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ग्रामीणों में है आकर्षण इफ्को-टोकियो का

राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए इफको-टोकियो के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी योगेश लोहिया को सम्मानित करते हुए केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री कोडिकुन्निल सुरेश।
‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना’ के शानदार क्रियान्वयन के लिए ‘इफको-टोकियो’ सम्मानित
‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना’, गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों और मनरेगा मजदूरों के लिए लागू की गई है। यह योजना राज्य और केन्द्र सरकार द्वारा संयुक्त रुप से चलाई जाती है। इस योजना के तहत अधिकतम 30,000 रुपये प्रति परिवार के हिसाब से अस्पताल के खर्चे के लिए बीमा पॉलिसी दी जाती है। एक साल की इस बीमा योजना को भारत की प्रमुख बीमा कंपनियों ने अपनाया है। इस योजना से लाभान्वित परिवारों को देश भर में फैले अस्पतालों के नेटवर्क के माध्यम से नकदी रहित इलाज की सुविधा उपलब्ध करायी जाती है।हाल ही में केरल की राजधानी तिरूवनंतपुरम में योजना की कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री कोडिकुन्निल सुरेश ने ‘इफको-टोकियो’ के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी योगेश लोहिया को सम्मानित किया। यह सम्मान योजना को बड़े पैमाने पर सफल बनाने के लिए ‘इफको-टोकियोÓ टीम द्वारा किए गए लगातार प्रयासों के लिए प्रदान किया गया।

इफ्को-टोकियो ने साल 2010 में पंजाब के 8 जिलों में इस योजना की शुरूआत की थी। 30अप्रैल 2013 तक कंपनी ने पंजाब, ओडिशा, कर्नाटक और मध्य प्रदेश के 41 जिलों में इस योजना का क्रियान्वयन किया। इस योजना के लिए ‘इफ्को-टोकियोÓ का 800 अस्पतालों के साथ अनुबंध है, जिसके अंतर्गत एक लाख से अधिक लोगों का दावा भुगतान कर लाभान्वित किया गया है। इस योजना से कंपनी ने अबतक 1लाखलोगोंकोलाभपहुंचाया।

बदली युवा वर्ग की सोच
स्वास्थ्य, निवेश, सम्पत्ति आदि के बारे में देश के युवा वर्ग की सोच बदल गई है। पहले युवा वर्ग बीमा को केवल लाइफ इंश्योरेंस तक ही सीमित रखता था या फिर टेक्स में छूट से जोड़ कर देखा करता था, वहीं अब युवा वर्ग इसे अपने जीवन के हर क्षेत्र की सुरक्षा से जोड़ कर देखता है। पहले युवा वर्ग की सोच अधिकतर स्वास्थ्य और वाहन बीमा तक ही सीमित लगती थी। लेकिन अब बीमा पूरे परिवार तक पहुंच रहा है। युवा वर्ग न केवल अपने स्वास्थ्य या वाहन का बीमा कराना चाहता है, बल्कि उसे अपने घर और अन्य कीमती सामान का भी ध्यान है। उसकी सुरक्षा के लिए वह सभी चीजों का बीमा कराना चाहता है। एक सर्वेक्षण के अनुसार अमेरिका में सबसे अधिक बीमा का क्षेत्र फैला हुआ है, जबकि भारत में इसका प्रसार हाल के दिनों में तेजी से बढ़ रहा है। भारत में लगभग 30 करोड़ लोग बीमे का किसी न किसी ढंग से लाभ उठाते हैं।शहरी क्षेत्रों में तो फिर भी युवा वर्ग की सोच कुछ सकारात्मक हुई है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अभी हालात कुछ खास नहीं बदले हैं। ग्रामीण लोगों के बारे में बीमा के क्षेत्र में अग्रणी कम्पनी इफको-टोकियो के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) योगेश लोहिया बताते हैं-”सामान्य व्यक्ति बीमा के लाभ को अधिक नहीं जानता। यही कारण है उसका खेत, फसल अन्य छोटी मोटी सम्पति भी सदा खतरे में रहती है। यहां तक कि उसका अपना स्वास्थ्य भी कम खतरे में नहीं होता। अपने सिर पर आई मुसीबत से निपटने के लिए आम तौर पर उसके पास कोई योजना नहीं होती और उसके खेत-घर और फसल ही आपात स्थिति की भेंट चढ़ जाते हैं।”लोहिया ने उदय इंडिया को विशेष भेंट में बताया कि इफ्को-टोकियो का मुख्य कार्यक्षेत्र दूर-दराज ग्रामीण इलाके हैं, जहां ग्रामीणों को कठिन समय के लिए बीमा की जानकारी व पॉलिसी उपलब्ध कराना इस कंपनी का ध्येय है।

