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जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने की ओर मोदी के बढ़ते कदम

मोदी जिस तरह से ईराक में रह रहे भारतीयों को बिना कोई क्षति पहुंचाए वतन वापसी का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं,वह काबिले तारीफ है। 04 जुलाई को अगवा हुईं 46 नर्सों एवं अन्य नागरिकों को वतन वापसी के लिए की गई कूटनीतिक पहल, यह एक तरह से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दृढ़ इच्छाशक्ति एवं भारत की दिनों-दिन बढ़ती विश्व बिरादरी में पकड़ का एक जीता जागता प्रमाण है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा की गई जम्मू-कश्मीर की पहली यात्रा को ही अनुच्छेद 370 को हटाने के संकेत के तौर पर देखना चाहिए, क्योंकि चुनाव अभियान में नरेन्द्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर के विकास में अनुच्छेद 370 को सबसे बड़ी बाधा बताया था और इसे समाप्त करने की वकालत की थी। ईराक में फंसे भारतीयों की सकुशल वापसी के लिए नरेन्द्र मोदी ने जिस दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया, उससे लगता है कि अनुच्छेद 370 के मामले में भी वे साहसिक कदम उठाने से परहेज नहीं करेंगे।

04 जुलाई देशवासियों के लिए महत्वपूर्ण दिन माना जाना चाहिए, क्योंकि मां वैष्णों देवी के द्वार तक पहुंचने के लिए ऊधमपुर से कटरा तक रेल यात्रा की सुविधा देशवासियों को प्राप्त हो गई है। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वयं ऊधमपुर से कटरा तक जाने वाली रेल को हरी झण्डी दिखाकर रवाना करते हुए कहा – ”ये सुविधा सिर्फ जम्मू-कश्मीर के लिए नहीं है, बल्कि जम्मू-कश्मीर आने वाले सभी सवा सौ करोड़ देशवासियों के लिए है। विकास के माध्यम से जम्मू-कश्मीर के नागरिकों का दिल जीतना मेरी पहली प्राथमिकता है। इस रेल को श्रीशक्ति एक्सप्रेस के नाम से जाना जाएगा। हम रेलवे प्लेटफॉर्म पर एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं प्रदान करेंगे। रेलवे कटरा तक छ: जोड़ी टे्रन शुरू करेगा। आज का दिन जम्मू-कश्मीर को नई गति और ऊर्जा देने जा रहा है।’’ उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि वे जम्मू-कश्मीर की सुख-समृद्धि के लिए अपने दायित्वों का निर्वहन करें।

प्रधानमंत्री के उक्त वक्तव्य पर यदि गौर किया जाय तो उन्होंने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि हमें जम्मू-कश्मीर का भी विकास देश के अन्य राज्यों की तरह प्राथमिकता के आधार पर करना चाहिए और इसके लिए उन्होंने केवल जम्मू-कश्मीर वासियों भर से सहयोग की अपील नहीं की, वरन भारत के सवा सौ करोड़ लोगों से सहयोग की मांग की। जब तक सभी देशवासियों का सहयोग नहीं प्राप्त होगा, तब तक जम्मू-कश्मीर देश के अन्य राज्यों की भांति विकास के पथ पर अग्रसर नहीं होगा। लेकिन, विकास में सबसे बड़ा रोड़ा जम्मू-कश्मीर में प्रभावी अनुच्छेद 370 है, जिसे अविलम्ब समाप्त किया जाना चाहिए। यह सर्वमान्य सिद्धांत है कि जब कोई समस्या विकास में बाधक हो तो सर्वप्रथम उस समस्या से निजात पाना होता है। तात्पर्य है कि यदि जीवन को सुरक्षित रखने के लिए शरीर के किसी अंग को हटाना लाभप्रद हो तो उसे भी हटाया जाता है। उसी प्रकार जम्मू-कश्मीर के विकास में बाधक अनुच्छेद 370 को हटाना जम्मू-कश्मीर के लिए अतिआवश्यक है। यदि अब भी अनुच्छेद 370 को नहीं हटाया गया तो एक समय ऐसा आएगा, जब जम्मू-कश्मीर का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। नरेन्द्र मोदी ने अपने विचारों से जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री की आशंका को भी निरूत्तर करते हुए स्पष्ट संकेत दिया कि जम्मू-कश्मीर का विकास आपके बलबूते का नहीं है।

