ब्रेकिंग न्यूज़ 

मायूस अम्बिका

सोनिया गांधी की विश्वासपात्र अम्बिका सोनी कुछ समय पहले केन्द्र सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्री थीं। आगामी लोकसभा चुनाव में संगठन में सोनिया गांधी का हाथ बढाने के लिए उन्होने मंत्री पद से इस्तीफा दे दियाए पर दिन बीतते बीतते महीने बीत गए। अभी भी कांग्रेस संगठन में अपने पुराने महामंत्री के पद पर नियुक्ति के इंतजार में बैठी हैं। संगठन में फेरबदल हुआ नहीं और जब होगा यदि राहुल गांधी की युवा टीम संगठन संभालती है तो पुराने लोगों पर भारी पड़ेगी।

उधर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने एक व्यक्ति को एक पद पर बने रहने की बात कहीए पर वह स्वयं मंत्री के साथ.साथ पार्टी में महामंत्री हैं। अगर वह किसी एक पद से इस्तीफाा देकर यह बात कहते तभी उनकी बात में

वजन और साफगोई होती। हालांकि अम्बिका को अभी कर्नाटक विधानसभा युनाव की चयन समिति में रखा गया था लेकिन उनका इंजजार कब खत्म होगा
कहां हैं प्रमोद तिवारी ?
लगभग तीन दशक तक उ. प्र. कांग्रेस पर अपना दबदबा बनाए रखने वाले भारी भरकम नेता प्रमोद तिवारी अब दिखाई नहीं दे रहे। हालांकि कई प्रदेश अध्यक्षों से उनकी अनबन हुई, लेकिन तब भी उनका वजन कभी कम नहीं हुआ। यहां तक कि निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष रीता जोशी से 36 का आंकड़ा होने पर भी वह उन पर न केवल इलाहाबाद की राजनीति में, बल्कि प्रदेश की राजनीति में भारी पड़ते रहे। विधान मंडल में इतने लम्बे समय तक कांग्रेस पार्टी का नेता शायद ही कोई रहा हो। इस पद से हटाने के बाद हाई कमान की लम्बी प्रतिक्षाए कांग्रेस का भारी न पड़ जाये। तिवारी को राजनीतिक पार्टियां न्योतने में लग गयी हैं। ब्राह्मण होने के साथ-साथ उनकी गिनती राजनैतिक माहिरों में होती है।
तिवारी के समर्थक उग्र होने लगे हैं और कहते सुने गये हैं कि तिवारी जैसे वफादार कांग्रेसी को बाहर रखा जा रहा है जब कि रीता बहुगुणा, जगदम्बिका पाल जैसे पूर्व प्रदेश अध्यक्ष पार्टी को धोखा दे चुके हैं और मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष निर्मल खत्री, मायावती और मुलायम सिंह के आगे बौने पड़ रहे हैं।
कोमा में जा रही उ.प्र.कांग्रेस
2012 के विधान सभा चुनाव में बुरी तरह परास्त होने के बाद से ही उण्प्रण् कांग्रेस को लकवा मार गया। हार का ठीकरा सर पर लेकर रीता जोशी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर घर बैंठ गयी थी और नया अध्यक्ष पांच माह बाद बना। इस तरह से पार्टी पांच माह तक सुस्त पड़ी रही। निर्मल खत्री के 6 माह पहले अध्यक्ष बनने के तुरंत बाद 8 जोनल उपाध्यक्ष बनाये गये जो खत्री को ग्रहण की तरह ग्रसित करते गये।
हुआ यूं कि 8 जोनल अध्यक्ष हाई कमान की मर्जी से बनाये गये और उन्हें प्रदेश अध्यक्ष से दूर रखा गया। उनमें से तीन रशीद मसूदए अनुग्रह नारायण सिंह और पाल दूसरी पार्टिओं से कांग्रेस में आये थे। पुनिया बतौर आईण् एण् एसण् अधिकारी मुलायम सिंह एवं मायावती के खास चहेते रहे हैं। इन सभी को कांग्रेस संगठन का कोई अनुभव नहीं था। आरण् पीण् एनण् सिंह और जितिन प्रसाद केन्द्रीय मंत्री होने के कारण लोकसभा भंग होने के डर से अपना काम निपटाने में लगे रहे। वे अपने क्षत्रों में व्यस्त रहे।
अत:ये पांच माह भी कांग्रेस सन्निपात में पड़ी रही। प्रदेश के अधिकांश वफादार वरिष्ठ नेता काना फूसी कर रहे हैं। कहते हैं बहुत देर हो गई “बाबा” अब तो जागें और अपनों पर भरोसा करें। लकवे से पीडि़त कांग्रेस को कोमा में जाने से बचाएं।

 

श्रीकान्त शर्मा

продвижение сайтов по ключевым словамкурсы информационной безопасности

Leave a Reply

Your email address will not be published.