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क्या विलायत मे वसूलेंगे अंग्रेजों से लगान?

इंग्लैंड को क्रिकेट का जन्मदाता कहा जाता है। आज से करीब 138 वर्ष पूर्व सन् 1876 में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच मेलबर्न में पहला अंर्तराष्ट्रीय टेस्ट खेला गया था। भारत ने अपना पहला टेस्ट 1932 में इंग्लैंड के विरूद्ध ही खेला था। हालांकि भारत 9 विकेट से मैच हार गया था, लेकिन दूसरी पारी में लाला अमरनाथ की शतकीय और कप्तान सी.के. नायडू की अद्र्धशतकीय पारी ने सबका दिल जीत लिया था। तब से लेकर आज तक भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाली श्रंृखलाओं का अपना अलग महत्व रहा है।

भारत ने अब तक कुल 17 बार इंग्लैंड का दौरा किया है। वर्ष 2004 के दौरे में भारत ने केवल एकदिवसीय श्रंृखला ही खेली थी। भारत ने केवल तीन बार (1971, 1986 और 2007) ही इंग्लैंड में सीरीज जीती है। वर्ष 2002 का दौरा भी भारत के नजरिए से अच्छा था। भारत सीरीज जीत तो नहीं सका लेकिन ड्रॉ करवाने में कामयाब रहा। अपने पिछले दौरे में भारत ने निराशापूर्ण प्रदर्शन किया था और इंग्लैंड ने सीरीज में उसका सूपड़ा साफ कर दिया था।

अब एक बार फिर भारतीय टीम इंग्लैंड दौरे की तैयारियों में जुटी हुई है। 9 जुलाई से भारत इंग्लैंड में पांच टेस्ट, पांच एकदिवसीय और एक टी-20 की श्रंृखला का आगाज करेगा। इस बार की भारतीय टीम पिछली भारतीय टीमों से अलग है। युवाओं से सुसज्जित इस टीम में केवल धोनी, गंभीर और ईशांत ही ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने वर्ष 2011 में इंग्लैंड में टेस्ट खेले थे। सचिन, द्रविड और लक्ष्मण की रिटायरमेंट और सहवाग का टीम में जगह के लिए संघर्ष के चलते टीम में कई युवाओं को मौका दिया गया है। हालांकि चेत्तेश्वर पुजारा नंबर तीन पर द्रविड की कमी को कुछ हद तक भरने में जरूर सफल हुए हैं पर क्या इंग्लैंड में भी वे अपना जादू दिखा पाएंगे इसका उत्तर तो समय के गर्भ में ही छुपा है।

वहीं विराट और रहाणे भी क्रमश: सचिन और लक्ष्मण की कमी को कई मौकों पर भरने में कामयाब रहे हैं। ओपनिंग भारत की कमजोरी रही है लेकिन पहले सहवाग और गंभीर और फिर शिखर और रोहित ने इस कमजोरी को दूर किया। लेकिन पिछले कुछ समय से शिखर और रोहित दोनों की फॉर्म खराब चल रही है। ऐसे में आईपीएल में जीत के बाद गौतम गंभीर को भी इंग्लैंड का टिकट दिया गया है। हालांकि गंभीर की खुद की फॉर्म कुछ खास नहीं है, लेकिन विदेशों में खासकर इंग्लैंड में खेलने का तजुर्बा उनके पक्ष में रहा। वर्ष 2011 के दौरे में उन्होंने तीन टेस्ट की छह पारियों में मात्र 116 रन ही बनाए। ऐसे में इस बार उन पर काफी दवाब होगा।

गेंदबाजी में भारत इंग्लैंड को टक्कर दे सकता है। भुवनेश्वर, शामी, वरूण ऐरान, ईश्वर पंाडे, पंकज सिंह और ईशांत सरीखे तेज और स्विंग गेंदबाजों का अच्छा मिश्रण है भारत के पास। वहीं फिरकी की बागडोर अश्विन और जडेजा के कंधों पर ही होगी। वहीं इंग्लैंड की टीम भी बदलाव के दौर से गुजर रही है। स्टार बल्लेबाज जोनाथन ट्रॉट और जादूई स्पिनर ग्रेम स्वान का ऐशेज के मध्य विवादास्पद रिटार्यमेंट और दिग्गज बल्लेबाज केविन पीटरसन का बोर्ड से झगड़े के कारण निलंबन ने इंग्लैंड को सिर दर्द तो दिया ही है।

भारत की तरह इंग्लैंड भी एक ही प्लान के साथ मैदान में उतरता है और इसी कमजोरी का फायदा भारत उठा सकता है। दबाव में भारत अगर इंग्लैंड पर जवाबी हमला कर उसकी योजना को ध्वस्त कर दे तो कप्तान कुक के पास ज्यादा विकल्प नहीं बचते। ऐसा ही कुछ हमने पिछली ऐशेज श्रंृखला में देखा। शिखर, विराट और धोनी ऐसा करने में पूर्णत: सक्षम हैं।

मध्यक्रम और निचले क्रम के बल्लेबाजों पर भी जीत का दारोमदार रहेगा। ऐशेज में ही हमने देखा था कि किस तरह ऑस्ट्रेलिया की टीम 100-5 के बाद पहले 300 और फिर 450 से 500 तक पहुंचने में कामयाब रही। और इंग्लैंड के पास इसका कोई जवाब नहीं था। कुछ ऐसा ही भारत को भी करना होगा और ऐसा करने में धोनी, रहाणे, अश्विन और भुवनेश्वर को जिम्मेदारी से बल्लेेबाजी करनी होगी। इसके साथ ही भारत को अपने क्षेत्र-रक्षण को भी मजबूत करना होगा। अक्सर दबाव में या विदेशों में बादलों की वजह से कम रोशनी में कई बार कैच हाथ से छूट जाते हैं जो अंत में निर्णायक साबित होते हैं। अगर भारत इन सभी बातों का ध्यान रखता है और दबाव में स्थिर रहता है तो निश्चित तौर पर भारत चौथी बार इंग्लैंड से लगान वसूल पाने में सफल होगा।

सौरभ अग्रवाल

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