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”इंग्लैंड दौरा एक चुनौती’’

भारत ने आखिरी बार इंग्लैंड को सात साल पहले टेस्ट क्रिकेट में हराया था। उस वक्त सचिन तेंदुलकर और जहीर खान ने अपने शानदार प्रेरणादायक व्यक्तिगत प्रदर्शन से 1-0 सीरीज से देश को जीताने में मदद की थी।

इस बीच इंग्लैंड ने विश्व रैंकिंग शिखर में कई उतार चढ़ाव देखे, जिसमें उन्होंने कई बार विपक्षी को करारी पराजय दी जैसे तीन साल पहले उसने भारत को 4-0 से हरा दिया था और 28 साल बाद 2012 में वापस भारत में अपनी पहली सीरीज जीती। यद्यपि पिछले 12 महीनों में इंग्लैंड बड़े ही नाटकीय ढंग से अपने स्थान से फिसल गया। एशेज श्रृंखला में करारी मात के बाद जोनाथन ट्रोट, ग्रीम स्वान और केविन पीटरसन जैसे महत्वपूर्ण खिलाडियों ने टीम को छोड़ दिया।

पूर्व कप्तान कपिल देव बड़ी ही उत्सुकता से पूर्वानुमान लगा रहे है कि भारतीय टीम का पलड़ा आगामी 5 मैचों की टेस्ट श्रृंखला में भारी रहेगा। उन्होंने उदय इंडिया को बताया – ”ये 40 साल में पहली बार हो रहा है कि भारतीय टीम इंग्लैंड जाएगी और पूरी श्रृंखला खेलेगी। अमूमन हम 3 या 4 मैच खेलते है, किन्तु एक पूरा टूर खेलना आपके सयंम और उपयोगिता की कड़ी परीक्षा होती है और मुझे यह देख के बहुत ही हर्ष हो रहा है कि अंतत: यह हो रहा है।’’

भारत टी 20 मैचों में पिछले वर्ष श्रेष्ठतर रहा, बीते वर्ष जून में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी जीती और मार्च में आयोजित विश्वकप टी 20 के फाईनल तक पंहुचा। लेकिन, भारत के टेस्ट मैचों का परिणाम बहुत अच्छा नहीं रहा, जिसमें लगातार 2 सीरीज में पराजय मिली। पहली पराजय दक्षिण अफ्रीका और दूसरी न्यूजीलैंड में मिली थी।

यद्यपि देव का यह मानना है कि इंग्लैंड की टीम जिस उलट-फेर के दौर से गुजर रही है, इसका पूरा लाभ भारत उठा सकता है। उन्होंने कहा – ”मैंने टेलीविजन में देखा कि एशेज श्रृंखला में इंग्लैंड में टीम वर्क नहीं दिखाई दिया। कुछ खिलाड़ी स्वदेश लौट गए और कुछ खिलाडिय़ों ने श्रृंखला के मध्य में सन्यास ले लिया। परिणाम यह हुआ कि ऑस्ट्रेलिया ने उनकी कमर तोड़ दी, जबकि वे पेशेवर खिलाड़ी हैं। ऑस्ट्रेलिया ने उन्हें हर क्षेत्र में पछाड़ दिया और इंग्लैंड हर बार वापसी करने में विफ ल रहा। भारत भी ऐसा ही कुछ कर सकता है। हमने उपमहाद्वीप के बाहर अच्छा नहीं खेला है इसीलिए मेरे मन में थोड़ी शंका है और मुझे पूरा विश्वास तब तक नहीं होगा जब तक कि भारतीय टीम वहां पहुंच कर अच्छा खेलना शुरू नहीं करती है। इंग्लैंड अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहा है तो यह भारत के लिए लाभकारी हो सकता है।’’

