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50 से 1000 रु. में नशे वाला पान

अफीम व हेरोइन मिले पान से युवा कर रहे नशा, होटलों में पर्यटकों को होते हैं सप्लाई, लपकों के माध्यम से होती है बिक्रीसूर्यनगरी में नशीले पान की बिक्री हो रही है। इस तरह के पान युवा खरीद कर नशा कर रहे हैं। पान में अफीम और हेराइन मिलाकर बेचे जा रहे हैं। विदेशी पर्यटक भी इस तरह के पान पसंद करते हैं।

जोधपुर शहर में कई पान वाले दुकानदार इस तरह के पान बेच रहे हैं। कत्थे के साथ अफीम मिला कर पान के पत्ते पर रगड़ी जाती है। इस प्रकार का कत्था अलग रखा जाता है। ग्राहक इसके लिए कोडवर्ड में बात करता है। अगर ग्राहक कहता है कि काला पान दो, तो दुकानदार समझ जाता है कि उसे अफीम वाला पान चाहिए। इस तरह के पान पुराने फिक्स ग्राहकों को ही बेचे जाते हैं।

इस संवाददाता ने ड्रग्स एडिक्ट बनकर घंटाघर में एक गाइड से इस प्रकार का पान मंगवाया। इसके लिए पहले वह तैयार नहीं हुआ, लेकिन जब इस संवाददाता ने उसे भरोसा दिलाया कि वह इस प्रकार के पान का आदी है, तो गाइड पान लाने को तैयार हुआ। इसके लिए गाइड ने उससे 250 रुपए लिए। इस पान की खासियत यह थी कि इसमें अफीम थी। गाइड ने बताया कि अगर उसे हेरोइन मिला पान चाहिए तो उसे तीन दिन पहले ऑर्डर देना होगा और करीब 1200 रुपए पहले जमा कराने होंगे। अफीम का पान हाथों हाथ मिल जाता है।

स्टेशन पर भी मिलते हैं
इस प्रकार के पान जोधपुर के रेलवे स्टेशन पर भी बिकते हैं। इस संवाददाता ने बूट पॉलिश करने वाले एक लड़के को सौ का नोट थमाया और उसने अफीम का पान लाकर दिया। जब इस संवाददाता ने पूछा कहां से लाए, तो वह बोला आप पैसे दो और खाने में ध्यान दो, कहां से लाया? इस चक्कर में न पड़ो।

दुकानदार हेरोइन मिला पान करीबन एक हजार रुपए में बेचते हैं। इसके लिए गोरा पान या व्हाइट पान कोडवर्ड बताया जाता है। शहर में कई लपके सक्रिय हैं जो सैलानियों के लिए इस तरह के पान खरीदते हैं। दुकानदार भी ऐसे लपकों को जानते हैं और उन्हें ही इस तरह के पान बेचते हैं। इस तरह के पान में कत्था, सुपारी, किमाम, जर्दा, चेरी, मुलहठी, हेरोइन मिला चूना, किशमिश, काजू के टुकड़े, चांदी का वर्क और कई अन्य विशेष चीजें डालकर दिया जाता है। यदि अफीम का पान लेना हो तो अन्य वस्तुएं तो वही रहती है, पर, कत्था अफीम मिलाकर लगाया जाता है। जिनकी नई-नई शादी हुई है, वे दूल्हे इस तरह का पान पसंद करते हैं। बताया जाता है कि नशीले पान से उत्तेजना बढ़ जाती है। इस वजह से युवा अफीम मिला पान खरीदते हैं। अफीम का नशा करने से किसी को शक भी नहीं होता। पान के साथ अफीम मिला होने से बजुर्गों को नशा करने में सुविधा रहती है। वे आसानी से परिवार के साथ रहते हुए भी बिना किसी शक के नशा कर लेते हैं। शहर की पॉश कॉलोनियों में कई बुजुर्ग इस तरह का पान खाते हैं।

प्रतिष्ठा का द्योतक
बताया जाता है कि कुछ लोग इस प्रकार का पान खाना प्रतिष्ठा का सूचक मानते हैं। समाज में अलग दिखने की होड़ में भी नशीले पान का सेवन किया जाता हैं। युवाओं के बीच परस्पर प्रतिस्पद्र्धा रहती है। इसी के चलते युवा नशीले पान का सेवन अधिक कर रहे हैं।

बताया जाता है कि लपके बाजार से नशीले पान खरीदते हैं। फिर उसे आगे अधिक दाम में बेच देते हैं। खासकर युवा सैलानी इस तरह के पान पसंद करते हैं। शहर के होटलों में भी इस तरह के पान लपकों के माध्यम से सप्लाई किए जाते हैं। मारवाड़ में अफीम का नशा करना आम बात है। खुशी का अवसर हो या गमी का, मारवाड़ में अफीम की मनुहार की जाती है, इसे रियाण कहते हैं। अब रियाण में भी अफीम मिले नशीले पान की मनुहार होती है। ऐसा करने से कानूनी डर नहीं रहता, क्योंकि पान की मनुहार करने से कोई शक नहीं कर पाता। इस संवाददाता ने सूरसागर क्षेत्र में एक दूकान से नशीला पान किसी और व्यक्ति के माध्यम से मंगवाया। इस बीच उस विक्रेता को पता चल गया तो अगले दिन दूकान ही उठा ली।

डी.के. पुरोहित

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