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बागी बने भाजपा-कांग्रेस की चुनौती

भाजपा तथा कांग्रेस ने चुनावी दंगल में सेलिब्रिटी जाति कार्ड खेलना मुनासिब समझा तो भाजपा ने मोदी लहर के बावजूद जोखिम उठाते हुए टिकट दिए। भाजपा ने सात तथा कांग्रेस ने छ: जाटों को टिकट थमाए, तो क्रमश: तीन व चार राजदूतों को मौका दिया।

भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेताओं की टीम में शामिल जसवंत सिंह जसोल की बाड़मेर तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री सुभाष महरिया की सीकर संसदीय क्षेत्र में बगावत ने राजस्थान से 16वीं लोकसभा चुनाव में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के मिशन 25 की सफलता पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। राज्य के 20 निर्वाचन क्षेत्रों में पहले चरण में 17 अप्रैल को मतदान होना है। नाम वापसी का आखिरी दिन 29 मार्च था और यह दोनों नेता चुनाव मैदान में डटे हुए हैं। इसी दिन से 24 अप्रैल को दूसरे चरण में 5 निर्वाचन क्षेत्रों में होने वाले मतदान के लिए नामांकन पत्र भरने की प्रक्रिया आरम्भ हो गई है। पहले चरण की 20 सीटों पर 239 प्रत्याशी मैदान में हैं।

14 वीं राजस्थान विधानसभा चुनाव में 200 सीटों में से 163 सीटों पर रिकॉर्ड जीत के साथ दूसरी बार शासन सत्ता संभालने वाली वसुंधरा राजे ने अपने नेतृत्व कौशल का डंका बजा दिया है और इसके चलते पार्टी हाईकमान ने भी लोकसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों के चयन में उनकी पसंद पर मुहर लगाने में कोई झिझक नहीं दिखाई। उम्मीदवार चुनने में पार्टी कार्यकर्ताओं, नेताओं तथा अन्य सूत्रों से फीडबैक की प्रक्रिया के साथ भाजपा ने चुनाव प्रबंधन में भी बढ़त ले ली है। वहीं प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस अपने प्रत्याशियों की पहली सूची की शीघ्र घोषणा के बावजूद चुनाव प्रबंधन से जुड़ी प्रक्रियाओं में उलझा हुआ है। पूर्व केंद्रीय मंत्री बूटा सिंह का जालोर से समाजवादी पार्टी की पार्टी की टिकट पर और चुरू में कांग्रेस से विधायक का चुनाव लड़ चुके एडवोकेट अभिनेष महर्षि का बहुजन समाज पार्टी का दामन थामना कांग्रेस को उलझन में डाल दिया है। केंद्रीय मंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट अजमेर से दूसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं। वहां से उनके मुखर विरोधी कांग्रेस नेता एवं अजमेर डेयरी के अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी ने भाजपा को खुला समर्थन देकर पायलट को मुश्किल में डाल दिया है।

पिछले लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को 25 में से 20 सीटें तथा भाजपा को महज 4 सीटें मिली थी। दौसा सीट पर भाजपा के बागी डॉ. किरोड़ीलाल मीणा विजयी हुए थे। कांग्रेस ने अपने 11 सांसदों को दुबारा मैदान में उतारा है। केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री नमोनारायण मीणा को टोंक-सवाई माधोपुर के स्थान पर दौसा में अपने भाई और राज्य के पुलिस महानिदेशक रहे भाजपा के हरीश मीणा के सामने ताल ठोंकने की इजाजत दी गई है, तो जयपुर ग्रामीण में पूर्व केंद्रीय मंत्री और पार्टी महासचिव डॉ. सी.पी. जोशी को टिकट दिया गया है। उनके सामने भाजपा ने नए चहरे ओलंपिक निशानेबाज राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को उतारा है। कांग्रेस ने मुरादाबाद के सांसद मोहम्मद अजहरुद्दीन को टोंक-सवाईमाधोपुर सीट पर लाकर अल्पसंख्यक वोट बैंक को लुभाने की कवायद की है, लेकिन बाहरी उम्मीदवार के रूप में उन्हें कांग्रेस अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पा रहा है। भाजपा ने भी उनके सामने हरियाणा निवासी सुखबीर सिंह जोनपुरिया को टिकट थमाया है, लेकिन लेकिन लोकसभा चुनाव में वह जयपुर ग्रामीण से तीसरे नम्बर पर रहे थे। पाली में कांग्रेस सांसद बद्रीराम जाखड़, जो पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के विश्वस्त सहयोगी रहे हैं, उनकी पुत्री मुन्नी देवी गोदारा को टिकट दिया गया, लेकिन गहलोत अपने पुत्र वैभव गहलोत को जालोर से टिकट दिलाने में कामयाब नहीं हो पाए। बांसवाड़ा से पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय की पत्नी रेशम मालवीय तथा वसुंधरा राजे के पुत्र दुष्यंत सिंह के खिलाफ झालावाड़ा भारा सीट पर पूर्व मंत्री प्रमोद जैन को चुनाव मैदान में उतारा गया है। पिछले चुनाव में प्रमोद जैन की पत्नी भाजपा के दुष्यंत सिंह से पराजित हुई थी।

