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राज्यसभा में कांग्रेस की उल्टी गिनती

विधानसभा में मात्र 21 सीटों की वजह से प्रतिपक्ष के नेता पद की जिम्मेदारी लेने से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अनिच्छा को देखते हुए कई नामों पर विचार किया गया। आखिर में अनुभवी विधायक और पूर्व मंत्री प्रद्युम्न सिंह को इस पद के लिए सर्वाधिक उपयुक्त माना गया है।

चौहदवीं राजस्थान विधानसभा के गठन से कांग्रेस पार्टी के सिमटने का आरम्भिक चरण संसद तक पहुंचता दिख रहा है। दो सौ सदस्यीय विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 163 सीटों पर विजय का अब तक का ऐतिहासिक प्रचण्ड बहुमत मिला है। इस परिदृष्य में मई में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले संसद के उच्च सदन में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व खत्म होने का सिलसिला मार्च 2014 से आरम्भ होकर 2018 की पहली तिमाही में यह शिखर पर होगा। तब राजस्थान से राज्यसभा में कांग्रेस का अस्तित्व नहीं रह पाएगा।

इधर भाजपा की नवगठित सरकार ने आगामी लोकसभा चुनाव में प्रदेश की सभी 25 सीटों को अपनी झोली में डालने के लिए मिशन-25 पर योजनाबद्ध ढंग से काम करना शुरू कर दिया है। अभी लोकसभा में कांग्रेस के 19 तथा भाजपा के चार सदस्य हैं। केन्द्रीय मंत्री कांग्रेस के शीशराम ओला के निधन तथा निर्दलीय सांसद डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के त्यागपत्र से दो स्थान रिक्त हैं। डॉ. मीणा अपनी पत्नी पूर्व मंत्री गोलमादेवी के साथ राष्ट्रीय पीपुल्स पार्टी के टिकट पर विधायक चुने गए हैं। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपने स्तर पर तथा वरिष्ठ मंत्री गुलाबचंद कटारिया की अध्यक्षता में मंत्रिमंडलीय उपसमिति के गठन और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकों और प्रजेन्टेंशन के आधार पर तीन दर्जन से अधिक विभागों की साठ दिवसीय कार्य योजना को अंतिम रूप देकर उन पर अमल करना आरम्भ कर दिया है। इस कार्य योजना का मुख्य ध्येय यही है कि लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से पहले ही प्रदेश के मतदाताओं को यह भरोसा दिलाया जा सके कि काम करने वाली सरकार प्रदेश के सर्वांगीण विकास की गति को तेज करने के साथ दूरदृष्टि से नए आयाम जोडऩे में सक्षम है। शहरों को साफ -सुथरा तथा उनका रंग-रूप बदलने के प्रयासों के साथ करीब 75 फीसदी ग्रामीण जनता को सीधे लाभान्वित करने के मकसद से पांच प्राथमिकताओं – स्वच्छता व शौचालय निर्माण, जल निकासी, सड़क, स्वच्छ पानी, ऊर्जा एवं स्कूल व चिकित्सा संबंधी कार्ययोजना के क्रियान्वयन का मुख्य लक्ष्य बनाया गया है। इसीलिए वसुंधरा राजे ने अपने वरिष्ठ सहयोगी गुलाबचंद कटारिया को ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का जिम्मा सौंपा है। कटारिया ने अगले पांच सालों के लिए विभाग की रूपरेखा भी स्पष्ट कर दी है। पंचायतों के पुनर्गठन के लिए सुविधा के लिहाज से छोटी-छोटी पंचायतों के गठन पर जोर रहेगा, जिससे गांवों के बेहतर विकास में गति आएगी।

वसुंधरा राजे के पास मुख्यमंत्री पद के साथ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष का कार्यभार भी है। पार्टी संगठन और सत्ता के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने के लिए फिलहाल लोकसभा चुनाव तक वसुंधरा राजे ही दोनों पदों का भार संभालेंगी। सरकार के पांच मंत्री उपाध्यक्ष, महामंत्री तथा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व भी संभाल रहे हैं। उनकी जगह नए चेहरों को जिम्मेदारी सौंपने के बारे में प्रदेश प्रभारी कप्तान सिंह सोलंकी संकेत दे चुके हैं।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. चन्द्रभान ने भी झुंझुंनू जिले के मण्डावा विधानसभा क्षेत्र से अपनी जमानत जब्त कराने तथा पार्टी की शर्मनाक पराजय के बाद अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था। लेकिन अब तक उनके स्थान पर नियुक्ति को लेकर उलझन बनी हुई है। पार्टी की बागडोर संभालने वाले उपाध्यक्ष राहुल गांधी की पहली पसंद नए चेहरे के तौर पर अजमेर से सांसद तथा केन्द्रीय राज्यमंत्री सचिन पायलट को माना जा रहा है। वह गुर्जर समुदाय से हैं। इसी समुदाय के भाजपा के बागी नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला की कांग्रेस के पक्ष में खुली अपील के बावजूद पार्टी को विधानसभा चुनाव में राजनीतिक लाभ नहीं मिल सका। विधानसभा में मात्र 21 सीटों की वजह से प्रतिपक्ष के नेता पद की जिम्मेदारी लेने से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अनिच्छा को देखते हुए कई नामों पर विचार किया गया। आखिर में अनुभवी विधायक और पूर्व मंत्री प्रद्युम्न सिंह को इस पद के लिए सर्वाधिक उपयुक्त माना गया है। आठवीं बार विधायक बने प्रद्युम्न सिंह को प्रोटेम स्पीकर भी बनाया गया है, जो 21 जनवरी 2014 से आरम्भ होने वाली चौदहवीं विधानसभा के अध्यक्ष निर्वाचित होने तक यह जिम्मेदारी निभाएंगे। कांग्रेस विधायक दल की बैठक में उन्हें नेता चुनने की औपचारिकता होनी है। उधर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी पार्टी के केन्द्रीय संगठन में कोई दायित्व सौंपे जाने की प्रतीक्षा में है। यदि कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष पद पर किसी जाट नेता को आसीन किया गया तो भाजपा अध्यक्ष पद पर जातीय समीकरण भी परिवर्तित होगा। इस पद के दावेदारों में वसुंधरा के विश्वस्त सहयोगी डॉ. दिगम्बर सिंह का नाम सबसे ऊपर है। वह पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं और जाट समुदाय से हैं, लेकिन डीग कुम्हेर से अपने स्वजातीय भरतपुर के पूर्व राजपरिवार के मुखिया विश्वेन्द्र सिंह से चुनाव हार गए थे। दूसरी बार विधायक चुने गए पूर्व सांसद विश्वेन्द्र सिंह का नाम भी प्रतिपक्ष नेता पद के लिए चलाया गया था।

मुख्यमंत्री के साथ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वसुंधरा राजे ने आगामी लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी पदाधिकारियों से विचार-विमर्श कर लिया है। पार्टी शीघ्र ही लोकसभा के 25 निर्वाचन क्षेत्रों में प्रभारियों की नियुक्ति करेगी जिनकी देखरेख में चुनाव लड़ा जाएगा।

गुलाब बत्रा

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