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गहलोत बनाम वसुंधरा यात्रा

थान विधानसभा चुनाव में अभी छह माह बाकी हैंए लेकिन सत्तारूढ़ कांग्रेस व प्रमुख विपक्षी दल भाजपा ने आने वाले चुनाव में जीत कर प्रदेश की सत्ता पर कब्जा करने के लिए जोर आजमाइश शुरू कर दी है। दोनों ही दल यात्राओं के जरिए जनता के पास जा रहे हैं और अपना.अपना बिगुल बजा रहे हैं। कांग्रेस जहां अपनी सरकार की प्रमुख उपलब्धियों को लेकर संदेश यात्रा निकाल रही है और विकास के काम गिना रही है वहीं भाजपा सुराज संकल्प यात्रा कर सरकार की नाकामियों को गिनाकर कांग्रेस को निशाना बना रही है। दोनों ही यात्राओं में एक तरह से शब्द युद्ध छिड़ा हुआ है। कांग्रेस की संदेश यात्रा में कुछ कहा जाता है तो वहीं दूसरी ओर वसुंधरा अपनी यात्रा में गहलोत द्वारा कही गई बातों पर कटाक्ष कर जनता को अपने पक्ष में लेने में लगी रहती हैं।

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वसुंधरा राजे के चुनावी प्रचार अभियान का नाम है सुराज संकल्प यात्रा। राजे इस अभियान के जरिए राज्य में 13ए800 किमी की यात्रा कर पूरे 200 विधानसभा क्षेत्रों में 412 सभाएं कर सुराज स्थापित करने के लिए चुनावी बिगुल फूंक रही हैं। यात्रा 4 अप्रैल से उदयपुर संभाग के धार्मिक स्थान चारभुजा से प्रारंभ हो चुकी हैए जो अब तक 30 से अधिक क्षेत्रों में राज्य की जनता से रूबरू हो चुकी है। इसका समापन 21 जुलाई को जयपुर में होगा।

राजे की सुराज संकल्प यात्रा की घोषणा ने राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित समूचे कांगे्रस खेमे को बेचैन कर दिया था। और इसी के चलते गहलोत ने अपनी संदेश यात्रा राजे की सुराज संकल्प यात्रा से पहले 30 मार्च को राजस्थान दिवस के अवसर पर निकालकर पहल कर दी। कांग्रेस की संदेश यात्रा का पहला चरण तीस मार्च को जयपुर से रवाना होकर पूर्वी राजस्थान से शुरू हुआ थाए जहां कांग्रेस को पिछली बार काफी सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था। दौसाए करौलीए सवाई माधोपुर जैसे जिलों में अधिकांश सीटों पर भाजपाए बसपा का कब्जा रहा था। इसके बाद हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर और जयपुर देहात व अलवर जिलों में संदेश यात्रा निकल रही है। इन दोनों जिलों में संदेश यात्रा का समापन 15 अप्रैल को आमेर में जनसभा से हुआ। संदेश यात्रा का समापन 30 जून को होगा।

वसुंधरा ने अपनी यात्रा के दौरान जितनी भी जनसभाएं कींए उनमें अपनी सभाओं में कांग्रेस सरकार को जमकर कोसते हुए सबसे ज्यादा निशाना मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर साधा। अब तक मुख्यमंत्री गहलोत अपनी सभाओं में वसुंधरा राजे पर भ्रष्टाचार के मामलों में सबसे ज्यादा प्रहार करते थे। पर इस बार वसुंधरा ने उन्हीं की रणनीति अपनाते हुए गहलोत पर हमले बोले हैं। वो चाहे उनके होटल के कारोबार के हों या फिर जलमहल लीज मामला या फिर जोधपुर में अपने रिश्तेदारों को खान आवंटन को आरोप हो। वसुंधरा अपने भाषणों में जनता को यह बताना चाह रही है कि गांधीवादी छवि का दावा करने वाले मुख्यमंत्री अपने पद के बूते जमकर भ्रष्टाचार फैला रहे हैं।

संदेश यात्रा में यह है कमियां
बड़े नेता एक साथ नहीं कांग्रेस की संदेश यात्रा में एक कमी जो उन्हें नुकसान पहुंचा रही है वह है यात्रा में मुख्यमंत्री अशोक गहलोतए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चन्द्रभान व प्रदेश प्रभारी मुकुल वासनिक लीड कर रहे हैंए जबकि प्रदेश के अन्य प्रमुख नेता सीपी जोशीए गिरिजा व्यासए नारायण सिंहए बीडी कल्लाए शीशराम ओलाए सचिन पायलटए जितेन्द्र सिंह सामूहिक रूप से शामिल नहीं हैं। ये केवल अपने जिले तक ही सीमित होकर रह गए हैंए जिससे पार्टी में एकजुटता का संदेश नहीं जा रहा है और जनता के सामने फूट नजर आ रही है। कांग्रेस ने यात्रा तो शुरू कर दीए उसके लिए एक बस का भी इंतजाम कर दिया मगर उस बस के बजाय नेता अपनी गाडि़यों से जनसभा के स्थान पर अलग.अलग पहुंच रहे हैं। जबकि वसुंधरा की सुराज संकल्प यात्रा में वह एक बस में अन्य नेताओं के साथ घूम रही हैं।