चुनावी शह-मात के मद्देनजर वसुंधरा ने सियासी गणित को बखूबी अंजाम देने का प्रयास करते हुए कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के सामने नए चहरे लाने में उन्होंने कोई झिझक नहीं दिखाई। चितौडग़ढ़ में कें द्रीय मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास के सामने भाजपा जिलाध्यक्ष सी. पी. जोशी और जोधपुर से केंद्रीय मंत्री चंद्रेश कुमारी के सामने छात्र नेता गजेंद्रसिंह शेखावत हैं। वसुंधरा ने अपने खेमें में नजदीकी रखने वाले नेताओं की आशा पर भी पानी फेर दिया और जिताऊ उम्मीदवारों को वरीयता दी।

भाजपा तथा कांग्रेस ने चुनावी दंगल में सेलिब्रिटी जाति कार्ड खेलना मुनासिब समझा तो भाजपा ने मोदी लहर के बावजूद जोखिम उठाते हुए टिकट दिए। भाजपा ने सात तथा कांग्रेस ने छ: जाटों को टिकट थमाए, तो क्रमश: तीन व चार राजदूतों को मौका दिया। कांग्रेस ने मुस्लिम प्रत्याशी के नाम पर क्रिकेटर अजहरुद्दीन पर दांव खेला है। भाजपा से अल्पसंख्यक वर्ग का एक भी प्रत्याशी नहीं है। भाजपा ने दो-दो ब्राहाणों एवं वैश्यों को तथा कांग्रेस ने क्रमश: तीन एवं एक टिकट दिया। भाजपा ने एक तो, कांग्रेस ने दो गुर्जरों को चुनावी मैदान में उतारा है। इस वर्ग से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट के खिलाफ भाजपा ने मंत्री और जाट नेता सांवरलाल जाट पर दांव पर लगाया है। कांग्रेस ने छ: महिलाओं को टिकट दिया है, जबकि भाजपा ने अकेली महिला प्रत्याशी के रूप में विधायक संतोष अहलावत को आगे किया है जिनका मुकाबला शीशराम ओला की पुत्रवधू राजबाला से होगा।

देश के सबसे बड़े लोकसभा क्षेत्र बाड़मेर से टिकट के दावेदार रहे भाजपा के दिग्गज नेता जसवंत सिंह के बजाय, वसुंधरा ने अशोक गहलोत के विरोधी और कांग्रेस के पूर्व सांसद कर्नल सोनाराम को उतारा है। जसवंत सिंह की जनसभा के अगले दिन राजे ने बाड़मेर में बड़ी भीड़ जुटाकर इस सीट को अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है। जसवंत सिंह का दावा है कि उन्होंने वाजपेयी के समय वसुंधरा राजे को मुख्यमंत्री बनाने का सुझाव रखा था और यह भी तथ्य है कि राजे के पहले शासन काल में जसवंत सिंह ने राजे से असंतुष्ट धड़े की उंगली थामी थी। सीकर से सुभाष महरिया के साथ जसवंत सिंह का भाजपा से छ: साल के लिए निष्कासन तथा उनकी चुनावी हार-जीत भाजपा के नए समीकरण की इमारत लिखेगी।

अरविंद केजरीवाल की ‘आप’ पार्टी ने 24 प्रत्याशी खड़े किए हैं, जिनमें अजमेर से अजय सोमानी सहित तीन ने अपना नाम वापस ले लिया है। जयपुर से सवाईमानसिंह अस्पताल के अधीक्षक पद से सेवानिवृति लेकर चुनाव मैदान में उतरे अस्थमा रोग विशेषज्ञ डॉ वीरेंद्र सिंह तथा वन रैंक वन पैंशन की लड़ाई में अहम भूमिका निभाने वाले मेजर जनरल पद से सेवानिवृत राज कादयान प्रत्याशी हैं। भाजपा के बागी और निर्दलीय विधायक नवीन पिलानिया जयपुर ग्रामीण से राजपा टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। डॉ. जगमोहन मीणा को राज्य प्रशासनिक सेवा से अनिवार्य सेवानिवृति दिलवाकर कांग्रेस टिकट का जुगाड़ बिठाना चाहती थी, लेकिन उन्हें माया मिली न राम। अब मीणा का रूख इन छ: सात सीटों पर चुनावी गणित को प्रभावित करेगा।

कांग्रेस ने अब जाकर चुनाव प्रबंधन से जुड़ी विभिन्न समितियों के गठन की औपचारिक्ता पूरी की है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत फिलहाल अलग-थलग हैं तथा मारवाड़ में दौरा कर रहे हैं। वहीं जयपुर, चुरू, जयपुर ग्रामीण सहित अन्य क्षेत्रों में कांग्रेस की अपनी फूट उजागर हो चुकी है तथा पार्टी नेतृत्व के प्रयासों के बावजूद कोई सार्थक नतीजे सामने नहीं आ पाए हैं। उधर भाजपा में डैमेज कंटोल की कमान खुद वसुंधरा राजे ने संभाली है। भाजपा-कांग्रेस अपने स्टार प्रचारकों के चुनावी दौरों को अंतिम रूप देने में जुटी है। भाजपा में नरेंद्र मोदी और वसुंधरा की मांग अधिक है, जबकि कांग्रेस की तरफ से सोनिया गांधी और राहुल गांधी स्टार प्रचारक होंगे।

पिछले चार चुनावों का आकलन करें तो विधानसभा चुनाव में जिस दल को बहुमत मिला लोकसभा चुनाव में भी उसी दल को बढ़त मिली। अब लाख टके का सवाल यह है कि राजनीतिक परिवर्तन के लिए देशव्यापी मोदी लहर के चलते क्या यह परंपरा बरकरार रहेगी, इसकी जानकारी 16 मई की मतगणना से मिलेगी।

गुलाब बत्रा

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