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स्मार्टफोन्स की नई उछाल

सैमसंग और एलजी अपनी नई फ्लेक्सिबल तकनीक पर काम कर रहे हैं, जो स्मार्ट फोन इंडस्ट्री को एक नए स्तर पर पहुंचा देगी।

हैंडसेट के नामचीन निर्माता – सैमसंग और एलजी अपनी फ्लेक्सिबल तकनीक के कॉन्सेप्ट के साथ स्मार्टफोन्स के नविनीकरण को पुन: परिभाषित करेंगे। इस तकनीक से स्मार्टफोन्स को फ्लेक्सिबिलिटी मिलती है, जिससे उन्हें आसानी से मोड़ा जा सकता है। एक तरफ जहां सैमसंग वर्टिकली बैंड किया जा सकने वाला फ्लेक्सिबल स्मार्टफोन ‘गैलेक्सी राउंड’ बना रहा है, वहीं दूसरी तरफ एलजी ने सैमसंग को टक्कर देने के लिए ‘एलजी जी फ्लेक्स’ को बाजार में पेश किया है। इस नई तकनीक को लेकर लोगों के मन में ‘फ्लेक्सिबल स्मार्टफोन क्या है?… क्या इसे वास्तव में मोड़ सकते हैं?’ जैसे कई प्रश्न हैं। इन्हीं सवालों के आधार पर प्रस्तुत है एक झलक इन स्मार्टफोन्स के बारे में –

फ्लेक्सिबल स्क्रीन क्या है?

जैसा कि कहा गया है – फ्लेक्सिबल स्क्रीन स्मार्टफोन्स परंपरागत डिजाइन को पीछे छोड़ देंगे। पारंपरिक डिजाइन में रेक्टांग्युलर ग्लास स्लैब और उसके नीचे ओएलईडी (ऑरगैनिक लाईट-एम्मिटिंग डायोड)की परत भी शामिल होती है। फ्लेक्सिबल स्मार्टफोन्स में ग्लास स्लैब को क्रिस्टल-क्लियर पदार्थ (जो ज्यादातर प्लास्टिक के बने होते हैं) से प्रतिस्थापित किया जाता है, जिससे स्क्रीन को आसानी से मरोड़ा जा सकता है और उसके साथ बिना किसी खामी के उपयोगकर्ता उस पर काम कर सकते हैं।

यह कैसे फायदेमंद होगा?

फ्लेक्सिबल डिवाइस एक प्रमुख समस्या का निवारण कर सकेगें जो है- गिरने पर डिवाइस के टूटने की आशंका। लेकिन इसमें प्लास्टिक का उपयोग किए जाने से यह ग्लास से बनी डिवाइस की तुलना में अधिक टिकाऊ बन जाता है। प्लास्टिक जैसे पदार्थ के उपयोग से स्मार्टफोन्स को पतला और हलका बनाकर उन्हें एक नया लुक भी मिलता है। लेकिन बड़ी समस्या यह है कि अगर प्लास्टिक को सीमा से अधिक खींचा जाए, तो वह भी टूट भी सकता है।

फ्लेक्सिबल स्मार्टफोन्स को बनाने में चुनौतियां?

फ्लेक्सिबल स्मार्टफोन्स को बनाने के प्रमुख चुनौतियों में से एक स्मार्टफोन्स के हार्डवेयर कॉन्फिगरेशन को बेंडेबल बनाना है। डिजाइन के आधार पर, फ्लेक्सिबल डिस्प्ले के साथ मोल्डेबल बैटरी और इलास्टिक हार्डवेयर कॉन्फिगरेशन भी बनाना पड़ सकता है। वर्तमान प्रौद्योगिकीय विकास को देखते हुए, इन फोन्स की कीमत स्टैंडर्ड स्मार्टफोन्स से ज्यादा होगी। प्लास्टिक का एक और नुकसान यह है कि उसमें हवा आसानी से प्रवेश कर सकती है, जिससे हवा में मौजूद ऑक्सीजन से ओएलईडी के लिए खतरा हो सकता है, जिससे फोन को नुकसान पहुंच सकता है।

क्या ग्लास का प्रयोग बंद हो जाएगा?

यह कहना मुश्किल है स्मार्टफोन्स मे ग्लास का प्रयोग बिलकुल खत्म हो जाएगा। बल्कि ग्लास को भी फ्लेक्सिबल बनाने की तैयारी शुरू हो गयी है। ऐसे प्रकार के ग्लास बनाने के ऊपर शोध चल रहा है। ग्लास को फ्लेक्सिबल बनाने के लिए उसकी ‘स्लो मूविंग लिक्विड’ गुण को प्रयोग करके उसको फ्लेक्सिबल बनाने की कोशिश की जा रही है। इसके परिणाम स्वरूप स्मार्टफोन्स में ग्लास का प्रयोग करते हुए, उसे फ्लेक्सिबल बनाया जा सकता है।

रोहन पाल

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