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‘साइलेंट किलर’ है ‘हाई ब्लड प्रेशर’

कई ऐसे रोग हैं जो अंदर ही अंदर हमें खोखला करते रहते हैं। बहुत समय बाद हमें उनका पता तब चलता है जब बात बहुत बढ़ जाती है। ऐसे रोगों को मेडिकल भाषा में ‘साइलेंट किलर’ नाम दिया गया है। इन्हें यह नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि इनके लक्षण स्थिति काफी बिगड़ जाने के बाद सामने आते हैं। उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) ऐसे ही खतरनाक रोगों की श्रेणी में आता है। वैसे तो उच्च रक्तचाप को साधना (मैनेज) बहुत कठिन नहीं है लेकिन अगर उसे नजरअंदाज कर दिया तो यह भी हो सकता है कि आप रात को सोएं तो हमेशा के लिए सोते ही रह जाएं। इसलिए भले ही आप एकदम भले चंगे महसूस कर रहे हों, अपनी धमनियों में दौड़ रहे खून पर हमेशा ही नजर रखें। उसकी नियमित जांच जरूर कराते रहें। छिपा हुआ हाई ब्लड प्रेशर स्ट्रोक (ब्रेन अटैक) और हार्ट अटैक का बहुत बड़ा कारण बन कर सामने आ रहा है। इतना ही नहीं वह आंख और किडनी को ऐसी क्षति पहुंचाता है कि बाद में उसकी भरपाई भी संभव नहीं होती। चूंकि अब जीवन शैली में परिवर्तन एवं तनाव की वजह से बच्चों और किशोरों को भी हाई ब्लड प्रेशर होने लगा है, इसलिए 30 वर्ष की आयु से ही रक्त प्रवाह पर नजर रखनी शुरु कर देनी चाहिए। भारत में इस रोग की दर का सटीक आंकड़ा नहीं है लेकिन भारत में हाई ब्लड प्रेशर से पीडि़त लोगों की संख्या निश्चित रूप से कम नहीं होगी। खराब जीवन शैली और खान-पान की बेतरतीब आदतों ने हाई ब्लड प्रेशर को आज महामारी का रुप दे दिया है। सर गंगाराम अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन के सीनियर कंसलटेंट डॉ. अतुल गोगिया कहते हैं, ”अब हर आदमी को ही अपने को हाई ब्लड प्रेशर का संभावित उम्मीदवार मान कर चलना चाहिए। हाई ब्लड प्रेशर का मतलब है कि दिल का अपनी क्षमता से अधिक काम करने की नौबत आना।
पांव का भी होता है ब्लड प्रेशर
पांवों का भी ब्लड प्रेशर मापा जाता है। इतना ही नहीं, पांवों के ब्लड प्रेशर में ऊपर वाली संख्या का बांह के ब्लड प्रेशर से कम होना एक असामान्य स्थिति होती है। इसका मतलब है कि पांवों में खून कम पहुंच रहा है। यह अच्छी बात नहीं है।

डॉक्टरों के अनुसार: ‘पांव के ब्लड प्रेशर का सिस्टॉलिक यानी ऊपर वाली रीडिंग बांह के मुकाबले 10 या 20 प्रतिशत अधिक होना चाहिए। लेकिन अगर पांव का ऊपर वाली रीडिंग बांह के ऊपर वाली रीडिंग से कम है तो चिंता की बात है। जिन्हें उच्च रक्तचाप है, उन्हें हाथ के साथ-साथ पांव का ब्लड प्रेशर भी नपवा लेना चाहिए।

