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सख्ती से लागू हो कानून

दामिनी रेप केस के बाद हाल ही में पांच साल की मासूम के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में एक बार फिर से महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा दिया है। आम आदमी पार्टी ‘आप’ द्वारा मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने वालों को मौत की सजा की मांग की जा रही है। साथ ही केंद्र सरकार द्वारा भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार) व 354 (महिलाओं के साथ होने वाली छेड़छाड़) में किए गए बदलाव को नाकाफी मान रही है ‘आप’। इस बारे में पेश है हमारे वरिष्ठ संवाददाता अरुण कुमार राघव की ‘आप’ के प्रवक्ता मनीष सिसोदिया से बातचीत-
केंद्र सरकार द्वारा भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और 354 में किए गए बदलाव के बारे में आम आदमी पार्टी (आप) का क्या कहना है। आप आईपीसी की धारा में किए गए बदलाव को किस नजरिये से देखते है।
‘आप’ का मानना है कि दामिनी कांड के बाद जल्दबाजी में आईपीसी की धारा 376 और 354 में संशोधन करके उन्हें सख्त बनाने का प्रयास किया गया है। लेकिन सवाल यह है कि इनका सख्ती से पालन कैसे कराया जाएगा। क्या पुलिस शिकायत करने वाले लोगों की प्राथमिकी तुरंत दर्ज करेगी? जबकि हमारे कानून में महिलाओं के साथ घटित होने वाले ऐसे अपराधों पर तुरंत प्राथमिकी दर्ज करने का प्रावधान है। लेकिन पुलिस ऐसा नहीं करती। यदि पुलिस सही तरीके से काम कर रही होती, तो देश और राजधानी दिल्ली में महिलाएं रात में अपने आप को सुरक्षित महसूस करतीं। कानून सख्त करने के साथ जब तक उसे सख्ती से लागू नहीं किया जाएगा, समाज में महिलाओं के खिलाफ होने वाली घटनाएं घटित होती रहेंगी। भारत में बलात्कार व छेड़छाड़ के मामलों से संबंधित आंकड़े बताते हैं कि कुल दर्ज होने वाले मामलों में से एक तिहाई मामलों में सजा हो पाती है, जबकि बाकी मामलों में आरोपी बरी हो जाते हैं। छोटी घटना के लिए छोटी सजा और बड़ी घटना के लिए बड़ी सजा, कुल मिलाकर सजा शत प्रतिशत होनी चाहिए। जब तक ऐसा नहीं होगा, लोग कानून का उल्लघंन करना बंद नहीं करेंगे।

केंद्र सरकार ने महिलाओं के लिए हेल्प लाइन सेवा शुरू की है। उसके बारे में ‘आप’ का क्या कहना है? क्या ‘आप’ समाज में जागरुकता लाने के लिए हेल्प लाइन सेवा का प्रचार करेगी?
केंद्र सरकार की हेल्प लाइन या दिल्ली पुलिस कंट्रोल रुम पर फोन करके यदि लोगों को सुरक्षा मिल रही होती, तो गुडिय़ा के परिवार वाले ‘आप’ को फोन करके सहायता क्यों मांगते? यहां सवाल यह भी उठता है कि आखिर दिल्ली पुलिस कंट्रोल रुम में फोन करने वालों की सहायता क्यों नहीं करती। उल्टा थाने केवल जनता को परेशान करने व उगाही का केंद्र बनकर रह गए है। केंद्र सरकार की हेल्प लाइन का नंबर देश की राजधानी में रहने वाले लाखों लोगों को नहीं मालुम है। इसका मतलब यह हुआ कि केंद्र सरकार महिला हेल्प सेवा का नंबर जनता तक पहुंचाने में विफल रही है। स्पष्ट है कि राजधानी में न तो केंद्र सरकार की हेल्प लाइन काम कर रही है और न ही पुलिस थाना।

क्या ‘आप’ ने महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने को लेकर कोई योजना बनाई है?
‘आप’ महिलाओं की सुरक्षा को लेकर काफी गंभीर है और महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ‘आप’ ने महिला सुरक्षा दल का गठन करने की योजना बनाई है। महिला सुरक्षा दल का आरंभ दिल्ली से होगा और दिल्ली की सभी विधानसभाओं में रहने वाले ‘आप’ के कार्यकर्ताओं से इसकी शुरुआत करने का आह्वान किया गया है। इसके अलावा ‘आप’ एक महिला हेल्प लाइन भी शुरु करने जा रही है। फिलहाल इस हेल्प लाइन के लिए नंबर का चयन किया जा रहा है। ‘आप’ चाहती है कि नंबर ऐसा हो, जिसे आसानी से याद रखा जा सके।

वर्तमान में चल रहे आंदोलन को ‘आप’ कहां तक ले जाएगी?
देखिए जब तक महिलाओं व बच्चियों के साथ होने वाले छेड़छाड़, बलात्कार आदि के मामलों में आरोपियों को सख्त से सख्त सजा का प्रावधान नहीं किया जाता, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा। केंद्र सरकार कानून को सख्त बनाकर और उसे लागू करने में अपनी तत्परता दिखा सकती थी और देश की जनता महिलाओं की सुरक्षा के प्रति संवेदनशील होने का एक संदेश दे सकती थी। लेकिन केंद्र सरकार ने एसा नहीं किया। यही कारण है कि अब समाज को खुद महिला सुरक्षा के लिए खुद कुछ करना होगा। ‘आप’ केवल समाज को एक साथ लेकर महिलाओं को यह एहसास दिलाने का प्रयास कर रही है कि भारत में महिलाएं रात में भी कहीं भी आ-जा सकती हैं।

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