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न्यौता नेतृत्व का

आज देश की जनता का प्यार, देश की जनता का स्नेह जिसे हासिल हो रहा है, उसी शख्सियत का नाम है नरेन्द्र मोदी जी। देश की जनता के प्यार को देखते हुए हमने नरेन्द्र मोदी जी को प्राईम मिनिस्टर कैंडिडेट के रूप में प्रोजेक्ट किया है।’’

भाजपा भारत की एक ऐसी राजनीतिक पार्टी है, जिसका ढांचा आज कांग्रेस पार्टी से भी बड़ा हो गया है। आजाद भारत में बहुत सारे राजनीतिक दल अस्तित्व में आए, लेकिन समाप्त हो गए। कोई भी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस से बड़ा ढांचा नहीं बना पाई, लेकिन भाजपा अकेली ऐसी पार्टी है, जिसने कांग्रेस से भी अधिक अपना विस्तार किया। भारत की यह अकेली राजनीतिक पार्टी है, जिसका एक अपना चिंतन व अपनी विचारधारा है। इस पर हम काम करते हैं। इसी कारण भाजपा का इतना बड़ा ढांचा बना है। आजाद भारत में जितनी भी राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टियां हैं, कांग्रेस समेत उन सबका वर्टिकल डिविजन हुआ है। लेकिन, भाजपा एक अकेली ऐसी पार्टी है, जिसका 1951 में अस्तित्व में आने के बाद से कभी भी वर्टिकल डिविजन नहीं हुआ है। देश की जनता के बीच अगर किसी पार्टी की विश्वसनीयता बची हुई है, तो वह भाजपा है। यही कारण है कि भाजपा के प्रति कॉमन मासेज का समर्थन बड़ी तेजी से बढ़ता जा रहा है। देश की राजनीति में 55 वर्षों से अधिक समय तक सक्रिय रहने के बावजूद, अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी पर कोई भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा है। भाजपा की यह सबसे बड़ी उपलब्धि है। भाजपा के पास आज भारत के सबसे लोकप्रिय नेता नरेन्द्र मोदी हैं। नरेन्द्र मोदी कास्ट, क्रीड, रीलिजन…. सबसे अलग हटकर हैं। आज देश की जनता का प्यार, देश की जनता का स्नेह जिसे हासिल हो रहा है, उसी शख्सियत का नाम नरेन्द्र मोदी है। देश की जनता के प्यार को देखते हुए भाजपा ने नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में देश के समक्ष पेश किया है।

मुझे याद है जब 2010 में अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा भारत आए थे, तो पार्लियामेंट के सेंट्रल हॉल में दोनों सदनों के सदस्यों को संबोधित करते हुए, उन्होंने कहा था कि ‘इंडिया इज नॉट इमर्जिंग, बट इंडिया हैज इमज्र्ड’ (भारत उभर ही नहीं रहा है, बल्कि भारत उभर चुका है)। मुझे लगता है कि 2004 तक अर्थव्यवस्था की गति के परिप्रेक्ष्य में उन्होंने यह बात कही थी। जब भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एनडीए की सरकार चला रहे थे, उस समय भारत ने विकास की जो गति हासिल की थी, उससे पूरी दुनिया में भारत की एक साख, एक विश्वसनीयता, एक धाक बनी थी। उस समय देश की विकास दर 8.4 प्रतिशत थी। इतनी विकास दर आजाद भारत में कभी नहीं रही। उस समय भारत करंट अकाउंट डेफिसिट देश नहीं था, बल्कि भारत करंट अकाउंट सरप्लस देश बन चुका था। यह हमारी सरकार की विशेषता थी। इस देश में ढांचागत विकास कितना हुआ है? देश की फोर लेन, सिक्स लेन चौड़ी सड़कों पर चलने पर आभास होता है कि आजाद भारत में पहली बार अगर यह काम किसी ने किया था, तो वह अटलजी की सरकार थी। आईटी में बूम अगर किसी के कार्यकाल में आया, तो अटलजी की सरकार में आया था। दूरसंचार में अटलजी की सरकार के दौरान बूम आया था।

दुनिया के विकसित देश नहीं चाहते थे कि भारत परमाणु बम टेस्ट करे। अटलजी को यह बात मालूम थी कि अगर भारत में परमाणु बम का टेस्ट किया जाएगा तो भारत को क्या खमियाजा भुगतना पड़ सकता है। इसके बावजूद उन्होंने ऐसा करने का फैसला लिया। राजस्थान की धरती पर पोखरण में परमाणु बम का टेस्ट किया गया। बाद में जो हुआ, उसे सारी दुनिया जानती है। कई देशों ने भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए, फिर भी हम लोगों ने देश की इकॉनॉमी को कमजोर नहीं होने दिया। इसका सारा श्रेय हमारे एनआरआई मित्रों को जाता है। उस समय, 1998 में ‘इंडिया रिसर्जेंट बॉण्ड’ जारी हुआ था। इस बॉण्ड में एनआरआई मित्रों के निवेश ने सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था को ही नहीं संभाला, बल्कि डॉलर के मुकाबले हमारे रूपए को भी मजबूत किया। लेकिन सिर्फ निवेश से ही देश की अर्थव्यवस्था मजबूत नहीं होती, बल्कि उसके लिए देश में मजबूत नेतृत्व भी होना चाहिए। यह नेतृत्व देश में किसी पार्टी के पास है, तो वह है भाजपा। और उसके नेता का नाम है– नरेन्द्र मोदी। गुजरात में मुख्यमंत्री के रूप में प्रधानमंत्री पद के हमारे उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी का काम सारी दुनिया देख चुकी है। अगर देश में मॉडल राज्य के रूप में किसी राज्य की बात होती है, तो वह है गुजरात। भाजपा ने बहुत सोच-समझकर उन्हें प्रधानमंत्री पद के रूप में उन्हें पेश किया है। भारतीय मूल के 25लाख लोग दुनिया भर के देशों में रहते हैं। यह एक बड़ी जनसंख्या है, जो भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

