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मैंने तेरे लिए ही… सात रंग के सपने बुने

बजट में आर्थिक स्थिति को समझकर चुनौतियों से निबटने की कोशिश की गई है। लेकिन अभी बहुत कुछ नहीं कहा जा सकता। यह बजट भविष्य के अनुमान पर निर्भर है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ईंधन के तेल के दाम भी बहुत कुछ दिशा तय करेंगे। इसलिए अगले तीन-चार महीने में पता चल पाएगा कि वित्त मंत्री कितना सफल हो पाएंगे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का बजट हिट है। यह हम नहीं बल्कि दुनिया की नामी रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पूअर्स (एस एंड पी)कह रही है। एजेंसी के मुताबिक, इससे भारत की अंतर्राष्ट्रीय रेटिंग पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यह बेहद सावधानी पूर्वक तैयार किया गया बजट है। इंडिया रेटिंग एंड रिसर्च के प्रमुख अर्थशास्त्री देवेंन्द्र कुमार पंत का कहना है कि फिलहाल इस बजट में आलोचना लायक कुछ नहीं है। वित्तमंत्री अरूण जेटली ने उन सभी मुद्दों को छुआ है जिनकी चिंता की जानी चाहिए थी। उन्होंने राजस्व घाटे पर अपनी चिंता दिखाई है, दिशा देने की कोशिश है और वृद्धि दर हासिल करके चुनौतियों से निबटने के मूड में दिखाई दे रहे हैं।

जेटली के बजट की तारीफ दुनिया में हो रही है। उन्होंने मोदी सरकार से लोगों की उम्मीद साकार करने के लिए सात रंग के सपने सजाए हैं। प्राधनमंत्री मोदी ने भी इस बजट की अपने अंदाज में तारीफ की और इसे मरणासन्न अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी बताया है।

रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर विमल जालान का भी मानना है कि बजट में आर्थिक स्थिति को समझकर चुनौतियों से निबटने की कोशिश की गई है। लेकिन जालान का कहना है कि अभी बहुत कुछ नहीं कहा जा सकता। यह बजट भविष्य के अनुमान पर निर्भर है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ईंधन के तेल के दाम भी बहुत कुछ दिशा तय करेंगे। इसलिए अगले तीन-चार महीने में पता चल पाएगा कि वित्त मंत्री कितना सफल हो पाएंगे।

जेएनयू के पूर्व कुलपति और जाने-माने अर्थशाी बीबी भट्टाचार्य के मुताबिक वित्त मंत्री ने कोई कड़वी दवा नहीं पिलाई। उन्होंने मध्यवर्ग का ख्याल रखा। रक्षा और बीमा क्षेत्र में प्रत्येक विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा बढ़ाकर इसे 26 से 49 फीसदी करने की घोषणा की है। यह एक सकारात्मक कदम है। उन्होंने ऐसा अर्थव्यवस्था को गति देने, वृद्धि दर को गति देकर तथा राजस्व घाटे को कम करके मंहगाई की रणनीति से निबटने के लिए किया है। हालांकि भट्टाचार्य मानते हैं कि मंहगाई से निबटने की पूरी रणनीति वित्त मंत्री सामने नहीं रख पाए। दिल्ली में अंबेडकर विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्री के प्रो. एस.के. मंडल को जेटली का बजट संतुलित नजर आता है। मंडल कहते हैं कि सरकार खाद और खाने-पीने से जुड़े क्षेत्र की सब्सिडी नहीं घटाई। यह एक अच्छा कदम है। इसमें भविष्य की चिंता साफ नजर आ रही है, क्योंकि मौसम विभाग ने पहले ही कम मानसून की भविष्यवाणी की है। इससे खेती-खलिहानी के प्रभावित होने के आसार हैं। यह स्थिति खाद्य मंहगाई को बढ़ा सकती है। इसलिए वित्त मंत्री सब्सिडी से कोई छेड़छाड़ नहीं की है, ताकि किसान को खाद में, गरीब को खाद्यान्न में और सिंचाई आदि के लिए डीजल पर निर्भर रहने वाले किसानों को राहत दी जा सके। मंडल को बजट में सबसे सकारात्मक पक्ष मध्यम वर्ग को राहत दिखाई दे रही है।

