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पृथ्वी को अनुभूत करने का दिवस: पृथ्वी दिवस

ग्लोब कार्यक्रम और पृथ्वी दिवस
पृथ्वी दिवस हमें इस बात का स्मरण कराता है कि हम सभी एक ही ग्रह के निवासी हैं। अतर: हम सभी पृथ्वी का साझा उपयोग करते हैं। पृथ्वी का साझा उपयोग करने का तात्पर्य यह है कि हम इस धरती का जो कुछ भी उपयोग करते हैं व उसे जैसे उपयोग में लाते हैं, उसकी पूरी जिम्मेदारी लेना। आज का यह दिन यह चिंतन करने का है कि हमारे सामने पर्यावरण की क्या चुनौतियों हैं और उनका निराकरण कैसे करना है। अपनी वसुंधरा की रक्षा करना हर एक व्यक्ति व हर एक देश की जिम्मेदारी है। इसका एक माध्यम है पर्यावरण को लाभ पहुंचाने के लिए वैश्विक अध्ययन और अवलोकन कार्यक्रम जिसे संक्षेप में ग्लोब कार्यक्रम भी कहते हैं। इसकी शुरूआत 22 अप्रैल 1995 को हुई थी और 2013 के पृथ्वी दिवस पर इसका अठारहवां स्थापना दिवस मनाया जा रहा है।

इंडियन एनवायरनमेंटल सोसायटी भारत में ग्लोब कार्यक्रम को लागू करती है। यह कार्यक्रम पर्यावरण पर छात्रों द्वारा एकत्रित किए गए आंकड़ों एवं अवलोकनों की सहायता से पर्यावरण को समझने के लिएए छात्रोंए शिक्षकों तथा वैज्ञानिक अनुसंधान समुदाय को परस्पर जोडऩे का कार्य करता है। इस प्रकार से ग्लोब एक ऐसी कार्यशाला के रूप में उभरा है जहां छात्र सही दिशा में व सार्थक प्रयास कर एक पर्यावरणविद् के रूप में स्वयं को विकसित कर सकते हैं। इस कार्यक्रम से जुड़े छात्रों के ज्ञानवर्धन के लिए ग्लोब उन्हें व्यापक शिक्षा सामग्री उपलब्ध कराता है।

अंतराष्ट्रीय स्तर पर पृथ्वी दिवस सबसे बड़ा व सबसे व्यापक तौर पर मनाया जाने वाला पर्यावरण कार्यक्रम है। हमारी पृथ्वी अविश्वसनीय जैव विविधताओं से भरा हमारे सौर मंडल का एक मात्र ग्रह है। इस जैव विविधता के बारे में जानना व इसकी सुरक्षा के लिए कृत संकल्प होना ही पृथ्वी दिवस मनाने का एकमात्र उद्देश्य है।

पहला पृथ्वी दिवस
अमेरिकी सिनेटर गेलॉर्ड नेल्सन ने पृथ्वी दिवस की स्थापना की थी। पृथ्वी दिवस सबसे पहले 22 अप्रैल 1970 को अमेरिका में मनाया गया था। पूरे अमेरिका से विभिन्न समुदायों व स्थानीय स्कूलो के दो करोड़ लोग व हजारों स्थनीय विद्यालय व समुदाय इस आयोजन में शामिल हुए थे। पहले पृथ्वी दिवस के आयोजन पर लोगों का इतनी भारी संख्या में शामिल होने के कारण यह अमेरिका के इतिहास का सबसे बड़ा आयोजन बन गया। पृथ्वी दिवस की सफलता ने अमेरिकी सरकार को पर्यावरण की सुरक्षा लिए कड़े कानून बनाने के लिए बाध्य किया। विभिन्न पुराने कानूनों और पर्यावरणीय व्यवहारों के विरोध में लोगों ने प्रदर्शन किए। ये लोग अमेरीका के प्रशांत उत्तर पश्चिम के एक पुराने जंगल में विकास के पुराने ढांचे का विरोध कर रहे थे।

धरती माता का उत्सव मनाना
पृथ्वी दिवस की भावना से अभिभूत होकर पृथ्वी व इसके पर्यावरण के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए उदयपुर में भारतीय पर्यावरण सोसायटी, भू विज्ञान मंत्रालय, भारत सरकार के साथ मिलकर एक सात दिवसीय कार्यक्रम आयोजित कर रही है। इसमें शामिल होकर पारिस्थितिकी के अनुकूल व्यवस्था में हम पर्यावरण के साथ साहचर्य व सामंजस्य बिठाकर रहने का अभ्यास कराने वाली ढ़ेरों गतिविधियों का गवाह बना जा सकता है।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली का पर्यावरण विभाग भी प्रत्येक वर्ष पर्यावरण दिवस मनाता है। इसमें स्कूली छात्रों को एकत्रित कर उन्हें नुक्कड़ नाटक, क्विज प्रतियोगिता जैसे शैक्षणिक आयोजनों द्वारा पृथ्वी व जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूक किया जाता है। छात्रों को पर्यावरण की रक्षा करने की शपथ दिलाई जाती है।

यहां कुछ ऐसे उपाय बताये जा रहे हैं जिसकी सहायता से आप पृथ्वी का संरक्षण कर सकते हैं।
स्कूल, पार्क तथा दुकान तक जाने के लिए पैदल जाएं या फिर साइकिल का उपयोग करें। अपने अभिभावकों से भी ऐसा करने का आग्रह करें।
वृक्षारोपण करें। वृक्ष वायु को साफ करने में सहायक होते हैं।
कूड़ा ना फैलाएं। सड़क किनारे, गली, बीच या नदी के किनारे पड़े कूड़े को उठा ले और इसे उपयुक्त जगह पर रखें। यह वातावरण को प्रदूषित होने से बचाता है।
भोजन के बचे अंश तथा बगीचे में पौधों की छंटाई से प्राप्त बेकार हिस्से को एकत्रित करने के लिए गड्ढा बनाएं। कचरे को गड्ढे में डालने से बाहर कचड़ा नहीं फैलता और बोनस के रूप में बागवानी के लिए यह उत्तम खाद में परिवर्तित हो जाता है।
पृथ्वी को साफ रखने के लिए पुनर्चक्रण एक अच्छी व्यवस्था है। ऐसा करना बहुत ही आसान है। पुरानी चीजों को नया जीवन देकर हम संसाधनों पर बढ़ते दबाव को कम कर सकते हैं जो कि भविष्य में जीवित रहने के लिए अपरिहार्य है।
आइए, हम सभी इस पर्यावरण दिवस पर मानव की लापरवाही के खतरों से धरती मां की सुरक्षा करने तथा पृथ्वी के अनुकूल गतिविधियों को बढ़ावा देने और मातृभूमि के संरक्षण का प्रण लें।

डॉ. देशबंधु

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