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सुनिए हाले दिल

अमूमन 30-35 साल के युवाओं को हार्ट अटैक होने के खबर जैसे ही नजर के सामने से गुजरती हैए कोई अपने को चाहे कितना भी स्वस्थ महसूस कर रहा हो, दिल धक से रह जाता है। अब ऐसी खबरें तो रोज ब रोज सामने आने लगी हैं। लगता है जैसे हम छाती के अंदर दिल नहीं बल्कि बम लेकर चल रहे हों। लगातार बदलती जीवन शैली ने हमें हार्ट अटैक के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। हार्ट अटैक की चिंता सर्व व्यापी हो गई है। स्थिति यह आ गई है कि अब डॉक्टर नसीहत देने लगे हैं कि दिल को महफूज रखना है तो उसकी चिंता स्कूल में पढ़ाई शुरु करने के साथ ही शुरु कर देनी चाहिए। वैसे भी हम भारतीयों के शरीर की जीन संरचना ऐसी है कि पश्चिमी देशों के मुकाबले हमारे दिल की राहें 10 वर्ष पहले से ही कठिन शुरु होनी शुरु हो जाती हैं। इसलिए अब बहुत जरुरी हो गया है कि हम चेतावनी के उन संकेतों को अच्छी तरह से आत्मसात कर लें ताकि जब हार्ट अटैक की घटना घटे तो तत्काल अस्पताल पहुंच कर जान सुरक्षित कर लेने में जरा भी समय जाया न हो। हार्ट अटैक होने पर एक.एक मिनट कीमती होता है। हार्ट अटैक होने के पहले घंटे को इसीलिए डॉक्टरी भाषा में गोल्डन आवर के नाम से पुकारा जाता है।

हार्ट अटैक की चिंता बहुत से सवालों को जन्म देती है जो अब हमें हर समय चुभती रहती है। मसलन, छाती में दर्द हो जाए तो क्या समझें, कैसे समझें कि यह दर्द गैस यादि कारणों से है या हार्ट अटैक की वजह से है?छाती में जलन हो तो क्या वह भी हार्ट अटैक का लक्षण हो सकता है? क्या हार्ट अटैक के पहले छाती में दर्द उठना जरुरी है? हार्ट अटैक की नौबत न आए उसके लिए क्या किया जाए? हार्ट अटैक हो ही जाए तो सबसे पहले क्या करें?हार्ट को लेकर सवालों की एक पूरी पोटली साथ लेकर हम चलते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सवाल हमें चुभते रहते हैं यह एक अच्छा लक्षण भी है। इसका अर्थ है लोगों में दिल के रोग से बचने की चेतना भी फैल रही है। हम यह चिंता भी करने लगे हैं कि हम क्या खाएं कि दिल स्वस्थ बना रहे। बैड कोलेस्ट्रॉल से कैसे बचें? गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने के लिए क्या जतन करें? कोलेस्ट्रॉल फिट रहने के लिए वे कौन सी खाने की चीजें हैं जिनसे दूर रहें?नमक कितना खाएं? तेल कितना खाएं? कौन-सा तेल खाएं? और न जाने कितने सवाल हैं जिनसे हमें दो-चार होना पड़ रहा है। बढ़ते तनाव के साथ साथ मोटापा और मधुमेह दिल पर बड़े जोखिम कारक के रूप में मंडराने लगे हैं। भारत मधुमेह की राजधानी के रूप में कुख्यात होने लगी है। बच्चों तक पर चर्बी का बोझ बढ़ रहा है। अब यह बात भी पूरी तरह साबित हो चुकी है कि हाले दिल और हमारे सेक्स जीवन के बीच सीधा रिश्ता है। नामर्दगी की शुरुआत दिल पर उत्पन्न खतरे का भी संकेत (वार्निंग सिग्नलद्ध) है। विशेषज्ञों के अनुसार नामर्दगी की शुरुआत का सीधा मतलब है कुछ ही सालों बाद दिल भी जबाव देने लगेगा।

