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”विकास की नीति प्राकृतिक संतुलन के साथ बनाई जाए” — भैयाजी जोशी

उत्तराखंड में पिछले साल 16 जून को आई आपदा का दर्द आज भी लोगों के दिल-ओ-दिमाग में बरकरार है। केदारनाथ में हुई भीषण त्रासदी का मंजर को लोग चाहते हुए भी भूल नहीं पा रहे हैं। जिन परिवारों के लोग अब तक नहीं लौटे हैं, उनके दिल में जख्म अब भी ताजा है। इन लोगों का कहना है कि उत्तराखण्ड सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग ने प्रलय की उस घड़ी में कोई मदद नहीं की। घटना के बाद आपदा के भुक्तभोगी बने इन लोगों को ना पूरा मुआवजा भी नहीं मिला। स्थिति यहां तक है कि एक बर्ष गुजर जाने के बाद बावजूद कंकालों का मिलना जारी है, लेकिन सरकार उन कंकालों का डीएनए टेस्ट कराने में भी नाकाम हो रही है।

उत्तराखण्ड त्रासदी के एक साल पूरे होने पर ‘भारतीय उत्तराखण्ड त्रासदी पीडि़त मंच’ द्वारा दिल्ली में एक श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह सुरेश जोशी ऊर्फ भैयाजी जोशी ने उत्तराखण्ड त्रासदी में दिवंगत लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा – ”देश में आपदा प्रबंधन के मामले में जापान से सीख लेकर हमें सुधार करने की जरूरत है। ऐसी आपदाएं सबसे अधिक वहीं आती हैं, लेकिन वहां की पूर्व-नियोजित व्यवस्थाओं के कारण न्यूनतम क्षति होती है। दूसरी ओर, हमारे देश का सरकारी तंत्र आपदा प्रबंधन में बेहद कमजोर है। हम सभी को विकास की आवश्यकता है, लेकिन यह प्रकृति के संतुलन के साथ होना चाहिए। हिमालय में पानी तथा बिजली देने की अपार क्षमता है, लेकिन उसकी सुरक्षा भी हमारा अपरिहार्य दायित्व है।’’ उन्होंने इस प्रकार की आपदाओं से बचने के लिए उत्तराखण्ड तथा हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में विकास की नीति प्राकृतिक संतुलन के साथ बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उत्तराखण्ड की उस आपदा को याद करते हुए भैयाजी ने कहा – ”प्राकृतिक आपदा के सामने सभी बेबस नजर आते हैं, किन्तु मानव निर्मित त्रासदी अधिक पीड़ादायक होती है। मानव प्रकृति के साथ खिलवाड़ करते समय उसकी अपार शक्ति को भूल जाता है। प्रकृति का खेल एक मिनट का होता है, किन्तु हम उसको जीवन भर भूल नहीं पाते। इसे झेलना हमारी विवशता है, लेकिन प्रकृति से संघर्ष करना हमारे हाथ में नहीं है।” उन्होंने कहा कि अपने देश का जनसामान्य हर आपदा के निवारण में अपने आपको झोंक देता है। यह अपने समाज की विशेषता है तथा इसी से हमें इन संकटों से उबरने में मदद मिलती है। उन्होंने ऐसी घटनाओं को राजनीति का विषय न बनाने का परामर्श दिया।

बिहार के बक्सर से सांसद तथा समिति के संयोजक अश्वनी कुमार चौबे, जो पिछले वर्ष स्वयं परिवार सहित केदारनाथ में आई प्राकृतिक आपदा में फंस गए थे, ने इस घटना का वृतांत एक वृतचित्र के माध्यम से उपस्थित लोगों के सामने रखा। उन्होंने पीडि़त लोगों की मदद के लिए यह समिति बनाई थी। अश्वनी कुमार चौबे ने बताया कि सरकार की ओर से उस समय कोई सहायता नहीं उपलब्ध कराई गई थी, किन्तु उस समय भी मंदिर-मठों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसवकों ने पीडि़तों की हर संभव मदद की तथा सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आपदा पीडि़तों की जान बचा कर उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया।

भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने आपदा में मृत लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए सुझाव दिए। उनके साथ उत्तराखण्ड से राज्यसभा सांसद तरुण विजय, दिल्ली से लोकसभा सांसद उदितराज ने भी प्रकृति संतुलन पर अपने विचार व्यक्त किए। (रोहन पाल)

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