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सोना कितना सोणा है

सोना, हमेशा से ही भारतीयों के दिल के करीब रहा है। धार्मिक पर्व हो, शादी-ब्याह या फिर कोई अन्य अवसर हो। सोना खरीदना और सोने के गहने पहनना भारतीयों के लिये फैशन भी है और आर्थिक स्टे्टस का प्रतीक भी। इसके अलावा सोना खरीदना हम लोगों की आदत में शुमार है। प्रापर्टी के बाद इसे निवेश का एक बेहतर माध्यम माना जाता है। तर्क यह भी दिया जाता है कि संकट में सोना ही काम आता है, क्योंकि इसे आसानी से बाजार में बेचा जा सकता है।

सोना की खरीददारी को लेकर लोगों की नजर बाजार में लगी रहती है। आज की तारीख में सोना खरीददारों को खूब भा रहा है। कारण भी काफी गहरा है, क्योंकि इसके दाम में गिरावट का दौर चल रहा है। बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि सोने में यह तेजी काफी समय तक जारी रह सकती है। बेशक इसमें बीच-बीच में सुधार का दौर चलेगा,मगर उतार का रुख ज्यादा प्रबल होगा।

क्या है कारण
सोने की कीमतों में गिरावट के तीन प्रमुख कारण है। पहलाए अंतर्राष्ट्रीय शेयर बाजार में तेजी। शेयरों में शार्टटर्म लाभ कमाने के लिये अब विदेशी निवेशक शेयरों में खूब पैसा लगा रहे हैं। अमेरिका की अर्थव्यवस्था में मजबूती के संकेत से शेयर बाजार को बल मिल रहा है। दूसरा कारण है कि सोना का अनुमान से अधिक ऊंचाई पर पहुंचना। अब उसके मूल्य सुधार का समय है। जिन्होंने सोने में सोना में गिरावट के समय निवेश किया है, वे अब मुनाफा कमाना चाहते हैं।

तीसरा कारण है कि बाजार में सोने की उपलब्धता में इजाफा। पिछले एक साल के दौरान चीन, भारत और अन्य देशों में सोने की रिसाइक्लिंग ज्यादा हुई है। सोने को ज्यादा बेचा भी गया है। इससे बाजार में सोने की उपलब्धता बढ़ी है। इसके अलावा यूरोपीय देशों साइप्रस, पुर्तगाल, स्पेन और फ्रांस ने यह जता दिया है कि वे बाजार से धन उगाहने के लिये अपना सोना बेचेंगे। एक अनुमान के अनुसार यह देश अंतर्राष्ट्रीय बाजार में 500 से 600 टन सोना बेच सकते हैं।

खरीददारी फायदेमंद
सोने की कीमत कम होने से सोने की खरीददारी अब सस्ती हो गई है। बाजार सर्वे एजेंसी विनायक इंक के प्रमुख विजय सिंह का कहना है कि लोग अब धीरे-धीरे बाजार में खरीददारी के लिए आ रहे हैं। वे सोने का 22 से 23 हजारी बनने का इंतजार कर रहे हैं। जैसे-जैसे सोना गिर रहा है, इसके खरीददार बढ़ रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक अगर सोना 22 से 23 हजार रुपये प्रति दस ग्राम पर आता है तो सोने के कारोबार में पिछले साल की तुलना में 40 से 50 प्रतिशत की तेजी आ सकती है।

गोल्ड लोन कम
दूसरी तरफ जो लोग सोने के एवज में कर्ज लेना चाहते हैं, वे बाजार से दूर हो रहे हैं। इसका कारण है कि तय नियमों के तहत कंपनियां सोने के कुल मूल्य का 60 से 70 प्रतिशत ही लोन दे सकती है। अगर सोने की कीमत घटती है तो कर्ज की राशि भी घट जाएगी। ऐसे में लोग अपनी जरूरत को देखते हुये लोगों ने गोल्ड लोन की जगह अन्य विकल्पों की तरफ ध्यान देना शुरू कर दिया है।