जाने माने हार्ट सर्जन और गुडग़ांव स्थित अत्याधुनिक मल्टीस्पेशियैलिटी अस्पताल मेडांटा मेडिसिटी के प्रबंध निदेशक डॉ. नरेश त्रेहन कहते हैं. तनाव बढ़ रहे हैंए लोग बैठे ठाले रहने लगे हैं, व्यायाम करने की फुर्सत नहीं लोगों में इसलिए युवा वस्था से ही दिल की चिंता शुरु हो जानी चाहिए, स्कूल के समय से ही खाने पीने की आदतों को लेकर सचेत हो जाएं तो बेहतर होगा। भोजन में तेल व वसा की जितनी सीमित मात्रा लेंगे बदलती जीवन शैली के बीच हम हार्ट अटैक की स्थति को उतना ही टाल पाने में समर्थ हो सकेंगे। वे कहते है. यह तो हुई आम लोगों की बात लेकिन जिनके घर में दिल के रोग का पारिवारिक इतिहास हो, आप मोटापे, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसे उच्च जोखिम कारक वाली श्रेणी में शुमार हों तो हार्ट अटैक को टालने के लिए दिल का चेक अप कराते रहना ही एकमात्र रास्ता है।

एस्कॉर्ट फोर्टिस में कॉर्डियोलॉजी विभाग के चेयरमैन एवं स्टेंट से दिल की बंद नली खोलने की तकनीक एंजियोप्लास्टी के जाने माने विशेषज्ञ डॉ. अशोक सेठ कहते हैंए हार्ट अटैक के शिकार जितने युवा हमारे पास पहुंचते हैं, उनमें अधिकांश सिगरेट पीने के आदी मिलते हैं, इसलिए स्मोकिंग हार्ट अटैक का एक बड़ा जोखिम कारक बन कर सामने आ रहा है। इसलिए दिल को महफूज रखना है तो स्मोकिंग की तो हमारे जीवन में कोई जगह ही नहीं होनी चाहिए। हार्ट के इन तमाम तरह के जोखिमों के बीच घिरे होने की मौजूदा स्थिति के बीच एक खुशी की खबर है कि अगर हम दिल को लेकर सचेत रहें तो अब इलाज इतने प्रभावी और अत्याधुनिक हो गए हैं कि हार्ट अटैक होने पर किसी की जान नहीं जानी चाहिए। एंजियोप्लास्टी और बाइपास कराने के बाद लंबे समय तक जीने वाले लोगों के ढेर सारे उदाहरण भी सामने हैं। हमारे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तक कितनी बार इन विधियों से गुजर चुके हैं। जरुरत है दिल को लेकर सचेत रहने की और समय पर हार्ट अटैक जैसी दुर्घटना को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने की।

मेट्रो मैन यानी श्रीधरन का बाइपास करने वाले वैशाली स्थित अत्याधुनिक अस्पताल पुष्पांजलि क्रॉसले व अपोलो के सर्जन डॉ. गणेश मणि ने हार्ट रोग से बचने के लिए अंग्रेजी के अक्षर एस का एक फार्मूला बना रखा है। वे कहते हैं,कोई भी इन एस फैक्टर को ध्यान में रखे और उनसे बचे तो बेशक हार्ट अटैक जैसी घटना से बच सकता है। पहला एस फैक्टर है स्मोकिंग, इससे तो एकदम दूर रहना चाहिए। दूसरा सॉल्ट यानी आदमी नमक का कम सेवन कम रखेए सुगर (चीनी) का सेवन कम कम से कम करे स्ट्रेस (तनाव) को दूर रखे और अंत में सेडेंटरी हैबिट (बैठे ठाले रहने की आदत) छोड़े तो हार्ट को महफूज रख सकते हैं।