जनता से दूरी

संदेश यात्रा कांग्रेस की सरकारी यात्रा बन कर रह गई हैए जिससे भीड़ भी पूरी तरह प्रायोजित लग रही है। इसमें कांग्रेस के नेता ाी जनता व पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलने के बजाय दूरी बनाए रख रहे हैंए जिससे कई बार लोग स्वागत या ज्ञापन देने की कोशिश करते हंै तो वह हो नहीं पाता है। इससे लोगों में कांग्रेस के प्रति नकारात्मक संदेश जा रहा है।

स्थानीय नेताओं में गुटबाजी

संदेश यात्रा में हर विधानसभा क्षेत्र में स्थानीय नेताओं की गुटबाजी सामने आने लग गई है। प्रदेश कांग्रेस की ओर से जिस नेता को यात्रा की जिम्मेदारी दी जाती हैए बाकी नेता उसकी कारसेवा में लग जाते हैं और यात्रा को फेल करने की कोशिश शुरू कर देते हैं।

लुभावने भाषण नहीं

कांग्रेस के नेताओं के पास यात्रा में भाषण देने वाले अच्छे वक्ताओं की कमी हैए जो जनता को ज्यादा देर तक सभा में बांधे नहीं रख सकती है। इससे जनता ऊबने लगी है और जो नेता भाषण देते हैंए वो लगभग एक जैसे ही होते हैंए कोई नई रूपता नहीं होती है। जबकी वसुंधरा की यात्रा में उसके आकर्षण और उसके लच्छेदार भाषण की वजह से भीड़ उमड़ रही है।

यह हैं फायदे

एंटी इनकंबैंसी का माहौल कम होगा। कांग्रेस ने भाजपा की सुराज यात्रा से पहले अपनी संदेश यात्रा शुरू कर दीए इसका पार्टी को फायदा भी मिलेगा क्यों कि भाजपा की यात्रा में जहां वसुंधरा सरकार के खिलाफ माहौल बना रही हैं वहीं गहलोत उनके आरोपों का मुंहतोड जवाब दे रहे हैं जिससे जनता में एंटी इनकंबैंसी का माहौल कम हो रहा है और संदेश यात्रा शुरू कर दीए इसका पार्टी को फायदा भी मिलेगा क्यों कि भाजपा की यात्रा में जहां वसुंधरा सरकार के खिलाफ माहौल बना रही हैं वहीं गहलोत उनके आरोपों का मुंहतोड जवाब दे रहे हैं जिससे जनता में एंटी इनकंबैंसी का माहौल कम हो रहा है और भाजपा को ज्यादा जोर लगाना पड़ रहा है।

सफलताएं बताने से फायदा

कांग्रेस जनता में चुनाव से छह माह पूर्व ही जाकर जनता को यह बता रही है कि हमने आपके लिए चार साल में यह विकास के काम किए हैंए चाहे मुफ्त दवा हो या जांचए दस लाख गरीबों को मकानए बीपीएल को एक रूपए किलो आटा हो या अन्य फ्लेगशिप योजनाएंए सरकार इन सबको आधार बता रही है। सबसे बड़ा काम रिफाइनरी का किया जिससे पश्चिमी राजस्थान में जबर्दस्त बदलाव आने की बात कही जा रही है। संदेश यात्रा से कांग्रेस इन सब बातों को जनता के सामने रख रही हैए जिससे जनता को भी आकलन करने में मदद मिलेगी।

प्रत्याशियों के चयन में मदद

संदेश यात्रा से कांग्रेस को विधानससभा चुनाव में अपने उम्मीदवारों की क्षमताओं का आंकलन करने में मदद मिल रही है। कांग्रेस ने नेताओं को कह दिया है कि जो ज्यादा भीड़ लाएगाए उसे चुनाव में फायदा मिलेगा। मतलब साफ है टिकट की संभावनाएं बढे़ंगी। इस वजह से गंभीर उम्मीदवार नेता के सामने अपने नंबर बढ़वाना चाहता हैए इससे कांग्रेस को चुनाव में जबर्दस्त फायदा मिलेगा।