अन्य देशों में रहने वाले चीनी मूल के लोगों का समूह सबसे बड़ा प्रवासी समूह है। चीनी मूल के सबसे अधिक लोग दुनिया के दूसरे देशों में रहते हैं। उसके बाद भारत का नाम आता है – प्रवासी भारतीय। एक समय ऐसा था, जब चीन में प्रवासी चीनीयों का निवेश, एफडीआई का 80 प्रतिशत था। आज भी यह 45 से 50 प्रतिशत के बीच है। भारत में हमारे एनआरआई मित्रों का एफडीआई में निवेश का भाग 10 से 15 प्रतिशत के बीच या उससे थोड़ा अधिक हो सकता है। आज जो एफडीआई में निवेश का भाग है, वह बढ़ कर एक दिन 40 से 45 प्रतिशत हो जाएगा। लेकिन इसके लिए एक अच्छे शासन की जरूरत है। विदेशों में रहने वाले भारतीयों की संख्या भी ढाई करोड़ के आस-पास है। ऐसे में मैं पांच साल तो नहीं, लेकिन यह कह सकता हूं कि 10 से 15 सालों में हम भारत को सुपर पावर बना सकते हैं। हम भारत को सुपर पावर बनाना चाहते हैं। हम भारत को तेजी से आगे बढ़ाना चाहते हैं। अगर कोई इसे सिर्फ आर्थिक विकास मानता है तो हम बता दें कि हम सांस्कृतिक धारा से भी जुड़े हैं। हम भारत का आर्थिक विकास ही नहीं, आध्यात्मिक विकास भी चाहते हैं।

प्राचीन इतिहास बताता है कि भारत को जगत-गुरू कहा जाता था। कहा जाता था कि भारत सोने की चिडिय़ा है। यहां दूध की नदियां बहती थीं। यह हाल 17वीं शताब्दी तक था। लेकिन अंग्रेजों के आने के बाद भारत की आर्थिक स्थिति खराब होती चली गई और आजादी मिलने के बाद जब कांग्रेस की हुकूमत आई तो भारत की स्थिति बद से बदतर हो गई। गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई ने आम लोगों को त्रस्त कर दिया। अटलजी के शासन में विकास दर बढ़ी थी। साथ ही महंगाई पर नियंत्रण था। हम वोट शब्दों के आधार पर नहीं, अपने काम के प्रदर्शन के आधार पर मांग रहे हैं।

विदेशों में अधिकतर भारतीय सेवा क्षेत्र में हैं। लेकिन वेस्टइंडीज, फिजी, मॉरिशस सहित दूसरे देशों में अधिसंख्य लोग सेवा क्षेत्र के साथ-साथ उद्योग और दूसरे क्षेत्र में भी हैं। क्या भारत में ऐसे हालात पैदा नहीं किए जा सकते हैं कि विदेशों में रहने वाले भारतीय यहां के ढांचागत क्षेत्रों में भी निवेश करने के लिए आगे आ सकें? भारत में आज निर्यात कम होने और आयात बढऩे के कारण चालू खाता घाटा बढ़ रहा है। इसका परिणाम यह है कि रूपए की कीमत डॉलर के मुकाबले काफी नीचे गिर गई है। ढांचागत क्षेत्र में निवेश बढ़ाकर देश को सुधारने की दिशा में अहम् कदम उठाया जा सकता है।

हमारे देश के निर्माण क्षेत्र में तैयार होने वाली वस्तुएं दूसरे देशों में तैयार होने वाली वस्तुओं से कम नहीं, बल्कि बेहतर भी हैं। अगर चीन निर्यात में इतना आगे जा सकता है, तो भारत भी जा सकता है। हमारी सरकार बनने के बाद हम देखेंगे कि निर्माण क्षेत्र को और आकर्षक बनाकर क्या कोई और भी ‘इंडियन रिसर्जेंट बॉण्ड’ लाया जा सकता है। हम वह सारे कदम उठाएंगे, ताकि अन्य देशों में रहने वाले भारतीय देश में अधिक से अधिक निवेश कर सकें।

मुझे अमेरिकी आव्रजन बिल ‘बोर्ड सिक्योरिटी इकॉनॉमिक अपॉरच्युनिटी इमिग्रेशन मॉडर्नाइजेशन एक्ट 2013’ को लेकर शिकायत है। इससे वीजा की फीस बढ़ गई है। मैं अमेरिकी सरकार से भी अपील करना चाहता हूं कि इस बिल पर पुनर्विचार करें। साथ ही भारत के आईआईटी जैसे संस्थानों में एनआरआई मित्रों के बच्चों के नमांकन की भी व्यवस्था की जाए।

राजनाथ सिंह

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