प्रधानमंत्री ने जहां एक तरफ आवागमन को सुगमता के लिए ऊधमपुर से कटरा तक श्रीशक्ति रेल लाइन को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया, वहीं पर प्रदेश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए झेलम नदी पर निर्मित उड़ी बिजली परियोजना को राष्ट्र के लिए समर्पित किया। उन्होंने सेना की छावनी में जाकर देश के वीर सपूतों के हौंसले बुलंद करते हुए आश्वासन दिया कि आपकी हर जरूरत की पूर्ति के लिए सरकार सदैव तत्पर है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने वक्तव्य में कहा कि चुनाव अभियान में जिस तरह से मैंने मां वैष्णों देवी का आर्शीवाद लेकर विजय पताका फहराया, उसी तरह आज मां वैष्णों देवी के यहां से विकास की अविरल धारा देश में प्रवाहित करने के लिए मां के चरणों में आया हूं। निश्चय ही उनके द्वारा राष्ट्रहित में लिए गए बहुत से निर्णयों से देश की जनता उनके प्रति अच्छे दिन आने की आशा लगाए बैठी है। देशवासियों को प्रधानमंत्री से बहुत आशाएं हैं और वे उन आशाओं की पूर्ति के लिए सजग भी हैं, जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण हम सबके सामने है।

ईराक जहां शिया-सुन्नी के बीच जारी युद्ध में जो वीभत्स दृश्य देखने को मिल रहे हैं, उससे भारतीयों के मन में ऐसी आशंकाएं उपज रही थीं कि भारतीय मूल के नागरिकों का तो सकुशल वापस आना संभव नहीं है। लेकिन मोदी ने जिस तरह से ईराक में रह रहे भारतीयों को कोई क्षति पहुंचाए बिना वतन वापसी का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं, वह काबिले तारीफ है। 04 जुलाई को 46 अगवा नर्सों एवं अन्य नागरिकों को वतन वापसी के लिए की गई कूटनीतिक पहल, यह एक तरफ से प्रधानमंत्री की दृढ़ इच्छाशक्ति एवं भारत की दिनों-दिन बढ़ती विश्व बिरादरी में पकड़ का एक जीता जागता प्रमाण है। विश्व के राष्ट्राध्यक्षों के साथ आतंकवादियों को भी यह ज्ञात है कि भारत की बागडोर वर्तमान समय में ऐसे व्यक्ति के हाथ में है जो अपने देश के नागरिकों के जान-माल की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। यह उसी के परिणाम के तौर पर देखा जाना चाहिए कि आईएसआई जैसे आतंकी संगठन जो ईराक के सैनिकों को मूली-गाजर की तरह काट रहे हैं, वे भी अगवा करने के बावजूद किसी भारतीय नागरिक को अभी तक कोई क्षति पहुंचाने की हिम्मत नहीं कर पाए। हमें देशवासियों को ईराक से लौट रहे अपने प्रियजनों की सकुशल वापसी कराने के लिए केन्द्र सरकार को शुभकामना देने की आवश्यकता है। साथ ही केरल के मुख्यमंत्री ओमन चाण्डी भी साधूवाद के पात्र हैं, जिन्होंने अपने वक्तव्य में केन्द्र सरकार एवं भारतीय दूतावास के कर्मचारियों की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए राष्ट्रीय नेतृत्व के प्रति सहयोगात्मक भावना की अभिव्यक्ति की। अब आवश्यकता यह है कि देश के विकास के लिए जाति, धर्म एवं किसी विचारधारा को किनारे रखकर सिर्फ सवा सौ करोड़ नागरिकों की भलाई के लिए ही केन्द्र एवं राज्य सरकारें काम करें। इसके लिए सबसे बड़ी आवश्यकता है कि देश में समान नागरिक संहिता लागू हो, जिसके तहत सम्पूर्ण देशवासियों के लिए ही केन्द्र एवं राज्य सरकारें बिना किसी भेदभाव के कार्य करें।

देश में जमाखारों के कारण आवश्यक वस्तुओं के दाम चरम पर हैं। दिनोंदिन बढ़ रही मंहगाई के कारण देशवासियों के मध्य जागी आशा, निराशा में बदल रही है। सरकार ने जमाखोरों पर कड़ी कार्यवाही करने के लिए कठोर कदम उठाने की पहल की है। निश्चय ही भविष्य में अच्छे परिणाम की आशा की जानी चाहिए। हम देशवासियों को मोदी सरकार को थोड़ा वक्त देकर उनके द्वारा लिए गए देशहित के निर्णयों पर सकारात्मक विचार एवं समर्थन देने की आवश्यकता है। देश के सर्वांगीण विकास के लिए देशवासियों का सहयोग ही सर्वोपरि है और वह सहयोग सरकार को प्राप्त हो रहा है। इसलिए निश्चय ही हम भविष्य में देश में अच्छे दिन की कल्पना को साकार रूप में देख सकेंगे। इसी भावना और विश्वास के साथ राष्ट्र देवो भव, कृवन्तों विश्वमार्यम की भावना के साथ!

उदय कमल मिश्र

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