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निकली चुहिया

राहुल गांधी ने कांग्रेस में नये क्षेत्रीय अध्यक्षों की नियुक्ति की है। पुराने खुर्राट कांग्रेसी एक साल पूरा नहीं कर पाये और हटा दिये गये। नये अध्यक्षों में दिग्विजय सिंह और ललितेश्वर त्रिपाठी पहली बार विधायक बने हैं। भगवती चौधरी, विनोद चौधरी, दीपक कुमार पूर्व विधायक हैं, जब कि संजय कपूर विधायक हैं। इनमें से एक विनोद ही ऐसे हैं,जो वरिष्ठ हैं, और प्रदेश प्रवक्ता रह चुके हैं। हर फेरबदल में राहुल गांधी पहाड़ खोद डालते हैं और निकालते चुहिया ही हैं।

बेआबरू होकर गये मंत्री
उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव अपने मंत्रिमंडल को भले बेईमान ना मानें पर पर यह बात मान ली है कि उनके मंत्री अन्य दोषों से पीडि़त हैं। एक शक्तिशाली मंत्री राजा भैया का इस्तीफा इसीलिए हुआ था कि उनके क्षेत्र में एक पुलिस अधिकारी की हत्या कर दी गयी थी और अफसर की पत्नी ने इसमें राजा भैया का इशारा या हाथ होने की बात कही थी।

मजेदार घटना एक और मंत्री रामचन्द्र के साथ हुई,जब उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया गया। उन्हें महिलाओं की बेजा तारीफ करने के लिये हटाया गया। वह बिना किसी आरोप के ही मंत्री पद से हाथ धो बैठे।

बेचारों ने दो महिला कलेक्टरों को सुन्दर ही तो कहा था और सड़कों को एक प्रसिद्ध अभिनेत्री के गालों की तरह बनवाने की बात की थी। अभिनेत्री सुन्दरता का पयार्य बन गयी थी। महिलाओं को छेडऩे या उनकी बुराई करने पर लोगों को सजा मिलते देखा है,पर बेचारे मंत्री जी तो महिलाओं की तारीफ करने में चले गये।

लोकायुक्त का फंदा

14 अरब रूपयों से ज्यादा का घोटाला लखनऊ और नोयडा में स्मारक बनाने में पकड़ा गया। मायावती सरकार के मंत्री नसीमुद्दीन और बाबू सिंह कुशवाहा इसकी लपेट में आ गये। इतना बड़ा काम बिना मुख्यमंत्री की मर्जी के हो नहीं सकता पर उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले।
इससे ज्यादा आश्चर्य की बात है कि तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री राकेश धर त्रिपाठी पर कालेजों को मान्यता देने में घूसखोरी के आरोप लगे। उन्हें मायावती ने टिकट भी नहीं दिया, पर वे अभी तक लोकायुक्त की गिरफ्त से बाहर हैं। मायावती की पूरी केबिनेट की जांच का इंतजार कर रहे हैं लोग। जिस मछली को पकड़ेंगे, वही तालाब गंदा करती पायी जायेगी तो कोई आश्चर्य नहीं।

फंस गये डायरेक्टर

रंजीत सिंह ने उच्चतम न्यायालय में यही तो कहा था कि सी.बी.आई. पिजड़े में तोते की तरह है यानी सरकार के इशारे पर काम करती है। क्या वह यह भी मानेंगे कि उनकी नियुक्ति भी सरकार के इशारे पर हुई थी। अपना मानकर ही सरकार ने उन्हें नियुक्त किया और उसका बन कर डारेक्टर साहब काम भी करते रहे।

कोर्ट की लताड़ में उन्हें वह सब उगलना पड़ा, जिसको पचाने के वह आदी हो गये थे। रही सही कसर कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने उनको इस्तीफे की सलाह दे कर पूरी कर दी।

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