्रदर्शन किया। नौवें राउंड में उन्होंने टूर्नामेंट में अपनी तीसरी जीत हासिल की। उन्होंने टोपोलोव के खिलाफ धीमी व सुरक्षात्मक शुरूआत को आक्रामक खेल में बदलते हुए, 52 चालों में ही बाजी अपने नाम की। यहां से आनंद को टूर्नामेंट जीतने से रोक पाना किसी भी खिलाड़ी के लिए भी संभव नहीं लग रहा था। कारण, टूर्नामेंट के सबसे उम्रदराज खिलाड़ी (44 वर्ष) भारत के विशि आनंद को भारतीय तिरंगे को रूस की सरजमीं पर जो लहराना था। नौवें राउंड के बाद आनंद कोई और बाजी तो जीत नहीं पाए, लेकिन उन्होंने कोई बाजी हारी भी नहीं और टूर्नामेंट में निर्णायक बढ़त बनाए रखी।

इस जीत के बाद रूस के दिग्गज खिलाड़ी और पूर्व विश्व चैंपियन गैरी कॉस्परोव ने कहा – ”एक रिटायर खिलाड़ी के लिए यह देखना काफी सुखद है कि खेल के सबसे अनुभवी व उम्रदराज खिलाड़ी ने शानदार वापसी करते हुए प्रतियोगिता जीती। जिन लोगों ने आनंद की आलोचना की थी, अब उन्हें शर्मिंदगी महसूस हो रही होगी।’’ वाकई आनंद ने किसी जादूगर की भांति प्रदर्शन किया।

उनके इसी जादूई प्रदर्शन से कायल हो कर खुद मैग्नस कार्लसन ने टूर्नामेंट की साईट पर कमेंट किया कि ‘मैं मानता हूं कि आनंद ने किसी चैंपियन की तरह प्रदर्शन किया है, उन्होंने ज्यादा गलतियां भी नहीं कीं। शुरूआत से ही वे संतुलन बनाए रखे। जीत के असली हकदार भी वे हीं थे।’ विशि के खेल में संतुलन के साथ आक्रामकता भी थी। पिछले वर्ष नवंबर में उन्होंने कार्लसन के विरूद्ध अहम मौकों पर गलतियां की थीं। यहां उन्होंने न सिर्फ सफाई से शतरंज खेली, बल्कि शुरूआत से ही अपने विरोधियों पर दबाव बनाए रखा। उम्मीद है कि विशि इस वर्ष नवंबर में कार्लसन को हरा एक बार फिर विश्व विजेता बन सभी भारतीयों को गौरवान्वित करेंगे।

सौरभ अग्रवाल

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