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नजर शासन पर

सरकार के गठन की प्रक्रिया अब पूरी हो चुकी है, उत्साह खत्म हो चुका है और मोदी के नेतृत्व में देश को चलाने के लिए एनडीए सरकार तंत्रों की पेंच कसने में जुट गई है। अब चुनौतियों का सामना करने का समय है। मोदी के नेतृत्व में राजग सरकार पर देशवासियों ने उम्मीदों का जो बोझ डाला है, उससे सरकार के हर क्रियाकलाप पर लोगों की पैनी नजरें हैं। मोदी के आलोचक किसी भी खामी के लिए उन्हें सूली पर चढ़ाने का कोई भी मौका नहीं चुकेंगे। इसके लिए सरकार ने संभवत: सही दिशा का चुनाव किया है, लेकिन आने वाले दिनों में ही पता चल पाएगा कि मोदी समस्याओं का सामना कैसे करते हैं।

पूरे चुनावी अभियान के दौरान भ्रष्टाचार विरोधी लहर ही प्रेरणा स्रोत रही। यह एक ऐसा मुद्दा है, जिसे मोदी को बहुत गंभीरता से लेना है। कांग्रेस की करारी हार के पीछे बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार प्रमुख कारण रहा। मनमोहन सिंह की नेतृत्व वाली यूपीए सरकार स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे भ्रष्ट सरकारों में से एक के रूप में याद की जाएगी। 2जी, कॉमनवेल्थ, कोयला, वीवीआईपी हेलिकॉप्टर जैसे घोटालों ने न सिर्फ दूसरे कार्यकाल में यूपीए सरकार की साख पर बट्टा लगाया, बल्कि भारत की छवि को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नुकसान भी पहुंचाया। मोदी को यह सुनिश्चित करना है कि उनके मंत्री समूह का कोई सदस्य अनैतिक दौलत का शिकार न बन जाएं। देश से भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ फेंकने का कठिन काम उनके सामने है। एनडीए सरकार को भ्रष्टाचार विरोधी कानून बनाना होगा और उसके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश में ही सही, एसआईटी का गठन, मोदी सरकार द्वारा सही दिशा में उठाया गया पहला कदम है। चुनावों के दौरान मोदी द्वारा सांसदों के खिलाफ लंबित मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन और एक साल के अंदर मामले का निपटारा करने का वादा लगभग असंभव होगा। दागी सांसदों की संख्या भाजपा में सबसे अधिक है। ऐसे में मोदी उनसे कैसे निपटेंगे, यह देखना दिलचस्प होगा।  शपथ-ग्रहण समारोह में सार्क देशों के शासनाध्यक्षों को बुलाकर मोदी ने विदेश नीति में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। विदेश नीति के मामले में अपनी पूर्ववर्ती सरकारों की नीतियों को आगे बढ़ाना भारत सरकार की परंपरा रही है। इसलिए मोदी भी कोई क्रांतिकारी परिवर्तन लाने में सक्षम नहीं होंगे, भले ही भारत के व्यवसायिक साझेदार अपनी सांसें रोके देखते रहें। अपने पड़ोसियों के साथ संबंधों को नजदीक से परखना होगा और रूस एवं अमेरिका के साथ एक संतुलन स्थापित करना होगा। शरीफ की यात्रा के बावजूद, मोदी को चीन और पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रूख अपनाना होगा। आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक युद्ध के नाम पर मोदी भारत-अमेरिकी संबंधों को थोड़ा लचीला रूख देकर पाकिस्तान पर अमेरिकी दबाव डलवा सकते हैं और वहां आबाद आतंकवादियों की स्वर्गस्थली को जड़ से उखाड़-फेंक सकते हैं। प्रमुख मामला 26/11 के मुकदमे का है, जिसमें कोई प्रगति नहीं है। वांछित आतंकवादी आज भी पाकिस्तान में खुलेआम घुम रहे हैं।

