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खुला पत्र नरेन्द्र मोदी के नाम

प्रिय मोदी जी,

देश के मौजूदा राजनीतिक विन्यासों के संबंध में कुछ नीतिपरक सुझावों के साथ मुझे अपने विचारों को रखने की अनुमति दें। मैं पूरी तरह से महसूस करता हूं कि वर्तमान राजनीतिक स्थिति तक पहुंचने के लिए अपने विचारों को आपके सामने रखूं। इसमें संदेह नहीं है कि आपने भी इसका गहन विश्लेषण किया होगा और संभवत: वहां तक मैं शायद ही पहुंच सकूं। फिर भी मैं अपने कुछ विचार यहां रख रहा हूं, भले ही उसकी जो भी अहमियत हो।

आप ने 2014 के आम चुनावों का ताजा रन अप (चार राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव) जीत लिया है। लेकिन दिल्ली विधानसभा चुनावों में ‘आम आदमी पार्टी’ के शानदार प्रदर्शन के परिप्रेक्ष्य में भाजपा को 2014 के आम चुनावों की अपनी नीतियों को व्यापक रूप में खुद समझना होगा।

‘आप’ ने दिल्ली की जनता की इच्छाओं, आकांक्षाओं और कुंठाओं को अच्छी तरह समझा और अपने राजनीतिक मंच से युवाओं, पेशेवर, नौकरशाह और बुद्धिजीवियों से अपील की। इसका सार यही है कि पार्टी और उसके करिश्माई मुखिया केजरीवाल ने खुद को सार्वजनिक महत्व में जनता के सामने प्रस्तुत किया। केजरीवाल ने सार्वजनिक भ्रष्टाचार, सरकार की अक्षमता, पानी-बिजली जैसी सार्वजनिक सेवाओं को दिल्लीवासियों के सामने बेहतरीन ढंग से प्रतिध्वनित किया। 30 वर्ष की आयु वर्ग के युवा, जो गुजरात में आप के नेतृत्व में बेहतर प्रशासन और विकास से प्रभावित थे, वे भी ‘आप’ के केजरीवाल के नेतृत्व से प्रभावित दिखे।

अत: यहां एक अलग प्रकार की राजनीति है। सार्वजनिक शालीनता, सहभागिता, सरकारी पारदर्शिता और जवाबदेही, इस नई राजनीति के कारक हैं। इस तरह की नई राजनीति और नई लीडरशिप नेतृत्व वर्तमान और आगामी चुनावों के बीच उभर रही है। भाजपा को इस का पूर्वानुमान जरूर होना चाहिए और इन मुद्दों पर जोर भी।

दूसरी जगहों पर भाजपा जीत हासिल की है। मध्य प्रदेश के मुकाबले राजस्थान और छत्तीसगढ़ के परिणामों को निर्धारित करने में ‘मोदी-लहर’ निर्णायक थी, लेकिन मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जो काम किए, उसकी जनता द्वारा सराहना भी हुई और दुबारा सत्ता में वापसी भी। शिवराज सिंह चौहान, वसुंधराराजे सिंधिया, रमण सिंह और मनोहर पार्रिकर, भाजपा की अनमोल संपत्ति और अमूल्य सहयोगी हैं।

समय आ गया है कि आप भारत के प्रति अपना विजन देश की जनता को बताएं। दिसंबर 2012 के गुजरात चुनाव में शानदार जीत हासिल कर आपने राष्ट्रीय परिदृश्य की तरफ कदम बढ़ाए हैं। आपने मनमोहन सिंह सरकार की नाकामियों और वंशवाद की बीमारियों का खुलासा कर बेहद महत्वपूर्ण कार्य किया है।

यह सब सही है। आपने सोनिया गांधी और राहुल गांधी को समझने में जबरदस्त सफलता पाई है। दिल्ली में वंशवाद असफल हो चुका है, यहां तक कि कुछ क्षेत्रों में राहुल की जनसभाओं में जाने से लोग कतराते भी दिखे। राजस्थान में भी वंशवाद का खात्मा हुआ, जहां अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन वह आपकी लोकप्रियता को झेल नहीं सके।

लेकिन अब समय आ गया है कि सोनिया और राहुल को कोसने के बजाय, आप संभावित प्रधानमंत्री के रूप में अपने सैद्धांतिक मुद्दों के बारे में बोलें, जो 2014 के आम चुनावों में प्रभावी हो। यह समय भारत के लिए आपके विजन को चित्रित करने का है। लोगों को ‘यह गलत है, वह गलत है’ बताना अलग बात है, लेकिन जनता तो सुनना चाहती है, कि आपके विचार में ‘क्या सही और क्या गलत है’।

