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राशिफल: 1 से 7 जुलाई 2013

मेष
उत्तम और श्रेष्ठ समय है। धन की प्राप्तियां अच्छी रहेंगी। नए विकल्प कारोबार में प्राप्त रहेंगे। उल्लास और प्रकृति के नजदीक रहने की कोशिश रहेंगी। कई दिनों का रूका हुआ काम करने का प्रयास जरूर सफल होगा। पुराने दोस्तों से मित्रता जारी रखना अच्छा रहेगा। शुभ अंक: 7 शुभ रंग: संतरी, दिशा: दक्षिण पूर्व। उपाय: यदि कार्तिकेय भगवान या बाबा बालक नाथ की उपासना करें अथवा मंदिर में जाकर शिवजी के सामने दिया जलाएं तो इनकी प्राप्तियों पर किसी की नजर नहीं लगेगी।
वृषभ
यह समय सामान्य से कुछ अधिक अच्छा रहेगा, लेकिन जातकों को इस सप्ताह अपने स्वास्थ्य की ओर विशेष ध्यान देना होगा। अचल सम्पति में हानि हो सकती है। कारोबार में भी उलट-पलट होने की संभावना है। अपनी राय का बहुत अधिक प्रगट न करें। जब तक आवश्यक न हो तब तक न बोलें। विदेश से भी संबंध हो सकता है। अदालत में यदि कोई मामला चल रहा हो तो वह जातक के पक्ष में सुलझ सकता है। शुभ अंक: 3, शुभ रंग: ग्रे है। दिशा पूर्व। शिव जी की उपासना जीवन में सुख-समृद्धि लाएगी। सोमवार को गाय को गुड़-चना खिलाना भी शुभ रहेगा।
मिथुन
सबसे अधिक परीक्षा का समय है। इस दौरान जो भी करेंगे वह आपके जीवन की प्रेरणा बनेगा। सोच विचार कर अपने समय का सदुपयोग करें। नई नौकरी के विकल्प मिलेंगे लेकिन उन्हें बहुत सोच समझ कर ही स्वीकार करें। नए दोस्तों पर अधिक विश्वास करना हानिकारक साबित होगा। घर में बुजुर्गों के स्वास्थ्य में परेशानी पैदा हो सकती है। शिक्षा के क्षेत्र में कठिनाइयां आ सकती हैं। शुभ अंक: 1 शुभ रंग: बैंगनी, दिशा: पश्चिम। उपाय: गणेश जी की पूजा और रविवार शाम तक मंदिर में गणेश जी के वस्त्र भेंट करना शुभ परिणाम देगा।
कर्क
विदेश से संबंधित कार्यो के लिए समय शुभ है। कार्य में सफलता मिलेगी। घरेलू कलेश या भाइयों के मतभेद सुलझेंगे। जातक को इस समय का सदुपयोग करना चाहिए। यह समय धन दिलाने वाला है। अचल सम्पति में निवेश करने का समय है। परिवार में शुभ घटनाएं घटने का समय है। नौकरी मिलने के लिए भी यह समय बहुत ही उत्तम है। शुभ अंक: 2, शुभ रंग: श्वेत, दिशा: उत्तर पश्चिम है। उपाय: रविवार को गौरी मां को सुहाग की कुछ वस्तुओं के साथ श्वेत रंग का वस्त्र भेंट करें। इससे बुरा समय टलेगा और शुभ समय के परिणामों में वृद्धि होगी।
सिंह
यह सप्ताह शुभ नहीं है। कार्यों में रूकावटें पैदा होंगी। दूसरों से स्पर्धा न करें। अनुमान लगा कर कोई कदम उठाने से भविष्य में नुकसान होने की आशंका रहेगी। इस सप्ताह किसी को यदि पैसा दिया तो उसकी वापसी में संदेह है। दुर्घटना की आशंका, इसलिए रात में घर से बाहर सावधानी से ही निकलें। रक्त स्राव की आशंका है। धैर्य बनाए रखें। शुभ अंक: 8 और शुभ रंग: सुनहरा, शुभ दिशा: दक्षिण पश्चिम। उपाय: पूरे सप्ताह नाम परायण करें यानी पूरे सप्ताह किसी भगवान या अपने ईस्ट देवता का नाम रटें। मंदिर में भगवान की परिक्रमा करें।
कन्या
यह सप्ताह विपरीत परिस्थियों वाला होगा। स्वास्थ्य की जांच अथवा आपरेशन के परिणाम अच्छे निकलेंगे। दूर देश की यात्रा लाभकारी नहीं होगी। किसी का निमन्त्रण स्वीकार न करें। किसी से वाद-विवाद में न पड़ें। उसके परिणाम प्रतिकूल हो सकते हैं। नए व्यवसाय खोलने या नई नौकरी में जाना हो तो इस सप्ताह वह अनुकूल नहीं होगा। जैसा अब तक चल रहा हो, वैसा ही चलने दें। शुभ अंक: 4, शुभ रंग: गहरा हरा। दिशा: उत्तर-पश्चिम है । उपाय: नारायण की उपासना। नारायण को यदि शंख और तुलसी की माला भेंट करना अति शुभ होगा।
तुला
