ब्रेकिंग न्यूज़ 

विकास के सहारे दिल्ली कूच की तैयारी

देश में बदलाव लाने की कोशिशों में गुजरात का स्थान शुरू से ही महत्वपूर्ण रहा है। गुजरात के एक मेस से शुरु हुआ एक छोटा सा आंदोलन, जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में क्रांति का कारण बन गया। अयोध्या आंदोलन की शुरुआत भी गुजरात के सोमनाथ से रथयात्रा के रूप में हुई थी। इस बार भी सत्ता में बदलाव की वजह गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं, जिनकी विकास नीति देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी सराहा गया है। कांग्रेस की नीतियों और भ्रष्टाचार को लेकर जिस तरह का आक्रोश पूरे देश में है, वह पहले की तुलना में कहीं ज्यादा तीखा है।

संपूर्ण क्रांति, स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश में जवान होते लोकतंत्र में बदलाव की पहली बयार थी। आजादी के 67 साल बाद आज देश तीसरी बार बदलाव देखने को बेताब है। जयप्रकाश नारायण द्वारा दिया गया संपूर्ण क्रांति का नारा इंदिरा गांधी की सत्ता के खिलाफ शंखनाद था। परिणाम यह हुआ कि इस आंधी में इंदिरा गांधी को अपनी सत्ता गंवानी पड़ी। देश ने दूसरा बदलाव 90 के दशक में देखा, जब बोफोर्स घोटाले में फंसे राजीव गांधी द्वारा शाहबानो मामले में संविधान के साथ छेड़छाड़ ने देश में एक नई बहस छेड़ थी दी। धर्म के नाम पर संविधान के साथ की गई छेड़छाड़ से जनमानस में उपजे गुस्से को देखते हुए भाजपा ने अयोध्या में राममंदिर का मुद्दा उठाया। अयोध्या आंदोलन के रूप में देश में बदलाव का यह दूसरा दौर था। देर से ही सही, लेकिन इसका भी परिणाम मिला और 1996 में भाजपा पहली बार सत्ता की अगुवाई में समर्थ हुई। एक बार फिर 2014 के आम चुनावों में बदलाव की कुलबुलाहट महसूस की जा रही है। इसके पीछे यूपीए सरकार की असफल और तुष्टीकरण वाली नीतियों के साथ-साथ भ्रष्टाचार, महंगाई और कमजोर विदेश नीति है।

देश में बदलाव लाने की कोशिशों में गुजरात का स्थान शुरू से ही महत्वपूर्ण रहा है। गुजरात के एक मेस से शुरु हुआ एक छोटा-सा आंदोलन, जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में क्रांति का कारण बन गया। अयोध्या आंदोलन की शुरुआत भी गुजरात के सोमनाथ से रथयात्रा के रूप में हुई थी। इस बार भी सत्ता में बदलाव की वजह गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं, जिनकी विकास नीति देश ही नहीं, बल्कि विदेश में भी सराही गई है। कांग्रेस की नीतियों और भ्रष्टाचार को लेकर जिस तरह का आक्रोश पूरे देश में है, वह पहले की तुलना में कहीं ज्यादा तीखा है। शिक्षित होता समाज, राजनीति के प्रति जागरूक होते लोग, सूचना क्रांति के प्रचार ने लोगों की भ्रमित करने के रास्तों को संकरा कर दिया है। आपातकाल के कलंक को दरकिनार कर दें, तो देश की राजनीति में इंदिरा गांधी का कद कभी सबसे ऊंचा हुआ करता था, लेकिन उन नीतियों को आगे बढ़ाने में उनके उत्तराधिकारी असफल ही नहीं, बल्कि तोडऩे के कगार तक लेकर जा पहुंचे।

कभी डॉ. राममनोहर लोहिया द्वारा ‘गूंगी गुडिय़ा’ कही गई इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी के बाद लगभग तीन साल के लिए सत्ता में आई जनता पार्टी की सरकार के गिरने के बाद, 1980 के चुनाव में जीत हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत की। अपने 63 दिन के चुनावी अभियान में इंदिरा गांधी ने लगभग 40 हजार मील की यात्रा करते हुए 384 संसदीय क्षेत्रों में 20 भाषण दिए। परिणाम यह हुआ कि इस मेहनत का फल इंदिरा गांधी को मिला।