अगर अनुमति दी जाए तो मैं बराक ओबामा का उदाहरण देना चाहूंगा। ओबामा ने अपने दूसरे कार्यकाल में अमेरिकी जनता के सामने खुद को एक राष्ट्रपति के रूप में प्रस्तुत किया, न कि रिपब्लिकन उम्मीदवार मिट रोमिनी के प्रतिद्वंद्वी के रूप में। अपनी दूसरी पारी के लिए जब वह 2008 के चुनावी मैदान में उतरे थे, तब वह निश्चित रूप से अमेरिका के राष्ट्रपति थे। वह अपनी चुनावी सभाओं में वैसे ही बोले, जैसे वह राष्ट्रपति चुनते आ रहे थे। अब आपको देशवासियों के सामने खुद को ऐसे ही पेश करना चाहिए, जैसे कि आपको देश का प्रधानमंत्री चुन लिया गया हो। मेरे विचार में धर्मनिरपेक्षता, विकास और सुशासन तथा विदेश मामले, ऐसे तीन मुद्दे हैं, जो 2014 के आम चुनावों में प्रभावी रहेंगे। उन पर आपको अपना दृष्टिकोण जनता के सामने रखना चाहिए।

आप अपने विरोधियों – कांग्रेस, बुद्धिजीवियों और मीडिया, द्वारा लगातार भला-बुरा सुनते आएं हैं। केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी और केन्द्रीय ग्रामीण एवं विकास मंत्री जयराम रमेश आपकी तुलना हिटलर से कर चुके हैं। यह तुलना बेतुकी तो है, लेकिन खंडन लायक नहीं है। आज जिसकी सबसे ज्यादा जरूरत है, वह है धर्मनिरपेक्षता पर आपका सुसंगत बयान।

एक बार आपने कहा था – ‘मंदिर से पहले शौचालय’। अब जरूरत है इस कथन की व्याख्या करें। धर्मनिरपेक्षता पर आपकी पार्टी के स्पष्ट रूख के संदर्भ में, अब जिस बात की जरूरत है, वह है भाजपा की विकास नीति में शौचालय और मंदिर की स्थिति पर आपका एक विस्तृत बयान। अपनी चुनावी घोषणाओं में जनता को आपको बताना चाहिए कि मंदिर का मुद्दा नब्बे के दशक का पुराना मुद्दा था। आज समय विकास की मांग करता है, जिसमें हर समुदाय के लिए जगह है, जो धर्म के बजाय अपनी जरूरतों और अपनी क्षमताओं के आधार पर जो चाहे, उसे हासिल करने की क्षमता रखें। सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण, गुजरात में मुसलमानों के आर्थिक विकास में आपकी सरकार का रिकॉर्ड है। आपके नेतृत्व में गुजरात के मुसलमानों में आई समृद्धि के पर्याप्त आंकड़े उपलब्ध हैं। भाजपा शासित अन्य राज्यों, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गोवा के मामले में भी यही सच है। कांग्रेस शासित महाराष्ट्र और समाजवादी पार्टी शासित उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक हिंसा की तरह, इन राज्यों में कभी सांप्रदायिक हिंसा तो दूर, कभी सांप्रदायिक तनाव तक नहीं हुए।

विकास एक अन्य मुद्दा है, जिस पर आपके एक वृहद बयान की आवश्यकता है। आप अक्सर कहते हैं कि सुशासन सरकार का मुख्य काम है, अर्थव्यवस्था नहीं। यह आपको उस वर्ग में खड़ा करेगा, जो चाहते हैं कि विकास बाजार के मुक्त खिलाडिय़ों द्वारा तय हो, न कि सरकार द्वारा निर्धारित आर्थिक नीतियों द्वारा। दूसरे शब्दों में कहें तो, सही आर्थिक नीतियां, आपकी पार्टी की केन्द्रबिंदु होनी चाहिए। अपने विभिन्न बयानों में आपने गुजरात की आर्थिक नीतियों को सही बताया है। इसलिए आर्थिक नीतियों पर देश आपसे एक विस्तृत बयान की उम्मीद करता है। चुनावों की पूर्व संध्या पर यह कांग्रेस की वर्तमान आर्थिक नीतियों का विरोध होगा।

क्या यह कारगर होगा? क्या सरकार ने आर्थिक विकास को नियंत्रित कर रखा है? राजस्थान में मुफ्त दवाईयां बांटने की अशोक गहलोत की आर्थिक नीतियों का दीवाला, इसका मुख्य बिंदु है। गुजरात की सफल आर्थिक नीतियों के परिप्रेक्ष्य में आप और आपकी पार्टी, संयुक्त रूप से कांग्रेस की आर्थिक नीतियों के खिलाफ हल्ला बोल सकते हैं।

जो भी हो, समुचित आर्थिक नीतियों की बात करते हुए, आप पर्यावरण के पक्ष को नकार नहीं सकते। सौर ऊर्जा के विकास के साथ गुजरात की आर्थिक सफलता इसका एक उदाहरण है। देश के प्रति आपकी दूरदर्शिता और आगे बढऩे के आपके तरीकों को समन्वित करना होगा।

भरत वरियाववाला

для новорожденныхрынок систем

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