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2013 रहा विवाद एवं जीत का मिश्रण!

भारतीय खेल जगत के लिए वर्ष 2013 मिला-जुला साल साबित हुआ। भारत ने लगभग हर खेल में अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन विवादों ने जीत की मिठास को कुछ खट्टा भी कर दिया। एक नजर कुछ लोकप्रिय खेलों में भारत के प्रदर्शन पर :

क्रिकेट

वर्ष 2013 भारतीय क्रिकेट, खासतौर पर एकदिवसीय क्रिकेट के लिए शानदार रहा। निरंतर बुलंदियों को छू रही भारतीय टीम, इस वर्ष भी अपनी पहचान के मुताबिक खेली। हालांकि, साल की शरूआत और अंत में पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका से भारत श्रृंखलाएं हार गया, परंतु इसके बीच भारत ने लगातार 6 श्रृंखलाएं (3 भारत में और 3 विदेश में) जीतीं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण जीत इंग्लैंड में खेली गई चैंपियंस टॅ्राफी (मिनी वल्र्ड कप) के आखिरी संस्करण की रही, जिसे भारत ने दूसरी बार जीता। इससे पूर्व भारत ने इंग्लैंड को उसके ही घर में, जुलाई में वेस्टइंडीज में त्रिकोणीय श्रृंखला में, अगस्त में जिम्बाब्वे को जिम्बाब्वे में, अक्तूबर में ऑस्ट्रेलिया को और नवंबर में वेस्टइंडीज को घर में मात दी। टेस्ट क्रिकेट में भारत के लिए वर्ष 2013 सामान्य रहा। इंग्लैंड के हाथों घर में सूपड़ा साफ होने के बाद भारत ने आस्टे्रलिया को घर में 4-0 से हराया। इस जीत के साथ ही भारत ने ऑस्ट्रेलिया से ऑस्टे्रलिया में मिली हार का बदला भी पूरा किया। इसके बाद वेस्टइंडीज को 2-0 से घर में हराया। इस सब के बीच क्रिकेट प्रेमियों के भगवान सचिन रमेश तेंदुलकर ने खेल को अलविदा कह दिया। विश्व क्रिकेट में यह पल अपने आप में एक पीढ़ी के अंत के बराबर था। भारत में आयोजित टी-20 लीग आई.पी.एल. का छठा संस्करण मुंबई इंडियंस के नाम रहा, जिसने फाईनल में चैन्नई सुपर किंग्स को हरा कर खिताब जीता। हालांकि, मैच फिक्सिंग के कलंक से आई.पी.एल. जरूर दागदार हुआ। श्रीसंत सरीखे कुछ और खिलाडिय़ों को इसमें दोषी पाया गया। फिलहाल भारतीय टीम दक्षिण अफ्रीका में टेस्ट श्रंृखला खेल रही है। महिला क्रिकेट में भी भारत ज्यादा कुछ नहीं कर पाया। जनवरी-फरवरी में भारत में हुए विश्व कप में भारतीय महिला टीम पाकिस्तान को हरा कर सातवें स्थान पर रही।

मुक्केबाजी

मुक्केबाजी में भारत के लिए वर्ष 2013 एक बुरी खबर के साथ आया। विश्व प्रतियोगिताओं और ओलंपिक खेलों में भारत को पदक दिलाने वाले इकलौते भारतीय मुक्केबाज विजेन्दर सिंह ड्रग स्कैंडल में फंस गए। इससे पहले इंडियन बॉक्सिंग फेडरेशन को बीते वर्ष दिसंबर में अंर्तराष्ट्रीय स्तर से सस्पेंड कर दिया गया था। मणिपुर की भारतीय महिला मुक्केबाज मेरी कॉम को लदंन ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने पर पदम् भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। एशियन यूथ चैंपियनशिप में भारतीय मुक्केबाजों को कांस्य पदक से ही संतुष्ट होना पड़ा। कजाकिस्तान में भारत एक गोल्ड और तीन कांस्य व साइप्रस में चार गोल्ड के साथ कुल 10 पदक जीतने में कामयाब रहा। चाईना ओपन और एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भी भारत को पदक मिले। सर्बिया में 9 भारतीय मुक्केबाज फाईनल तक पहुंचे। विजेन्दर सिंह ने स्कैम के बाद वल्र्ड चैंपियनशिप में वापसी की। जूनियर वल्र्ड बॉक्सिंग में भारतीय महिलाओं ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए पदक जीते। पुरूषों में विजेन्दर सिंह के दूसरे राउंड में बाहर होने के बाद अन्य तीन मुक्केबाज क्वार्टर फाईनल तक पहुंचे।