शायद कुछ यही वजह है कि वित्त सचिव अरविंद मायाराम बजट के बारे में दम भरकर अपनी बात कह पा रहे हैं। वह भी तब, जब देश की अर्थव्यवस्था की हालत बहुत अच्छी नहीं कही जा सकती। वह भी तब रक्षा क्षेत्र में पहले से मौजूद 26 प्रतिशत की एफडीआई के बावजूद विदेशी निवेश का खास आकर्षण न दिखा हो, दुनिया की रेटिंग एजेंसी ने भारत में निवेश के लिए उत्साहजनक सलाह न दी हो, देश 4.1 प्रतिशत राजस्व घाटा की स्थिति में हो। इसके बावजूद अरूण जेटली और अरविंद मायाराम की टीम ने 4.5 प्रतिशत राजस्व घाटे तक के अनुमान की जहमत उठाने का साहस दिखाया हो। 2015-16 में इसे घटाकर चार प्रतिशत से नीचे और उसके अगले साल तक घटाकर तीन प्रतिशत तक लाने का सपना दिखाया हो। अर्थशास्त्री भी मानते हैं कि यदि सरकार ऐसा करने में सफल हो गई तो यह अर्थवस्था को वेंटिलेटर जैसी स्थिति से उतार कर सीधे दौड़ा देना होगा। यानी फिर यह मान लेने में कोई गुरेज नहीं होगा कि देश की वृद्धि दर अगले चाल सालों में दोहरे अंक (9-10 प्रतिशत) के बिल्कुल करीब होगी। हालांकि अरविंद मायाराम कहते हैं कि 2014-15 का बजट बेहद संतुलित, देश के सामने मौजूद चुनौतियों को समझने, अर्थव्यवस्था को दिशा देने वाला बजट है। इससे हमें देश की वृद्धि दर को आगे ले जाने में बड़ी मदद मिलेगी।

बीबी भट्टाचार्य, अरविंद मायाराम के इसके पीछे कुछ तर्कों से सहमत नजर आते हैं लेकिन उनका मानना है कि जेटली का बजट अभी दूरदर्शी कहने के लिए थोड़ा रूकना पड़ेगा। विमल जालान को भी चार महीने का इंतजार ठीक लग रहा है। देवेन्द्र कुमार पंत थोड़ी अलग राय रखते हैं। उन्हें बीमा क्षेत्र में 49 प्रतिशत की एफडीआई थोड़ा उत्साहित कर रही है। रक्षा क्षेत्र में 49 फीसदी की एफडीआई को लेकर वह उतने उत्साहित नहीं नजर आते, लेकिन मानते हैं कुछ तो चमक दिखेगी। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आएगा। देश की रक्षा कंपनियों के साथ विदेशी कंपनियां मिलकर रक्षा जरूरतों को पूरा करेंगी। इससे विदेशी कंपनियों को डॉलर में भुगतान का दबाव कम होता जाएगा। बीमा क्षेत्र में तेजी आएगी। लाखों नौकरियों का आगाज होगा। बीमा क्षेत्र सुधार के चरण में जाएगा और इन दोनों ही स्थितियों से रूपए को मजबूती मिलेगी। रूपए की यह मजबूती र्इंधन तेल में जारी सब्सिडी को कम करने में थोड़ा मदद देगी और अर्थव्यवस्था को आगे बढऩे का धक्का लगने की उम्मीद जगेगी। ऐसा होते ही अर्थव्यवस्था के विकास का पहिया घूम सकता है।

अरूण जेटली ने वास्तव में बाजीगरी की है। बड़ा दांव लगाया है। मंहगाई के बोझ से दोहरे हो रहे मध्यम वर्ग को राहत दे दी है। वह आयकर की सीमा को 2 बढ़ाकर दो लाख पचास हजार तक ले गए। राष्ट्रीय बचत कम हो रही थी। इसे ठीक करने का इंतजाम किया। भविष्य निधि का दायरा एक लाख से बढ़ाकर 1.5 लाख रूपए कर दिया। होम लोन में थोड़ा सा राहत देने का इंतजाम कर गए। होम लोन देने वालों के लिए छूट की सीमा में राहत दे दी है। इस तरह से मध्यमवर्ग को उन्होंने कम से कम सालाना 16 हजार रूपए से 36 हजार तक बचाने का प्रावधान कर दिया है।