यह समय मृत्यु तुल्य कष्ट वाला है। बड़ों का सम्मान करें और शुभचिन्तकों की सलाह को सुनें। व्यवसाय में भारी नुकसान होने की आशंका रहेगी। प्राकृतिक आपदाएं भी आ सकती हैं। विशेषकर 42 से 49 साल की आयु के लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। घर में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर अधिक चिन्ता हो सकती है। यात्राओं को टालने की कोशिश करें। शुभ अंक: 5, शुभ रंग: काला। दिशा: पश्चिम। उपाय: भगवान श्री कृष्ण की उपासना करने और मंदिर जा कर भगवान श्रीकृष्ण के समक्ष रोज दिया जलाने से परेशानियां दूर हो सकती हैं।
वृश्चिक
समय सुधारने की उम्मीद है। रूके हुए कार्य पूर्ण होंगे। मन में सकारात्मक सोच पैदा होगी और वे आपके लिए मददगार साबित होंगे। सरकार से जुड़े कार्यों के सप्ताह के बीच में होने में सफलता मिलने की संभावना है। विदेश जाने या विदेश से जुड़े कार्यों यदि बुधवार को किए जाएं तो उसमें सफलता मिलने की अधिक संभावना है। खेल या आईटी क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए यह समय बेहतर परिणाम देने वाला है। शुभ अंक: 9, शुभ रंग: नीला। दिशा: उत्तर। उपाय: सरस्वती मां या शारदा देवी की पूजा करें। इससे शुभ परिणामों में वृद्धि होगी।
धनु
सप्ताह के आरम्भ में समय अच्छा है। लेकिन जातक को निराशा नहीं होनी चाहिए। सप्ताह के आरम्भ में किए गए कार्यों से आने वाले महीनों में लाभ मिलेगा। निकटतम संबंधी और मित्रों की मदद और सलाह से लाभ होगा। नौकरी की इंतजार कर रहे जातकों की प्रतीक्षा भी पूरी हो सकती है। स्वास्थ्य की दृष्टि से यह सप्ताह ठीक नहीं है। पेट या आंखों में तकलीफ हो सकती है। किसी प्रिय मित्र की दी हुई पुरानी भेंट के खो जाने से भी मन को ठेस पहुंच सकती है। शुभ अंक: 6 शुभ रंग: पीला। दिशा: दक्षिण। उपाय: शिवजी या कुल गुरू की अराधना शुभ रहेगी।
मकर
सप्ताह अच्छा नहीं है। काम में बाधाएं पैदा होंगी। कोई नवीन कार्य करने से बचें। इस सप्ताह तबादले को टाल दें। डाक्टर से यदि स्वास्थ्य की जांच करानी हो अथवा कोई आपरेशन कराना हो तो इस सप्ताह न कराएं। आवश्यक भी हो तो बुधवार तक न कराएं। अपनों से उलझने की परिस्थितियों से बचें अन्यथा कई प्रकार की मानसिक समस्याएं पैदा होने की आशंकाएं हो सकती हैं। पुलिस-प्रशासन से बचें। शुभ अंक: 4 शुभ रंग: लाल है। दिशा: उत्तर पूर्व है। उपाय: श्री राम की उपासना करें और पूरे सप्ताह प्रतिदिन रामायण की कम से कम चार चौपाइयों का पाठ करें।
कुंभ
कई रूके हुए कार्य पूरे होंगे या पूरे होने की दिशा में बढ़ेंगे। यदि उच्चाधिकारी नाराज चल रहे हों तो उनके रूख में परिवर्तन होगा। अच्छा समय है। उल्लास का समय है। घर का माहौल अच्छा रहेगा। कहीं घूमने जा सकते हैं। बहुप्रतीक्षित कार्यों में सफलता मिलेगी। विदेश से जुड़े कार्य पूरे होंगे। समय का सदुपयोग करें। शुभ अंक: 2 शुभ रंग: फिरोजा शुभ दिशा: पश्चिम है। उपाय: भगवान लक्ष्मीनारायण की पूजा करें और तुलसी मां को जल चढ़ाएं। इससे जीवन में शुभता और खुशियां आएंगी।
मीन
यह सप्ताह अति शुभ है। सभी ओर से शुभता और खुशियों की बरसात आएगी। विवाह की बात चल रही हो तो वह पूरी होगी। सरकारी या अदालती फैसले जातक के पक्ष में आएंगे। लेकिन स्वास्थ्य और पढ़ाई की ओर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। जल संबंधी रोग होने की आशंका है। सतर्क रहें। मां-बाप की बातों पर विशेष ध्यान दें। शुभ अंक: 5 शुभ रंग: सतरंगी। शुभ दिशा: दक्षिण पूर्व है। उपाय: गणेश जी की अराधना करें और नारियल या अनार की भेंट चढ़ाएं। जीवन में खुशियां बढ़ेंगी।
उपाय-उपचार के सत्य और सरल रास्ते
परिचय