हॉकी

निरंतर अपना वर्चस्व खोती भारत का राष्ट्रीय खेल हॉकी के लिए यह वर्ष अन्य वर्षों की तरह ही रहा। 1975 में विश्व विजेता बनी भारतीय टीम आज अपना खोया सम्मान पाने की जद्दोजहद में है। गौरतलब है कि भारत ओलंपिक खेलों में भी लगातार 6 स्वर्ण, 1 रजत और 1 कांस्य पदक जीत चुका है। इस वर्ष अगस्त सितंबर में मलेशिया में संपन्न एशिया कप में भारत कोरिया से 4 के मुकाबले 3 गाोल से हार गया था। हॉकी को और प्रचलित करने और नई प्रतिभाओं की खोज में क्रिकेट की तर्ज पर जनवरी में हॉकी इंडिया लीग शुरू की गई। हार की कहानी को भारत की जूनियर टीम ने विश्व कप में भी दोहराया। पाकिस्तान से 4 के मुकाबले 2 गोल से हार कर भारत की जूनियर टीम दसवें स्थान पर रही। हालांकि, जूनियर टीम ने सुल्तान अॅाफ जोहर कप जीत कर कुछ इज्जत जरूर बचाई। भारतीय महिला जूनियर टीम ने अच्छा प्रर्दशन करते हुए जर्मनी में आयोजित विश्व कप में कांस्य पदक जीता।

शतरंज

शतरंज में वर्ष 2013 भारत के विश्वनाथन आंनद के लिए अच्छा नहीं रहा। हाल ही में आनंद चेन्नई में आयोजित विश्व शतरंज चैंपियनशिप में दुनिया के नं.-1 खिलाड़ी नार्वे के मेग्नस कार्लसन से हार गए थे। इसके बाद आनन्द लंदन में आयोजित लंदन चेस क्लासिक में रूसी मूल के व्लादिमीर क्रामनिक से क्र्वाटर फाईनल में हार कर टूर्नामेंट से बाहर हो गए।

कबड्डी

कबड्डी में भारत के लिए वर्ष 2013 बेहद खास रहा। भारत ने उपविजेता पाकिस्तान को 39 के मुकाबले 48 अंकों से हराकर विश्व कप पर कब्जा कर लिया। भारत का यह लगातार चौथा विश्व कप खिताब है। इसी वर्ष भारत ने महिला वर्ग में लगातार तीसरी बार विश्व कप जीता। भारत ने न्यूजीलैंड को 21 के मुकाबले 49 अंकों से हराया।

टेनिस

मुक्केबाजी की तरह ही टेनिस में भी भारत की शुरूआत विवाद से हुई। सोमदेव बर्मन और 8 अन्य खिलाडिय़ों ने डेविस कप में जाने से इंकार कर दिया था। विवाद और बहिष्कार के बावजूद डेविस कप में लिएंडर पेस और पूरव राजा की जोड़ी ने अच्छा प्रर्दशन किया। फेडरेशन कप में स्टार खिलाड़ी सानिया मिर्जा की गैर-मौजूदगी में भारत एक भी मैच नहीं जीत पाया। दुबई टेनिस चैंपियनशिप में सोमदेव ने रूस के खिलाड़ी को हरा कर, एटीपी रैंकिंग में 65वें स्थान पर छलांग लगाई। क्योटो में दविज शरन और पूरव राजा ने खिताबी जीत दर्ज की। एटीपी इंडियन वेल्स मास्टर्स में महेश भूपति व सानिया मिर्जा अपने जोड़ीदारों के साथ शरूआती दौर में बाहर हो गए। मियामी मास्टर्स में सोमदेव का मुकाबला विश्व के नं.-1 खिलाड़ी नोवाक जोकोविच से हुआ। दविज और पूरव मैक्सिको में एटीपी चैलेंजर के सेमीफाईनल में हार गए। वहीं मोनेको में मोंटे कार्लो मास्टर्स में पेस-मेलजर की जोड़ी ने भूपति-बोपन्ना को हराया। चाईना में भी दविज और पूरव एटीपी टूर्नामेंट के सेमिफाईनल में पहुंचे। मेडरिड ओपन व रोम मास्टर्स में भूपति-बोपन्ना हार के बाद बाहर हो गए। फ्रेंच ओपन में सोमदेव और एजन चैम्पियनशिप में भूपति-बोपन्ना ने अच्छा प्रर्दशन किया। विम्बिल्डन में दविज और पूरव को छोड़ कर, पेस, भूपति, बोपन्ना और सानिया ने अच्छा प्रर्दशन किया। वर्ष के अंत तक भारतीय टेनिस ने नई बुलंदियों को छुआ।

बैडमिंटन

बैडमिंटन में स्टार खिलाड़ी सायना नेहवाल को छोड़कर बाकि खिलाडिय़ों ने अच्छा प्रदर्शन किया। 23 वर्षीया सायना इस वर्ष खिताब जीतना तो दूर, इंडोनेशिया, डेनर्माक, स्विट्जरलैंड और थाइलैंड में अपने खिताब को बचा तक नहीं पाई। वहीं पी.वी. सिंधू ऐसी पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं, जिन्होंने गुआंगजूह व चीन में वल्र्ड चैंपियनशिप में पदक जीते।

इसके साथ उन्होंने दो ग्रां प्री खिताब में स्वर्ण पदक जीता।

सौरभ अग्रवाल

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