विशेषकर,भारत को केविन पीटरसन, जिन्हें इस साल अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से निलंबित कर दिया गया, के नहीं खेलने से भारत को बड़ी बढ़त मिल सकती है। भारत के पिछले दौरे पर पीटरसन इंग्लैंड की तरफ से सर्वाधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी थे। उन्होंने 533 रन बनाए, जिसमें पहले टेस्ट मैच का दोहरा शतक शामिल है। उनके बिना इंग्लैंड का मध्य क्रम ढ़ीला लग रहा है। देव कहते हैं – ”यह बहुत आश्चर्यजनक है कि इंग्लैंड की टीम ने पीटरसन को निलंबित कर दिया है, लेकिन कहीं न कहीं पीटरसन ने भी टीम प्रबंधन को ऐसा करने पर विवश किया। मुझे लगता है कि वे एक महान क्रिकेटर हैं, लेकिन मैं नहीं जानता वे अमूमन किसी न किसी विवाद में क्यों फंस जाते हैं। मुझे लगता है कि उन्हें सिर्फ क्रिकेट खेलना चाहिए। वे बहुत प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं। हर टीम को ऐसे खिलाड़ी की जरूरत होती है। क्रिकेट टेनिस की तरह एक खिलाड़ी का खेल नहीं है। हर खिलाड़ी को टीम के हिसाब से अपने आप को ढालना होता है। आप टीम से बड़े नहीं हो सकते, आपको टीम का हिस्सा बनना होता है।’’

देव आगे कहते हैं – ”तेंदुलकर के 24 साल के करियर का नवंबर में अंत होने के बाद से भारत खुद की विपदाओं को झेल रहा है और उनकी कमी को पूरा करने की कोशिश कर रहा है। परन्तु मेरी सोच यह है कि टीम को उन्हें भूल कर आगे बढऩा चाहिए। ‘मुझे सच में लगता है कि सचिन की कमी जयादा विघ्न नहीं डालेगी। मैं इसे उस तरह नहीं देखता।’’

”मुझे लगता है सचिन ने अपना काम कर दिया है। आप किसी इंसान से यह आशा नहीं कर सकते कि वह 100 साल तक खेले। उन्होंने 24 साल तक खेलकर देश की अच्छी सेवा की और वो सब कुछ किया जो एक खिलाड़ी करने की सोचता है। आपको जीवन में आगे बढऩा चाहिए। हमेशा सचिन की बात करने से टीम व्यवस्थित नहीं हो पाएगी। भारत के पास विराट कोहली जैसे रोमांचक खिलाड़ी मौजूद है जो सचिन तेंदुलकर को प्रतिस्थापित कर सकते है। बिना किसी शंका के मुझे लगता है कि वे भारत के महानतम बल्लेबाज बन सकते है और सबसे अधिक रिकार्ड बना कर दिखाएंगे।’’

”मैं इस युवा लड़के में प्रतिभा और क्षमता को देखता हूं जो कि काफी अद्भुत है। यह उसकी उम्र के लिए बहुत बड़ी चीज है। 24 साल के तेंदुलकर की तुलना में शायद बेहतर। मुझे नहीं लगता की विवियन रिचड्र्स ने भी ऐसा कोई रिकॉर्ड अपने नाम किया होगा जब वह 24 साल के थे। वह निश्चित रूप से दुनिया में किसी भी अन्य 24 साल की उम्र वाले खिलाड़ी से अधिक क्षमता रखते है। लेकिन यह स्वाभाविक है कि अगली पीढ़ी हमेशा बेहतर ही होती है। मनुष्य के रूप में हम अगर यह विश्वास नहीं करते कि अगली पीढ़ी बेहतर होगी, तो आप विकास में विश्वास नहीं करते। अगर चोटों और फि टनेस को अलग रखें तो अब तक कोहली की क्षमता ने यह दिखा दिया है कि 32-33 की उम्र तक आते-आते वह सभी रिकॉर्ड को तोड़ सकते हैं।’’

कोहली ने विपरीत परिस्थितियों में इस तरह का शांतचित का प्रदर्शन किया है। अब टेस्ट टीम के कप्तान के रूप में महेंद्र सिंह धोनी की जगह उन्हें लेने की मांग उठने लगी है, लेकिन कपिल देव इसे बेहद जल्दबाजी मानते हैं।

