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तरक्की की आश्चर्यजनक छलांग

ताजा परिदृश्य में भाजपाई सूबों के अधिकांश क्षत्रप जब पार्टी की अंदरूनी कलह का शिकार होते दिख रहे हैं तब छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह अज्ञातशत्रु बनकर उभरे हैं. यह चर्चा आम हो चली है कि मोदी और षिवराज सिंह चौहान की तरह रमनसिंह भी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष या फिर प्रधानमंत्री पद के दावेदारों में शामिल हो चुके हैं. सालों पहले टी.वी चैनल में साक्षात्कार देते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से जब उनके उत्तराधिकारियों के नाम पूछे गये तो आडवाणी ने जिन चार नेताओं का नाम लिया, उनमें डॉ. रमनसिंह एक थे!
यह एक गुजरे राज्योत्सव का दृश्य है। एक क्षेत्रीय चैनल में राज्य के विकास को लेकर बहस जारी थी। कांग्रेस के नेता आरोप लगा रहे थे कि रमन सरकार में सिवाय भ्रष्टाचार के कुछ नहीं हुआ। इस पर सरकार समर्थक एक अर्थशास्त्री ने एक दर्जन केन्द्रीय मंत्रियों के बयान गिनाये जिसमें रमन सरकार के कार्यों की दिल खोलकर तारीफ की गई थी! नहले पर दहला यह रहा कि कल्याणकारी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन करने के लिये केन्द्र सरकार, रमन सरकार को अब तक एक दर्जन से ज्यादा राष्ट्रीय पुरस्कार दे चुकी है!पूंजी निवेश के मामले में छत्तीसगढ़ गुजरात के बाद दूसरे स्थान पर है तो वित्तीय प्रबंधन के मामले में राज्य, देश में चौथे स्थान पर है। यहां अब तक 44 हजार करोड़ रूपये का पूंजी निवेश हुआ है और ऐसी औद्योगिक क्रांति हाल के वर्षों में किसी और राज्य में देखने को नहीं मिली जहां टाटा, जिंदल, एस्सार और इफको सहित आधा दर्जन कंपनियां राज्य में नये प्लांट डालने की तैयारी में हैं। सामाजिक विकास का ताना-बाना इतना मजबूत हुआ है कि रोजगार गारंटी योजना और बेहतरीन स्वास्थ्य सेवायें मुहैया कराने के लिये उसकी झोली में राष्ट्रीय स्तर के आधा दर्जन से अधिक पुरस्कार आ चुके हैं। कृषि उत्पादन के मामले में देश में अव्वल रहने का पुरस्कार लेकर लौटे कृषि मंत्री चंद्रशेखर साहू के मुताबिक ‘यदि हमारा काम राष्ट्रीय स्तर पर सराहा जा रहा है तो इसका श्रेय सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को जाता है जो सिर्फ कागजों पर नहीं हैं।
छत्तीसगढ़ की जीवनरेखा महानदी मानी जाती है लेकिन यहां का पीडीएस सिस्टम इतना मजबूत है कि वह 35 लाख परिवार यानि राज्य की पैंसठ प्रतिशत आबादी की लाइफलाइन बन चुका है। पर्याप्त भोजन न मिल पाने से जहां देश में लोग भूखों मर रहे हैं और दूसरे राज्यों की राशन प्रणाली का बुरा हाल है तब छत्तीसगढ़ ने आशाजनक तस्वीर पेश की है। सरकार अंत्योदय वर्ग के लोगों को एक रूपये और बीपीएल को दो रूपये की दर से प्रति माह 35 रूपये किलो चावल देकर उनका पेट भर रही है जिस पर 1200 करोड़ सालाना खर्च हो रहे हैं और 1000 करोड़ से ज्यादा का नुकसान धान खरीदी पर उठाना पड़ा है। आशंका के विपरीत गरीबों के कल्याण में चलाई गई महंगी योजनाओं से राज्य का खजाना खाली होने के
बजाय भरता चला गया और राज्य की जीडीपी दर देश में नम्बर वन पर पहुंच चुकी है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री पुन्नूलाल मोहिले कहते हैं, ‘जब दूसरे राज्यों में भूख से मौतें हो रही हैं, राशन गोदामों में सड़ रहा है तब छत्तीसगढ़ में हम भरपेट भोजन उपलब्ध करा रहे हैं। हमने साबित किया है कि छत्तीसगढ़ वाकई धान का कटोरा है।’इसकी धमक दिल्ली तक सुनाई दी। नतीजन ऑनलाइन सुविधा के सफल क्रियान्वयन पर राज्य सरकार को गोल्ड पुरस्कार, धान खरीदी की ऑनलाईन व्यवस्था पर ई-एग्रीकल्चर पुरस्कार तथा सहकारी समितियों के कम्प्यूटरीकरण के लिये भारत सरकार से ई-गवर्नेन्स का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर मुहर लगाते हुए इसे पूरे देश में लागू करने का मॉडल करार दिया। विश्व बैंक से लेकर केन्द्रीय खाद्य राज्य मंत्री के।व्ही। थॉमस, मुख्यमंत्री नीतिश कुमार, केन्द्र सरकार द्वारा गठित सर्तकता समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति डी.पी. वाधवा सहित भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने राज्य के पीडीएस सिस्टम को देश में मॉडल के रूप में तैयार करने का सुझाव दिया।

