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ज्योतिषी करें कैंसर की जानकारी के लिए अनुसंधानरू दिग्विजय सिंह भारतीय विद्या भवन ज्योतिष संस्थान का रजत जयन्ती समारोह

भारतीय विद्या भवन का ज्योतिष संस्थान विश्व का सबसे बड़ा ज्योतिष शिक्षण संस्थान माना जाता है। 20 छात्रों और छह शिक्षकों से 1987 में श्री केण्एनण् राव के निर्देशन में शुरू हुआ यह संस्थान अपनी रजत जयन्ती मना रहा है। इस संस्थान में अब ज्योतिष के 33 शिक्षक और 1200 विद्यार्थी हैं। इसे एक संयोग ही कहा जाएगा कि भारतीय विद्या भवन इस वर्ष अपनी 75वीं वर्षगांठ मना रहा है।अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय महासचिव और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पूजा.पाठ पूरी तरह से त्याग दिया है। पहले वह बहुत श्रद्धा के साथ पूजापाठ करते थे। लेकिन अब उन्होंने यह जिम्मेदारी अपने परिवार के पुरोहित को दे दी है। ऐसा उन्होंने इसलिए नहीं किया कि उनके पास समय नहीं है या उनके संस्कार बदल गए हैंए बल्कि अपनी पत्नी की कैंसर से मृत्यु के बाद उन्हें महसूस हुआ कि जो कुछ भाग्य में बदा हैए वह होना ही है। श्होनी्य को कोई नहीं टाल सकता। वह सोचते हैं कि जब होनी को टाला नहीं जा सकताए तो फिर पूजा.पाठ किस लिए। विचारों मंे परिवर्तन के बावजूद पूजा.पाठ को त्यागने की उनकी हिम्मत नहीं हुई। उन्होंने अब पूजा.पाठ खुद करने की बजाय उसे अपने परिवार के पुरोहित से कराना शुरू कर दिया है।
अपनी पत्नी के निधन की उनके हृदय पर इतनी गहरी चोट पहुंची है कि वह कैंसर रोगियों के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार रहते हैं। वह चाहते हैं कि कैंसर जैसा गंभीर रोग होने से पहले यदि जानकारी मिल जाए तो परिवारजन कुछ सावधानी बरत सकते हैं। श्री दिग्विजय सिंह ने ज्योतिषियों को सुझाव दिया है कि श्मेडिकल ज्योतिषश् पर अनुसंधान कर वैदिक ज्योतिष को इतनी ऊंचाई तक ले जाएं कि कुंडली के अध्ययन से ही कैंसर जैसे रोगों का पता लग जाए। दिग्विजय सिंह ने केन्द्र सरकार से अनुरोध किया है कि चिकित्सा ज्योतिष अुनसंधान में लगे मनीषियों को पर्याप्त आर्थिक सहायता दे।
सितारों ने किया ज्योतिषियों को सक्वमानित
भारतीय विद्या भवन के रजत जयन्ती समारोह में फि ल्म कलाकारों ने ज्योतिष के विद्वानों को प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। कई शिक्षकों ने एक फि ल्मी कलाकार के हाथों ‘मोमेंटो’ लेने के बाद उसी मोमेंटो को दूसरे कलाकार के हाथों फिर से ग्रहण किया और फोटो खिंचवाई। मनोज वाजेपयी के साथ समारोह में शामिल होने वालों में दीपक तिजोरी, प्रतिभा प्रह्लाद, प्रणव अवस्थी, रितु झिंगन, और संजय मुखर्जी आदि थे।
दिग्विजय सिंह नई दिल्ली में भारतीय विद्या भवन, ज्योतिष संस्थान की रजत जयन्ती समारोह में मुख्य अतिथि थे। उनकी आवाज में कैंसर रोगियों और उनके परिवार वालों के लिए दर्द था। कैंसर रोगियों की तकलीफ दूर करने के लिए वह कुछ भी करने के लिए तैयार हैं। चिन्मय मिशन के हैमको सभागार में समारोह का संचालन कर रहे आचार्य मनोज पाठक ने जानकारी दी कि संस्थान में ज्योतिष गुरू श्री के.एन. राव के निर्देशन में ‘मेडिकल ज्योतिष’ पर अनुसंधान जारी है। उसके सकारात्मक परिणाम भी आ रहे हैं।”
ज्योतिष से मिलेगी रोगों की जानकारी
भारतीय विद्या भवन का ज्योतिष संस्थान विश्व का सबसे बड़ा ज्योतिष शिक्षण संस्थान माना जाता है। 20 छात्रों और छह शिक्षकों से 1987 में श्री के.एन. राव के निर्देशन में शुरू हुआ यह संस्थान अपनी रजत जयन्ती मना रहा है। इस संस्थान में अब ज्योतिष के 33 शिक्षक और 1200 विद्यार्थी हैं। इसे एक संयोग ही कहा जाएगा कि भारतीय विद्या भवन इस वर्ष अपनी 75वीं वर्षगांठ मना रहा है। दिल्ली विश्वविद्यालय सहित देश के अनेक विश्वविद्यालयों में ज्योतिष को एक विषय के रूप में पढ़ाने के लिए मान्यता दिलाने का श्रेय नेशनल हेराल्ड के संस्थापक-सम्पादक स्व. के. रामाराव के पुत्र के.एन. राव को है। मनोज पाठक ने
बताया कि वाजपेयी सरकार में डॉ. मुरली मनोहर जोशी मानव संसाधन विकास मंत्री थे, तब ज्योतिष को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने मान्यता दी थी। पाठ्यक्रम में इसे शामिल भी किया गया था। लेकिन इस फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दे दी गई। तब केवल श्री राव ने देश की सबसे बड़ी अदालत में खुद बहस की और लगातार 25 मिनट तक ज्योतिष के विषय में अकाट्य तर्क पेश किए। उच्चतम अदालत से ज्योतिष के हक में फैसला हुआ। भारतीय विद्या भवन के छात्रों में 25 से 75 साल तक की आयु के अधिकारी, बुद्धिजीवी, कलाकार, आईएएस, आईपीएस, एमबीए आदि शामिल हैं। इस संस्थान में रूस, जापान आदि देशों के छात्र-छात्राएं भी हैं। राव ज्योतिष का इंटरनेट पाठ्यक्रम भी चलाते हैं।
अमिताभ की सुरक्षा के लिए किया था सचेत
भारतीय विद्या भवन के सर्वेसर्वा के.एन. राव को फिल्मों और फिल्म अभिनेताओं के बारे में अधिक जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि वह अमिताभ बच्चन के बारे में अधिक नहीं जानते, लेकिन सदी के नायक अमिताभ बच्चन के माता-पिता तेजी बच्चन और हरिवंश राय बचचन उनके पास बराबर आते थे। एक बार जब तेजी बच्चन उनसे मिलने आईं, तो उन्होंने अपने बारे में जानना चाहा। लेकिन राव ने उनसे अमिताभ की सुरक्षा की ओर ध्यान देने के लिए कहा। उसी के कुछ दिन बाद फि ल्म ‘कुली’ की शूटिंग करते हुए अमिताभ को गंभीर चोट लगी थी। राव ने बताया कि पानी का कुंआ खोदने से पहले ही बताया जा सकता है कि जहां कुआं खोदा जा रहा है, वहां पानी मिलेगा या नहीं। उनका कहना था कि इसी प्रकार जमीन के नीचे तेल की भी खोज की जा सकती है।