सन 1971 के चुनाव में इंदिरा गांधी द्वारा दिया गया ‘गरीबी हटाओ’ का नारा भले ही उतना कारगर सिद्ध नहीं हुआ, लेकिन विदेश नीति के मामले में इंदिरा गांधी को बेहद सफल माना जाता है। पाकिस्तान से अलग कर बांग्लादेश के उदय को उनकी विदेश नीति का सबसे बेहतरीन प्रमाण माना जाता है। श्रीलंका में सिंहलियों द्वारा अल्पसंख्यक तमिलों पर अत्याचार को लेकर उन्होंने श्रीलंका के तत्कालीन राष्ट्रपति जूनियस जयवद्र्धने को चेतावनी देते हुए कहा था कि तमिलों के खिलाफ हिंसा को देखते हुए भारत लंबे समय तक चुप्पी नहीं साध सकता। कुछ वैसे ही अंदाज में नरेन्द्र मोदी ने चीन की विस्तारवादी नीति और पाकिस्तान द्वारा सरहद पर किए जा रहे कुकृत्यों के खिलाफ चेतावनी अपने भाषणों में दी है।

भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी ने 2014 के आम चुनावों में भाजपा नीत एनडीए की जीत सुनिश्चित करने के लिए भारत के कुल 295 संसदीय क्षेत्रों में 185 रैलियों के माध्यम से जनता के बीच जाने की योजना बनाई है। अब तक हुई रैलियों में जनता की उपस्थिति ने साबित भी किया है कि मोदी पर उनका अटूट विश्वास है। यह भारत के किसी चुनाव में एक व्यक्ति द्वारा संबोधित की जाने वाली सबसे ज्यादा रैलियां होंगी।

गुजरात मॉडल के नाम से प्रसिद्ध नरेन्द्र मोदी की विकासवादी परिकल्पना में आर्थिक सुधारों का महत्वपूर्ण योगदान है। इसमें लाइसेंसराज से मुक्ति के साथ-साथ लघु और मझोले उद्योगों के विकास के लिए कई तरह की सरकारी योजनाओं का संचालन है। इसमें निजी क्षेत्रों द्वारा उद्योगों के विस्तार के साथ-साथ पब्लिक-प्राईवेट पार्टनरशिप का खास योगदान है। गुजरात में रेल, सड़क, बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं को बहुत हद तक पूरा किया जा चुका है। खासतौर पर विदेशी निवेश में गुजरात का रिकॉर्ड बेहतर है। इंदिरा गांधी द्वारा नजरअंदाज की गई स्वास्थ्य सेवाएं, हर युवा को रोजगार, पेयजल की उपलब्धता जैसी मूलभूत सुविधाओं को सुनिश्चित करना नरेन्द्र मोदी की स्पष्ट और व्यापक नीतियों का प्रमाण कहा जा सकता है।

मोदी ने कई रैलियों के दौरान जनता से वादा किया कि अगर केन्द्र में भाजपा (एनडीए) की सरकार आती है, तो कालेधन के खिलाफ सख्त कानून बनाए जाएंगे, साथ ही कालेधन को सामाजिक कल्याण के लिए आवंटित कर दिया जाएगा। कृषि के लिए विशेष नीति तैयार की जाएगी, जिससे किसान आत्मघाती कदम न उठा सकें और देश में खाद्यान्नों का उत्पादन बढ़ाया जा सके। महिला सशक्तिकरण को गति देकर समाज के हर क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ाने का लक्ष्य देश की आधी आबादी को मुख्यधारा में लाने का दूरगामी नजरिया है। युवाओं को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के लिए पब्लिक-प्राईवेट पार्टनरशिप के तहत नए उद्योगों को बढ़ावा भी सरकार के सीमित संसाधनों से बेहतर तालमेल बैठाना कहा जा सकता है। ये सारे मुद्दे आज एक भूले-बिसरे विषय हैं।

मोदी का कहना है कि समाज के समेकित विकास के लिए सरकार वैसी नीतियां बनाएगी, जिसमें जाति, धर्म, क्षेत्र और भाषा से परे समाज के हर वर्ग का व्यापक विकास हो। आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद पर मोदी की स्पष्ट और सख्त नीति है। देश से आतंकी मॉडल को पूरी तरह ध्वस्त करना मोदी की प्राथमिकताओं में शामिल है। उनका मानना है कि आतंकवाद और सीमा से जुड़े मसले पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। सीमा पर चौकसी को और दुरुस्त करने के साथ-साथ विषम परिस्थितियों में सीमा की सुरक्षा करने वाले जवानों के लिए मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी। जम्मू-कश्मीर मसले के समाधान के लिए मोदी ने कहा कि वाजपेयी सरकार की नीतियों के तहत कश्मीर, कश्मीरियत और इंसानियत के सिद्धांतों को आगे बढ़ाया जाएगा।

