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पाकिस्तान के चुनाव भारत के लिए सबक

दर्शकों से रू.ब.रू होकर हंसाने वाले हास्य कलाकारों (स्टैंड-अप कॉमेडियनों) को छोड़ कर आगे बढि़ए। जिन्हें भारतीय टीवी चैनलों पर स्टैंड अप कॉमेडी वाले कार्यक्रमों को देखने की भूख है और उन कार्यक्रमों को देखने के लिए वे लालायित रहते हैं, उन्हें गुदगुदाने वाले हास्य रस के लिए अपनी नजर इधर-उधर भी करनी चाहिए। यहां उन्हें मेरी एक सलाह है, 11 मई 2013 को पाकिस्तान में आम चुनाव हैं। वहां की चुनावी प्रक्रियाओं पर नजर गड़ाइए।
नामांकन पर्चे दाखिल करने एवं उनकी जांच पड़ताल की प्रक्रिया अजीबोगरीब राजनीतिक हास्य रस के बीच पूरी हुई। चुनाव अधिकारियों ने उम्मीदवारों का साक्षात्कार लेने के समय जो जो सवाल पूछे, उन्हें सुनकर हंसी छूट जाएगी। कभी कभी तो ये सवाल विचित्र होते थे। ऐसा उन्होंने
इस चुनाव पर पैनी निगाह रख रहे सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के दबाव में किए। सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश था कि केवल सक्षम उम्मीदवारों को ही चुनाव लडऩे की इजाजत दी जाए। उम्मीदवारों के जबाव कम गुदगुदाने वाले नहीं थे और सवालों से भी ज्यादा अजीबोगरीब थे।

गुजरांवाला से पर्चा भरने वाले पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) के उम्मीदवार शौकत मंजूर चीमा को ए, बी, सी का ककहरा बोलने को कहा गया। चीमा का जबाव था, “छोटी वाली या बड़ी वाली?” इसमें हैरत में डालने वाली बात यह है कि चीमा लाहौर विश्वविद्यालय के स्नातक हैं। उन्हें 2005 में स्नातक की डिग्री हासिल हुई, हालांकि वे अगले जनवरी महीने में 60 के हो जाएंगे।

गुजरांवाला के ही दूसरे उम्मीदवार थे इमरान खान के नेतृत्व वाली पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के शाह नवाज चीमा। उन्हें अंग्रेजी में 15 फलों के नाम बताने को कहा गया। उनका जबाव देखिए- एप्पल -(सेब), ऑरेंज (नारंगी), बाकी 13 केले कर लो।

पाकिस्तान से क्या सीख ले भारत
यह लेख किसी भी तरह से पाकिस्तान के कानूनों एवं चुनाव प्रक्रिया का मजाक उड़ाने की मंशा से नहीं लिखा गया है। इसके उलट दुनिया की सबसे बड़ी जम्हूरियत भारत को पाकिस्तान से कुछ सीख लेनी चाहिए।

पाकिस्तान में तब्दीली की हवा बह रही है। इसके इतिहास में पहली बार इसकी एक चुनी हुई सरकार ने अपना पूरा कार्यकाल पूरा किया है और ये चुनाव दूसरी चुनी हुई सरकार को सत्ता सौंपने के लिए हो रहे हैं। यहां पाकिस्तान से हमें कुछ नहीं सीखना है।

लेकिन दो विशेष बिंदु हैं जहां पाकिस्तान हमें सीख दे सकता है। ये वे क्षेत्र हैं जिसके बारे में अन्ना हजारे एवं उनके सहयोगियों ने शायद कभी सोचा भी नहीं होगा और जो लोकपाल का वही घिसा पिटा रिकॉर्ड बजाते रहे। हजारे एंड कंपनी भारतीय चुनाव पद्धति में अगर दो बड़े बदलाव की मांग करते तो पाकिस्तानियों को पीछे छोड़ देते। उनसे सोच और उस पर अमल करने में आगे रहते।