ही कहा जाएगा कि भारतीय विद्या भवन इस वर्ष अपनी 75वीं वर्षगांठ मना रहा है। दिल्ली विश्वविद्यालय सहित देश के अनेक विश्वविद्यालयों में ज्योतिष को एक विषय के रूप में पढ़ाने के लिए मान्यता दिलाने का श्रेय नेशनल हेराल्ड के संस्थापक.सम्पादक स्वण् केण् रामाराव के पुत्र केण्एनण् राव को है। मनोज पाठक ने बताया कि वाजपेयी सरकार में डॉण् मुरली मनोहर जोशी मानव संसाधन विकास मंत्री थेए तब ज्योतिष को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने मान्यता दी थी। पाठ्यक्रम में इसे शामिल भी किया गया था। लेकिन इस फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दे दी गई। तब केवल श्री राव ने देश की सबसे बड़ी अदालत में खुद बहस की और लगातार 25 मिनट तक ज्योतिष के विषय में अकाट्य तर्क पेश किए। उच्चतम अदालत से ज्योतिष के हक में फैसला हुआ। भारतीय विद्या भवन के छात्रों में 25 से 75 साल तक की आयु के अधिकारीए बुद्धिजीवीए कलाकारए आईएएसए आईपीएसए एमबीए आदि शामिल हैं। इस संस्थान में रूसए जापान आदि देशों के छात्र.छात्राएं भी हैं। राव ज्योतिष का इंटरनेट पाठ्यक्रम भी चलाते हैं।