आंकड़ों के आधार पर लोहिया का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्र के जिस वर्ग को बीमा नीतियों का लाभ देने की कोशिश की जा रही है उन तक पहुंच बहुत ही कम है। इतनी कम है कि उसे पूरी तरह से नगण्य कहा जाना चाहिए। बीमा का लाभ देने के लिए ग्रामीण इलाकों में जिस वर्ग को लक्ष्य किया जा रहा है, उसमें पिछले दो साल में केवल 0.1प्रतिशत ही पंहुच बढ़ी है। ग्रामीण इलाकों में 1990 से 2011 के बीच मात्र 0.6 प्रतिशत पहुंच थी और 2011 के बाद अब तक दो सालों में यह 0.1 प्रतिशत बढ़ कर 0.7 प्रतिशत हुई है। इफ्को-टोकियो के कार्यक्षेत्र का आधार ग्रामीण है और हमारी कोशिश है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बीमा का लाभ अधिक से अधिक लोगों को मिले। इसके लिए हम ग्रामीण इलाके के लोगों को इस दिशा में जागरूक करने का काम भी कर रहे हैं।

ग्रामीणों में पहुंच बहुत कम होने और बीमा का पूरा लाभ इन क्षेत्रों में न पंहुचने का विशलेषण वह इस प्रकार करते हैं कि ग्रामीण बहुत ही सीधे सादे लोग होते हैं और उन्हें अपने हितों की अधिक जानकारी नहीं होती। हमारी कोशिश होती है कि उन्हें बीमा के माध्यम से मिलने वाले लाभों की अधिक से अधिक जानकारी दी जाए। विभिन्न प्रकार की पॉलिसियों में उनके लिए प्रीमियम भी इतना कम रखा गया है जोकि उनकी देय क्षमता के अनुरूप है। सहकारी सोसायटियों के माध्यम से किसानों और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को बीमा का लाभ पहुंचाने की कोशिश चल रही है। उन्हें स्वास्थ्य बीमा से लेकर व्यक्तिगत बीमा, फसल बीमा, सम्पति बीमा आदि से सुरक्षा देने के प्रयास हैं। जन आधारित बीमा पालिसियों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के सफलतापूर्वक क्रियान्वयन से तो भारत सरकार ने इफको-टोकियो को सम्मानित भी किया है।

इफ्को-टोकियो के निदेशक मार्केटिंग एच.ओ. सूरी के अनुसार बीमा पॉलिसी को निवेश के नजरिए या बचत के दृष्टिकोण से नहीं लेना चाहिए। निवेश के अन्य कई रास्ते हैं। बीमा तो व्यक्ति के कठिन समय में उसकी सहायता के लिए होता है। बच्चों की शिक्षा, शादी, किसी बड़ी बीमारी में अस्पताल और डॉक्टरों के मोटे बिल, आग के खतरे, विदेश में दुर्घटना, बीमारी या कोई सामान खो जाने की परेशानी आदि में बीमा एक अच्छे और सच्चे दोस्त की तरह मददगार बन कर आपके होंठों पर मुस्कान बनाए रख कर कहता है-”मुस्कुराते रहो”। बीमा का उद्देश्य ही है बीमित के कष्ट का निर्वारण। सूरी का कहना है कि ”मुस्कुराते रहो” ही तो इफको-टोकियो का संदेश वाक्य है। जिसे सार्थक बनाने में ये कंपनी तत्पर है।

एच.ओ. सूरी के साथ मिल कर कार्यकारी उपाध्यक्ष संजय सेठ उदय इंडिया को जानकारी देते हैं कि यदि आम आदमी बीमा को योजनाबद्ध ढंग से लेता है तो इफको टोकियो के संदेश वाक्य के अनुरूप कठिनाइयों में भी वह मुस्कुराता रहेगा।

 

सुधीर गहलोत

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