इस पर कटाक्ष करते हुए नेता प्रतिपक्ष रवीन्द्र चौबे कहते हैं- ‘खुद गृहमंत्री कह रहे हैं कि यहां कोई सुरक्षित नहीें हैं। बढ़ते अपराध और नक्सली हमलों के चलते राज्य के नागरिक असुरक्षा और भय में जी रहे हैं। यह शर्मनाक है। आदिवासियों की जमीन पर उद्योग और गरीबों की जमीन पर दलाल कब्जा जमाए बैठे हैं जिन्हें सरकार का संरक्षण हासिल है। फर्जी मुठभेड़ में आदिवासियों की हत्या, खाद-बीज की कालाबाजारी, मनरेगा में भ्रष्टाचार, बिजली की कमी, अवैध शराब बंटवाने तथा लचर स्वास्थ्य सुविधाओं जैसे हालात दर्शा रहे हैं कि सुराज देने का दावा कुराज में बदल चुका है।Ó

अप्रतिम विकास और नक्सलवाद की घटनाओं केे चलते पूरे देश में ख्यात हो चुका छत्तीसगढ़, अब क्रिकेट के नक्शे पर भी उभरने जा रहा है। नई राजधानी में नवनिर्मित और ईडन-गार्डन से भी बड़े शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में पहली बार आइपीएल के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों का आयोजन हो रहा हैै। छत्तीसगढ़ टेनिस संघ के अध्यक्ष विक्रम सिसोदिया कहते हैं कि ‘कुछ लोग इस आयोजन में महज राजनीतिक विरोधवश गलतियां ढूंढ़ रहे हैं। हालांकि वे भी जानते हैं कि आईपीएल का आयोजन छत्तीसगढ़ के लिये कितना फायदेमंद है।Ó

