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काले जादू के मकडज़ाल में सऊदी अरब

काला जादू के आरोप में एक ओडिया दंपत्ति को सऊदी अरब की जेल में 8 महीने गुजारने के बाद, अंतत: उन्हें वहां से निर्वासित कर भारत भेज दिया गया।

तथाकथित काला जादू के जुर्म में सऊदी अरब की जेल में 8 महीने गुजारने के बाद, एक ओडिया दंपत्ति वहां की अपनी दर्दभरी कहानी बताने के लिए 12 मई 2014 को अपने घर ओडिशा के केन्द्रपाड़ा में वापस पहुंच गया। सऊदी अरब के जेद्दा के नजदीक टुर्बा की जेल में सजा पूरी होने के बाद इस दंपत्ति को वापस भारत निर्वासित कर दिया गया है।

केन्द्रपाड़ा शहर के अंतर्गत आने वाले दिलारपुर गांव के रहने वाले 49 वर्षीय शेख निजाम ईस्माइल और उनकी 45 वर्षीया पत्नी नूरजहां अब्दुल सईद को 10 सितंबर 2013 को अपने सऊदी नियोक्ता मोहम्मद सैफी पर तथाकथित काला जादू करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। निजाम, सैफी के यहां ड्राईवर का काम करते थे, जबकि उनकी पत्नी नूरजहां उसी घर में नौकरानी का काम करती थी। सऊदी नागरिक सैफी ने 10 सितंबर को टुर्बा थाने में एक शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि दंपत्ति ने ऐसे तेल से उसके शरीर की मालिश की, जिसके कारण उसके रीढ़ की हड्डी का दर्द कम नहीं हो रहा था। दूसरी तरफ वह लगातार दर्द से परेशान था, जिसके कारण पुलिस ने उस भारतीय दंपत्ति को गिरफ्तार कर लिया।

थाने में पुलिस द्वारा ढाए गए जुल्म को याद करते हुए निजाम कहते हैं – “पुलिस ने जेल भेजने से पहले मुझे और मेरी पत्नी को कोड़े से मारा। मेरा मालिक रीढ़ की हड्डी के दर्द से परेशान था, इसलिए मैं और मेरी पत्नी ने ओडिशा से लाए यूनानी तेल से उसके शरीर की मालिश की थी। दुर्भाग्य से उसकी रीढ़ की हड्डी का दर्द कम नहीं हुआ। उसे शंका हुई कि मैंने और मेरी पत्नी ने उस पर काला जादू कर दिया है और उसकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने हमारे ऊपर काला जादू करने का आरोप लगा दिया।” निजाम आगे बताते हैं – “हमें टुर्बा की कोर्ट में पेश किया गया और कोर्ट ने हमें 8 महीने की करावास की सजा सुनाई। मेरी पत्नी को जेल के महिला वार्ड में रखा गया। यह मेरी जिंदगी का एक डरावना सपना है, जिसे मैं कभी नहीं भूल सकता। 8 महीने की सजा पूरी होने के बाद हमें सऊदी अरब से निर्वासित कर दिया गया। साथ ही हमें सऊदी अरब में घुसने पर 3 साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया। अब मैं अपने बच्चों और अपने गांव के लोगों से मिल कर बेहद खुश हूं। हमने निर्णय किया है कि रोजी-रोटी कमाने के लिए भारत के किसी भी हिस्से में काम कर लूंगा, लेकिन विदेश नहीं जाउंगा।” निजाम की पत्नी नूरजहां सिसकते हुए कहती हैं – “पुलिस ने मुझे थाने में कोड़े से पीटा और जेल भेजने से पहले मेरे लंबे बालों को काट दिया। मैं भगवान की शुक्रगुजार हूं कि सऊदी अरब की सरकार ने हमें हमारी मातृभूमि वापस भेज दिया। हम मध्य-पूर्व के किसी भी देश में अब कभी नहीं जाएंगे।”

सितंबर में दंपत्ति को गिरफ्तार करने के बाद, उनके सभी छ: बच्चों की देखभाल भारतीय कामगारों ने दो सप्ताह तक की। बाद में बच्चों को जेद्दा स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास के सामुदायिक कल्याण विभाग के अधिकारियों को सौंप दिया गया, जिन्होंने सभी 6 नाबालिग बच्चों को करीब पांच महीने

पहले भारत भेजने में मदद की। जेद्दा स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास की सामुदायिक कल्याण विभाग के अधिकारी राजकुमार का कहना है – “काला जादू सऊदी अरब में एक अपराध है। वहां तथाकथित डायनों की तलाश के लिए सऊदी अधिकारियों की एक ईकाई है। सबसे पहले हमने सजा प्राप्त दंपत्ति के बच्चों को वापस ओडिशा स्थित उनके गांव भेजने का प्रबंध किया।”

2007 में मिस्र के फर्मासिस्ट मुस्तफा इब्राहिम को कथित काला जादू और टोना में लिप्त होने के आरोप में सजा के तौर पर उनका सिर काटकर मौत के घाट उतार दिया गया था। 2006 में फावजा फलीह को जादू-टोना करने, जिन्न का सहारा लेने के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई थी। फलीह को अपने गवाहों के सबुतों के बारे में पूछने का भी अधिकार नहीं दिया गया। यहां तक कि तथाकथित गवाह के उपस्थिति के कारण उनके कानूनी प्रतिनिधि को कोर्ट में जाने से रोक दिया गया। ह्यूमन राईट वॉच की अपील के बाद उनकी फांसी की सजा में देर जरूर हुई, लेकिन खराब शारीरिक हालत के कारण जेल में ही उनकी मौत हो गई।

2008 में लेबनान का एक प्रसिद्ध टेलिविजन पर्सनेलिटी अली हुसैन सिबत, जो अंधविश्वासों पर आधारित भविष्य बताते थे, को मक्का में धार्मिक यात्रा के दौरान एक महिला को जादुई पेय के बारे में बातचीत करने वाले एक स्टिंग में फंसा कर गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर आरोप लगाया गया कि वे एक महिला को अपने पति की दूसरी पत्नी को तलाक दिलवाने के लिए काला जादू का इस्तेमाल कर रहे थे। सिबत के मौत की सजा को अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के विरोध के बाद स्थगित कर दिया गया, लेकिन अमीना बिन्त अब्दुलहलीम नस्सार नाम की महिला को डायन के आरोप में इस साल के शुरूआत में सिर काटकर मौत की सजा दे दी गई।

केन्द्रपाड़ा से आशीष सेनापति

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