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वसुंधरा : मिशन-25 की ओर

वसुन्धरा राजे ने शासन तथा प्रशासन के बेहतर तालमेल के लिए सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए मंत्रिमण्डल के गठन में कैबिनेट स्तर के सभी नौ मंत्रियों के पुराने अनुभव को तरजीह दी गई है ताकि लोकसभा चुनावों से पहले आम मतदाता तथा जनता के साथ कुछ ठोस उपलब्धियां रखी जा सके। तीन राज्यमंत्रियों को भी स्वतंत्र प्रभार देकर उनसे अपने विभाग में कुछ कर दिखाने की अपेक्षा की गई है।

राजस्थान में दूसरी बार सत्ता की बागडोर सम्भालने वालीं वसुन्धरा राजे सरकार ने वर्ष 2014 में केन्द्र में भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता नरेन्द्र मोदी के कुशल नेत्त्व में सरकार गठित कराने के उद्देश्य से मिशन-25 के लक्ष्य के साथ काम-काज शुरू कर दिया है।

इस साल के आखिरी पुश्य नक्षत्र में शुक्रवार 20 दिसम्बर को राजभवन में मंत्रिमण्डल के नौ कैबिनेट और तीन स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्रियों ने शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे की अध्यक्षता में अपनी पहली बैठक में आगामी साठ दिनों की कार्य योजना बनाने का निर्णय लिया। इसका आधार विधानसभा चुनाव के लिए घोषित सुराज संकल्प रखा गया है। पूर्ववर्ती राज्य सरकार के अंतिम छ: माह के फैसलों की समीक्षा के निर्णय के साथ वरिष्ठ मंत्री गुलाबचंद कटारिया की अध्यक्षता में मंत्रिमण्डल उप-कमेटी भी गठित की गई है। शनिवार को इसकी बैठक में कार्ययोजना के प्रारम्भिक बिन्दुओं पर चर्चा की गई। कटारिया ने उदय इण्डिया को बताया कि सोमवार को मंत्रिमण्डल के सदस्यों के समक्ष विभागीय प्रजेन्टेशन होगा। प्रत्येक विभाग से साठ दिन की अवधि में न्यूनतम 11-11 कार्य पूरे करने को कहा गया है। प्रजेन्टेशन एवं चर्चा के दौरान इन कार्यों की संख्या में परिवर्तन किया जा सकता है।

वसुन्धरा राजे ने वर्ष 2003 में 120 सीटों के स्पष्ट बहुमत से सरकार गठित करने के बाद एक सौ दिन की कार्य योजना बनाई थी। लेकिन मई 2014 में लोकसभा के प्रस्तावित चुनाव तथा फरवरी में आचार संहिता लागू होने की संभावना के मद्देनजर साठ दिन के लिए कार्ययोजना बनाई गई है ताकि राज्य सरकार की जनहितकारी उपलब्धियों के बल पर लोकसभा की सभी 25 सीटे भाजपा के खाते में डाली जा सके।

चौदहवीं विधानसभा में भाजपा को 200 में से 163 सीटों पर सफलता मिली है। लेकिन लोकसभा के करौली-धौलपुर निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा की अपेक्षा कांग्रेस को बढत मिली है। इस सीट पर कांग्रेस को आठ विधानसभा क्षेत्रों में से छ: पर भाजपा से अधिक वोट मिले हैं। कांग्रेस को तीन लाख 79 हजार और भाजपा को तीन लाख 18 हजार से अधिक वोट मिले है। इसका अंतर 61 हजार से अधिक है। इसलिए राज्य सरकार और भाजपा को यह फासला समाप्त कर बढ़त लेने के लिए काफी प्रयास करने होंगे।