गत पच्चीस वर्षों से ज्योतिष विज्ञान की सेवा में लगे श्री एस. गणेश वैदिक ज्योतिष के अति सम्माननीय व सुप्रसिद्ध दैवज्ञ हैं। परम्परावादी दक्षिण भारतीय हिन्दू परिवार के श्री एस. गणेश भारतीय विद्या भवन ज्योतिष संस्थान में अध्यापन का कार्य भी करते हैं। जगद्गुुरू शंकराचार्य इनके गुरू हैं। इनके पिता श्री ए.आर. शंकर नारायणन मद्रासी वैदिक ब्राह्मण एसोसिएशन के सचिव थे। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिष गुरू श्री के.एन. राव के सान्निध्य में उन्होंने ज्योतिष के अनेक पारम्परिक पहलुओं एवं मान्यताओं पर प्रकाश डाला है और ज्योतिष की अनेक पुस्तकों व शोध-पत्रों के वह लेखक भी हैं।ज्योतिष ब्लैक मैजिक यानी काला जादू नहीं है। यह केवल और केवल सत्य है। ज्योतिष पुरूषार्थ करने का साधन है। ज्योतिष को वेद पुरूष की दृष्टि माना गया है। हमारा सनातन धर्म वेदों पर आधारित है, जो अपने में सर्वव्यापी है। यदि उपाय ज्योतिषीय हैं तो वे हमारे जीवन में कष्टों को दूर करने में सहायक होते हैं। ज्योतिष को रचने वाले ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने ही ये उपाय भी रचे हैं, जिससे ये सत्य है। ये उपाय कष्टों को दूर करने में सक्षम हैं। ऐसे कोई उपाय नहीं हैं, जो हमारे जन्मों के कर्मों को बदल सकते हों। कोई उपाय हमारे भाग्य को नहीं बदल सकते बल्कि उपाय करने से कष्टों को सहन करने की शक्ति या साधन मिलता है। जैसे खाना खाते हुए पेट में जाता हुआ भोजन दिखाई नहीं देता, उसी प्रकार से ज्योतिषीय उपाय करने से आत्मा को मिलने वाली ऊर्जा भी दिखाई नहीं देती। ऊर्जावान होना भाग्यशाली बनाने में मददगार साबित हो सकता है।

अधिकतर उपाय जैसे व्रत करना, दिया जलाना, ब्राह्मणों को उचित उपहार देना आदि स्वयं करना होता है। कई वैदिक रीतियां ऐसी हैं, जिनमें मन्त्र जाप, यज्ञ, तर्पण आदि शास्त्रों के जानकार विद्वानों से ही कराए जाने चाहिए। वेदों में भी दिया बताया गया है कि राजाओं ने ऋषियों के माध्यम से यज्ञ हवन आदि धार्मिक कार्य किए। यज्ञ करना, बीजमंत्रों का जाप श्रेष्ठ एवं निपुण ब्राह्मणों से कराना चाहिए। इनके फल पूर्ण रूप से प्राप्त होते हैं। हमारे धर्मशास्त्र इस बात की पुष्टि करते हैं। जब किसी के लिए यज्ञ, मंत्रों अथवा अन्य कोई उपचार शुरू किया जाता है, तब जातक को उस दौरान विशेष रूप से संयम और नियमों का पालन करना चाहिए । एक समय भोजन और सिर्फ रात्रि में जमीन पर ही सोना चाहिए। मन को किसी भी प्रकार के लालच से दूर रखना जरूरी है। इसीलिए दूसरे पर विश्वास रखना जरूरी है। ये पूजा-पाठ आत्मा के लिए होता है, शरीर के लिए नहीं। रामचरित मानस में गोस्वामी तुलसीदासजी ने मन्त्र, मणि और औषधि को उपाय के तीने साधन बताया है। आधुनिक दवाएं शरीर के लिए होती हैं। दोष निवारण उपाय आत्मा के लिए माना गया है। दोनों की जरिए बन कर मणि आता है। ये साथ साथ चलते हैं। मन और शरीर का स्वच्छ रहना जरूरी है। तीनों उस मुकाम में बना कर रखते हैं। उपाय के दौरान खासकर खाने में नियन्त्रण भी जरूरी है। जितना हो सके, सात्विक भोजन का अनुष्ठान करें। भगवान के आगे दीप जरूर जलाएं। उनकी परिक्रमा तीन, पांच, सात आदि विषम गिनतियों में जरूर लगाएं। ब्राह्मणों और गरीबों को दान दें। उन दिनों में नाखून और बाल न काटें। ये हमारे पितरों को दर्शाते हैं। इन्हें काटना हमारे दोषों को बढ़ाना है। संक्रान्ति या पितरों की तिथियों में भी यह काम नहीं करना चाहिए। इससे आने वाली पीढिय़ां सुखमय रहेंगी। इस दौरान शव यात्रा या शोक सभाओं में भी नहीं जाना चाहिए। यह वर्जित है। परिवार में कष्ट पितृ दोष माना जाता है।

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