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कांग्रेस-सपा का छद्म युद्ध
कांग्रेसनीत यूपीए अभी नए सहयोगी जोडऩे में व्यस्त है। जब भी आप नए दोस्त बनाते हैंए तो दोनों आपस में कुछ न कुछ आदान-प्रदान करते ही है। ऐसा ही कुछ कांग्रेस और सपा में भी हो रहा हैए भले ही ऊपर से देखने में यह एक बेमेल जोड़ जैसा दिखता हो। उदाहरण के लिए मुलायम ने कांग्रेस को धोखेबाज बताया तो उसी विनम्रता के साथ बेनी प्रसाद के बयान के रूप में कांग्रेस ने भी मुलायम को धोखेबाज करार दे दिया। मुलायम ने कांग्रेस को धोखेबाज कहा क्योंकि 60 साल के इस्लामी धर्मनिरपेक्षता के बाद भी मुसलमान पिछड़े हुए ही हैं। दूसरी ओर मुलायम पर धोखेबाज होने का आरोप इसलिए लग रहा है कि उन्होंने देश के पवित्रतम स्थान बाबरी मस्जिद को बचाने के लिए कुछेक कारसेवकों को मार गिराने के अलावा और कुछ नहीं किया था। इस प्रकार दोनों ही समान है और उनके गठबंधन में कोई बाधा नहीं है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि उन्हे राजनीतिक तहजीब ही नहीं है। इसलिए कांग्रेसी संस्कृति के अनुसार बेनी प्रसाद ने कहा कि आगामी आम चुनावों में सपा की अंत्येष्टि कर दी जाएगी तो सपा नेता शिवपाल यादव ने बेनी प्रसाद को अफीम तस्करए चरसी और मानसिक रूप से बीमार बता दिया। देखाघ् चूंकि सैटिरीकस एक राजनेता नहीं हैए केवल एक आम आदमी भर ही है और इसलिए वह यह नहीं बता सकता कि गाली देने की कला में कांग्रेस और सपा में अधिक महारथी कौन है। मुलायम ने कहा कि चीन के मामले में कांग्रेस कायरता दिखा रही है। परंतु इससे केवल उनका राजनीतिक तहजीबों का अज्ञान ही प्रदर्शित होता है। हालांकि यह सच है कि चीन शेर की तरह गरजता है तो भारत बिल्ली की तरह मिमियाता हैए पर क्या यह सच नहीं है कि दोनों ही विडाल जाति के ही पशु हैंघ् दोनों में अतर तो केवल राजनीतिक स्तर का है। और अंततरू वेनी को अफीम तस्कर कहना तो मूर्खता ही है। वास्तव में सैटिरीकस यह नहीं समझ पा रहा है कि इस वह बेनी प्रसाद के लिए आरोप समझे या प्रशंसा। इसके अलावा क्या बेनी प्रसाद को तस्करी का कखग भी आता हैए या वे केवल द से दाउद ही समझते हैं। सैटिरीकस उलझन में है।सुपरहिट सोनिया मॉडल
क्या सोनिया.मनमोहन का कांग्रेसी सरकार का मॉडल एक आदर्श सरकार हैघ् यदि सैटिरीकस कांग्रेस का महासचिव होता तो इसका उत्तर अवश्य देता। सौभाग्य से वह कांग्रेस का महासचिव नहीं है क्योंकि उसने देखा कि कांग्रेस के दो महासचिवों का एक ही प्रश्न का उत्तर अलग अलग है। बिल्कुल विपरीत उत्तर देने वाले ये दो महासचिव हैं दिग्विजय और द्विवेदी। महासचिव दिग्विजय सिंह कहते हैंए च्च्यह मॉडल ठीक काम नहीं कर पाया। दो शक्ति केंद्र नहीं होने चाहिए। प्रधानमंत्री को ही सारे अधिकार होने चाहिए।ज्ज् महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने इसके ठीप विपरीत कहाए च्च्कांग्रेस अध्यक्षा और प्रधाममंत्री के बीच एक अनोखापन है। ऐसा पहले कभी नहीं देखा गया और इसे भविष्य के लिए भी एक आदर्श माना जाना चाहिए। अब इसमें सैटिरीकस क्या कह सकता है। उसके मत में दोनों ही सही कारणों से गलत हैं। एक ने तो पिछले 15 सालों से कोई दो शक्ति केंद्र देखा ही नहीं हैए उसे तो केवल एक ही केंद्र पता है और वह है 10 जनपथ। क्या कोई दूसरा भी हैघ् दिमाग पर काफी जोर डालने के बाद उसे याद आया कि हमारे एक प्रधानमंत्री भी हैं और वे सभी सरकारी आदेश देने के लिए अधिकृत व्यक्ति हैं। और यह कि वे उन आदेशों जोकि 10 जनपथ से निकलते हैं और पीएमओ होते हुए उन तक पहुंचते हैं पर हस्ताक्षर भर करने का अधिकार रखते हैं। और यह मॉडल वहुत अच्छा काम नहीं कर रहा हैघ् दिग्विजय सिंह को इससे क्यों असंतुष्टि होनी चाहिए जबकि पीएमओ का क्लर्क को भी इससे कोई परेशानी नहीं हैघ् द्विवेदी के लिए सैटिरीकस नामांकित व्यक्ति और उसे नामांकित करने वाले व्यक्ति या सिंहासन पर बैठे व्यक्ति या उसके पीछे खड़े या खड़ी व्यक्ति या महिला के इस संबंध में कोई भी अनोखापन नहीं देख पा रहा। ऐसी स्थिति में सैटिरीकस का मानना है कि राहुल बिल्कुल सही थे जब उन्होंने कहा था कि उनसे यह बात पूछना ही गलत है कि वे प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं या नहीं। मूर्ख सैटिरीकस भी इतना मूर्ख नहीं है कि यदि वह किंगमेकर हो तो वह स्वयं राजा बनने की सोचे। इसलिए मनमोहन सिंह अगले साल भी पीएम पद के प्रत्याशी बने रहेंगे। हो सकता है कि यदि कांग्रेस जीती तो वे प्रधानमंत्री भी बन जाएं। और प्रधानमंत्री के रूप में उनका 10 जनपथ दौडऩा भी चालू रहेगा। बहरहाल उनका 10 जनपथ दौडऩा रूक सकता है यदि राहुल कहीं और रहने लग जाएं।

झबरीला मामला
सैटिरीकस को इस्लाम के बालों संबंधी आग्रह की अच्छी जानकारी है। उसे याद आता है कि कुछ वर्ष पहले पाकिस्तानी संसद में आस्थावान मुसलमानों की दाढ़ी की सही लंबाई पर काफी गरमागरम बहस हुई थी। लेकिन उसे इसका कोई अंदाजा नहीं था कि कम्यूनिज्म में भी बालों की लंबाई और आस्था का कोई कोई संबंध होगा। हाल ही में उसे पता चला है कि कम्यूनिस्ट उत्तरी कोरिया में पूंजीवाद को समाप्त करने के लिए केशसज्जा के 28 विशिष्ट प्रकारों की अनुमति दी गई है जिसके तहत एक युवा के बाल पांच सेंटीमीटर से अधिक नहीं होने चाहिए। यह वास्तव में एक झबरीला मामला है। सैटिरीकस को डर है कि बालों की छठी भयावह सेंटीमीटर लंबाई से कहीं कम्युनिज्म बर्बर पूजीवाद में न बदल जाए।

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