क्या लो ब्लड प्रेशर भी है कोई रोग?
देश में लाखों लोग लो (निम्न) ब्लड प्रेशर के रोगी हैं। इस रोग की वजह से ऐसे लोग हमेशा कमजोरी महसूस करते हैं। लेकिन मजे की बात है कि लो ब्लड प्रेशर कोई रोग ही नहीं होता। रोचक बानगी देखिए। हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के. के. अग्रवाल का ब्लड प्रेशर हमेशा 100 बाई 60 रहता है। यही उनका सामान्य ब्लड प्रेशर है। उनकी भाग दौड़ भी बहुत रहती है, लेकिन कम ब्लड प्रेशर के कारण उन्हें जरा भी कमजोरी महसूस नहीं होती। डॉक्टरों के अनुसार रोग के रूप में लो ब्लड प्रेशर एक मिथक के अलावा और कुछ नहीं है। हाइपर टेंशन (उच्च रक्तचाप) तो रोग है, लेकिन हाइपोटेंशन (लो) कोई रोग नहीं होता। हां, डायरिया, निर्जलीकरण (डीहाइड्रेशन), तेज संक्रमण या किसी अन्य बीमारी की स्थिति में ब्लड प्रेशर कम होने लगे तो वह खतरनाक है लेकिन कोई रोग नहीं है। जैसे डेंगू के मरीज का ब्लड प्रेशर अचानक गिरने लगे तो भारी चिंता का विषय होना चाहिए। सर गंगाराम अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन के सीनियर कंसलटेंट डॉ. अतुल गोगिया का कहना है कि बहुतों का ब्लड प्रेशर 90 बाई 60 या 80 बाई 60 भी होता है और हमेशा रहता है। यह एकदम सामान्य है। लो ब्लड प्रेशर से कमजोरी लगने की बात भी भ्रम के सिवा कुछ नहीं है। लेकिन यदि ब्लड प्रेशर हमेशा 100 बाई 60 रहता है और वह अचानक 80 बाई 60 हो जाए तो जरुर चिंता की बात है। डॉक्टरों के अनुसार ब्लड प्रेशर इस तरह अचानक गिरने लगे तो पानी या दूसरे द्रव पेय पिला कर उसे सामान्य स्थिति में लाया जाता है।
अगर आप अपने हेल्थ के प्रति सजग रहने वाले लोगों में शुमार हैं तो आपके डॉक्टर ने आपको जाड़े में, खास कर नवंबर से जनवरी तक, हाई ब्लड प्रेशर को लेकर खासा एहतियात बरतने की सलाह दी होगी। जाड़े में ब्लड प्रेशर के बढ़ जाने का खतरा बहुत रहता है। जाड़े में सभी को नमक कम खाने की सलाह दी जाती है। गर्मी में रक्तचाप को लेकर रणनीति बदलनी पड़ती हैं। गर्मी में जाड़े की तरह ब्लड प्रेशर के बढऩे का खतरा नहीं होता बल्कि उसके ‘निम्नÓ (लो) हो जाने का खतरा होता है। डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) ब्लड प्रेशर को खतरनाक स्तर तक कम कर सकता है, इसलिए डॉक्टर गर्मी में अधिक पानी पीने के साथ खाने में नमक की मात्रा हल्की-सी बढ़ा देने की भी सलाह देते हैं।
क्या है नार्मल (सामान्य),
क्या है अबनार्मल (असामान्य)!

बच्चा जब जन्म लेता है तो सामान्य स्थिति में उसका बल्ड प्रेशर 90 बाई 60 रहता है। उम्र बढऩे के साथ-साथ ब्लड प्रेशर में ऊपर और नीचे, दोनों में वृद्धि होती चली जाती है और खून को साधने की जुगत नहीं की तो यही ब्लड प्रेशर बढ़ कर 200 बटा 130 जैसे खतरनाक स्तर से भी ज्यादा हो सकता है। यह स्थिति आ गई तब तो एक क्षण भी गंवाना जान पर भारी पड़ सकता है। यह तत्काल इलाज शुरु कर देने की स्थिति है।

किडनी और उच्च रक्तचाप होते है सहोदर भाई की तरह
किसी को बार बार पेशाब आता है तो सबसे पहले जो आशंका मन में उभरती है वह है मधुमेह की। शुगर की जांच रिपोर्ट सामान्य होने पर भी ऐसा नहीं माना जा सकता कि चिंता की कोई बात नहीं हैं। ऐसा उच्च रक्तचाप की वजह से भी हो सकता है। अगर ऐसा हो तो समझिए, हाई ब्लड प्रेशर ने किडनी को क्षति पहुंचाना शुरु कर दिया है। पूसा रोड स्थित बीएलके सुपर स्पेशियैलिटी अस्पताल के जाने माने किडनी विशेषज्ञ डॉ. सुनील प्रकाश के अनुसार: ‘उच्च रक्तचाप और किडनी के बीच गहरा संबंध है। मधुमेह की तरह ही उच्च रक्तचाप किडनी पर प्रतिकूल असर डालता है। किडनी की खराबी भी उच्च रक्तचाप का कारण बनती है। कहने का मतलब है कि लोगों को उच्च रक्तचाप और खराब किडनी के दुश्चक्र में फंसने से बचना चाहिए।