2004 चुनाव विकास आधारित कतई नहीं कहे जा सकते, क्योंकि अगर चुनावों में विकास ही मुद्दा होता, तो कांग्रेस सहित पिछली कई सरकारों से बेहतर प्रदर्शन के बावजूद वाजपेयी सरकार की हार नहीं होती। यूपीए ने इस चुनाव को सांप्रदायिक बनाम धर्मनिरपेक्षता में तब्दील कर दिया था, जिसके कारण अल्पसंख्यकों द्वारा किए गए रणनीतिक मतदान का लाभ यूपीए सरकार को न सिर्फ 2004 के चुनावों में, बल्कि 2009 के लोकसभा चुनावों में भी मिला। विकास बनाम छद्म धर्मनिरपेक्षता का खेल 2014 के चुनावों में भी जारी है। 2004 के चुनावों में भाजपा की हारने की एक मुख्य वजह यह भी बताई जाती है कि राम मंदिर, धारा 370

और समान नागरिक संहिता जैसे अपने मूल एजेंडे से पीछे हटने के कारण जनता में भाजपा के प्रति आक्रोश फैल गया, जिसके कारण उसने भाजपा के बजाय स्थानीय स्तर के नेताओं को वोट दिया। साथ ही मूल एजेंडे से हटने के कारण संघ ने भी 2004 के चुनावों में भाजपा की मदद करने से अपने हाथ पीछे खींच लिए।


कांग्रेस का चुनावी घोषणापत्र 2014


कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में एक-तिहाई आबादी को मध्यम वर्ग में लाने की बात कहते हुए कुल छह अधिकारों – स्वास्थ्य, पेंशन, सामाजिक सुरक्षा, आवास, सम्मान एवं मानवीय कार्य करने और उद्यम के अधिकार देने की महत्वाकांक्षी योजना लाने की बात अपने घोषणा-पत्र में कही है। स्वास्थ्य के अधिकार को मजबूती देने के लिए कांग्रेस ने स्वास्थ्य पर किए जाने वाले खर्चों में बढ़ोत्तरी करते हुए, उसे जीडीपी का तीन प्रतिशत करने की बात कहते हुए देशवासियों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही है। जिन न्यूनतम सामाजिक-आर्थिक अधिकारों को लागू करने का वादा किया गया है, वे नए अधिकार यूपीए-एक और यूपीए-दो सरकार के अंतर्गत के अधिकारों – खाद्य सुरक्षा, सूचना, शिक्षा, रोजगार, भ्रष्टाचार की रोकथाम करने, और पहचान के अधिकार के पूरक होंगे।

कांग्रेस ने दस करोड़ युवाओं को कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराने और उन्हें अगले पांच वर्षों में रोजगार के अवसर प्रदान करने का भी वादा किया है। रोजगार सृजन के संबंध में घोषणापत्र में कहा गया कि सत्ता में लौटने के 100 दिन के भीतर पार्टी रोजगार का एक विस्तृत एजेंडा पेश करेगी, ताकि युवाओं के लिए 10 करोड़ नए रोजगार और उद्यमशीलता के मौके पैदा किए जा सकें। युवाओं में क्षमता निर्माण, शिक्षा एवं नेतृत्व विकास पर ध्यान देने और साथ ही प्रत्येक युवा के लिए राजनीतिक प्रणाली के दरवाजे खोलने तथा उसकी आवाज को प्राथमिकता देने का वादा घोषणापत्र में किया गया है। घोषणापत्र में सर्व शिक्षा अभियान से श्रेष्ठ शिक्षा अभियान की दिशा में आगे बढऩे की भी बात कही गई है। वर्ष 2020 तक स्वास्थ्य के क्षेत्र में 60 लाख नई नौकरियों का सृजन करने का भी वादा किया गया है।

आर्थिक विकास को रफ्तार देने के लिए कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में आर्थिक वृद्धि दर तीन साल में आठ प्रतिशत वार्षिक करने और मुद्रास्फीति पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की बात कही है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को प्रोत्साहित करने और उत्पाद एवं सेवा कर (जीएसटी) एवं प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) के प्रस्तावों को लागू करने का भी वादा किया है। कालेधन पर रोक लगाने के लिए कालेधन का पता लगाने और उसे वापस लाने के लिए गंभीर एवं क्रमबद्ध प्रयास करने के तहत विशेष प्रतिनिधि की नियुक्ति करने की बात भी कही गई है।

