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चक्रव्यूह भेदने में जुटे महारथी भाजपा पूर्ण बहुमत की ओर?

चक्रव्यूह भेदने में जुटे महारथी भाजपा पूर्ण बहुमत की ओर?

By सुधीर गहलोत

‘ये देश है वीर जवानों का अलबेलों….’ का स्वर कान के समीप आकर दूर निकल जाता है। इसी बीच ‘5 साल केजरीवाल..’ का स्वर कानों के रास्ते दिमाग में घुसते ही याद दिला जाता है कि दिल्ली चुनावी जश्न में सराबोर है।  दिल्ली की तंग गलियों में ऑटो रिक्शा और रिक्शे पर लगे लाउडस्पीकरों से निकलने वाले राष्ट्रभक्ति गीतों और अपीलों के बीच दिल्ली को विश्वस्तरीय शहर बनाने की किरण बेदी की गुंज सुनाई देने लगती है। गली-नुक्कड़ पर खड़े हर शख्स की जुबान पर दिल्ली की किस्मत के अपने-अपने तर्क और नजरिया है। धुंआधार प्रचार और पार्टी कार्यकर्ताओं के जोश और राजनीतिक दलों की बदलती रणनीति यह बताने के लिए पर्याप्त है कि मुकाबला किसके बीच है।

वाक्युद्ध और बदलती रणनीति बता रही है दिल्ली में असली मुकाबला आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और भाजपा की मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार किरण बेदी के ही बीच है। इस चुनाव में कांग्रेस के लिए अपना अस्तित्व बचाए रखने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। कांग्रेस पूर्वांचल (बिहार और उत्तर प्रदेश के भोजपुरीभाषी) के लोगों को लुभाने के लिए भोजपुरी गानों के धुन पर चुनावी मसाला तैयार कर दिल्ली की सड़कों पर अपने प्रचार वाहन को दौड़ा रही है। कांग्रेस के दिल्ली चुनाव अभियान की कमान संभालते ही अजय माकन ने कहा था कि वे सिर्फ दिल्ली का मुंडा ही नहीं, बल्कि बिहारी बाबू भी हैं। उनके बयान से स्पष्ट था कि 15 सालों तक दिल्ली की सत्ता पर काबिज रही कांग्रेस का मुख्य फोकस पूर्वांचली और पंजाबी समुदाय को लुभाना है। माकन ने कांग्रेस की जीत की स्थिति में झुग्गी में रहने वाले लोगों को एक साल के भीतर 25*40 वर्गमीटर एरिया वाले फ्लैट देने की घोषणा की है। उनके लिए सरकारी फंड बनाने की बात कहकर लुभाने का भी प्रयास किया।

लेकिन, तमाम सर्वे एजेंसियों के रिपोर्ट बताते हैं कि असली मुकाबला आआपा और भाजपा के बीच ही है। किरण बेदी के मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद किरण और केजरीवाल के बीच कांटे का मुकाबला हो गया है। इंडिया टीवी-सी वोटर ने अपने सर्वे में भाजपा को पूर्ण बहुमत हासिल करते हुए दिखा रही है। वहीं एबीपी-नेल्सन अपने सर्वे में केजरीवाल को दिल्ली की पहली पसंद बता रही है। इंडिया टीवी-सी वोटर के अनुसार, किरण बेदी के आने से भाजपा को जबरदस्त फायदा पहुंचा है। किरण बेदी के आगमन और मोदी के आभामंडल के कारण दिल्ली में भाजपा को इस बार 45 प्रतिशत वोट हासिल होगी। जबकि आआपा को 39 प्रतिशत और कांग्रेस को सिर्फ 10 प्रतिशत वोट हासिल होंगे। दिल्ली की पिछली विधानसभा चुनावों में भजपा को 33 प्रतिशत वोट हासिल हुए थे, जबकि आआपा को 29 प्रतिशत और कांग्रेस को 25 प्रतिशत मत हासिल हुए थे।

हिंदुस्तान टाईम्स-सी फोर ने अपनी सर्वे में भाजपा को 31 सीटें, आआपा को 36 सीटें और कांग्रेस को 2 से 7 सीटें दी है। सर्वे के अनुसार मुख्यमंत्री के रूप में केजरीवाल दिल्ली के 43 प्रतिशत लोगों की पसंद हैं। जबकि 29 प्रतिशत लोग किरण बेदी को और 12 प्रतिशत लोग अजय माकन को मुख्यमंत्री के रूप में पसंद करते हैं। वहीं एबीपी-नेल्सन ने अपने सर्वे में बताया है कि केजरीवाल 51 प्रतिशत लोगों की पसंद हैं, वहीं किरण को पहली पसंद बताने वाले लोग सिर्फ 40 प्रतिशत हैं।