देव पूछते हैं – ”हमें क्या जरूरत है इतनी जल्दी उसे इतना पुश करने की?’’ इसका उत्तर खुद देते हुए देव कहते हैं – ”अभी वक्त उसका नहीं है, समय आएगा। मुझे लगता है उसे इंतजार करना चाहिए। अभी वे जवान हंै और भविष्य में जब वो थोड़े और बड़े और समझदार हो जाएंगे तो उन्हें यह अवसर जरूर मिलेगा। धोनी एक परिपक्व कप्तान हैं और उन्हें उनका काम करने दो। अगर आप कोहली को अभी कप्तान बनाते हैं और धोनी उसके नीचे खेलते हैं तो एक भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। यह कहना मुश्किल होगा कि टीम का भार किस पर है। और, यह टीम के लिए उचित नहीं होगा।’’

देव को कोई संदेह नहीं है कि अगले साल ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में हो रहे विश्व कप में धोनी को ही कप्तानी करनी चाहिए।

”अगर वह एक दम फिट है तो इसमें कोई तर्क-वितर्क नहीं होना चाहिए, क्योंकि वह बेहतरीन बल्लेबाजों में से एक है। कितने खिलाड़ी हैं जो वनडे क्रिकेट में नंबर 6 या 7 पर आकर 50 से अधिक की औसत बरकरार रखने में कामयाब रहे हैं? खेल के इतहास में हमने ऐसा बेहतरीन फिनिशर नहीं देखा। उन्होंने खेल के सारे फॉर्म टी-20 विश्व कप हो या 50 ओवर विश्व कप, सब में जीत हासिल की है।’’

हालांकि, अगर भारत को ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अगले वर्ष प्रतिस्पर्धा करनी है तो उन्हें तेज और उछाल भरी पिचों पर अपने प्रदर्शन को सुधारने की आवश्यकता होगी। देव कहते हैं – ”फिलहाल हम उछाल भरी पिचों पर अच्छी क्रिकेट खेल सकते हैं, पर हम इसे बरकरार नहीं रख पाते। इसलिए हमें उपमहाद्वीप के बाहर जीतने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। हमें इसे सुधारना होगा और हम ऐसा कर सकते हैं। बस थोड़े टेक्निकल ऐड्जस्टमेंट्स की जरूरत है। यही कारण था कि ऑस्ट्रेलिया चारों टेस्ट मैच भारत में आकर हार गयी थी। तकनीकी तौर पर टर्निंग और कम उछाल वाली पिचें उनके अनुकूल नहीं हैं। लेकिन किसी भी टीम को हावी होने के लिए सभी परिस्थितियों में अच्छी तरह से खेलना होगा। तभी वे नंबर वन बन सकती हैं।’’

भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रश्नों में से एक यह है कि इंग्लैंड के खिलाफ सलामी जोड़ी कौन बनेगा। वीरेंद्र सहवाग की अनुपस्थिति में, एक ऐसे सलामी बल्लेबाज की जरूरत है जो तेज गेंदबाजों के मन मैं डर पैदा कर सके। कपिल देव का यह मानना है कि मुरली विजय और शिखर धवन के पास आने वाले कुछ महीनों में अपने आप को स्थापित करने के लिए शानदार मौका है। देव कहते हैं – ”वे प्रतिभाशाली हैं और कड़ी मेहनत कर रहे हैं, लेकिन अभी भी यह उनके प्रदर्शन पर निर्भर करता है। अगर इन दोनों लड़कों ने इंग्लैंड मैं अच्छा प्रदर्शन किया तो हमें गर्व का अनुभव होगा। हालांकि टेस्ट क्रिकेट के लिए उनके पास आवश्यक मानसिकता है या नहीं, यह उनकी सबसे बड़ी परीक्षा होगी, क्योंकि यह तीन महीनों का सफर बहुत ही कठिन होगा।’’

डेविड कॉक्स

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