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शैतानी दिमाग की उपज है बलात्कार

बलात्कारियों की मानसिकता क्या होती है?
बलात्कारी चाहे उच्च परिवार का हो या निम्न आर्थिक हालात वाले वर्ग का, दोनों ही तरह के बलात्कारियों की मानसिकता अपराधिक ही होती है। उनके दिल को दूसरे की पीड़ा से खुशी मिलती है। जैसे कोई बाज अपने शिकार पर टूटता है, या कई बार बिल्ली चूहे को खेल खिला कर पकड़ती है। यही कुछ मानसिकता बलात्कारियों की होती है।

इस प्रकार की मानसिकता के कारण क्या हैं?
कारण एक नहीं, कई तरह के होते हैं। कभी एक प्रकार का कारण प्रबल हो जाता है तो कभी दूसरी प्रकार का कारण बलात्कारी पर हावी होता है। जैसे कभी माहौल बलात्कार का कारण बनता है तो कभी बदला लेने की भावना बलात्कार के लिए अपराधी को उकसा देती है। जैसे कोई महिला अंधेरे और सुनसान इलाके से जा रही हो, अपराधी प्रवृति का व्यक्ति उसे देख कर उसकी ओर बढ़ता है। वह सोचता है उसे रोकने वाला कोई नहीं है। उस वक्त उसके मन में कानून का डर भी नहीं होता। यह कहा जाए तो गलत नहीं होगा कि उसे कानून याद भी नहीं आता। वह बस अपने शिकार की ओर बढ़ता है। यही नहीं जैसे युद्ध में सैनिकों की बलात्कार की प्रवृति होती है हारे हुए देश की जनता को अधिक से अधिक नीचा दिखाने की। ऐसा छोटी बच्चियों के साथ अधिक होता है। नन्हीं बच्चियां बोल नहीं पातीं। ऐसे अपराधी को साइकोपैथ कहा जाता है। ऐसा अक्सर घिनौनी प्रवृत्ति के लोग करते हैं जो शराब के नशे में अधिक होते हैं। शराब उनकी खराब मानसिकता को अधिक खराब कर देती है।

क्या अमीरी-गरीबी भी बलात्कार का कारण बनती है?
अमीरी-गरीबी का अंतर भी बलात्कार का कारण बनता है। अमीर लड़का किसी गरीब लड़की के साथ बलात्कार इसलिए करता है कि उस पर अमीरी का नशा सवार रहता है। गरीब लड़का कुंठा में बलात्कार करता है। लेकिन दोनों ही वर्गों के बलात्कारी यह घिनौना अपराध इसलिए करते हैं कि उन्हें किसी तरह का कोई डर नहीं होता।

कानून और पुलिस का कितना डर बलात्कारियों को रहता है?
केवल उतना ही डर होता है, जितना कि अन्य प्रकार के अपराध करने वालों को होता है। वैसे यह कहा जाए कि अपराधियों को पुलिस और कानून का कोई डर ही नहीं रह गया है तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। अमीर सोचता है कि उसकी जेब में पैसा है और गरीब सोचता है पुलिस उसका क्या छीन लेगी।

लेकिन अब तो बच्चियां और जवान लड़कियां घर में भी महफूज नहीं हैं? पिता ही अपनी बेटी का बलात्कार करता है?
ऐसे बहुत सारे केस सामने आ रहे हैं जब पिता-चाचा ही अपनी बच्चियों से ही बलात्कार कर रहे हैं। अन्य रिश्तेदार भी अपनी ही बच्चियों से रेप करते हैं। उनकी मानसिकता भी यही होती है कि बच्ची अपने पिता के खिलाफ तो कुछ कहेगी नहीं। जब वह डर ही मन से निकल जाता है तो वे बलात्कार और अपनी बच्चियों का यौन शोषण करते हैं।

बलात्कार के मामले अब अधिक हो रहे हैं। क्या बलात्कार पहले नहीं होते थे? इनके बढऩे के क्या कारण हैं?
बलात्कार तो सदियों से इसी प्रकार होते आ रहे हैं। कारण भी वही रहे हैं। अब अन्तर यह आ गया है कि ये मामले अब अधिक से अधिक प्रकाश में आ रहे हैं। मीडिया ने समाज को जागरूक कर दिया है। महिलाएं भी बोल्ड हो गई हैं। पहले उनके मन में एक शर्म हुआ करती थीं और बलात्कार के लिए वे खुद को कहीं कलंकनी मानती थीं या समाज उन्हें ऐसा

मानने के लिए मजबूर कर देता था। लेकिन महिलाएं अब समझने लगी हैं कि इसमें उनका कोई कसूर नहीं है। कसूर तो बलात्कार करने वाले का है। अदालतों के हस्तक्षेप से भी ऐसे मामलों की पुलिस में रिपोर्टिंग अधिक होने लगी है।

इस प्रकार के घिनौने अपराधों को रोकने में समाज की क्या भूमिका होनी चाहिए?
समाज और मां-बाप की तो बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है इस प्रकार के अपराधों को रोकने में। कानून को सख्त बनाया गया है। लोग जागरूक हो रहे हैं। स्कूलों में यौन शिक्षा बेहतर ढंग से देंगे तो बच्चे-बच्चियां अच्छे बुरे का फर्क समझेंगे। मां-बाप को अपनी बच्चियों को समझाना होगा कि वे अपनी छोटी से छोटी बात उन्हें बताएं। अच्छे बुरे ‘टच’ का फर्क बच्चियों को समझाएं। स्कूल में शिक्षक बेमतलब बच्चियों के शरीर को ‘टच’ करते हैं। बात बात में वे उन्हें छूने की कोशिश करते हैं। यह बात भी बच्चियों को अपने मां-बाप को बतानी चाहिए। प्रस्तुति: उदय इंडिया ब्यूरो

अमिताभ साहा
सीनियर मनोचिकित्सक पुष्पांजलि क्रास ले हॉस्पीटल

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