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येदी-अनंत की लड़ाई जारी

क्या निर्मला सीतारमण को कर्नाटक से राज्यसभा सीट लड़ाने के पीछे अनंत का उद्देश्य बी.एस.येदियुरप्पा को कमजोर बनाना है?

यह कहावत सही है कि पुरानी आदतें आसानी से नहीं जातीं। ऐसा लगता है कि केन्द्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री अनंत कुमार कर्नाटक से राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में वरिष्ठ भाजपा नेता सुश्री निर्मला सीतारमण को खड़ा करके अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वी बी.एस. येदियुरप्पा को कर्नाटक भाजपा में एक अवांछित व्यक्ति बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

कर्नाटक में श्रेष्ठ बनने के लिए अनंत कुमार और येदियुरप्पा के बीच शीत युद्ध छिड़ गई है। इसे एक ‘त्रासदी’ के रूप में वर्णित किया जा सकता है। राज्य और केन्द्र की भाजपा सरकार के नेतृत्व के साथ ही कर्नाटक में रैंक और फाईल के कैडर इन सब से थक चुके हैं।

अब, राज्यसभा चुनाव के लिए कर्नाटक का विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र अनंत कुमार के लिए येदियुरप्पा को कमजोर करने का क्षेत्र बन गया है। अनंत की योजना अनुसार, वह पार्टी आलाकमान को वर्तमान सांसद प्रभाकर कोरे (जो एक लिंगायत दिग्गज और येदियुरप्पा के समर्थक हैं) की जगह निर्मला सीतारमण के लिए मनाने और समझाने की कोशिश करेंगे।

बेलगाम के रहने वाले धनी कोरे, व्यावसायिक संस्थानों की श्रृंखला के अध्यक्ष हैं और उनके समुदाय पर उनका दबदबा है। उन्हें मुंबई-कर्नाटक क्षेत्र में येदियुरप्पा के मजबूत स्तंभों में से एक माना जाता है। निर्मला सीतारमण की नियुक्ति से अनंत कुमार के दोहरे उद्देश्य पूरे होंगे। पहला तो यह है कि वो इससे पार्टी आलाकमान के प्रिय बन जाएंगे, विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के। दूसरा यह कि वो येदियुरप्पा की छवि को संगठन के अंदर कमजोर कर सकेंगे।

हालांकि, पार्टी के कार्यकर्ताओं को पार्टी उम्मीदवार के रूप में निर्मला सीतारमण को देखकर अत्यंत खुशी होगी। उनकी पार्टी की प्रवक्ता के रूप में, विरोधियों के खिलाफ आवाज उठाने की क्षमता ‘उल्लेखनीय और प्रभावी’ प्रदर्शन के लिए वह भय और सम्मान का उदाहरण देती हैं। अगर यह प्रक्रिया मनोवैज्ञानिक खाई को चौड़ा करता है तो कुछ लोगों के लिए थोड़े दुख का विषय हो सकता है। लेकिन वो अनंत कुमार कि बनाई गई साजिश और उनके गलत उद्देश्यों का पर्दाफाश करने में असमर्थ हैं।

भाजपा ने मई 2013 के चुनावों में सत्ता खो दी थी। उसे विधानसभा में केवल 40 सीटें मिली थीं। राज्यसभा सीट जीतने के लिए 45 वोट प्राप्त करना जरूरी है। जेडी (एस) के पास कुल 40 सीटें हैं और सत्तारूढ़ कांग्रेस के 124 विधायक हैं। गणना के अनुसार, कांग्रेस आराम से दो सीटें जीत सकती है और शेष वोट के लिए उसे दूसरों पर निर्भर रहना पड़ सकता है।

कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक, एआईसीसी के महासचिव बी.के. हरिप्रसाद और बंगलुरू सिटी कॉर्पोरेशन की पूर्व मेयर सुश्री प्रेमा करियप्पा को पहले और दूसरे उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारे जाने की संभावना है। इस सूची में पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम का भी नाम शामिल है। पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा ने अपनी पार्टी के महासचिव दानिश अली को इस क्षेत्र में उतारने की योजना बनाई है।

जहां भाजपा कार्यकर्ताओं का एक वर्ग निर्मला सीतारमण के कद और महत्व को देखते हुए परिणाम के बारे में आशंकित है कि वह इस ओहदे को पा सकेंगी या नहीं। वहीं एक वर्ग ऐसा भी है जिसे अनंत कुमार की क्षमता पर पूरा भरोसा है कि कांग्रेस और जेडी(एस) के अपने ‘गुप्त दोस्तों’ द्वारा वह पा सकते हैं, जो वह चाहते हैं। अगर कर्नाटक से निर्मला सीतारमण को राज्यसभा के उम्मीदवार के रूप में खड़ा किया जाता है तो प्रतियोगिता वास्तव में दिलचस्प होगी।

बेंगलुरू से एस.ए. हेमंत कुमार

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