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सलाम वीर जवान

सलाम वीर जवान

दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन में हिमस्खलन की वजह से 3 फरवरी को जिंदा दफन हुए 9 वीरों के शवों को दिल्ली लाया गया, जहां रक्षा राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह, सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह सुहाग, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अरूप राहा तथा अन्य लोगों ने शहीदों को पुष्पचक्रअर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इन जाबाजों ने जितनी बहादुरी से दुश्मनों का सामना किया, उतने ही साहस के साथ प्रकृति के प्रकोप को भी सहा, लेकिन अंत में भारतमाता की सुरक्षा में तैनात देश के इन वीर जवानों ने सियाचिन में अपने जीवन की अंतिम सांस लेते हुए सबको अलविदा कर दिया। साथ ही सलाम है हनुमनथप्पा को जिन्होंने अपनी अंतिम सांस तक जीवटता की मिसाल कायम की।



लांस नायक हनुमानथप्पा


हनुमानथप्पा 14 साल पहले मद्रास रेजीमेंट की 19वीं बटालियन से जुड़े थे, इन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई दुरूह क्षेत्रों में अपनी सेवाएं देते हुए अपने आद्म्य साहस और बहादुरी का परिचय दिया।



सूबेदार नागेश टीटी


05-03-2016

ये जूनियर कमीशंड अधिकारी थे जिन्हें ‘रैम्बो’ भी कहा जाता था। नागेश ने अपने 22 साल के सेवाकाल में 12 वर्ष दुरूह क्षेत्रों में सेवा दी। अपने करियर के दौरान उन्होंने ‘ऑपरेशन पराक्रम’ और ऑपरेशन रक्षक में भाग लिया। एनएसजी में भी तीन साल तक कमांडो के रूप में स्वेच्छा से सेवा दी।



लांस हवलदार एस कुमार


05-03-2016

ये निष्ठावान तथा ईमानदार सैनिक थे और 31 अक्टूबर 1998 को मद्रास रेजीमेंट में शामिल हुए थे। अपने 17 साल के सेवाकाल में 9 साल तक वह कठिन और चुनौती भरे स्थानों पर तैनात रहे। इनकी सियाचिन ग्लेशियर में 2 बार तैनाती हुई।



हवलदार एलुमलाई एम


05-03-2016

ये नॉन कमीशंड ऑफिसर (एनसीओ)थे जो 28 अक्टूबर 1996 को मद्रास रेजीमेंट की19वीं बटालियन में भर्ती हुए थे और तब से बटालियन का अभिन्न हिस्सा रहे थे। उन्होंने हमेशा अपने साहस का प्रदर्शन किया। जम्मू-कश्मीर व पूर्वोत्तर में आतंकवादियों के खिलाफ अनेक सफल अभियानों को अंजाम दिया।



लांस नायक सुधीश बी


05-03-2016

लांस नायक सुधीश बी को ‘ऑल इन वन’ के नाम से भी जाना जाता था। इन्होंने बहादुरी का परिचय देते हुए जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ ‘ऑपरेशन रक्षक’ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आतंकवाद से मुकाबले के लिए खुफिया टीम और कई सफल अभियानों में भी मदद की।



सिपाही महेश पीएन


05-03-2016

मद्रास रेजीमेंट की 19वीं बटालियन में 10 अक्टूबर 2005 को शामिल हुए सिपाही महेश पीएन ने 11 साल के सेवाकाल में 7 साल तक दुर्गम और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में काम किया। अचूक निशानेबाज होने की वजह से बटालियन की फायरिंग टीम का हिस्सा थे, जिसमें उन्होंने अनेक प्रतियोगिताएं भी जीतीं।



सिपाही एस मुस्ताक अहमद


05-03-2016

30 वर्षीय सिपाही एस मुश्ताक आत्मविश्वास से लबरेज थे। 21 सितंबर 2004 को मद्रास रेजीमेंट में भर्ती हुए एस मुश्ताक को मित्रवत व्यवहार होने की वजह से वरिष्ठों और साथियों से हमेशा समर्थन मिला। पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर में आतंकवादरोधी अभियानों में बटालियन का हिस्सा रहे। वह आंध्र प्रदेश के कुर्नूल जिले के रहने वाले थे।



सिपाही गणेश जी


05-03-2016

5 अप्रैल 2010 को मद्रास रेजीमेंट की 19वीं बटालियन का हिस्सा बने गणेश जी तमिलनाडु के मदुरई जिले के रहने वाले थे। गणेश जी देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत रहते थे। वह हमेशा अपने साथियों को प्रेरित करते थे। उनसे प्रेरित होकर उनके छोटे भाई भी सेना में भर्ती हुए। पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर में आतंकरोधी अभियानों में हिस्सा लिया था।



सिपाही राम मूर्ति एन


05-03-2016

कठिन से कठिन काम के लिये हमेशा तत्पर रहने वाले जांबाज सिपाहियों में से एक राम मूर्ति एन मद्रास रेजीमेंट में 13 दिसंबर 2009 को 19वीं बटालियन में तैनात हुये थे। 7 साल के सेवाकाल में ‘ऑपरेशन राइनो’ में सक्रिय भूमिका निभाई। इन्होंने कई सफल अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।



सिपाही सूर्यवंशी एसवी


05-03-2016

स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने सेना को चुना। 30 सितंबर 2010 को आर्मी मेडिकल कोर में नर्सिंग असिस्टेंट के तौर पर इनका चयन हुआ। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्हें पहली तैनाती पूर्वी कमान में मिली थी।


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