देश के सामाजिक आर्थिक एवं राजनीतिक बदलाव के लिए कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में पंद्रह सूत्री कार्यसूची पेश की है। इस कार्यसूची में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, महिलाओं के सशक्तिकरण, अनुसूचित जाति एवं जनजातियों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने और इन वर्गों के लिए संसाधनों के आवंटन में वृद्धि करने तथा अन्य पिछड़े वर्गों ओबीसी के हितों की मजबूती से रक्षा करने का शामिल किया गया है। निजी क्षेत्र में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण पर राष्ट्रीय सहमति बनाने के प्रति भी प्रतिबद्धता जताई गई है।

माध्यमिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान पर जोर देने और इसके लिए संसाधनों को बढ़ाने का भी वादा किया गया गया है। अगले पांच वर्ष में माध्यमिक शिक्षा में सभी बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करने के साथ-साथ स्कूली शिक्षा छोडऩे वाले बच्चों की दर में कमी लाने, शिक्षा का मानकीकरण करने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सरकारी एवं निजी संस्थाओं के पर्यवेक्षण हेतु स्वतंत्र नियामक व्यवस्था स्थापित करने की घोषणा की गई है।

राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग को और अधिक मजबूत बनाने, कानूनी एवं न्यायिक सुधार तथा चुनाव सुधार लाने के लिए नई दिशा अपनाने की बात कही गई है। घोषणा पत्र में कहा गया है कि सभी गांव एवं शहरों को 18 महीने के भीतर हाई स्पीड ब्रॉडबैंड से जोड़ दिया जाएगा।


नरेन्द्र मोदी का उदय

2014 के लोकसभा चुनावों में नरेन्द्र मोदी का उदय और कई सर्वों में प्रधानमंत्री के पद की प्रबल दावेदारी के साथ लोगों द्वारा मिल रहे जबरदस्त समर्थन को यूपीए सरकार के अंत के रुप में देखा जा रहा है। मोदी के जीवनीकार नीलांजन मुखोपोध्याय का कहना है कि मोदी हमारे पहले ऐंटी-नेहरुवियन नेता हैं। पूरे भारत में मोदी-लहर उनके इस कथन को संबल देती है। गुजरात के विकास, भ्रष्टाचार विहीन सरकार और बेदाग छवि के लिए पहचाने जाने वाले नरेन्द्र मोदी को भाजपा द्वारा अपना उम्मीदवार घोषित किए जाने के साथ ही मोदी ने लोगों से जुडऩे की प्रक्रिया तेज कर दी थी। देश के हर राज्य में कम से कम एक रैली के आयोजन के साथ-साथ तकनीक का इस्तेमाल करते हुए ‘चाय पर चर्चा’ और सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं के साथ सीधा संपर्क मोदी के चुनावी अभियानों की प्रमुख विशेषताएं हैं। मोदी ने इस चुनाव में ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ के अपने सपने को पूरा करने के लिए पूरे देश में 185 ‘भारत विजय रैली’ का आयोजन किया गया है। छोटी-छोटी टोलियों के साथ-साथ बूथ लेवल तक के लिए टीमों का निर्माण उनकी प्रमुख रणनीति है। इसके तहत एक-एक व्यक्ति से संपर्क साधकर उसे भाजपा से जोडऩे की कोशिश शामिल है।

दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा अगली बार प्रधानमंत्री बनने की अनिच्छा के बाद, कांग्रेस की तरफ से प्रधानमंत्री पद के अघोषित उम्मीदवार राहुल गांधी ही हैं। राहुल और सोनिया गांधी की रैलियों में लोगों की अनुपस्थिति को देखते हुए, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बेचैनी महसूस करने लगे हैं। लोगों को राहुल-सोनिया गांधी की रैलियों में लाने के लिए नीचले स्तर के सभी नेताओं को निर्देश देना, कांग्रेस खेमे की मायूसी को इंगित करता है। चुनावी समीकरण के तहत राहुल और सोनिया गांधी का फोकस जनजातीय लोगों, महिलाओं और अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों पर है। ताकि चुनावी गणित को सम्मानजनक स्तर तक पहुंचाया जा सके।


