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राहुल गांधी, महान इतिहासकार!
गरीब सैटिरीकस तो गरीब भारतीय है। वह एक रोमन कैथोलिक चर्च के चूहे जितना ही गरीब है। एक अज्ञानी पत्रकार होने के नाते वह नहीं जानता कि ऐसा क्यों हो रहा है। लेकिन राहुल गाँधी की कृपा से उसे अब यह पता है। अब उसे पता चल गया है कि वह गरीब इसलिए है क्योंकि वह एक हिंदू है जिसकी गरीबी का एक लंबा इतिहास है। हाल ही में एक विशेष प्रकार के श्रोताओं के सामने अपना वैज्ञानिक व्याख्यान देते हुए उन्होंने भारत के बारे में की गई अपनी खोज की जानकारी दी। उन्होंने बताया, ‘वे भारत की ओर देख कर कहा करते थे, देखो विकास का हिंदू दर। ऐसा वे पिछले तीन हजार सालों से कहते आ रहे हैं।्य देखा भारत की गरीबी का ऐतिहासिक भयावह सच उद्घाटित हो गया है और इसका एक बड़ा ही बौद्धिक ठोस आधार है। यह वे लोग हैं, जो ऐसा कहा करते थे। यदि सैटिरीकस को यह नहीं पता कि यह वे लोग कौन हैं, तो जी हां, यह केवल उसका अज्ञान ही है। उसकी अज्ञानता का एक कारण यह हो सकता है कि उसने जो इतिहास पढ़ा है, वह दुर्भावनापूर्वक बिगाड़ा हुआ है।

आइए, राहुल के बताए गए इस तीन हजार साल के ऐतिहासिक कालखंड को देखते हैं। यह भगवान बुद्ध और जातक कथाओं का काल है, यह काल है गुप्त राजवंश के सम्राट चंद्रगुप्त का और सिकंदर के आक्रमण का और जातक कथाएं क्या बताती हैं? भारत के इतिहास पर अऋारह पुस्तकें लिखने वाले (बेचारा लेखक केवल 18 ही लिख पायाए राहुल ने तो 20 लिख मारी होतीं) एक लेखक के अनुसार उस समय भारत की समृद्धि पूरी दुनिया में अतुलनीय थी। बुद्ध के एक भक्त ने उन्हें सौ स्वर्ण मुद्राओं की कीमत की जूते की जोड़ी भेंट की थी। कासीभारद्वाज नामक एक किसान इतना समृद्ध था कि उसके यहां 500 खेतीहर मजदूर काम करते थे। एक व्यापारी ने बुद्ध को 54 करोड़ स्वर्ण मुद्राएं दी थीं। एक ब्राह्मण ने प्रतिदिन छह लाख सोने के सिक्के दान किया करता था। ऐसे दर्जनों उदाहरण देने के बाद वह लेखक आगे लिखता है, ‘जातक कथाओं में ऐसे उदाहरण बड़ी संख्या में पाए जाते हैं।्य सैटिरीकस स्तब्ध है। अब वह समझ गया है कि इस लेखक ने नकली जातक कथाएं पढ़ रखी हैं, असली तो अवश्य राहुल गांधी के पास ही होंगी।

गुप्त वंश के बारे में जिसे वह बेचारा इतिहासकार स्वर्ण युग कहता है, के बारे में मेगास्थनीज लिखता है, ‘भारतीय… शुद्ध हवा में सांस लेते हैं और दुनिया का सबसे साफ पानी पीते हैं। वहां की धरती में सोनाए चांदी, तांबा और लोहे सहित अनेक प्रकार के खनिज पदार्थ हैं। श्रेष्ठतम मलमल से बने उनके परिधान सोने और कीमती पत्थरों से जड़े
होते हैं।्य इन सबका क्या अर्थ है? इसका अर्थ यही है कि वह अज्ञानी ग्रीक भारत के 3000 साल पुराने दयनीय हिंदू विकास दर से अपरिचित था।

ग्रीक के बाद आए रोमनों के साथ क्या हुआघ् यदि यूरोप पर प्राचीन भारत के प्रभाव पर पुस्तक लिखने वाले एक दूसरे निकम्मे इतिहासकार की माने तो ‘भारत से आयातित सामानों के प्रयोग करना रोमन महिलाओं में सम्मान का विषय माना जाता था और भारत के वस्त्र जबरदस्त प्रचलन में थे। वास्तव में भारतीय कपड़े इतनी बड़ी मात्रा में रोम में आयात किये जाते थे कि रोमन सीनेट ने रोमन अर्थ व्यवस्था पर खराब प्रभाव पडऩे की आशंका से उनके आयात पर कुछ प्रतिबंध लगाए। प्लिनी ने लिखा है कि लगभग पांच लाख स्टिंग रोम से भारत जाता था।्य

क्या राहुल गाँधी रोमन काल से बाइबिल के एक हजार साल बाद के रोमन कैथोलिक काल तक आना चाहेंगे? यहां भी संयोगवश पवित्र पुस्तक कुछ अपवित्र तथ्यों को स्वीकारती प्रतीत होती है। यदि काल्डवेल और फ़ॉक्स जैसी मिशनरियों पर फरोसा किया जाए तो बाइबिल (उत्पत्ति ङ्गङ्गङ्कढ्ढढ्ढ) में वर्णन है कि मसालों से लदे जहाज के जहाज मिश्र जाया करते थे और पैट्रिआर्क जेकब के
बेटों (उत्पत्ति ङ्गढ्ढढ्ढढ्ढ) दक्षिण भारत से यह लाना शुरू किया था।

2000 साल पहले के बाइबिल के समय से क्या इतिहासकार राहुल अपने 3000 साल के उद्धरण के और 3000 साल यानी कि कुल 6000 साल पहले यानि कि सिंधु घाटी सभ्यता तक जा सकते हैं? यदि वे जाएंगे तो वे ऐसे अज्ञानियों के काल में पहुंच जाएंगे जिन्हें गरीबी के इस हिंदू विकास दर के बारे में कुछ भी नहीं मालूम होगा। इसके विपरीत सिंधु घाटी सभ्यता के लोग इतने असभ्य थे कि वहां केवल औरतें ही नहीं, बल्कि पुरूष भी आभूषण पहना करते थे। ये आभूषण पीतल और हाथीदांत के अलावा सोने और चांदी के बने होते थे। वहां की स्रियां और पुरूष दोनों ही अपने लंबे बालों को लेकर इतने दीवाने रहते थे कि वहां केशसज्जा एक कला बन गई थी। वहां की बर्बरता इतने चरम पर थी कि वहां के सभी लोग शौचालयों का उपयोग करते थे और महिलाएं सौंदर्य प्रसाधनों विशेषकर लिपस्टिक का उपयोग करती थीं।

अब इस पर सैटिरीकस क्या कह सकता है? उसका मानना है कि सेकुलर इतिहासकार राहुल के लिए अब वह सारा इतिहास जो घटा है? को प्रतिबंधित कर देना चाहिए और उसकी जगह पर क्या घटा होना चाहिए था? लिखा जाना जाहिए।

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