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बाबा-रे-बाबा

पीएमओ के अफसरों को हर रोज कोई नया काम मिल रहा है। ठाठ में लगी सेंध ने पैर का पसीना सिर पर चढ़ा दिया है। ताजा मामले ने उनकी परेशानी को और बढ़ा दिया है। काम के घंटे जो बढ़ गए हैं। हर दिन पांच हजार पत्रों को पढऩा, छांटना, संबंधित विभागों को भेजना और जवाब देने के लिए कहना कोई मामूली काम थोड़े है। बताते हैं पीएम मोदी लगातार लोकप्रिय हो रहे हैं। हर भाषण में हजारो-लाखों लोग जुड़ जा रहे हैं। इसके चलते पीएम को खूब पत्र भी लिख रहे हैं और प्रधानमंत्री का फरमान है कि जनता के साथ संवाद बनाने में कोई कोताही न हो। यहां तक कि पत्रों का भी पूरा जवाब दिया जाए और समस्याओं का समाधान भी हो। अब आप समझ सकते हैं कि इसके बाद अफसरों का क्या हाल होगा। बताते हैं दिल्ली का बाबू कागजों के ढेर में ही दबा जा रहा है।

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