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मन द्वारा उपचार

मन का कोई नाम या रूप नहीं होता। अरूप अनाम होने पर भी इसकी शक्ति का कोई ओर-छोर नहीं है। मन एक शक्ति है, एक रोशनी है। मन की एक किरण भी जीवन और जगत की ऊँचाई तक पहुँचाने में सक्षम है। अपने मन की शक्ति को पहचानने और अपने तन-मन को स्वस्थ रखने के लिये बहुचर्चित लेखक सीताराम गुप्ता ने ‘मन द्वारा उपचार’ पुस्तक का सृजन किया है। यह पुस्तक उनके स्वयं के अनुभव के साथ-साथ मन द्वारा उपचार की विभिन्न विधियों के गहन अध्ययन-मनन की सार्थक एवं प्रभावी प्रस्तुति है। लेखक की इस विषय में गहरी पकड़ का कारण श्रेष्ठ-मनीषी गुरुओं से प्राप्त प्रशिक्षण एवं उसके आधार पर गहन-गंभीर साधना है। रैकी, विपश्यना, हिप्नोथेरेपी, साइकिक सर्जरी, क्रिस्टल हीलिंग, लामापफेरा, पेंडुलम डाउजिंग, क्रिया-योग जैसी अनेक विधियों पर निरन्तर प्रयोग एवं शोध के पश्चात मन द्वारा उपचार जैसे गहन आध्यात्मिक एवं गंभीर विषय को लेखक ने लोकव्यापी बनाया है और उसके वैचारिक पक्ष को समृद्ध किया है। लेखक ने विषय के व्यावहारिक एवं प्रायोगिक स्वरूप को प्रगट किया और उसे सरल शब्दों में व्याख्यायित किया। प्रस्तुत कृति में लेखक ने व्यक्ति, परिवार बल्कि समाज, राष्ट्र और विश्व के संदर्भ में मन की गहन और विस्तृत विवेचना की है। विशेषज्ञों ने जो विचार दिए, उन्हीं विचारों को इस पुस्तक में संकलित कर मन द्वारा उपचार का नया आलोक बिखेरा गया है, जो पाठकों के पथ को आलोकित करता है। साथ-ही-साथ जीवन के सार्थक आयाम एवं दिशाओं को उद्घाटित करता है।

इस पुस्तक में ये विषय आये हैं वे हैं- अपना उद्धार स्वयं करें, मन द्वारा उपचार क्या है?, रोगों का मनोदैहिक स्वरूप, मन द्वारा उपचार कैसे संभव है? मन द्वारा उपचार की विभिन्न विधियां, विभिन्न पद्धतियों में समान तत्व, प्रमुख सीढिय़ां, साधना के लिये समय, स्थान तथा परिवेश, निश्चयात्मक स्वीकारोक्ति की तकनीकें, किस प्रकार की बीमारियों का उपचार संभव एवं मन द्वारा उपचार इत्यादि ग्यारह लेख। यह पुस्तक मन द्वारा उपचार को परम प्रतिष्ठा देती है क्योंकि संभवत: इतनी सहज और सरल अभिव्यक्ति में मन की इतनी गूढ़ एवं गहन विवेचना का यह अपना एक अनूठा और मौलिक प्रयास है। किसी रेगिस्तान को सबसे सुंदर यह बात बनाती है कि उसकी रेत में कहीं-कहीं एक कुआं छिपा होता है। ठीक उसी तरह मनुष्य जीवन को सबसे सुंदर जो चीज बनाती है वह है उसका मन। प्रस्तुत पुस्तक उसी मन की शक्ति एवं महत्व से महरूम होते जीवन में मन की विलक्षण एवं चमत्कार-सरीखी ताकत का संचार करने और जीने का नया नजरिया प्रस्तुत करने की सार्थक कोशिश करती है।

डॉ. कर्णसिंह ने इस पुस्तक की भूमिका में लिखा है कि मन द्वारा उपचार की कला का अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिये, भावनात्मक सन्तुलन के लिये, आध्यात्मिक उन्नति के लिये, व्यक्तित्व विकास तथा आर्थिक समृद्धि के लिये, सामाजिक व्याधियों एवं बुराइयों के उपचार के लिये तथा जीवन में लक्ष्य प्राप्ति के लिये कारगर रूप से उपयोग कर सकते हैं। सीताराम गुप्ता एक प्रबद्ध एवं जागृत लेखक हैं। उनके मन में व्यक्ति व समष्टि के उत्कर्ष की गहरी तड़प है। सामाजिक परिप्रेक्ष्य में अध्यात्म एवं मूल्यों की प्रतिष्ठा के लिये वे निरन्तर प्रयासरत है ।

सृजन में शोर नहीं होता। साधना के जुबान नहीं होती। किंतु सिद्धि में वह शक्ति होती है कि हजारों पर्वतों को तोड़कर भी उजागर हो उठती है। यह कथन मन द्वारा उपचार पुस्तक के सृजन पर अक्षरश: सत्य सिद्ध होता है। लेखक आधुनिक साहित्य से भली-भांति परिचित हैं। वे गहराई के साथ अध्ययन करते हैं और लिखते भी खूब हैं।

ललित गर्ग

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