  उम्मीदवारों को देश, संविधान और जन सेवकों के कर्तव्यों की समझ है या उसका अभाव है, इसको लेकर उम्मीदवारों से पूछताछ होनी ही चाहिए।
  उम्मीदवारों के साक्षात्कार के दौरान मौजूद रहने की मीडिया को जरुर इजाजत दी जानी चाहिए और दरअसल, उनका इन साक्षात्कारों का सीधा प्रसारण करने के लिए उत्साहवर्धन करना चाहिए।
  अन्ना हजारे एंड कंपनी ने यूपीए सरकार के साथ अपने संवादों की रिकॉर्डिंग को लेकर अनावश्यक रूप से चिल्लपौं मचाई। इससे बेहतर यह होता कि इस बात पर जोर देते जैसा पाकिस्तान में हुआ, उम्मीदवारों के साक्षात्कार का सीधा प्रसारण। अगर ऐसे कानून भारत में लागू कर दिए जाएं तो बहुत संभव है कि भारतीय राजनेताओं की हालत वहां के राजनेताओं से ज्यादा पतली दिखेगी।

कराची में सुन्नी तहरीक के उम्मीदवार जाहिद अहमद को चुनाव अधिकारी ने संक्षिप्त एलएलबी का पूरा नाम बताने को कहा और साथ ही ग्रेजुएशन और सुपरिन्टेंडेंट के हिज्जै लगाने भी कहा। वे इन तीनों सवालों में मार खा गए।

कुछ और सवालों और जबावों के नमूनों की बानगी देखिए-
सवाल– कुरान में कितने पैरा (अनुच्छेद) हैं?
जबाव- 32।
सवाल– कायद-ए- आजम का असली नाम क्या था?
जबाव– (मौलाना फजूल का ) -हजरत मुहम्मद अली जिन्ना अलिहे सलाम।
सवाल– आलम इकबाल कब पैदा हुए थे?
जबाव– 32 नवंबरए 1887।
सवाल– दुनिया के सबसे पहले इंसान का नाम क्या था?
जबाव– टारजन।

लेकिन सभी उम्मीदवार फेल नहीं हुए और दरअसल कुछ उम्मीदवारों ने भौंचक्का कर देने वाले बुद्धिमत्ता एवं हाजिर जवाबी का परिचय दिया। असलम खान खटक इन्ही में से एक थे। अगर भारतीय उपमहाद्वीप में राजनेताओं के सामान्य ज्ञान के स्तर को ध्यान में रखते हुए देखें तो खटक को संभवत: सबसे भारी सवाल पूछा गया। वह सवाल मौजूं भी नहीं था। उन्हें चांद पर चहलकदमी करने वाले पहले शख्स का नाम बताने के लिए कहा गया। खटक ने सही जबाव दिया- नील आर्म स्ट्रांग। लेकिन फिर चुनाव अधिकारी ने एक पूरक सवाल पूछ लिया। सवाल यूं था- उनके बाद दूसरे कौन थे जिनके कदम चांद पर पड़े। खटक ने चुनाव अधिकारी के सवाल की यह कहते हुए हवा निकाल दी कि – वह भी आर्मस्ट्रांग ही थे क्योंकि वे विकलांग नहीं थे और उनके दोनों पांव काम कर रहे थे। खटक के पर्चे सही करार दे दिए गए। उम्मीदवारों से सामान्य ज्ञानए इतिहास और इस्लाम से जुड़े सवाल पूछे गए। इनमें अंतिम सबसे महत्वपूर्ण और सबसे बड़ी संवैधानिक जरुरत के हिसाब से सबसे अहम थे।

पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने 425 चुनाव अधिकारी बहाल किए थे जो मातहत न्यायपालिका से आए थे और उन्हें 23ए000 नामांकन पर्चों (नैशनल एसेम्बली (संसद) के लिए 8059 और बाकी प्रांतीय एसेम्बलियों के लिए) की बारीकी से जांच पड़ताल करनी थी।