गोल्ड लोन देने वाली कंपनियां परेशान
सोने में इस भारी उतार से गोल्ड देने वाली कंपनियां खासी परेशान है। एक कंपनी के अधिकारी ने कहा, हमने ज्यादा कीमत का लोन दे दिया है। मगर हम सोने के एवज में निवेश करकेजो कमाते थे, वह कम हो रहा है। इससे हमारे कारोबार का संतुलन बिगड़ रहा है। दूसरी तरफ इन कंपनियों के शेयर भी बाजार में बुरी तरह से पिटने शुरू हो गये हैं। डीएसई के पूर्व प्रेसिडेंट बी.बी. साहनी का कहना है कि आज की तारीख में सबसे रिस्की शेयर गोल्ड कंपनियों के हो गये हंैं, क्योंकि इनमें शार्टटर्म लाभ पाना मुश्किल है। यही कारण है कि खरीददारी इन शेयरों से दूर जा रहे हैं।

कैसे करें खरीददारी
अगर इस वक्त आप अपनी जरूरत के मुताबिक सोने की खरीददारी करना चाहते हैं, तो पहले बाजार की आकलन करें। सोने की कीमत और ज्यादा न गिर जाये, इसलिये कई आभूषण विक्रेताओं ने छूट की पेशकश करनी शुरू कर दी है। कोई लकी ड्रा भी निकाल रहा है। कोई एक तय राशि की आभूषण विक्रेताओं खरीदने पर सोने का सिक्का भी दे रहा है। इसके अलावा को मेकिंग चार्ज पूरी तरह से माफ कर रहा है।

सोने की जूलरी में मेकिंग चार्ज उसकी कुल कीमत का 15 से 20 प्रतिशत रहता है। इसके अलावा एक बड़ी आभूषण के साथ छोटे आभूषण को ‘कम्बो्य ऑफर के रूप में पेश किया जा रहा है। इन ऑफरों का आकलन करने के बाद ही बाजार में खरीददारी के लिये।

ऐहतियात बरतें
सोने की जूलरी खरीदते समय सोने की शुद्धता का आकलन और रसीद जरूर लें। इससे सोने बेचते और रिसाइक्लिंग करते समय में काफी मदद मिलती है। कोई आपको मिसगाइड नहीं कर सकता।

अगर ज्यादा राशि का सोना खरीदना है तो ब्रांडेड लें। इसके दो फायदे हैं, कुछ गड़बड़ी यानी कीमत और शुद्धता में दावे की तुलना में कमी होने पर आप पुलिस थाने में इसकी शिकायत भी करा सकते हैं। साथ ही वहां तक आपकी पहुंच सीधे तौर पर हो सकती है। दूसरा फायदा यह है कि वहां पर आपकी शिकायत की सुनवाई सही तरीके से सुनी जा सकती है, मामला बाजार में ब्रांड के नाम का है।

निवेशकों को सलाह
सुदामा डायमंड ज्वैलर्स के एमडी संजय गुप्ता का कहना है कि बेहतर निवेशक कुछ समय तक बाजार से दूर रहे हैं। इस वक्त शार्ट टर्म या लाग टर्म दोनों तरह के निवेश काफी रिस्की है। ऽुछ दिनों बाद सोने की बाजार की तस्वीर साफ होगी। तब निवेश की रणनीति बनाना बेहतर होगा।
वायदा कारोबार में भी सोने के सौदों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। बेहतर है कि डिलीवरी तय समय पर लें। उसको आगे मत बढ़ाएं।

एक्सपोर्ट
सोना के एक्सपोर्ट का यह सबसे बेहतर समय है क्योंकि भारत में श्रम सस्ता है। सोने के दाम भी कम हो रहे हैंं। ऐसे में एक्सपोटर्स सोने की जूलरी का एक्सपोर्ट पर जोर दे सकते हैं। उनका प्राफिट मार्जिन उन देशोंं में बढ़ सकता है, जिन देशों में भारतीय जूलरी की काफी डिमांड हैं। इनमें अमेरिकाए दक्षिण अफ्रीकाए ब्रिटेन, मलेशिया, सिंगापुर और आस्ट्रेलिया प्रमुख है।

जोसफ बर्नाड

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