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मोदी के सपनों का भारत

रविवार का दिन कंपकपाती सर्दी का दिन था। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से घोषित प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के प्रभावशाली और जबरदस्त ओजपूर्ण भाषण के साथ भाजपा की राष्ट्रीय परिषद् की दो दिवसीय बैठक संपन्न हो गई। बैठक में मोदी ने भारत को ‘विश्व-गुरु’ बनाने का अपना स्पष्ट दृष्टिकोण पेश किया। पार्टी प्रमुख राजनाथ सिंह ने भी पार्टी की वैचारिक जड़ों से जुड़ी लघुकथाओं के माध्यम से आगामी चुनावों के लिए रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए अपने सुव्यवस्थित विचार रखे। पार्टी के लिए 272 से अधिक सीटें हासिल करने की चुनौतियों का सामना करने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अच्छे नुस्खे पेश किए। ऐसा लगा मानो इस बार भाजपा 2014 में नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए आर-पार की लड़ाई के मूड में है। यही नहीं, पार्टी के कर्ताधर्ता लालकृष्ण आडवाणी ने राष्ट्रीय परिषद् के सदस्यों से कड़ी मेहनत करने और इस दिशा में कोई कोर कसर न छोडऩे का आह्वान किया ताकि, जून, 2014 में नरेंद्रभाई को भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई जा सके। लेकिन साथ ही आडवाणी ने पार्टी कैडर को सतर्क रहने और अति आत्मविश्वास से बचने की भी सलाह दी। भगवान का शुक्र है कि पूर्व उपप्रधानमंत्री ने अब नरेंद्र मोदी की अब तारीफ करनी शुरू कर दी है। ऐसा लगता है कि उनके तथाकथित वफादार समर्थक भी पार्टी के व्यापक हित में उनकी बात मानेंगे। भाजपा में यह एक बड़ा बदलाव है जिसे कोई भी दूर से देख सकता है। नि:संदेह इसका श्रेय संकटमोचक पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह को दिया जाना चाहिए, जिन्होंने सही समय में पार्टी की कमान संभाली और पार्टी व संघ की आकांक्षा पूरी करने एवं पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार करने में सफल रहे। आम चुनावों से पहले पार्टी को आगे ले जाने एवं विभिन्न अवसरों पर विरोधियों को ध्वस्त करने के लिए अब भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के बीच एकता साफ दिखाई देती है।

दिल्ली के रामलीला मैदान में हुए सम्मेलन में पहली बार पार्टी कार्यकर्ता आम आदमी जैसे दिखे और ‘आप’ स्टाइल की भगवा रंग की टोपी पहनी थी। इस बार का नारा रहा– ‘वोट फॉर इंडिया, वोट फॉर मोदी’। पूरे स्थल पर 25 से अधिक स्टॉल लगे थे, जहां पार्टी कार्यकर्ता मोदी के लिए 272 से अधिक सीटों का लक्ष्य हासिल करने हेतु धन जुटाने में लगे रहे।