उम्मीदवारों के साक्षात्कार के क्रम में चुनाव अधिकारियों का सबसे ज्यादा ध्यान यह जानने पर था कि उनका इस्लाम का ज्ञान कैसा है। इसके लिए उन्होंने उम्मीदवारों से बेतरतीब सवाल भी किए। वजह यह थी कि वे इस्लामी गणतंत्र पाकिस्तान के संसद के लिए चुने जाने के लिए मैदान में थे। उम्मीदवारों ने चुनाव अधिकारियों के बेतरतीब एवं अक्सर फिजूल सवालों का विरोध करने की जुर्रत नहीं की क्योंकि पाकिसतान चुनाव आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय के उस निर्देश को पूरी निष्ठा के साथ लागू करने का निर्देश दिया था जिसमें उम्मीदवारों की जांच पड़ताल सैनिक शासक जिया उल हक द्वारा पाकिस्तान के संविधान में शुमार किए गए दो अनुच्छेदों के अनुरूप कड़ाई से करनी थी। जिया उल हक ने 1980 के दशक में शुरू किए इस्लामीकरण अभियान के दौरान ये अनुच्छेद शुमार किए थे।

बेहद चर्चा में रहे ये अनुच्छेद 62 और 63 हैं। अनुच्छेद 62 के अनुसार कोई उम्मीदवारए जो अच्छे चरित्र का नहीं है, जिन्हें इस्लामी पाठों का पर्याप्त ज्ञान न हो और जो इस्लाम द्वारा तय अनिवार्य कर्तव्य पूरा न करते हों और जिन्होंने बड़े पापों से तौबा न की हो, वे चुनाव लडऩे के योग्य नहीं होंगे। वहीं अनुच्छेद 63 में संसद के किसी चुने हुए सदस्य को अयोग्य ठहराने की शर्ते शामिल की गई हैं।

कई दशकों से ये दोनों अनुच्छेद पाकिस्तानी राजनेताओं के लिए खौफ के कारण रहे हैं। लेकिन अब तक किसी भी राजनेता ने जिया युग के इन अनुच्छेदों को रद्द करने की मांग करने की जुर्रत नहीं की है। पाकिस्तान की सिविल सोसायटी इस दादागिरी को जियायुगीन निगरानी के रूप में परिभाषित करती है। इसलिए हैरत की बात नहीं होनी चाहिए कि चुनाव अधिकारियों ने अधिकतर सवाल इस्लाम एवं इस्लामी वसूलों पर पूछे। ऐसे सवाल भी कि किसी लाश को नहलाने का इस्लामी तरीका क्या है।

पाकिस्तानी स्पेक्टेटर में गजला खान ने 10 सबसे बेतरतीबए गुदगुदाने वाले एवं विचित्र सवालों की अपनी सूची छापी है। ये सवाल चुनाव अधिकारियों ने उम्मीदवारों से पूछे थे।

उन्होंने जो सवाल चुने, वे हैं-
वे कौन सी स्थितियां हैं जिनमें शादीशुदा महिलाओं के लिए स्नान करना अनिवार्य हो जाता है?
आपकी कितनी बीबियां हैं और उनमें से हर के साथ आप कितनी रातें बिताते हैं?
 क्या आप हनीमून में विश्वास करते हैं?
क्या उचित तरीके से आपका खतना हुआ है?
क्या कभी आप लड़की के किसी कॉलेज के सामने खड़े हुए हैं?
 क्या आपने कभी कोई ऐसी फिल्म देखी है जिसे सेंसर किया गया हो?
क्या आपने कभी सूअर का मांस खाया है?
फर्ज कीजिए आप किसी रेगिस्तान में प्यास से मर रहे हैं। उस समय कोई आपको शराब की एक बोतल दे तो क्या आप उसे पीएंगे?
किसी नदी में एक धार्मिक विद्वान, आपकी पत्नी और बेटा, तीनों डूब रहे हों और आप एक को ही बचा सकते हैं तो इनमें किसको बचाएंगे?
अगर आप चुनाव जीत जाते हैं तो क्या इससे आपकी पत्नी, बच्चों और पड़ोसियों के जीवन में व्यवधान पैदा नहीं होंगे?

राजीव शर्मा

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