आंतरिक सुरक्षा एक और महत्वपूर्ण चुनौती है। उत्तर-पूर्वी राज्यों में भाजपा का प्रवेश, उग्रवाद को नए सिरे से भड़का सकता है। चुनावों के दौरान और उसके बाद नक्सलियों ने कई हमलों को अंजाम दिया। नक्सलवाद से भाजपा शासित राज्य बुरी तरह प्रभावित हैं। आंतरिक संघर्ष से निपटने की नीति में बदलाव होना चाहिए। इसके लिए विकास एक विवेकपूर्ण तुरूप का पत्ता साबित हो सकता है। चिंता का एक अन्य पहलू देश में आतंकी संगठनों का उद्भव है। इसके लिए एनडीए सरकार को अद्र्धसैनिक बलों, पुलिस और खुफिया एजेंसियों का आधुनिकीकरण और उसमें सुधार करना होगा, ताकि अत्याधुनिक हथियारों के साथ वे आतंकवादियों से सख्ती के साथ निपट सकें।

सरकार के सुरक्षा बलों का मनोबल अपने निम्न स्तर पर है। सैन्य बलों – सेना, नौसेना और वायुसेना का आधुनिकीकरण आवश्यक है। बदलते परिदृश्य में चीन और पाकिस्तान द्वारा खड़ी की जाने वाली चुनौतियों के लिए भारत को खुद को तैयार रखना होगा। नौसेना और वायुसेना में हाल ही में हुईं दुर्घटनाएं भारत की खोखली रक्षा तैयारियों को पहले ही उजागर कर चुकी हैं।

चुनावी अभियानों के दौरान देश की दुर्गति को खुब इस्तेमाल किया गया। अर्थव्यवस्था में बदलाव लाने के लिए एनडीए सरकार को जल्दी और कुशलता से काम करना है। यूपीए सरकार के कार्यकाल में विकास दर अपने अधिकतम दहाई अंक से लुढ़कर 4.6 प्रतिशत के निचले स्तर पर आ गई। मोदी के लिए ‘भारत की विकास गाथा’ को पुनर्जीवित करने की चुनौती आसान नहीं है। ढ़हती अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए आधारभूत संरचना वाली बड़ी परियोजनाओं को अहमियत देनी होगी। यूपीए सरकार के कार्यकाल में आधारभूत संरचना की परियोजनाओं में देरी की मुख्य वजह कानून और व्यवस्था की स्थिति, भूमि अधिग्रहण में देरी, पुनर्वास एवं पुनस्र्थापना, फंड की कमी, पर्यावरण मंत्रालय से स्वीकृति रही है। मोदी को इन समस्याओं को उसी तरह निपटना है, जैसे उन्होंने गुजरात में किया। चुनावों के दौरान युवाओं के लिए रोजगार सृजन के वादे को भी पूरा करना होगा।

अल्पसंख्यक, खासकर मुसलमान, मोदी की तरफ आशा भरी निगाहों से देख रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि मोदी सरकार का एजेंडा हिंदुत्ववादी नहीं होगा। उन्हें अल्पसंख्यकों का खास ख्याल रखना है और उनके उस डर को दूर करना होगा, जो कांग्रेस और अन्य पार्टियों द्वारा उन्हें दिखाए गए थे।

मोदी सरकार को पूरे देश में पानी और बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी। इसे अधिक प्रभावी बनाने के लिए एनडीए सरकार को आंकड़ों का संकलन और उनके विश्लेषण पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

पहली बार चुने गए सभी सांसदों को कहा गया कि वे सभी पहले छह महीने ट्रायल पर हैं और एक समीक्षा समिति हर तीन महीने पर उनके प्रदर्शन की समीक्षा करेगी। मोदी ने सांसदों से व्यर्थ के खर्चों में कटौती, पारदर्शिता और सबसे अहम, आम लोगों के लिए सुलभ रहने को कहा। मोदी ने कहा कि किसी भी घोटाले या भ्रष्टाचार के पहले संज्ञान पर उनका बोरिया-बिस्तर बांध दिया जाएगा। शक्ति केन्द्र के लिए कोई गलियारा नहीं होगा और उन्हें चमचों, दलालों, बिचौलियों और रिश्तेदारों को दूर रखना होगा। इस तरह प्रधानमंत्री के लोगों के सिर पर हमेशा तलवार लटकी रहेगी। हम उम्मीद करते हैं कि उन सांसदों का बाल भी बांका नहीं होगा।

दीपक कुमार रथ

दीपक कुमार रथ

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