 राहुल की ‘किंडरगार्टन’ नियति


राहुल गांधी जब एक इलैक्ट्रानिक चैनल के सामने पेश हुए तो उन्होंने सचमुच बहुत बड़े साहस का परिचय दिया। लेकिन वह इंटरव्यू लेने वाले के सवालों पर जिस तरह चकराए, उससे वह राजनीति के निरे कच्चे खिलाड़ी ही साबित हुए। पिछले करीब 9 साल से राहुल गांधी अपनी इसी ‘किंडरगार्टेन’ (बालवाड़ी) छवि से बाहर निकलने के लिए छटपटा रहे हैं। लेकिन अपने साक्षात्कार के बाद 2014 की इस सबसे कठिन राजनीतिक लड़ाई के ऐन पहले भी उन पर किंडरगार्टेन वाली छवि ही चस्पां हो गई है। उनके विरोधियों ने यही कह कर उनका मखौल उड़ाया है।

सोनिया गांधी ने दिल्ली की एक रैली में आम आदमी पार्टी पर यह कहते हुए निशाना साधा था कि शासन करना बच्चों का खेल नहीं है। केजरीवाल ने उनके इस बयान का मुंह बड़ी आसानी से राहुल गांधी की तरफ मोड़ दिया। केजरीवाल ने चुटकी ली- ‘सोनिया जी, राहुल के बारे में ऐसी बात नहीं करनी चाहिए।’ सही भी है, केजरीवाल की छवि भले ही भाग खड़े होने वाले राजनेता की बनी हो, लेकिन उन्हें ‘पप्पू’ तो कतई नहीं कहा जा सकता।

कांग्रेस पार्टी अपने जिस ‘युवराज’ को प्रधानमंत्री के रूप देख रही हो, वोटरों के बीच उनकी ‘कमअक्ल बालक’ की छवि बन जाए, वह भी चुनाव के ठीक पहले, तो इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती है। मोदी भी अपने फिकरों से यही दिखाते रहते हैं कि राहुल राजनीति में अब भी ‘मम्मी’ के पल्लू से बंधे निरे बालक ही हैं। राहुल की इसी छवि की वजह से एक बार फिर सोनिया को मोर्चा संभालना पड़ा है और राहुल गांधी अचानक गौण से हो गए लगते हैं। ‘मोदी मैजिक’ के सामने राहुल गांधी अपनी अलग चमक पैदा करने में बुरी तरह असफल रहे हैं। बल्कि, अब यह बात कांग्रेसियों के मन में भी घर कर गई है कि पार्टी की डूबती नैया को पार लगाना है, तो यह काम केवल प्रियंका गांधी ही कर सकती हैं। यह राहुल गांधी के बूते की बात नहीं है।

राहुल गांधी राजनीति में कदम रखने के बाद शुरू में तो लगातार ‘अनिच्छुक युवराज’ होने का संकेत ही देते रहे। लेकिन बाद में राहुल गांधी ने अपनी एक परिपक्व राजनेता की छवि बनाने के लिए पापड़ बेलने शुरू कर दिए। इंडिया को डिस्कवर (खोजने) करने के लिए कभी रात में किसी दलित घर ठहरे, तो कभी अमेरिका की तर्ज पर प्राइमरी के आधार पर पार्टी के उम्मीदवारों को चुनने की कवायद की, लेकिन आम लोगों में अपनी छाप छोडऩे में असफल रहे हैं। 10 साल के शासन के बाद कांग्रेस के खिलाफ जो जबरदस्त माहौल बना है उसे देखते हुए ऐसा कतई नहीं लगता कि राहुल गांधी पार्टी के लिए आपातकालीन लंगर की भूमिका निभा पाएंगे।

(ध. कु.)


नरेन्द्र मोदी की योजनाएं

अपने चुनावी घोषणा-पत्र में विकास को तरजीह देते हुए मोदी ने गांवों को 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की बात कही है। गुजरात की ‘ज्योति ग्राम योजना’ की तर्ज पर नीतियों का नियमन कर सरप्लस बिजली उत्पादन की व्यवस्था को पूरे देश में लागू करने का सपना मोदी ने देखा है। युवाओं को रोजगार सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दक्षता की आईटीआई संस्थाओं के विकास, कौशलवद्र्धन केन्द्र और व्यवसायिक शिक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही है। रोजगार के साथ-साथ भारत की आर्थिक और सामाजिक संरचना को मजबूती देने के लिए देश के हर राज्य में एक-एक आईआईटी और आईआईएम की स्थापना करने का लक्ष्य, दक्ष मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में एक सफल कदम माना जा सकता है।


