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दादी नानी का थैला दिल दा मामला है

शरीर में हृदय ऐसा अंग है जो व्यक्ति के पैदा होने से लेकर उसके मरने तक लगातार काम करता रहता है। हृदय एक बार बंद हुआ तो समझो जीवन समाप्त हो गया। हृदय की देखभाल करने के लिए सुबह कम से कम 40 मिनट रोज घूमना चाहिए और हृदय से संबंधित जांच कराते रहना चाहिए। जांच की रिपोर्ट के अनुसार डॉक्टर की सलाह पर चलना चाहिए।

हृदय की देखभाल के लिए हमारी रसोई में भी ऐसे पदार्थ मौजूद हैं जो देखने में तो सामान्य हैं लेकिन हृदय को बड़े परेशानी से बचा सकते हैं।

प्याज का रस
सामग्री: एक छोटी प्याज, थोड़ी सी अदरक, देसी पान के पांच पत्ते, लहसुन की पांच कलियां और शहद।
विधि: प्याज, अदरक, देसी पान के पत्ते और लहसुन को एक साथ मिक्सी में डाल कर चटनी बना लें। जब बारीक चटनी बन जाए तो साफ कपड़े से छान कर रस निकाल लें। यदि मधुमेह से पीडि़त न हों तो इस रस में एक चम्मच शहद मिला लें। इस रस को सुबह-शाम खाली पेट पीएं। इस रस को पीने से आधा घंटा पहले और आधा घंटा बाद तक कुछ खाएं पीएं नहीं। इससे धमनियों में चर्बी (फैट)नहीं जमेगी और रक्त का प्रवाह लगातार बना रहेगा। यह उच्च रक्तचाप में भी लाभदायक है।

हृदय पर लेप
सामग्री: उड़द की दाल 100 ग्राम, अरंडी का तेल 10 ग्राम, शुद्ध गूगल 10 ग्राम, गाय के दूध का शुद्ध मक्खन 10 ग्राम।
विधि: उड़द की 100 ग्राम दाल रात को गर्म पानी में भिगो दें। सुबह उसे सिल-बट्टे पर अथवा मिक्सी में अच्छी तरह पीस लें। उसमें अरंडी का 10 ग्राम तेल, गाय के दूध का शुद्ध मक्खन और 10 ग्राम शुद्ध गूगल भी मिला लें। इनका लेप बना कर उसे छाती पर लगायें। यह लेप हृदय पर अधिक लगाएं। पसलियों तक लेप लगाएं। लेप को लगभग दो से तीन घंटे तक लगा रहने दें। सूख कर अपने आप उतर जाने दें। यह लेप महीने में केवल सात दिन लगाएं। इससे धमनियां में जमा चर्बी (फैट) निकल जाएगी और धमनियां खुल जाएंगी।

भोजन ऐसे पकाएं
खाद्य पदार्थो की पौष्टिकता बरकरार रखने के लिए भोजन पकाने में कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए। इन सावधानियों से न केवल भोजन की पौष्टिकता बरकरार रहती है, बल्कि भोजन भी बहुत स्वादिष्ट बनता है।

चावल: चावल पकाने से पहले उसे धोने के लिए अधिक जल का इस्तेमाल नहीं करें। इससे विटामिन-बी समूह वाले पौष्टिक तत्वों में कमी आ जाती है। चावल का मांड निकाल देने से उसमें मौजूद विटामिन और खनिज निकल जाते हैं। चावल पकाने के लिए केवल उतने जल का ही प्रयोग करें जो पकते समय चावलों में समा जाए और मांड फेंकना नहीं पड़े।

दाल: दाल जल्दी पकाने के लिए उसमें मीठा सोडा नहीं डालना चाहिए। मीठा सोडा डालने से दाल में मौजूद विटामिनों में रासायनिक क्रिया शुरू हो जाती है मीठा सोडा विटामिनों को नष्ट कर देता है। दाल को अंकुरित कर पकाने से उसमें पौष्टिक तत्व और विटामिनों की मात्रा बढ़ जाती है।

सब्जियां: भोजन पकाने से पहले सब्जियों को बारीक काट कर नहीं रखना चाहिए। सुविधा के लिए यदि सब्जी काट कर रखना चाहें तो बारीक नहीं काटें, बल्कि बड़ा बड़ा काटें और पकाते समय उन्हें बारीक काटें। पकाने से काफी पहले सब्जी काटने से उनमें मौजूद विटामिन-सी का ऑक्सीकरण हो जाता है। इससे विटामिन-सी नष्ट हो जाता है। सब्जी पकाने के लिए कम जल का प्रयोग करें और अधिक देर तक नहीं पकाएं। अधिक जल डाल कर देर तक पकाने से सब्जी की पौष्टिकता कम हो जाती है।

दूध और गुड़: दूध में गुड़ डाल कर देर तक नहीं उबालना चाहिए। इससे दूध में प्रोटीन की मात्रा नष्ट हो जाती है।

अनिल बंसल

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