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सावधान! स्मार्टफोन पर वायरस के हमले

स्मार्टफोन के क्षेत्र में हो रही लगातार प्रगति और उसकी बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए हैकर्स की पैनी निगाहें अब स्मार्टफोनों पर आ लगी हैं। स्मार्टफोन आज हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं और वे अगली पीढ़ी के कम्प्यूटर माने जाने लगे हैं।

स्मार्टफोन अब केवल कॉल करने से लेकर कोई सूचना प्राप्त करने या किन्हीं यादगार क्षणों को इसके कैमरे में कैद करने तक ये सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि आम आदमी के जीवन को सुगम बनाने के लिए एक वफादार सेवक की तरह अनेक प्रकार की सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। इससे आम आदमी अपने स्मार्टफोन पर दिन ब दिन निर्भर होता जा रहा है। मोबाईल फोन हम अपने खुद के कई ऐसे राज सुरक्षित रखते हैं, जो हम दूसरों से छिपाकर रखते हैं। इनमें बैंक खाता का नंबर, उसके पासवर्ड आदि कई अन्य ऐसी जानकारियां होती हैं जिन्हें हम नहीं चाहते कि किसी अन्य को पता चले। ये जानकारियां प्राप्त करने की काशिशें हैकर्स की दुनिया को स्मार्टफान की तरफ आकर्षित कर रही हंै, जिसके कारण स्मार्टफोन के लिए भी वायरस इजाद हो गए हैं।

स्मार्टफोन की बढ़ती मांग के साथ-साथ वायरस बनाने में भी इजाफा हुआ है। कई ऐसे स्पैम और मालवेयर (एक तरह का वायरस) मार्केट में आ चुके हैं, जिससे हमारे फोन में मौजूद डाटा पूरी तरह बर्बाद किया जा सकता है। इससे स्मार्टफोन पूरी तरह अनुपयोगी हो जाता है। हालांकि मार्केट में ऐसे कई एंटी वायरस सॉफ्टवेयर हंै, जो फोन की रक्षा करते हैं, लेकिन फिर भी पूरी सावधानी बरतने और सतर्क रहने की जरूरत है जिससे फोन में अपनी अहम जानकारियों को सुरक्षित रखा जा सकता है। आइए, कुछ ऐसे तरीकों की बात करते हैं, जिससे अपका स्मार्टफोन वायरस के संपर्क से दूर रह सके।

एप्स डाउनलोड करते समय

जब स्मार्टफोन की बात करते हैं तो मार्केट में उपलब्ध मिलियन एप्स का ध्यान आता है। मार्केट में असंख्य एप्लीकेशन्स हैं तो असंख्य वायरस भी आ गए हैं। कई एप्स डाउनलोड करते समय हम वायरस भी डाउनलोड कर लेते हैं। एप्स को डाउनलोड करते समय हम ऐसी कुछ फाईल्स डाउनलोड कर लेते हैं, जिसमें स्पैम और मालवेयर छुपा होता है। ये वायरस डाउनलोड होते ही आपके फोन की प्रोसेसिंग पावर को कम कर देता है, जिससे आपका फोन खराब हो सकता है। एप्स को डाउनलोड करते समय हम कभी भी उसके ‘टम्र्स एंड कंडीशन्सÓ नहीं पढ़ते, जिससे वायरस के जरिए आपकी प्राइवेसी खत्म हो जाती है।

क्या करें – वायरस से बचने के लिए कम से कम एप्स को डाउनलोड करंे और केवल जेन्यूइन एप्स का ही प्रयोग करें। अगर संभव हो तो एप्स को इंस्टॉल करते समय उसकी टम्र्स एंड कंडीशन्स भी जरूर पढें ।

इंटरनेट का प्रयोग करते समय

इंटरनेट से डाउनलोड और स्ट्रीमिंग एक वायरस के लिए सबसे आसान तरीका है। कई बार साइटों को खोलने पर स्पैम और मालवेयर अपने आप ही वायरस वाली फाइलों के जरिए खुद ही डाउनलोड हो जाती हैं। डाउनलोड कि गई फाइलों में बहुत कुछ कोडेड हो सकता है, जिसका आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते।

क्या करें – अपने फोन में एंटी-वायरस इन्स्टॉल करें, जिससे फ ाइलों को स्कैन करके वायरस को खत्म किया जा सकता है।

कंप्यूटर से कनेक्ट करते समय

जब आप अपने कंप्यूटर के साथ अपने स्मार्टफ फोन को कनेक्ट करते हैं तो उस समय आपके फोन में मालवेयर के खतरे की आशंका बढ़ सकती है। इससे बचने के लिए नियमित अंतराल पर अपने कंप्यूटर को स्कैन करते करते रहना चाहिए अन्यथा कंप्यूटर में वायरस आने की आशंकाएं बढ़ जाएंगी। ये वायरस यूएसबी के माध्यम से आपके डिवाइस को करप्ट कर देगें

क्या करें – एंटी-वायरस से अपने कंप्यूटर को नियमित रूप से स्कैन करें और कंप्यूटर से अपना फोन कम से कम कनेक्ट करें।

ब्लूटूथ का इस्तेमाल करते समय

स्मार्टफोनों में मौजूद ब्लूटूथ से भी वायरस आपके फोन में प्रवेश कर सकते हैं। सुनने में थोड़ा अटपटा लगता है, पर स्मार्टफोन में लगे हुए ब्लूटूथ के में इतनी क्षमता होती है कि वह हवा में मौजूद वायरस को सोख सकते हैं जो आपके फोन के लिए बहुत ही हानिकारक हो सकते हैं। जब हम ब्लूटूथ से किसी फाइल के आदान-प्रदान करते हैं, तो उस वक्त दूसरे फोन में मौजूद वायरस आपके फोन में भी पहुंच सकते हैं।

क्या करें – ब्लूटूथ को लम्बे समय तक खुला न रखें और उसका इस्तेमाल कम से कम करें।

रोहन पाल

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