चार लोकसभा क्षेत्रों—जालोर,, जयपुर शहर, नागौर तथा अलवर में भाजपा तथा कांग्रेस के मतों में दो लाख 40 हजार से लेकर दो लाख मतों का अंतर है। दस संसदीय क्षेत्रों उदयपुर, गंगानगर, बांसवाड़ा, जोधपुर, बाडमेर, चुरू, सीकर, अजमेर, टोंक, सवाई-माधोपुर तथा पाली में एक लाख से लेकर एक लाख 97 हजार मतों की बढ़त मिली है। लेकिन छ: लोकसभा क्षेत्रों बीकानेर, झुंझुनूं, जयपुर ग्रामीण, भरतपुर, दौसा और चितौडग़ढ़ में वोटों का अंतर एक लाख से कम और 44 हजार के बीच है। भाजपा को अगले लोकसभा चुनाव में अधिक बढ़त वाली लोकसभा सीटों पर मतदाताओं का समर्थन जुटाने और इसमें वृद्धि के साथ अन्य संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में जीत का अंतर बढ़ाने तथा करौली-धौलपुर क्षेत्र में कांग्रेस से अधिक वोट हासिल करने की चुनौती को भी ध्यान में रखना होगा। इस लिहाज से अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़ी समस्याओं के समाधान को तरजीह देनी होगी।

भाजपा सरकार ने अपने पूर्ववर्ती शासन की उन विकास योजनाओं को भी खंगाला है, जिन्हें गहलोत सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया था अथवा उनके काम की गति अत्यंत धीमी कर दी गई थी। इनमें भामाशाह नारी सशक्तिकरण, धरोहर एवं प्रोन्नती प्राधिकरण, जयपुर में शूटिंग रेंज, बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (बी.आर.टी.एस.) टेलीमेडिसिन योजना इत्यादि प्रमुख है।

मुख्यमंत्री द्वारा कामकाज संभालते ही रेाजधानी जयपुर के संभावित दौरे के मद्देनजर जयपुर विकास प्राधिकरण तथा नगर निगम ने साफ सफाई का अभियान आरम्भ कर दिया है। गुलाबी नगर को चमकाने की इस मुहिम के साथ सरकार की पहल पर सभी संभाग मुख्यालयों पर विशेष सफाई अभियान शुरू किया गया है। वसुन्धरा राजे के पिछले शासन में प्रमुख धार्मिक स्थल श्री खोले जी के हनुमान मंदिर परिसर को आकर्षक स्वरूप दिया गया था। अब इसी तर्ज पर प्राचीन तीर्थ गलता जी के सौन्दर्यकरण की योजना बनाई जा रही है।

गांवों तथा खेतों के लिए पर्याप्त बिजली सुलभ कराने की घोषणा को लागू किए जाने पर भाजपा सरकार ने काम शुरू किया है। अपनी चुनाव घोषणाओं को अमली-जामा पहनाने के मकसद से नौकरशाही में आवश्यक बदलाव किया जा रहा है। पिछले कार्यकाल के विश्वस्त प्रशासनिक अधिकारियों को प्रमुख पदों पर आसीन किए जाने का सिलसिला आरम्भ हो गया है। केन्द्र में प्रतिनियुक्ति पर गए 1978 बैच के आई..एस. अधिकारी राजीव महर्षि को मुख्य सचिव तथा सुभाष गर्ग को प्रमुख शासन सचिव (वित्त) के पद पर लगाया गया है। अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी दिल्ली से लौटने वाले हैं। प्रशासनिक फेरबदल की प्रक्रिया में 30 आई.ए.एस. अधि़कारियों के तबादले किए गये है। आई.ए.एस. और आई.पी.एस. अधिकारियों के स्थानान्तरण की सूची भी शीघ्र जारी होने वाली जानी है।

