ब्रेकिंग न्यूज़ 

धर्म के लिए कुर्बान होते हिंदू

भारत भले ही एक सेकुलर राज्य हो लेकिन यह एक निर्विवाद तथ्य है कि दुनिया में हिंदुओं का एकमात्र देश भारत ही है और इसलिए पूरी दुनिया में हिंदू जब भी संकट में होते हैं तो वे भारत की ओर ही आशाभरी नजरों से देखते हैं। पाकिस्तान से आए 625 हिंदू भी भारत की ओर आशाभरी नजरों से देख रहे हैं। बात केवल इन 625 हिंदुओं की नहीं है, बात पाकिस्तान में बसे 22 लाख और बांग्लादेश में बसे सवा करोड़ हिंदुओं की भी है। इन पर होने वाले अत्याचारों के प्रति भारत आंखें मूंदे नहीं रह सकता। इसलिए आज आवश्यकता है कि भारत पाकिस्तान और बांग्लादेश पर नेहरू-लियाकत समझौते को मानने के लिए दबाव डाले और उनके ऐसा नहीं करने पर उनके साथ सभी प्रकार के कूटनीतिक संबंध, व्यापार और अन्य समझौते समाप्त कर दे।

भारत सरकार को यह मुद्दा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में भी उठाना चाहिए ताकि पाकिस्तान और बांग्लादेश पर इन अत्याचारों के लिए प्रतिबंध लगाया जा सके। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग को इन घटनाओं का संज्ञान लेना चाहिए और पीडि़तों को हर प्रकार की सहायता उपलब्ध करानी चाहिए। यह काफी गंभीर मामला है और सरकार को इसमें अविलंब कार्रवाई करनी चाहिए।

तात्कालिक समाधान के तौर पर पाकिस्तान, बांग्लादेश और अन्य किसी भी देश से सांप्रदायिक उत्पीडऩ के कारण भारत आने वाले हिंदुओं को शरणार्थी का दर्जा देकर उन्हें नागरिकता दी जानी चाहिए जिससे उन्हें भारत के अन्य नागरिकों की भांति ही सारे अधिकार मिल सकें। वीसा की अवधि में वृद्धि मांगने वालों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। उन्हें बीपीएल श्रेणी में रखा जाना चाहिए, ताकि वे अपनी जीवनरक्षा कर सकें, क्योंकि अभी इन शरणार्थियों को बैंक अकाउंट खोलने, ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने और व्यापार करने की छूट नहीं है। उन्हें शिक्षा का अधिकार और अपनी आजीविका कमाने का भी पूरा अधिकार दिया जाना चाहिए। ऐसी सुविधाएं जब तिब्बती शरणार्थियों को दी जा चुकीं हैं, तो इन्हें इनसे वंचित रखना एक विडंबना ही है।

वास्तव में इन हिंदू परिवारों का तो देश के हिंदू समाज द्वारा सम्मान किया जाना चाहिए था, क्योंकि पाकिस्तान में अमानवीय अत्याचार झेलने के बाद भी इन्होंने अपना हिंदू धर्म नहीं छोड़ा। ऐसे अत्याचारों के कारण पाकिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले हिंदुओं को पाकिस्तान और बांग्लादेश से उनकी वहां छूट गई जमीन-जायदाद का मुआवजा दिलवाया जाना चाहिए।

भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह हाल ही में बिजवासन में ठहरे 511 हिंदुओं से मिलने गए। उन्होंने भारत सरकार से उनकी वीसा की अवधि बढ़ाए जाने की मांग की है क्योंकि उनके वापस जाने का अर्थ निश्चित मौत ही है। अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर बुक्का फाड़ कर रोने वाले भारतीय राजनेताओं को इन बेचारों की सुध लेने का समय नहीं मिला, जबकि उन्हें विशेष रूप से इनकी दयनीय अवस्था के बारे में बताया गया था। इससे पता चलता है कि संसद में पाकिस्तानी हिंदुओं के उत्पीडऩ पर हुई बहस निरर्थक ही थी।

इन शरणार्थियों का कहना है कि वे पाकिस्तान जाने की बजाय भारत की जेलों में रहना पसंद करेंगे। उनका कहना है कि पाकिस्तान में हिंदू सुरक्षित नहीं है। वहां स्त्रियों का अपहरण किया जाता है, उनका बलात्कार होता है और फिर उन्हें जबरन मुसलमान बनाया जाता है। हिंदू वहां अपने मृतकों का अंतिम संस्कार तक नहीं कर सकते क्योंकि मुसलमान उन्हें दफनाने के लिए कहते हैं।

पंजाब और मध्य प्रदेश में लगभग 10000 हिंदू (अवैध रूप से) रह रहे हैं। उनके वीसा की अवधि समाप्त हो गई है। उन्होंने स्थानीय अधिकारियों के पास स्थाई रूप से यहां रहने की अनुमति के लिए आवेदन किया है, लेकिन केंद्र ने अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है। भाजपा अकेला दल है जिसने इन शरणार्थियों को नागरिकता दिये जाने के लिए आवाज उठाई है। भाजपा ने इस मुद्दे को केंद्र सरकार के पास उठाने के लिए तीन सदस्यीय एक समिति का भी गठन किया है। समिति ने पंजाब में रह रहे ऐसे शरणार्थियों की एक सूची भी बनाई है। पाकिस्तान में हिंदुओं की संख्या लगातार घटी ही है। परंतु संख्या से अधिक महत्वपूर्ण है उनकी सामाजिक व राजनीतिक स्थिति। वहां के हिंदुओं की सामाजिक-राजनीतिक स्थिति निरंतर खराब हुई है। वे वहां मूल अधिकारों से भी वंचित हैं। हिंदू स्त्रियों पर अमानवीय अत्याचार जारी हैं। अपहरण और बलात्कार वहां आम घटनाएं हैं। पिछले वर्ष ब्रिटिश सांसदों के एक प्रभावी समूह ने भी पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदुओं की दुरावस्था पर खेद व्यक्त किया था।

पाकिस्तान के पहले गवर्नर जनरल मोहम्मद अली जिन्ना ने 11 अगस्त, 1947 को कंस्टीट्यूएंट असेंबली के सामने अपने भाषण में कहा था: “आप स्वतंत्र हैं, आप अपने मंदिरो-मस्जिदों या अपने अन्य उपासना स्थलों में जाने के लिए स्वतंत्र हैं। आप किसी भी जाति या संप्रदाय के हों, इससे राज्य को कोई लेना-देना नहीं है। हम इस मूल सिद्धांत के साथ नया देश बना रहे हैं कि हम सब एक राज्य के नागरिक हैं और एक समान नागरिक हैं।”

सवाल है कि क्या पाकिस्तान की आज की सरकारें अपने संस्थापक की इस बात पर खरी उतर पा रही हैं?

михаил безлепкин интервьюстатистика ключевых запросов

Leave a Reply

Your email address will not be published.