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कुत्ती चीज

वे काफी तमतमाए हुए थे। सभा फिर नहीं चली थी। उन्हें लगता था कि सभा को एक दिन बाधित करने पर सरकारी खजाने को जो लगभग 2 करोड़ रू. की चपत लगती है, जैसे वह रकम उन्हीं की जेब से गई हो। वे बार-बार कहते भी थे कि यह हमारे ही टैक्स का पैसा तो है। आते ही बोले ‘यार सक्सेना यह राजनीति बहुत कुत्ती चीज है’मैने चश्मा नाक पर कुछ नीचे करके उन्हें देखा। वे सचमुच क्रोध में थे। मैं अवाक रह गया। मैंने पहली बार उनके मुंह से गाली सुनी थी। फिर मैं सुश्री मेनका गांधी से प्रभावित होने के बाद जानवरों का प्रबल पक्षधर बन गया था। कोई मेरे कुत्ते बिल्लियों का अपमान करे, यह मझसे बर्दाश्त नहीं होता। मैंने कहा,’गुप्ता जी आपको गलत शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। मैंने आजतक आपके मुंह से कभी ऐसा शब्द नहीं सुना है।’

‘मैं तो इससे भी ज्यादा गलत शब्द का प्रयोग करना चाहता था, पर तुम्हारा लिहाज कर गया’ उन्होंने कहा

‘पर मैं तो राजनीति में नहीं हूं’ मैंने कहा। ‘वही तो, फिर भी राजनीति को कुत्ती कहना तुम्हें बुरा लग रहा है। कुत्ती न कहूं तो क्या कहूं? ‘ उन्होंने तमतमाकर कहा।

‘आखिर हुआ क्या है’ मैंने पूछा।’नहीं चलने दी सभा। प्रधानमंत्री का इस्तीफा मांग रहे हैं। यह राजनीति नहीं है तो क्या है’ उन्होंने कहा।
‘तो दे दें प्रधानमंत्री इस्तीफा। क्यों फेविकोल की तरह कुर्सी पर चिपक गए हैं’ मैंने कहा
‘क्यों दे दें इस्तीफा? हिम्मत है तो नो कॉन्फिडेंस मोशन लाएं और गिरा दें सरकार’ उन्होंने कहा और फिर क्रोध में बुदबुदाए-
‘कुत्ते साले।
‘आप जैसे बुद्धिजीवी के मुंह से ऐसी गालियां शोभा नहीं देतीं गुप्ता जी’ मैंने कहा।
‘गालियां तुमने सुनी नहीं सक्सेना। सुनाऊं? ‘ उन्होंने कहा।
‘गालियां सुनने-सुनाने के संस्कार मैंने नहीं पाए’ मैंने कहा।
‘तभी तो देश का यह हाल है’ उन्होंने कहा और फिर जोड़ा ‘इन हरामजादों को तो जूते से पीटना चाहिए।
‘अब आप हिंसा पर उतारू हो रहे हैं गुप्ता जी’ मैंने कहा।
‘हां हो रहा हूं। आओ कर लो थाना पुलिस’ उन्होंने कहा।
‘क्या आप बिना अपशब्दों का इस्तेमाल किए विचार-विमर्श नहीं कर सकते’
मैंने कहा।
‘नहीं बिल्कुल नहीं। इन हरामखोरों को सबक सिखाने की जरूरत है। तुम जैसे कायरों के कारण ही ये लोग बदमाशी पर उतर आए हैं। सरकार भी नहीं गिराएंगे और सभा भी नहीं चलने देंगे। कुत्ते, साले’ उन्होंने कहा
‘अब आप हदें पार कर रहे हैं गुप्ता जी’ मैंने कहा।
‘हां कर रहा हूं। तुमसे जो उखड़ता हो उखाड़ लो मेरा’ वे बोले।
‘मैं आपका लिहाज कर रहा हूं। आप जाइए यहां से’ मैंने कहा।
‘नहीं जाता, सड़क तेरे बाप की नहीं हैं।’ उन्होंने कहा। ‘बाप तक मत पहुंचो, ‘ मैंने कहा।
‘बाप क्या दादा, परदादा और लक्कड़दादा तक भी पहुँचूंगा’ उन्होंने कहा।
‘मैंने भी चूडिय़ां नहीं पहनी हैं। हद हो गई’ मैंने कहा।
‘अबे जा साले हिजड़े’ उन्होंने कहा ‘मुझे धमकी देता है।
मैंने कसकर दो रैपट उनके गाल पर रसीद किए और मेरे भीतर अन्दर कहीं दबी गालियां भी मेरे होठों पर आ गईं। वे मुझसे उम्र में बड़े थे और बुद्धि में भी कहीं बड़े। कभी जीवन में उनके साथ इस तरह की मारपीट नहीं हुई। वे विलाप करने लगे और मुझे गंदी-गंदी गालियां भी बकने लगे। तूने मुझ पर हाथ उठाया तेरी उठे अर्थी।
आसपास के लोग इकठ्ठे हो गए और तमाशा देखने लगे। कुछ परिचित भी थे जो मेरा यह रूप देखकर आश्चर्य से भरे हुए थे।
‘सक्सेना, के होबे’ बंगाली बाबू नेमुझसे पूछा।
‘गुप्ता को दौरा पड़ा है। मान ही नहीं रहा है, गाली गुप्तार किए जा रहा है। अब सभा नहीं चली तो इसमें मेरी गलती है? ‘ मैंने कहा।
‘हां तेरी गलती है साले नीच। तू कभी आवाज नहीं उठाता। कायर है कायर। तेरा इनकम टैक्स नहीं कटता, इसलिए तुझे कोई दर्द नहीं होता। कुत्ती और कुत्ता जैसे शब्द भी तुझे गलत लगते हैं।’
‘कोती, कोता? ‘ बंगाली बाबू बोले
‘हां यही है कुत्ती और यही है कुत्ता’ गुप्ता जी अब भौंकने लगे।
मुझे लगा हां मैं ही कुत्ता हूं और पागल हो गया हूं और गुप्ता जी को फाड़ दूंगा। मैं हलकाया हुआ कुत्ता लगने लगा। मुझे लगा कि कै आएगी। मेरा सिर चकराने लगा। मैं सिर पकड़ कर वहीं बैठ गया।

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