वसुंधरा की यात्रा की ताकत

वसुंधरा राजे ने दस साल पहले राजस्थान में परिवर्तन यात्रा की थी तो उसके बाद हुए विधानससभा चुनाव में भाजपा को पहली बार स्पष्ट बहुमत मिला था और उसने दो सौ में से 120 सीटों पर कब्जा करके कांग्रेस को मात्र 56 सीटों पर सिमटा दिया थाए उस यात्रा में राजे को जनता का जोरदार समर्थन मिला था खासकर महिलाओं का। सभाओं में उमडऩे वाली भीड़ वोटों में तब्दील हो गई थी।

द्यइस बार भी अब तक की करीब तीन दर्जन सभाओं में राजे को जनता का समर्थन मिल रहा है। और साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या इस बार भी वसुंधरा अपना पुराना करिश्मा दोहरा पाएगी।वसुंधरा की सुराज संकल्प यात्रा की सबसे बड़ी ताकत है कि सभाओं में लोगों की कमी नहीं दिखने से भाजपा को माहौल बनाने में मदद मिल रही है। इससे पूरे प्रदेश में यह मैसेज जा रहा है कि सुराज यात्रा में भाजपा कार्यकर्ता पूरी तरह वसुंधरा के साथ हंै और उनकी सभाआें को सफल बनाने में एकजुट दिख रहे हंै।

राजे की सभाओं में महिलाओं की भीड़ ज्यादा है और जब घर की महिला यदि राजे के साथ आ गई तो पूरा परिवार साथ हो जाता है और राजे को इसका फायदा मिलेगा।

राजे अपने भाषण में हर जिले और विधानसभी क्षेत्र के स्थानीय मुद्दों को छू रही हैए जिससे उन्हें स्थानीय जनता का समर्थन मिलता है और वह भाषण में भी जमकर वाहवाही लूटती है। स्थानीय मुद्दे छूने से लोग उन्हें अपने साथ पाते हंै।

द्यवसुंधरा को सीएम प्रोजेक्ट करने के बाद सभी विधायकों और चुनाव लडऩे के इच्छुक नेताओं को यह पता है कि टिकट राजे ही देगी। इसलिए सभी नेता उनके साथ हाथ से हाथ मिलाकर चल रहे हंै और भीड़ जुटाने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हंै।

कुछ नेता साथ नहीं

राजे की सुराज संकल्प यात्रा में रामदास अग्रवालए घनश्याम तिवाडीए देवी सिंह भाटी और सत्यनारायण गुप्ता साथ नहीं है और वे राजे से नाराज चल रहे हैंए जिससे राजनीतिक माहौल में यह संकेत जा रहे हैं कि यह नेता राजे को सत्ता की कुर्सी तक पहुंचने में बाधा बन सकते हैं। जैसा पिछली बार किरोडीलाल मीणा ने भाजपा को नुकसान पहुंचाया था।

प्रदेश के दोनों ही प्रमुख दल की यात्राएं निकल रही हैंए दोनों ही यात्राओं में वन मेन शो का नजारा दिखाई दे रहा है। भीड़ दोनों ही यात्राओं में जुट रही हैए फिर भी कांग्रेस की तुलना में वसुंधरा की यात्रा में जनता ज्यादा उमड़ रही है। इसकी वजह यह भी मानी जा सकती है कि लोगों में वसुंधरा का आकर्षण और उनकी वाकपटुता गहलोत से अधिक है। अब यह भीड़ वोट में तब्दील होती है या नहीं यह तो चुनावी नतीजे ही बता पाएंगे।

गहलोत और राजे के व्यक्तित्व में समानता

दोनों नेताओं में जबर्दस्त नेतृत्व क्षमता
द्यप्रदेश की राजनीतिक स्थितियों से पूरी तरह वाकिफए एक दूसरे की क्षमताओं के जानकारए कुशल रणनीतिकारए हर विधानसभा क्षेत्र तक पहुंचए मुद्दों की समझए वोट ट्रांसफर करने की क्षमताए चुनाव के सारे दांवपेचों से वाकिफ। भाषण में क्या कहना है और जनता क्या समझती है उसका पूरा ज्ञान दोनों को है।

अंतर

द्यवसुंधरा राजनेता के साथ कुशल प्रशासक भी हैए मगर गहलोत की प्रशासनिक क्षमताओं पर सवालए लेकिन राजनेता की छवि में गहलोत भारी।

राजे की छवि गहलोत के मुकाबले कमजोरए भ्रष्टाचार के आरोपों के घेरे में।

भाषण देने में राजे प्रभावशालीए गहलोत कमजोरए ज्यादा आक्रामक नहीं हो पाते गहलोत।

गहलोत को विकास योजनाओं पर भरोसाए मगर विधायकों की स्थिति कमजोरए मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप।

 

वाक् युद्ध की यात्रा

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