शेरे गुजरात के विकास का दम


गुजरात में पिछले 12 सालों में किए अपने विकास के दम के बूते वह अपनी हर रैली में अपनी अलग छाप छोड़ते दिख रहे हैं। अगले 3 सप्ताह में अपनी करीब 186 रैलियों में मोदी अपने और किन-किन रंगों और जलवों को देश के समक्ष प्रस्तुत करेंगे, यह देखना बेहद रोचक होगा। पूरे देश से जुडऩे की कवायद में वह अपनी वेशभूषा, उनके रंगों, उनकी बुनावट पर विशेष ध्यान देते हैं।

उनके प्रतिद्वंद्वी तो अभी लस्त-पस्त दिखने लगे हैं, लेकिन मोदी के चेहरे पर थकान की कोई रेखा नहीं दिखती। मोदी लगातार अधिक आक्रामक और आत्म विश्वास से लबालब होते जा रहे हैं। अपनी रैलियों में लोगों की लगातार बढ़ती भीड़ से उत्साहित मोदी ने अब अपने बूते 272 सीट जीतने के लक्ष्य को और अधिक ऊंचा कर उसकी जगह 300 का लक्ष्य बना लिया है। इस शेर की दहाड़ सुन कर अमेरिका तक के कान खड़े हो गए हैं। उसने कभी मोदी की राह में रोड़े अटकाने की कोशिश करने वाली अपनी राजदूत नैंसी पॉवेल को वापस बुला कर संकेत दे दिए हैं कि वह मोदी के लिए रेड कार्पेट बिछाने की तैयारी शुरू कर दें।

(ध. कु.)


मोदी ने ब्रांड इंडिया के तहत प्रतिभा, व्यापार, भारतीय परंपरा और संस्कृति का विकास, पर्यटन और तकनीक के विकास को महत्व देने की बात कही है। उन्होंने भारतीय संस्कृति, युवा शक्ति, महिला सशक्तिकरण, कृषि, प्राकृतिक संसाधनों, लोकतंत्र और भारतीय ज्ञान-शक्ति को सप्तरंगी इंद्रधनुष कहा है, जिसके विकास को प्रमुखता देकर भारत को विश्व पटल पर चमकाया जा सकता है। भारत के इस इंद्रधनुषीय रंगों को उभारने को प्राथमिकता देने की बात मोदी के राष्ट्रवादी विकास के लिए महत्वपूर्ण है। विकास को गति देने के लिए नरेन्द्र मोदी ने जिन मुख्य बिंदुओं पर फोकस किया है, उनमें युवाओं के लिए शिक्षा और रोजगार के साधन उपलब्ध कराना, बच्चों और महिलाओं का सशक्तिकरण, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत संरचना का विकास, महंगाई और मूल्य नियंत्रण, कृषि सुधार, सभी के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और भ्रष्टाचार विरोधी नीतियां शामिल हैं। मोदी ने अपने विजन पत्र में कहा है कि शहरी और ग्रामीण विकास के अंतर्गत 100 शहरों को स्मार्ट सिटी, ट्वीन सिटी, सैटेलाईट सिटी बनाया जाएगा, जिससे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता जैसे महानगरों में जाने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे इन बड़े शहरों पर पडऩे वाले दबाव में भी कमी आएगी। इन शहरों को बुलेट ट्रेन से जोडऩा और नदियों को आपस में जोडऩा एक महत्वकांक्षी नीति कही जा सकती है।

मोदी ने विजन डॉक्यूमेंट में इंगित किया है कि सभी राज्यों, खासकर पूर्वोत्तर राज्यों का संतुलित विकास किया जाएगा। किसानों के लिए विविध फसल प्रणाली को बढ़ावा दिया जाएगा। कृषि उत्पादों के लिए रियल टाईम डाटा बैंक की स्थापना करने के साथ-साथ मिट्टी से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी। राष्ट्रीय कृषि बाजार की स्थापना किसानों को संवारने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। उनके विजन में स्वर्ण चतुर्भुज के लिए बुलेट ट्रेन की व्यवस्था, रेलवे में सुधार, गरीबों के लिए आवास की व्यवस्था, गैस और वाटर ग्रिड की स्थापना जैसी महत्वकांक्षी परियोजनाएं शामिल हैं। महिलाओं के लिए बेटी बचाओ अभियान, बेटी पढ़ाओ योजना और बराबरी का अधिकार भी इसमें शामिल है।

सुधीर गहलोत

 

 

 яхты фотоотзывы

Leave a Reply

Your email address will not be published.