जेटली ने बजट में खाद्य और खाद (उर्वरक) की सब्सिडी को नहीं छुआ है। किरोसिन पर सब्सिडी जारी रहने का अनुमान है। डीजल अभी बाजार के हवाले नहीं हुआ है। पेट्रोल पर जारी सब्सिडी को उन्होंने 25 प्रतिशत तक कम करने का प्रावधान किया है। इस तरह से वह कहीं न कहीं हाथ बंधे होने के बावजूद जनता के साथ खड़े नजर आए हैं। बजट में गैर-योजना व्यय 12,19, 892 करोड़ रूपए रहने का अनुमान है। सकल कर प्राप्ति 13, 16, 524 करोड़ रूपए, कुल व्यय 17,94, 892 करोड़ रूपए रहने आंकलन किया है। सकल घरेलू उत्पाद की तुलना में राजस्व घाटा 2.9 रहने की आशंका जताई है। जेटली ने बजट भाषण में साफ कहा कि जरूरी वस्तुओं के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराते समय वित्तीय घाटे को कम करने से ध्यान नहीं बंटाया जा सकता।

2014-15 के बजट में 5,75,000 करोड़ रूपए का योजना आवंटन किया गया है। यह 2013-14 से 26.9 प्रतिशत अधिक है। इसके बारे में वित्त मंत्री ने कहा है कि कृषि, स्वास्थ्य एवं शिक्षा में क्षमता बढ़ाने, ग्रामीण सड़कों और राष्ट्रीय राजमार्ग बुनियादी ढांचा, रेल नेटवर्क, स्वच्छ जल, उर्जा, नदी संरक्षण योजनाओं को पूरा करने के लिए योजना आवंटन में वृद्धि की गई है। वित्त वर्ष 2014-15 में पूर्वोत्तर विकास के लिए 53, 706, महिलाओं के लिए 98,030 बच्चों के कल्याण के लिए 81, 075 रूपए का प्रावधान किया गया है।

रक्षा बजट

वित्त मंत्री ने साफ कहा कि देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। इसलिए रक्षा क्षेत्र के लिए 2,29,000 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। यह यूपीए सरकार द्वारा फरवरी 2014 में पेश अंतरिम बजट के प्रोजेक्शन 2.23 लाख करोड़ से पांच हजार करोड़ रूपए अधिक है। इसका उपयोग सरकार सैन्य आधुनिकीकरण को गति देने के लिए करेगी और रक्षा साजो सामान की खरीद में 94,587 हजार करोड़ रूपए खर्च किए जा सकते हैं। इस साल सरकार को वायुसेना के लिए करीब 20 अरब डॉलर के 126 मध्यम बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमानों के सौदे को अंतिम रूप देना है। 22 अपाचे युद्धक हेलीकाप्टर (अमेरीकन मरींस ने पाकिस्तान के ऐबटाबाद में ओसामा बिन लादेन को मारने में इसका प्रयोग किया था।), भारी सामान, टैंक, सैन्य टुकड़ी ढोने में सक्षम 15 चिन्हुक हेलीकॉप्टर सौदे को हरी झंडी देनी है। सेना की इंफैंट्री, आर्टिलरी को धार देना है। चीन की सीमा पर सैन्य बलों की स्थिति मजबूत करनी है और नौसेना तथा सेना के आधुनिकीकरण पर खासा ध्यान देना है। भूतपूर्व सैनिकों की पेंशन संबंधी शिकायत और अनियमितता को दूर करने के लिए 1000 हजार करोड़ रूपए का प्रावधान किया है।

शहीदों को सलाम

इसे अरूण जेटली के खाते में आई उपलब्धि कहा जा सकता है। देश में शहीदों का कोई युद्ध स्मारक नहीं है। इंडिया गेट अंग्रेजों द्वारा बनाया हुआ है। इसे द्वितीय विश्वयुद्ध में शहीद हुए सैनिकों की याद में बनवाया गया था और यहीं अमर जवान ज्योति पर हम 1965, 71 और कारगिल संघर्ष में शहीद हुए सैनिकों की शहादत याद करते हैं। लेकिन मौजूदा बजट में इंडिया गेट के नजदीक प्रिंस पार्क में अब 100 करोड़ रूपए की लागत से युद्ध स्मारक बनेगा। सैन्य बल दशकों से इसकी मांग कर रहे थे।

नमामि गंगे

देश की एक बड़ी आबादी को जीवन और जीवन की सभ्यता का नया दर्शन देने वाली गंगा को अब सरकार ने दृढ़ता के साथ स्वच्छ रखने का संकल्प लिया है। इसके लिए मौजूदा बजट में 2037 करोड़ रूपए का प्रावधान किया है। धन का संकट आड़े न आए इसे ध्यान में रखते हुए एनआरआई निधि की स्थापना की और केदारनाथ, हरिद्वार, कानपुर, वाराणसी, इलाहाबाद, पटना, दिल्ली में नदियों के किनारे घाटों के सौंदर्यीकरण के लिए 100 करोड़ रूपए का प्रावधान किया है।

रंजना

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