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संस्कृतियों को फिर से जिन्दा करें – मुकेश खन्ना

संस्कृतियों को फिर से जिन्दा करें – मुकेश खन्ना

छोटे और बड़े पर्दे पर अपने भाव-प्रवण अभिनय से एक अलग पहचान बनाने वाले मुकेश खन्ना अपने करियर के ‘थर्ड इनिंग’ के सफर पर हैं। आज भी कई टीवी धारावाहिकों और फिल्मों में उनकी व्यस्तता बनी हुई है। कभी महाभरत के भीष्म पितामह तो कभी शक्तिमान बनकर वह हमेशा सुर्खियों में रहे। उसके अब तक के करियर एवं निजी जिदंगी से जुड़े पहलुओं पर मुंबई के कांदिवली स्थित उनके कार्यालय में लंबी बातचीत की संजय सिन्हा ने। पेश है मुख्य अंश –

14-02-2015

करियर के शुरूआती दिनों के बारे में कुछ बताएं।
बहुत लंबी कहानी है पुत्र (हंसते हुए)। फिल्मी नायक से लेकर महाभारत, शक्तिमान से लेकर नानू, और फिर फिल्मों में चरित्र अभिनय… एक लंबी कहानी है। कह सकते हैं कि ये दास्तां पूरी की पूरी महाभारत है। ये मेरे करियर की ‘थर्ड इनिंग’ है। मैं तीसरी पारी का सफर तय कर रहा हूं। फिल्मी नायक के बाद ‘महाभारत’ ने मुझे भीष्म पितामह बना दिया। इस इमेज को तोडऩे के लिए मैंने बच्चों के लिए धारावाहिक शक्तिमान का निर्माण किया। इसके बाद फिल्म निर्देशकों ने मुझे फिरोज खान से लेकर शाहरूख खान तक का बाप बना दिया। फिलहाल मैं दो कैरेक्टर में जी रहा हूं। एक भीष्म पितामह और दूसरा शक्तिमान। बड़े मेरे पैर छूते हैं और बच्चे मेरी कमीज खींचकर कहते हैं ‘शक्तिमान आ गया’।

इससे आपको परेशानी तो नहीं होती? ऐसा नहीं लगता कि आपका करियर हॉच-पॉच हो गया है?
मुझे कोई परेशानी नहीं होती, बल्कि किसी भी कलाकार के लिए इस तरह की घटनाएं एक उपलब्धि की तरह होती हैं। आज भी कार्यक्रमों में मैं जब जाता हूं तो एनाउंस होता है – बड़ों का पितामह और छोटों का शक्तिमान आ गया। अचानक कोई बुजुर्ग महिला मेरे पास आ जाती है और हाथ जोड़कर खड़ी हो जाती है। कोई पैर छूने लगता है। इस इमेज को तोडऩे के लिए ही मैंने शक्तिमान बनाया, लेकिन भीष्म पितामह के कैरेक्टर ने आज तक मेरा पीछा नहीं छोड़ा। दरअसल मैंने किरदारों को गहराई से जीया है।

इस मुकाम पर पहुंचकर कितना संतुष्ट हैं आप?
संतुष्टि शब्द बहुत छोटा है। इस इंडस्ट्री ने मुझे बहुत कुछ दिया, उम्मीद से भी कहीं अधिक।

मैंने सुना है कि भीष्म पितामह के कैरेक्टर को आपने अपनी निजी जिंदगी में उतार लिया है? क्या ये सच है?
सही सुना है आपने। भीष्म पितामह के किरदार ने मुझे एक प्रेरणा दी। मैं आज भी अविवाहित हूं। शराब को हाथ नहीं लगाता, न पार्टियों में जाता हूं। मुझसे एक बार ऋषि कपूर ने पूछा था कि इंडस्ट्री में रहकर भी आप खुद को इन चीजों से कैसे अलग रख पाते हैं। इस पर मैंने कहा था कि अगर आपकी इच्छाशक्ति मजबूत हो, आपके इरादे अटल हो तो आपको कोई भी हिला नहीं सकता। आज भी मैं लोगों को यही बात कहता हूं। मेरी पर्सनल लाइफ काफी सिंपल है। मैं जिंदगी आपनी शर्तों पर जीता हूं। मुझे कोई मलाल नहीं है।

कहते हैं, कोई भी कलाकार कभी मुकम्मल नहीं होता। वह हमेशा अधूरा ही रहता है। इस पर क्या कहना चाहेंगे आप?
ये बात आमतौर पर हर इंसान पर लागू होती है। कोई भी इंसान कभी मुकम्मल नहीं होता, मगर कलाकारों के साथ एक खास बात होती है। साधारणत: हम कहते हैं कि जो वक्त गुजर गया, वह वापस नहीं आता, मगर कलाकार समय को बांध लेता है। हमलोग समय को फिल्मों के जरिए कैमरे में कैद कर लेते हैं। आपको आज अगर 60 साल पहले जाना हो, तो फिल्मों के जरिए आप वहां तक पहुंच सकते हैं। एक कलाकार की जिंदगी अधूरी तब रहती है, जब उसमें प्रतिभा हो लेकिन उसे कोई प्लेटफॉर्म नहीं मिल पाया। सही प्लेटफॉर्म मिलने के बाद कोई भी प्रतिभावना कलाकार अपना रास्ता बना लेता है।

आपके करियर का कोई ऐसा लम्हा, जिसे भुलाना आपके लिए मुश्किल हो?
एक एक्टर के लिए उसका हर लम्हा यादगार होता है। मैं जब निकलता हूं तो लोग मेरे पैर छूते हैं। मुझसे आशीर्वाद लेते हैं। कोई कहता है कि आपमें भारत की संस्कृति दिखती है। शक्तिमान के बाद कई अभिभावक यह कहते हुए मिल जाते हैं कि बच्चे आपकी बात मानते हैं, हमारी नहीं। आज से लगभग 3 साल पहले मुंबई एयरपोर्ट पर अचानक एक बच्ची मेरे पास आई। मुझे छुआ और मुझसे कहने लगी – अंकल आप शक्तिमान हो न। मैं आपसे बहुत प्यार करती हंू। ‘नानू’ का कैरेक्टर भी काफी यादगार रहा। इन लम्हों को मैं कतई नहीं भूल सकता।

इन दिनों क्या कर रहे हैं?
अभी मैंने कई फिल्में की, जिनमें एक मलचालम फिल्म भी है। मेरा अपना एक प्रोडक्शन हाउस है, भीष्म इंटरनेशनल। इसी बैनर के तले मैं फिल्में बनाता हूं। शक्तिमान-2 की भी तैयारी चल रही है।

वर्तमान राजनीति को लेकर कुछ कहना चाहेंगे?
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश विकास के सोपान चढ़ रहा है। स्थितियां और भी अच्छी होंगी। मैंने भी भाजपा ज्वाइन किया है। मेरा मकसद समाजसेवा है। देश और समाज के लिए कुछ करना चाहता हूं।

लोगों को क्या संदेश देना चाहेंगे?
यही कि लुप्त होती पंरपराओं और संस्कृतियों को फिर से जिंदा करें। खासकर बच्चों से कहना चाहूंगा कि शरीर आपका मंदिर है। इसकी पूजा कीजिए, इससे बड़ी खूबसूरत नियामत और नहीं हो सकती। नशे से दूर रहिए और सबसे बड़ी बात कि जातिवाद से उपर उठकर एक सच्चा नागरिक बनें और देश की सेवा करे।

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