वह कहते हैं: अगर किसी को उच्च रक्तचाप हो तो किडनी की जांच जरुरी है। अगर किडनी की वजह से उच्च रक्तचाप है तो फिर खास इलाज और एहतियात की जरुरत पड़ेगी। कई मामलों में पहले किडनी की वजह से उच्च रक्तचाप होता है फिर उच्च रक्तचाप किडनी को और खराब करने लगता है। यह बेहद विकट स्थिति है। उच्च रक्तचाप के मरीजों को समय समय पर यूरिया की जांच जरूर करानी चाहिए। किडनी का हाल जानने के लिए अल्ट्रासाउंड भी करा लेना चाहिए।

वैसे ही खून बहुत तुनक मिजाज होता है। कहीं किसी सभा में भाषण दिया हो या आपने कुछ किलोमीटर की जॉगिंग की हो या किसी भावुक क्षण से गुजरे हों तो वह उफन उठता है। यह सबके साथ होता है। उस समय ब्लड प्रेशर नपवाया जाये तो लग सकता है कि व्यक्ति हाई ब्लड प्रेशर का शिकार हो गया है। लेकिन यह हाई ब्लड प्रेशर नहीं है। अगर सामान्य स्थिति में भी लगातार ब्लड प्रेशर अधिक हो तो जरूर चौकस हो जाना चाहिए। हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ.के. के. अग्रवाल बताते हैं।

‘एक स्वस्थ वयस्क में 120 बाई 80 एक सामान्य ब्लड प्रेशर है। उसका 140 बाई 90 हो जाना अच्छा संकेत नहीं है। सामान्य स्थिति में लगातार यह रीडिंग आ जाए तो समझना चाहिए कि आप हाई ब्लड प्रेशर के कगार पर पहुंच गए हैं। ऊपर या नीचे, किसी में भी वृद्धि दिखे तो चिंता की बात है। इस स्थिति में पहुंचने के बाद ही ब्लड प्रेशर को मैनेज करने की दिशा में कोशिश शुरु कर देनी चाहिए।

डॉक्टरों के अनुसार 120 बाई 80 से रक्तचाप के बढ़ जाने के बाद 6 महीने तक जीवन शैली में माकूल परिवर्तन कर दवा से बचने की कोशिश करने में कोई हर्ज नहीं है। लेकिन इसके बाद भी आपका ब्लड प्रेशर मैनेज न हो, तो फिर दवा लेनी चाहिए।

डॉक्टरों के अनुसार: ‘यह सोच कर कि दवा शुरु कर देंगे तो जिंदगी भर दवा खानी पड़ेगी, दवा से दूर रहना सुरक्षित सोच नहीं है। क्योंकि अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर आंखों, किडनी एवं धमनियों को क्षति पहुंचाता है। मधुमेह के मरीजों के लिए खतरे की स्थिति पहले ही आ जाती है। उनका ब्लड प्रेशर जैसे ही 130 बाई 80 पहुंचे, उन्हें ब्लड प्रेशर का इलाज शुरु कर देना चाहिए। ब्लड प्रेशर की नाप बेहद संवेदनशील क्रिया है। नापने के तरीके से भी फर्क पड़ता है। इसलिए उसी डॉक्टर से ब्लड प्रेशर नपवाना चाहिए जिसे इसका तरीका मालूम हो।

55 से अधिक उम्र, पारिवारिक इतिहास, हद से अधिक वजन, बैठे रहना, बहुत ज्यादा शराब पीना, सिगरेट पीना, तला हुआ भोजन करना और बहुत ज्यादा नमक खाना। ये सभी हाई ब्लड प्रेशर के जोखिम कारक हैं। खराब जीवन शैली और खान पान की बेतरतीब आदतों ने हाई ब्लड प्रेशर को आज महामारी का रूप दे दिया है।

धनंजय कुमार

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