एक तरफ भाजपा जहां आइपीएल के आयोजन को भुनाना चाहती है वहीं कांग्रेस ने परिवर्तन रैली की शुरूआत करते हुए चुनावी बिगुल फूंक दिया है। परिवर्तन रैली में जिस भाग्यशाली रथ का उपयोग किया जा रहा है, उसने कांग्रेस को अन्य राज्यों में भी सत्ता दिलवाई है। इसलिए रैली की शुरूआत आदिवासी राज्य सरगुजा के अम्बिकापुर से हुई। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष नंदकुमार पटेल ने भटगांव में परिवर्तन यात्रा के दौरान कहा कि ‘छत्तीसगढ़ की रमन सरकार को केन्द्र ने अरबों रूपये दिये जो भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। इसके अलावा केन्द्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को भी राज्य सरकार ने अपनी योजना बताते हुए जनता को गुमराह किया है।Ó सत्ता परिर्वतन के लिये निकली कांग्रेस की 45 दिनों की परिवर्तन रैली को राजनीतिक प्रेक्षक, खतरे की घंटी भी बता रहे हैं। महज छह महीनों में ही कांग्रेस जनता के बीच यह प्रचारित करने में कामयाब रही है कि रमन सरकार के मंत्री भी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं।

वैसे चौतरफा तरक्की के सफर का नतीजा यह रहा कि आयकर विभाग ने रायपुर को उन 10 शहरों में रखा है, जहां रीयल इस्टेट का कारोबार आठ हजार करोड़ से पार हो चुका है। मूलभूत बुनियादी विकास को छोड़ दीजिये, यहां मनोरंजनपरक विकास इतने चरम पर है कि अकेले राजधानी में दो बड़े मॉल खुल चुके हैं और चार से ज्यादा मॉल और मल्टीप्लेक्स धड़धड़ाते चले आ रहे हैं! योजना आयोग के उपाध्यक्ष शिवराज सिंह कहते हैं- ‘सरकार के क्रांतिकारी फैसले और उसके बेहतरीन क्रियान्वयन से ही ऐसे परिणाम निकलते हैं। वे स्पष्ट करते हैं कि सरकार ने महज आंकड़ों या कागजों पर उलझे रहने की बजाय जमीनी स्तर पर काम किया और समाज के अंतिम व्यक्ति तक का ध्यान रखा।Ó जाहिर है आने वाले वर्षों में तरक्की की यह उड़ान और तेज होनी है क्योंकि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के मुताबिक, बहुतेरे ख्वाब हैं जो नींद में आते हैं, एक ख्वाब वो है जो मुझे सोने नहीं देता।

विजन 2013
रमन सरकार कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास पर विशेष ध्यान देना चाहती है. खासकर सार्वभौम शिक्षा दिलाने, लड़कियों-महिलाओं के प्रति भेदभाव समाप्त करने, शिशु मृत्यु दर में कमी, मातृ स्वास्थ्य में सुधार, मलेरिया-एड्स से मुकाबला और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की मुख्य प्राथमिकता में शामिल है.

मध्य प्रदेश में छत्तीसगढ़ का बजट महज 810 करोड़ था जो अब 59321 करोड़ तक पहुंच गया है. प्रति व्यक्ति वार्षिक आय 29621 रूपये.
• अब तक 44 हजार करोड़ रूपये का पूंजी निवेश. देश में गुजरात के बाद दूसरे स्थान पर.
• देश का पहला विद्युत कटौती मुक्त राज्य. 7500 मेगावाट क्षमता के बिजली घरों का निर्माण प्रगति पर.
• कृषि उत्पादन के मामले में देश में नम्बर वन.
• राज्य की सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सुप्रीम कोर्ट ने सराहा. केन्द्र सरकार को अन्य राज्यों में लागू करने की सलाह दी.
• वित्तीय प्रबंधन के मामले में राज्य, देश में चौथे स्थान पर.
• 35 लाख गरीब परिवारों को प्रति माह दो और तीन रूपये किलो चावल.
• अकेले सडक़ों पर 1800 करोड़ से ज्यादा का खर्च, 12 हजार किलोमीटर की सडक़ों का निर्माण पूर्ण.
• अब तक एक लाख युवाओं को रोजगार.
• इस्पात और बिजली के क्षेत्र में भी खासी तरक्की देखने को मिल रही है.
• 80 करोड़ का अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम और राजिम-कुंभ को देश भर में पहचान.

अनिल कुमार द्विवेदी

dpkjvfnmдепутат лобановский

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