वसुन्धरा राजे ने शासन तथा प्रशासन के बेहतर तालमेल के लिए सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए मंत्रिमण्डल के गठन में कैबिनेट स्तर के सभी नौ मंत्रियों के पुराने अनुभव को तरजीह दी गई है ताकि लोकसभा चुनावों से पहले आम मतदाता तथा जनता के साथ कुछ ठोस उपलब्धियां रखी जा सके। तीन राज्यमंत्रियों को भी स्वतंत्र प्रभार देकर उनसे अपने विभाग में कुछ कर दिखाने की अपेक्षा की गई है। इनमें पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अरूण चतुर्वेदी तो विधानसभा का पहला चुनाव जीतकर आए हैं। गुर्जर समुदाय से हेमसिंह भडाना तथा जाट समुदाय से अजय सिंह दूसरी बार निर्वाचित हुए है। अन्य केबीनेट मंत्री, गुलाबचन्द कटारिया, कैलाश मेघवाल, नंदलाल मीणा, राजेन्द्र राठौड, प्रभुलाल सैनी, सांवर लाल जाट, कालीचरण सर्राफ, गजेन्द्र सिंह खींवसर, युनूस खान पहले भी भैरोसिंह शेखावत अथवा वसुन्धरा मंत्रिमंडल में रह चुके है। इन मंत्रियों को वही पुराने वाले विभागों की जिम्मेदारी दी गई है ताकि उनके अनुभवों का तत्परता से लाभ उठाया जा सके।

यह भी संयोग है कि वसुन्धरा राजे ने शुक्रवार 13 दिसम्बर 2013 को राज्य की तेरहवीं मुख्यमंत्री के रूप 13.13 बजे (यानी एक बजकर 13 मिनट पर) विधानसभा परिसर के मुख्य द्वार के समक्ष बने विशाल मंच तथा सामने जनपथ पर हजारों लोगों की उपस्थिति में शपथ ली और अगले शुक्रवार 20 दिसम्बर को जब वरिष्ठ मंत्री गुलाब चंद कटारिया को राज्यपाल माग्र्रेट आल्वा ने सबसे पहले शपथ दिलाई। तब भी 13.13 बजे थे। वसुन्धरा राजे ने एक ऐतिहासिक फैसला कर 13 सिविल लाईन बंगले को मुख्यमंत्री का अधिकृत सरकारी आवास घोषित किया है। अब तक मुख्यमंत्री का अधिकृत सरकारी आवास 8 सिविल लाईन था, जिसे स्टेट गेस्ट हाऊस में बदले जाने की योजना है। वसुन्धरा राजे को 13 सिविल लाईन को मुख्यमंत्री के रूप में आवंटित किया गया था। अभी वह इसी बंगले में रह रही है।

मंत्रिमण्डल के गठन में वसुन्धरा राजे ने जातीय समीकरण साधने की भरपूर कोशिश की है, लेकिन क्षेत्रीय सहभागिता में कमी साफ दिख रही है। पूर्वी राजस्थान के नाते भरतपुर संभाग की अनेदखी खटकने वाली है। इसी अंचल में करौली-धौलपुर संसदीय क्षेत्र है, जहां भाजपा को कांग्रेस की अपेक्षा कम वोट मिले हैं। इसी प्रकार 33 में से 23 जिलों को प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है। अजमेर संभाग से सर्वाधिक चार मंत्री, जयपुर संभाग से तीन, उदयपुर से दो तथा जोधपुर, बीकोनर, कोटा संभाग से एक-एक मंत्री को शामिल किया गया है। पहली बार ब्राö समुदाय के किसी मंत्री को कैबिनेट का दर्जा नहीं मिला है। इस समुदाय के कद्दावर नेता घनश्याम तिवाड़ी को विधानसभा अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा है। यदि वह नहीं माने तो उन्हें जयपुर से लोकसभा चुनाव भी लड़ाया जा सकता है। वह पिछली बार कांग्रेस के महेश जोषी से चुनाव हार गए थे। पूर्व उपराष्ट्रपति स्व. भैरोसिंह शेखावत के दामाद नरपतसिंह राजवी समेत कई दिग्गजों को शामिल न किए जाने पर राजनीतिक क्षेत्रों में आश्चर्य भी है। लेकिन प्रचण्ड बहुमत में मुख्यमंत्री समेत तीस मंत्रियों की संख्या की संवैधानिक पाबंदी भी वसुन्धरा राजे के लिए चुनौती है। उन्हें सभी को साथ लेकर भी चलना है।

गुलाब बत्रा

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