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आखिर क्या करें राजन

आखिर क्या करें राजन

उत्साही प्रधानमंत्री, सुबह होते ही नई रोशनी देखने वाला वित्त मंत्री और सूरज-पृथ्वी की चाल देखकर रोशनी का आकलन करने वाले बेचारे रघुराम राजन जी। सुनते हैं इन दिनों नए रिकॉर्ड से परेशान हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक इसको लेकर लगातार रोना रो रहे हैं जबकि प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री रिकार्ड बनाने में लगे हैं। मामला जन-धन योजना का है। प्रधानमंत्री इसे लेकर विदेशों तक में डंका पीट रहे हैं और बैंक हैं कि अकाउंट के बोझ से दबे जा रहे हैं। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक हालत यह है कि जब से अकाउंट खोलने का काम शुरू हुआ है बैंकों का आराम हराम हो गया है। स्टाफ उतना ही और हर रोज बड़ी संख्या में खाता। मियां का कहना है कि बैंक में कोई आए और बिना कुछ लेन-देन किए केवल दो तीन मिनट एक कर्मी से बात करके चला जाए तो समझिए बैंक का 49 रूपए पानी में गया। बाकी आप खुद ही समझ लीजिए।

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