पार्टी ने अपनी परंपरा के मुताबिक कढ़ी-चावल और दाल-रोटी जैसा गर्म देसी भोजन परोसा, जिससे कार्यकर्ताओं के बीच सादा जीवन, उच्च विचार रखने का साफ संदेश गया। इस बार, उनका नेता एक पिछड़ी जाति से है और एक गरीब परिवार से आता है। उसने चाय की दुकान चलाई है और उसकी मां ने घरों में मेहनत का पसीना बहा कर अपने परिवार को पाला है। मोदी बूथ स्तर से उठकर प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार तक पहुंचे हैं। पार्टी ने महात्मा गांधी की जन्मभूमि गुजरात के एक गांव से निकले एक गरीब व्यक्ति को शीर्ष पद के लिए पेश किया है। मोदी के पास विरोधियों को धूल चटाने के लिए कई मुद्दे हैं। मोदी ने कहा कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी हर बार गरीबों की बात करते हैं, गरीबों की झोपडिय़ों में जाते हैं और आम आदमी की बात करते हैं जो एक बड़ा ‘फ्लॉप शो’ साबित होता है। उन्होंने कांग्रेस पर यह कहते हुए निशाना साधा कि एक राजवंश के नेता से अधिक एक गरीब ही गरीब का दुख समझ सकता है और उसे महसूस कर सकता है। मोदी ने देश के सबसे पुराने राजनीतिक दल ‘कांग्रेस पार्टी’ के सामने गांधीजी के उन सपनों को साकार करने की चुनौती पेश की है, जिसे भाजपा ने पूरा करने का वादा किया है। उन्होंने कांग्रेस को महात्मा गांधी की इच्छा पूरी करने में नाकाम रहने के लिए पार्टी को भंग करने की भी सलाह दी है। गांधी के ‘स्वराज और सुराज’ के सपने का उल्लेख करते हुए उनका कहना था कि– ‘भाजपा अब अपना ध्यान इसी लक्ष्य की ओर केंद्रित कर रही है।’ पार्टी ने हमेशा की तरह दीनदयाल उपाध्याय के आदर्शों को अपनाने पर भी जोर दिया है और कार्यकर्ताओं को समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचने की सलाह दी है जिसे दिल से अभिनंदन की दरकार है। सभी कार्यकर्ताओं को हर बूथ पर प्रत्येक मतदाता तक पहुंचने और सभी आम लोगों से यह अनुरोध करने को कहा गया है कि ‘अब देश को एक ऐसे नेता की प्रधानमंत्री के रूप में जरूरत है, जो गरीब परिवार से हो। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए 272 से अधिक सीटें हासिल करने की जरूरत है। इस लक्ष्य के लिए आम आदमी से धन जुटाने के वास्ते उसकी मदद की जरूरत है। मेरे देश में करोड़ों लोग मेरा दर्द महसूस करेंगे और देश का नेतृत्व करने के लिए मुझ से हाथ मिलाएंगे।’

सम्मेलन में स्पष्ट संदेश दिया गया कि नरेंद्र मोदी जैसे आम आदमी का इससे बेहतर और कोई चेहरा नहीं हो सकता। मोदी ही आम आदमी का उत्थान कर सकते हैं और भारत को ‘विश्व-गुरू’ बना सकते हैं।

नरेंद्र मोदी का 90 मिनट का भाषण एक बातचीत जैसा सत्र था। यह शायद उनके कैरियर का सबसे लंबा राजनीतिक भाषण था, जिसमें उन्होंने एक विकसित भारत का स्पष्ट विजन दिया और 2014 बाद के लिए विभिन्न क्षेत्रों की समस्याओं का विस्तृत समाधान पेश किया। आम आदमी पार्टी का नाम लिए बगैर मोदी ने उसे निशाने पर लेते हुए जोरदार ढंग से कहा कि– ‘लोगों को शासन के संबंध में उनके ट्रैक रिकार्ड पर विश्वास करना चाहिए, न कि उनके वादों के टेप रिकार्ड पर।’

यदि मोदी के भाषण का अध्ययन किया जाए तो कहा जा सकता है कि उन्होंने पहली बार भारत कहलाने वाले एक महान राष्ट्र के लिए एक प्रगतिशील व समग्र सोच पेश की है। उनकी आकांक्षाओं की लंबी सूची में गरीबी खत्म करने से लेकर महंगाई पर लगाम लगाने, ढांचागत विकास व अत्याधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया जाना तक शामिल है। मोदी के भीतर भारत को एक महाशक्ति बनाने और दुनियाभर में इसकी ब्रांडिंग करने की इच्छाशक्ति व चिंतन है। उनके पास गरीब के लिए मूल्य स्थिरीकरण कोष का एक बेहतर विकल्प है। उनका मानना था कि आम आदमी जब महंगाई का शिकार होता है, तो उसके लिए यह कोष जबरदस्त ढंग से काम करेगा। आम आदमी के स्वास्थ्य के लिए उनका कहना था कि स्वास्थ्य देखभाल में पहले से रोकथाम की जानी चाहिए जोकि स्वास्थ्य बीमा की बजाय अच्छे स्वास्थ्य का आश्वासन देती है। वह चाहते हैं कि आईआईटी, आईआईएम और एम्स प्रत्येक राज्य में हो और बेहतर संचार सुविधाओं के लिए भारतीय रेलवे के विकास एवं अनुसंधान हेतु कम से कम चार विश्वविद्यालय हों।