14-02-2015

तमाम सर्वे के नतीजों से साफ हो गया है कि किरण और केजरीवाल के बीच कांटे का मुकाबला है। दिल्ली की जनता के दिलों में जगह बनाने के लिए केजरीवाल और किरण ने एक-दूसरे पर हमले तेज कर दिए हैं। केजरीवाल ने किरण को अवसरवादी बताते हुए ऑटो पर पोस्टर लगाए हैं, जिनमें केजरीवाल को ईमानदार और किरण को अवसरवादी बताया है। ऑटो केजरीवाल और आआपा के लिए शुरू से ही चुनावी प्रोपगंडा फैलाने के लिए ब्रह्मास्त्र के तौर पर इस्तेमाल किए जाते रहे हैं। केजरीवाल और आआपा ने किरण पर दो जगहों, उदय पार्क और तालकटोरा से वोटर कार्ड रखने का आरोप लगाकर चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया, लेकिन चुनाव आयोग ने किरण बेदी को क्लीन चिट देते हुए कहा कि तालकटोरा वाले पता से वोटर कार्ड को रद्द करने का आवेदन किरण ने पहले ही दे दिया था। दूसरी तरफ, भाजपा-कांग्रेस से नोट लेकर आआपा को वोट देने के आआपा के नेताओं के आह्वान पर चुनाव ने अंतिम चेतावनी दी है। पाला बदलते हुए केजरीवाल ने मतदाताओं से कहा कि अगर कोई उन्हें पैसे दे रहा है तो उसकी विडियो बना लें। आआपा ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि वह उसके कार्यकत्र्ताओं को पैसे का लालच देकर तोडऩे का प्रयास कर रही है।

जनलोकपाल की मांग को लेकर सुर्खियों में छाए रहे अण्णा हजारे भी अचानक सक्रिय हो गए हैं। कुछ दिन पहले ही ‘मुख्यमंत्री के रूप में केजरीवाल को पसंद करेंगे या किरण को’ के जवाब में अण्णा ने कहा था कि दोनों में कोई भी मुख्यमंत्री बने, दोनों मेरे ही कार्यकत्र्ता हैं। इससे उनके दो सेनानियों के बीच के युद्ध के अंतराल में अपने लिए जमीन तैयार करने का अवसर भी मिल गया। अण्णा ने मोदी सरकार के खिलाफ नए सिरे से आंदोलन छेडऩे की बात कहकर भाजपा के सुशासन देने के ख्याल पर सवालिया निशान लगा दिया है। भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के मुद्दे पर गंभीर नहीं है, इसलिए लोकपाल, भूमि अधिग्रहण और कालेधन के मुद्दे पर एक बार फिर आंदोलन चालाया जाएगा।

सर्वे में केजरीवाल को मिलती और अण्णा के नए पैंतरे से पहले से ही परेशान भाजपा को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी की सभा में बमुश्किल जूटे 100 से 200 लोगों की भीड़ ने भाजपा को सकते में डाल दिया है। भीड़ की इसी कमी के डर ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को जनसभा के बजाय पदयात्रा करने पर विवश कर दिया। शायद ही किसी को उम्मीद हो कि राहुल गांधी चुनाव प्रचार में पदयात्रा में निकलेंगे। दूसरी तरफ विपक्ष की हर रणनीति को विफल करने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने दिल्ली के चुनाव की कमान खुद संभाल ली है। चुनाव की रणनीति दिल्ली भाजपा के पंत मार्ग के बजाय पार्टी मुख्यालय 11 अशोक रोड से बन रही है। नई रणनीति के तहत भाजपा ने दिल्ली चुनावों में अपने मुख्यमंत्रियों, केन्द्रिय मंत्रियों सहित लगभग 120 सांसदों की फौज को दिल्ली चुनाव में लगा दिया है। बूथ लेवल तक मैनेजमेंट करने के साथ-साथ केन्द्रिय मंत्रियों तक के काम तय कर दिए गए हैं। दिल्ली में चुनाव प्रचार के लिए सुषमा स्वराज, स्मृति ईरानी, राजीव प्रताप रूडी, जे.पी. नड्डा और निर्मला सीतारमन वाली कमिटी की कमान अरूण जेटली को सौंप दी गई है। हर कीमत पर भाजपा की बहुमत वाली सरकार बनाने के लिए दिल्ली में 250 जनसभाओं के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 4 रैलियां भी रखी गईं हैं। मोदी की पहली रैली 31 जनवरी को कड़कडड़ूमा में होगी। दूसरी रैली 1 फरवरी को द्वारका में, तीसरी रैली 2 फरवरी को रोहिणी में और चौथी रैली खानपुर में विराट सिनेमा के सामने आयोजित की गई है। 13 राज्यों के भाजपा कार्यकत्र्ताओं के साथ-साथ संघ के कार्यकर्ता भी भाजपा को बहुमत दिलाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए हैं। संघ के प्रचारक और भाजपा-संघ समन्वय देखने वाले डॉ. कृष्ण गोपाल ने स्वयंसेवकों से कह दिया है कि यह कबड्डी है, विजय हासिल होने तक सांसें रोककर रखनी है।

इधर कांग्रेस की चेतावनी के बावजूद जनता दल यूनाईटेड के नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आआपा के पक्ष में वोट मांगने की बात कह चुके हैं। आआपा न सिर्फ ऑटो-रिक्शा प्रचार और प्रोपगंडा के जरिए मतदाताओं को लुभा रही है, बल्कि उसके कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों के साथ समय बैठकें कर रहे हैं, उनकी समस्याएं सुनकर उसे लिख रहे हैं और उसके समाधान सुझाकर अपने लिए वोट पक्के कर रहे हैं। अण्णा की चेतावनी, केजरीवाल की बढ़त और कांग्रेस के आरोप के बीच भाजपा ने अपना चक्रव्यूह का घेरा कसना शुरू कर दिया है। बाकी… कलियुग का यह अभिमन्यु इस  चक्रव्यूह को भेदने में कितना सफल होगा यह 10 फरवरी को साफ हो जाएगा।

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