रजत जयन्ती समारोह में राव और दिग्विजय सिंह के अतिरिक्त संस्थान के निदेशक अशोक प्रधानए गरेखानए भारतीय विद्या भवन के प्रधानाचार्य प्रोण् एनण् पिल्लैए शिक्षकगण और ज्योतिषप्रेमी मौजूद थे। अनेक कंपनियों के सीईओए फि ल्मी कलाकारों आदि ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया। आचार्य कर्नल अशोक गौड़ ने बंगबंधु मुजीबुर्ररहमानए दूसरे विश्व युद्ध में जापान का नेतृत्व करने वाले जनरल तोजोए पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री माधव राव सिंधिया आदि की कुंडलियों का विशलेषण कर द्वादशेषए पंचम भावए पंचमेशए दशम भाव और दशमेश तथा अष्टमेश के संबंधों पर प्रकाश डाला। आचार्य विनय गुप्ता ने कैंसर के रोगियों की कुंडली में एकादश और एकादेशेश के संबंधों का महत्व बताया। आचार्य विशाल अरोड़ाए और आचार्य शिवराज शर्मा ने भी ज्योतिष की बारीकियों को सरल शब्दों में समझाया। आचार्य मनोज पाठक और आाचार्य दीपक बिसारिया ने कार्यक्रम का संचालन किया।

रजत जयन्ती समारोह में राव और दिग्विजय सिंह के अतिरिक्त संस्थान के निदेशक अशोक प्रधान, गरेखान, भारतीय विद्या भवन के प्रधानाचार्य प्रो. एन. पिल्लै, शिक्षकगण और ज्योतिषप्रेमी मौजूद थे। अनेक कंपनियों के सीईओ, फि ल्मी कलाकारों आदि ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया। आचार्य कर्नल अशोक गौड़ ने बंगबंधु मुजीबुर्ररहमान, दूसरे विश्व युद्ध में जापान का नेतृत्व करने वाले जनरल तोजो, पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री माधव राव सिंधिया आदि की कुंडलियों का विशलेषण कर द्वादशेष, पंचम भाव, पंचमेश, दशम भाव और दशमेश तथा अष्टमेश के संबंधों पर प्रकाश डाला। आचार्य विनय गुप्ता ने कैंसर के रोगियों की कुंडली में एकादश और एकादेशेश के संबंधों का महत्व बताया। आचार्य विशाल अरोड़ा, और आचार्य शिवराज शर्मा ने भी ज्योतिष की बारीकियों को सरल शब्दों में समझाया। आचार्य मनोज पाठक और आाचार्य दीपक बिसारिया ने कार्यक्रम का संचालन किया।

ऊषा शर्मा

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