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मानस सेवा ही ईश्वर सेवा है! सबसे प्रेम करो, सबकी सेवा करो

पुट्टापार्थी के सत्य साईं बाबा के भक्त दुनिया भर में फैले हैं जो उन्हें श्रद्धा से बाबा कहते है। अमेरिका में भी उनके भक्तों की बड़ी संख्या है। पिछले वर्ष अमेरिका के पूर्वी तट पर भारी तूफान आया थाए जिससे जन और धन की भारी क्षति हुई थी। अटलांटिक सागर में इससे पहले इतना भीषण तूफान पहले कभी नहीं आया। हजारों घर नष्ट हो गये। न्यूयार्क, न्यू जर्सी और लान्ग आइलैंड में दो सौ से अधिक लोग मारे गये थे। सत्य साईं संगठन की शाखाओं ने पीडि़त क्षेत्रों में जाकर दुखी मानवता की भारी सेवा की थी। सत्य साईं संगठन का लक्ष्य है: ‘सबसे प्रेम करो, सबकी सेवा करोÓ। संगठन के भक्त स्वयंसेवकों ने तूफान वाले क्षेत्रों में जाकर भोजन और वस्त्र मुहैया कराये थे। विपदा ग्रस्त लोगों को साईं भक्तों ने यातायात की सुविधा भी प्रदान की थी।

सत्य साईं विश्व प्रतिष्ठान के अध्यक्ष डॉ. माइकेल गोल्डस्टीन का कहना है कि ‘बाबा चमत्कारों का भंडार थे। मैं लंबे समय तक बाबा के साथ रहा हूं। उन्होंने विश्व भर में फैले अपने लाखों भक्तों को संदेश दिया है कि ”मानवता की सेवा ही ईश्वर की सेवा है। डॉ. गोल्डस्टीन ने बताया कि सुखी जीवन के लिए नौ सूत्रों को आचरण में अपनाना जरूरी है, इन नौ सूत्रों को तीन भागों में बांटा जा सकता है। दृष्टिकोण, व्यवहार और कर्म। दृष्टिकोण के अंतर्गत आध्यात्मिक आनंद प्राप्त करने के लिए जरूरी है कि हम अतीत को भुला दें, भविष्य की चिंता न करें और याद रखें कि जीवन के सारे सुख-दुख ईश्वर की ही देन है। व्यवहार के अंतर्गत मनुष्य को सदैव प्रसन्न यानी संतुष्ठ रहना चाहिए। संतोष ही परम धन है। हमें निस्वार्थ प्रेम करना चाहिए और मन में शांति धारण करनी चाहिए। कर्म के अंतर्गत साधक को बुरे विचारों से दूर रहना चाहिए वह पाप से बचे, काम, क्रोध, मद, मोह, लोभ से दूर रहें। चित्त को चंचल न होने दें। बुरे विचारों से बचें। साधक को अपनी आत्मा की आवाज पर कार्य करना चाहिए। डॉ. गोल्डस्टीन ने बताया कि उनके एक मित्र को कैंसर था, जो अंतिम अवस्था में था, बाबा ने अपने चमत्कार से उनके मित्र को रोग रहित कर दिया।

सत्य साईं बाबा का 87 वां जन्मदिवस 23 नवंबर 2012 को अमेरिका में बड़ी धूम-धाम से मनाया गया। मैरीलैंड में कोलंबिया के इंटरफेथ सेंटर में स्थानीय भक्तों ने बाबा के जन्मदिवस पर समारोह का आयोजन किया। इस अवसर पर वेद पाठ किया गया, जिसमें बाल विकास संस्था के बच्चों ने भी भाग लिया। आयोजन में मुख्य अतिथि ने बताया कि उनकी चाची कैंसर से पीडि़त थीं, जिन्हें स्वामी जी ने अपनी कृपा से पूर्ण स्वस्थ कर दिया। स्वामी जी के आशीर्वाद से अनेक रोगी भी आज स्वस्थ जीवन बिता रहे हैं। इसीलिए भारत में पुट्टापार्थी में स्वामी जी के आश्रम पर भारी संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ती है,। हालांकि स्वामी जी आज सशरीर वहां उपस्थित नहीं है, फिर भी उनकी समाधि पर दर्शनार्थियों का तांता लगा रहता है

अमित वर्धन

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