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हिंदू विहीन अफगानिस्तान की राह पर पाकिस्तान!

पाकिस्तान के सिंध प्रांत से आए 150 हिंदू तीर्थयात्री अंतत: बुझे मन से आगे की मंजिल की ओर रवाना हो गए। पाकिस्तान की सरहद से बाहर निकलकर भारत की धरती पर घूम-घूमकर पुण्य बटोरने वाले इस जत्थे का अगला पड़ाव हरिद्वार है। उसके बाद यह जत्था जबलपुर, चित्रकूट, माता वैष्णो देवी और अमृतसर होते हुए 5 जून को पाकिस्तान लौट जाएगा।

रायपुर (छत्तीसगढ़) के सादानी दरबार के बाद, ये तीर्थयात्री विभिन्न तीर्थों की यात्रा करते हुए 27 मई को दिल्ली पहुंचे। विश्व हिंदू परिषद ने उनका भरपूर स्वागत किया। भारत की धरती पर मरने की ख्वाहिश लिए बिजवासन में रह रहे 480 पाकिस्तानी हिंदू परिवारों के लोगों ने भी अपने बिछड़े भाई-बहनों से मुलाकात कर सुख-दुख को साझा किया। शरणार्थी युवती यमुना के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। अपने घर पाकिस्तान में छूटे परिवार के अन्य सदस्यों को याद कर संदेश भेज रही थी। यमुना पाकिस्तान में पैदा हुई उन बदनसीब हिंदू युवतियों में से है, जो अगवा होने और जबरन धर्मांतरित कर निकाह किए जाने से बचने के लिए भारत की नागरिकता मिलने की आस देख रही है। पाकिस्तान में 10 साल की उम्र में शादी कर दिए जाने की मजबूरी को वह अच्छी तरह समझती है। पाकिस्तान से तीर्थयात्रा पर आए अपने पड़ोसियों के गले लिपटकर यमुना कहती है कि यहां कलमा पढऩे की मजबूरी नहीं है, न ही काफिर कहकर छेड़े जाने की।

विस्थापित परिवारों के ही हनुमान प्रसाद भी अपने भाइयों से हंसी ठिठोली में व्यस्त दिखे। बात जब इनके वापस जाने की होती है, तब हनुमान की आंखों में खामोशी छा जाती है। कहते हैं ”पाकिस्तान में हिंदुओं की स्थिति नर्क में रहने के समान है। उन्हें अपने पर्व-त्योहार मनाने की बात तो दूर, मृत्यु के बाद दाह-संस्कार करने तक की इजाजत नहीं है। शवों को दफनाने के लिए विवश किया जाता है। भारत में कम-से-कम सुकुन से मर तो सकते हैं।”

पाकिस्तानी अल्पसंख्यकों के दर्द की वजह बताते हुए विश्व हिंदु परिषद के संरक्षक अशोक सिंघल कहते हैं ”घृणा के आधार पर शक्ति ग्रहण कर उत्पात मचाने वाले ज्यादा समय तक धरती पर नहीं टिकते। प्रकृति का भी अपना नियम होता है। आने वाला समय हमारा है। विश्व में कहीं भी रहने वाले हिंदुओं की आवाज है विश्व हिंदू परिषद। राष्ट्रीय स्तर पर मोदी का उद्भव भारतीय जनमानस की छटपटाहट है। मोदी ने गुजरात में हिंदुओं की भावनाओं की कद्र की। आसाम में बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ बोडो लोगों का संघर्ष एक दिन की कहानी नहीं है। यह कहानी स्थानीय स्तर पर बहुसंख्यक बने मुसलमानों द्वारा उत्पीडऩ किए जाने की कहानी है। बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए बांग्लादेश सरकार भी उतनी ही जिम्मेदार है, जितनी भारत सरकार। आज सारी दुनिया मुस्लिम आतंकवाद से त्रस्त है। जब सहनशीलता खत्म हो जाएगी तो सारा विश्व बैठकर यह निर्णय कर लेगा कि इस्लाम को इस दुनिया में रखना है या नहीं। … ”

तीर्थयात्रा पर आए सिंध प्रांत के भजनलाल अपनी भावनाओं को जज्ब करते हुए बस इतना ही कह पाते हैं ”पाकिस्तान लौटना हमारी मजबूरी है, क्योंकि हमारी जमीन, जायदाद और परिवार है वहां पर।” पाकिस्तान में मीडिया और मानवाधिकार संगठनों द्वारा हिंदुओं की समस्याएं उस स्तर पर नहीं उठायी जातीं, जितनी स्थिति भयावह है। इन हिंदुओं के दमन का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 26 लाख की कुल जनसंख्या में मात्र 5-6 लाख हिंदुओं का नाम वोटर लिस्ट में दर्ज किया गया है। ये
आंकड़े पाकिस्तान में हाल ही में संपन्न हुए चुनाव के हैं। जिन क्षेत्रों में हिंदू बहुसंख्यक हैं, वहां उनका नाम वोटर लिस्ट में से काटकर, उन्हें अल्पसंख्यक बना दिया गया है। ताकि वे अपना प्रतिनिधि नहीं चुन पाएं और वहां के बहुसंख्यकों के रहमो करम पर जिंदा रहने को विवश रहें। नवाज शरीफ के सांत्वना देने के बाद भी स्थिति में ज्यादा सुधार की गुंजाइश नहीं है। सरकारी आंकड़ों में हिंदुओं की सीमित संख्या दिखाकर, धर्मांतरण, हत्या के माध्यम से उनकी जनसंख्या को प्रभावित करने की कोशिश लगातार जारी है।
गंगा, गाय और प्रकृति से दूर भागते भारतीय
भारत में बदलती जीवन-शैली और लोगों द्वारा अपनी जड़ों से कटने का मुख्य कारण पाश्चात्य दर्शन है। गंगा, गाय और प्रकृति से दूर भागते भारतीय, विकास के नाम पर खुद तक सिमटकर रह गए हैं। आज गंगा की हालत दिन प्रति दिन बद से बदतर होती जा रही है। इसकी मुख्य वजह है लोगों की अपने धर्म से दूरी। जीव-जंतुओं की हत्या, प्रकृति के साथ खिलवाड़ भारतीय जीवन-दर्शन के खिलाफ है। पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा है गंगा को इस हालत तक पहुंचाने में कांग्रेस और भाजपा का बराबर का योगदान है। ये दोनों पार्टियां केन्द्रीय राजनीति में हैं, क्षेत्रीय दल तो इनके अनुचर हैं।

दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित सभा में गोवर्धनपीठ, पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने भारत में राजनैतिक जागरुकता और बदलाव की जरुरत पर बल देते हुए हिंदुओं की हालत पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा च्च्विश्व स्तर पर हिंदुओं की स्थिति बदतर होती जा रही है। भारत में दो तरह से धर्मांतरण का खेल खेला जा रहा है। एक घोषित धर्मांतरण और दूसरा अघोषित धर्मांतरण। घोषित धर्मांतरण लालच देकर किया जा रहा है। अघोषित धर्मांतरण मैकाले की शिक्षा पद्धति से हो रहा है। इस शिक्षा पद्धति के माध्यम से हम रहेंगे तो भारतीय, लेकिन हमारी संस्कृति भारतीय न रहकर पश्चिमी हो गई है। यह स्थिति उस देश के युवाओं के लिए शर्मनाक है, जिस देश ने विज्ञानशास्त्र, अर्थशास्त्र, दर्शनशास्त्र, चिकित्साशास्त्र जैसे कितने शास्त्र दुनिया को दिये हैं।

उनका कहना था भारत की मेधाशक्ति, श्रमशक्ति, वाणिज्यशक्ति और रक्षाशक्ति से दुनिया आकृष्ट होती रही है, लेकिन इनका सदुपयोग हम अब छोड़ चुके हैं। विश्व के राष्ट्रों को सुसंस्कृत, सुशिक्षित, सुरक्षित, संपन्न और सेवापरायण होना चाहिए। इन संस्कारों को अपनाने के साथ ही सारी दुनिया स्वत: हिंदू हो जाएगी।

तीर्थयात्रियों के स्वागत समारोह में सुब्रह्मण्यम् स्वामी ने कहा कि विश्व में कहीं भी रह रहे अपने हिंदू भाइयों के साथ हम सदैव खड़े हैं। आप अपनी समस्याएं हमें पत्रों या ईमेल के माध्यम से भेजिए। अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं, मानवाधिकार संगठनों, विदेशी सरकारों को भेजिए। जरुरत पड़ी तो हम आपकी लड़ाई अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी लड़ेंगे। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश सहित विश्व भर में हिंदुओं की दुर्दशा नेहरु की तुष्टीकरण की देन है। भारत के ऊपर 800 वर्ष मुसलमानों और 200 वर्ष ईसाइयों का राज रहने के बावजूद, आज भी भारत में 80 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या हिन्दू है। जबकि ईरान, इराक व मिस्र को सिर्फ 20 वर्षों में ही 100 प्रतिशत मुस्लिम मुल्क में बदल दिया गया। भारत के जिस जिस भाग में हिन्दू घटा, वो बंटने के कगार पर पहुंच गया। चाहे वो जम्मू और कश्मीर हो या फिर असम। केरल के मलाप्पुरम जिले में मुसलमानों का उत्पात चरम पर है। जिस इलाके में मुस्लिम बहुमत में होते हैं, वहां उत्पात मचाना शुरू कर देते हैं।

1947 में जम्मू और कश्मीर से विस्थापित हिंदुओं को नजरअंदाज करने वाली हिंदू विरोधी नीति की चर्चा करते हुए विहिप दिल्ली के अध्यक्ष स्वदेशपाल गुप्ता ने कहा कि पाकिस्तानी आक्रमण के बाद पाक अधिकृत कश्मीर से लगभग 4 लाख हिंदू परिवारों में से कुछ जम्मू में आकर बस गए और कुछ परिवार देश के विभिन्न हिस्सों में बस गए। देश के विभिन्न हिस्सों में बसे उन परिवारों को आज जम्मू और कश्मीर राज्य में न बसने की आजादी है और न जमीन खरीदने की। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मीरपुर जिले के विस्थापित परिवारों में से 8 न्यायाधीश हुए, जिन्होंने उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय में अपनी सेवाएं दी हैं। इस विषय पर स्वदेशपाल गुप्ता ने प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप करने की मांग की। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की राजधानी मुजफ्फराबाद में स्थित शारदा माता मंदिर के दर्शन के लिए भी हिंदुओं को इजाजत दिए जाने की भी मांग की। शारदा माता का मंदिर एक शक्तिपीठ के रुप में मान्य है, जहां पर साधना कर शंकर नाम का बालक, जगदगुरू शंकराचार्य बन गया।

पाकिस्तान में स्थित न सिर्फ हिंदू आस्था के प्रतीक चिन्हों की स्थिति जर्जर है, बल्कि वहां रहने वाले हिंदुओं की स्थिति भी नारकीय है। इस विषय पर न ही भारत सरकार के पास कोई नीति है और न ही उनकी व्यथा को सुनने के लिए समय। अपनी बदकिस्मती के शिकार ये हिंदू अफगानिस्तान की तरह पाकिस्तान से भी जल्दी ही विलुप्त हो जाएं तो आश्चर्य नहीं। उदय इंडिया ब्यूरो

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