ऐसे समझें दिल पर खतरे मंडराने के संकेत
कैसे पता चले कि दिल दुरुस्त है? यह आज हर आदमी के मन का सवाल बन गया है। हर कोई चाहता है कि कोई यह पूरा भरोसा दिला दे कि उसका दिल दुरुस्त है। लेकिन कैसे पता चले कि दिल दुरुस्त है। मैट्रो मैन श्रीधरण के हार्ट सर्जन डॉ. गणेश मणि तो कहते हैं कि व्यायाम और टहलना दिल के दुरुस्त करने के लिए तो जरुरी है ही यह एक जांच भी है । ब्रिस्क वाकिंग (तेज टहलने) के क्रम में भी यह पता चल जाता है कि हार्ट में कुछ गड़बड़ है और डॉक्टर से भी मिल लेना चाहिए।

इन ऊपर उद्धृत तमाम विशेषज्ञों से विस्तृत बातचीत के आधार हम यहां क्लू दे रहे हैं जिससे आम लोगों को (हाई रिस्क) यह समझ में आ सके कि हार्ट पर खतरा मंडराने लगा है।

दिल की स्थिति जानने के लिए वैसे तो कई टेस्ट हैं लेकिन पैदल चलने या सीढ़ी चढऩे के दौरान सामने आने वाले संकेत दिल को लेकर खतरे की घंटी बजाते हैं । अगर दो किलोमीटर पैदल चलने के दौरान या दो मंजिल की सीढ़ी चलने पर सांस न फूले या छाती में दर्द न उठे तो समझ सकते हैं कि हार्ट दुरुस्त है। सहवास के दौरान सांसे फूलना भी दिल का मरीज होने का संकेत है।

दिल तक पर्याप्त खून न पहुंचने लगे तो छाती में दर्द होता है या सांस फूलने लगती है। इसे एंजाइना कहते हैं। डॉ. अशोक सेठ कहते हैं, चलने पर छाती के बीचोबीच भारीपन लगे और खड़ा हो जाने पर वह ठीक हो जाए तो यह दिल पर खतरे का पहला संकेत होता है । ब्रिस्क वाकिंग या सीढ़ी चढऩे के समय दिल में कोई बेचैनी या पसीने पसीने हो जाना अच्छा संकेत नहीं है।
ोने तक जान बची रहे।

कैसे हो पहचान हार्ट अटैक की
अगर आराम की स्थित में भी छाती का दर्द या भारीपन दूर न हो, आदमी पसीना.पसीना हो रहा होए सांस लेने में दिक्कत हो रही हो तो ये हार्ट अटैक के लक्षण हो सकते हैं । डॉ.नरेश त्रेहन कहते हैं, ऐसे लक्षण हों तो 15 मिनट में पता चल सकता है कि ये लक्षण हार्ट अटैक के हैं या नहीं। ईसीजी यानी इकोकार्डियोग्राम एवं कुछ बल्ड टेस्ट कराने के बाद डॉक्टर यह बखूबी समझ लेता है कि लक्षण हार्ट अटैक के हैं, दूसरे किसी कारण से ऐसा हो रहा है। डॉ. अशोक सेठ कहते हैं, ऐसे लक्षण सामने आएं तो ईको कराने के पहले भी 150 एमजी या 300 एमजी की एक गोली जरूर मुंह में ले लें ताकि अस्पताल पहुंचने एवं वहां इलाज शुरु होने तक जान बची रहे।
चलने पर छाती के बीचोबीच भारीपन लगे और खड़ा हो जाने पर वह ठीक हो जाए तो यह दिल पर खतरे का पहला संकेत होता है ।
डॉ.अशोक सेठ
भोजन में तेल व वसा की जितनी सीमित मात्रा लेंगे बदलती जीवन शैली के बीच हम हार्ट अटैक की स्थिति को उतना ही टाल पाने में समर्थ हो सकेंगे ।
डॉ.नरेश त्रेहान
दिल को कोई वार्निंग सिग्नल सामने आए तो डॉक्टर से मिलने में जरा भी देरी नहीं करनी चाहिए।
डॉ. पुरूषोत्तम लाल

 

धनंजय कुमार

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