उन्होंने कहा कि जब देश 2022 में स्वतंत्रता की ‘डायमंड जुबली’ मना रहा हो, उस समय तक चारों दिशाओं में बुलेट ट्रेन चल रही हों। विश्व हमें एक नई दृष्टि से देखना शुरू कर देगा। उन्होंने भारत में असमान विकास एवं क्षेत्रीय असंतुलन पर भी चिंता जताई और राज्य सरकारों के साथ ‘बिग ब्रदर’ जैसा रवैया अपनाने के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की। मोदी के पास एक संयुक्त टीम एवं सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों व नौकरशाहों एवं केंद्र के एकीकृत दृष्टिकोण के साथ राष्ट्र के विकास की एक दूरदृष्टि है। मोदी ने चुटकी ली कि हमारे देश को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए समितियों की नहीं, बल्कि प्रतिबद्धताओं की जरूरत है….. कानूनों की नहीं, बल्कि कार्य करने की जरूरत है। भारत में खराब होती कानून व्यवस्था एवं असुरक्षित वातावरण पर उन्होंने महिलाओं के सशक्तीकरण पर जोर दिया। उनका सुझाव था कि महिलाओं को घर बनाने के साथ ही राष्ट्र निर्माण में अहम् भूमिका निभानी चाहिए। इसके लिए उन्होंने महिला साक्षरता को मजबूत करने पर जोर दिया। महिलाओं के विकास के साथ ही देश को युवा शक्ति का भी उपयोग करने पर बल दिया। उन्होंने देश की 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु के लोगों की होने की ओर ध्यान दिलाया। भारतीय परंपराओं को बचाने की जरूरत पर बल देते हुए उन्होंने इसकी तुलना इंद्रधनुष से करते हुए ‘पारिवारिकमूल्य, कृषि व ग्रामीण भारत, महिला सशक्तीकरण, पर्यावरण, युवा, लोकतंत्र व ज्ञान’ को उसके सात रंग बताए। मोदी ने भारत में लोकतंत्र का तत्व बढ़ाने और देश के विशाल प्राकृतिक संसाधनों को तलाशने एवं ज्ञान कोष पर निर्भर रहने की जरूरत पर भी बल दिया।

ब्रांड इंडिया पर ध्यान केंद्रित करते हुए उन्होंने उसके पांच तत्वों व तथ्यों — ‘परंपरा, प्रतिभा, पर्यटन, प्रौद्योगिकी और व्यापार’ के संवर्धन पर जोर दिया। उन्होंने सामाजिक कल्याण की योजनाओं का एक ऐसा मिश्रण पेश करने का भी वादा किया, जो भारत को विकसित अर्थव्यवस्थाओं के बराबर लाकर खड़ा कर देगा। उन्होंने सुझाव दिया कि देश के शहरीकरण को एक अवसर के तौर पर लेना होगा, न कि एक चुनौती के तौर पर। उन्होंने अपने नेतृत्व में भाजपा की सरकार द्वारा ‘स्मार्ट सिटी, ट्विन सिटी और सैटेलाइट सिटी’ के तौर पर नए 100 शहर विकसित करने का लक्ष्य रखा।

दिल्ली में दो दिवसीय राष्ट्रीय परिषद् और एक दिन की कार्यकारिणी बैठक से व्यक्ति इस नतीजे पर पहुंच सकता है कि पार्टी ने अपना चुनावी बटन दबा दिया है और अपने कार्यकर्ताओं को मोर्चा संभालने के लिए प्रशिक्षित कर दिया है। अटल बिहारी वाजपेयी के बाद, भाजपा के लिए नरेंद्र मोदी अब तक के सबसे ‘बड़े चेहरे’ है। पिछड़ी जाति के नेता मोदी के शासन का एक अच्छा ट्रैक रिकार्ड है। वह एक मजबूत हिंदू नेता हैं। युवाओं के बीच लोकप्रिय हैं और एक आम आदमी परिवार से आते हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि राजवंश के उत्तराधिकारी राहुल और देर से ही सही, लेकिन नि:संदेह मोदी के मार्ग में रोड़ा बनता दिख रहे केजरीवाल से भाजपा का यह शेर — नरेन्द्र मोदी कैसे मोर्चा लेते हैं।

दीपक कुमार रथ

брутфорссайт раскрутка

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