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वर्चुअल वल्र्ड में महासंग्राम

वर्चुअल रियलिटी हेडसेट बनाने के बारे में अफवाहों के साथ ही सैमसंग वर्चुअल दुनिया में सर्वश्रेष्ठ होने की लड़ाई में प्रवेश कर चुका है।

सैमसंग एक नयी तरह की मार्किट में अपने कदम जमाने जा रहा है। यह अफवाह तकनीक के गलियारों में उठ रही है की सैमसंग अपना खुद का एक वर्चुअल रियलिटी हेडसेट्स बनाने जा रहा है। सोशल नेटवर्किंग साईट फेसबुक ने भी ‘ऑक्यूलस रिफ्ट’ नामक एक ऐसा ही हेडसेट 2012 मैं निकाल चुका है। दूसरी ओर सोनी भी इसमें पीछे नहीं है। सोनी ने ऑक्यूलस रिफ्ट इस तकनीक में कड़ी प्रतिस्पर्धा प्रदान करने के लिए अपनी ‘प्रोजेक्ट मॉर्फियस’ की घोषणा की है। माइक्रोसॉफ्ट भी इस कतार में पीछे नहीं है। यह अटकलें लगायी जा रही हैं कि माइक्रोसॉफ्ट ‘एक्सबॉक्स’ के लिए वर्चुअल रियलिटी हेडसेट्स बनाने जा रही है। लेकिन क्या है यह वर्चुअल रियलिटी हेडसेट? कहां होगा इनका प्रयोग? इन कुछ सवाल को हम समझने की कोशिश करेंगे।

क्या है वर्चुअल रियलिटी?

वर्चुअल रियलिटी हेडसेट्स की अवधारणा को समझने के लिए हमें वर्चुअल रियलिटी को समझने की जरूरत है। वर्चुअल का मतलब है नजदीक और रियलिटी जो हम अुनभव करते हैं। अगर हम दोनों शब्दों को एक करें तो हमें सुगठित परिभाषा मिल जाएगी। वर्चुअल रियलिटी शब्द का इस्तेमाल एक तीन आयामी कंप्यूटरजनित वातावरण का वर्णन करने के लिए किया जाता है जो व्यक्ति द्वारा महसूस किया जा सकता है। वह व्यक्ति इस वर्चुअल दुनिया का हिस्सा बन जाता है या इस वातावरण में डूब जाता है। वह उस स्थान पर अपनी उपस्थिति महसूस कर वस्तुओं में हेर-फेर या कार्यों की एक श्रृंखला का प्रदर्शन करने में सक्षम हो जाता है।

क्या है यह वर्चुअल रियलिटी हेडसेट्स?

वर्चुअल रियलिटी हेडसेट्स मूल रूप से हेड-माउंटेड डिस्प्ले (एच.एम.डी) या ऐसे चश्मे होते हंै जो वर्चुअल स्टिम्यूलेशन्स के हिस्से के रूप में तीन आयामी चित्र प्रदर्शित करते हैं। हेडसेट में हर आंख के लिए एक अलग मॉनिटर होता है। इन हेडसेट्स की बदौलत एक स्टीरियोस्कोपिक प्रभाव बनाया जाता है जिसके द्वारा व्यक्ति को यह भ्रम होता है कि वो वर्चुअल स्टिम्यूलेशन्स में मौजूद है। ऑडियो और वीडियो इनपुट की मदद से यह एकदम असली लगता है।

कहां-कहां इसका इस्तेमाल किया जा सकता है?

वर्चुअल रियलिटी हेडसेट्स मूल रूप से गेमिंग और मनोरंजन प्रयोजनों के लिए उपयोग किया जाता है। लेकिन वास्तव मे यह कई जगह प्रयोग हो सकता है, जैसे वास्तुकला, खेल, चिकित्सा, कला, और मनोरंजन आदि में। वर्चुअल रियलिटी हमें कई नए और रोमांचक खोजों ओर ले जा सकती है और हमारे रोजमर्रा के दिनचर्या को बदल सकती है। यह स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी काफी उपयोगी होगी। वर्चुअल स्टिम्यूलेशन्स अगली पीढ़ी के सर्जनों के लिए भी बहुत उपयोगी साबित होगी।

रोहन पाल

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