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कौशल प्रशिक्षण द्वारा भारत विश्व में सर्वोच्च शिखर प्राप्त कर सकता है

आज भारत की जनसंख्या 1.21 अरब है और उसमें 17 प्रतिशत की तेजी से विस्तार हो रहा है। भारत की इस आबादी में 15-59 वर्ष की आयु वर्ग के लोगों की संख्या विश्व के अन्य किसी भी देश की आबादी से सबसे अधिक है इसीलिये भारत के पास सबसे अधिक ‘युवा’ वर्ग है और उसका हमें लाभ उठाना चाहिये। परंतु अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि भारत के कुल वर्क फोर्स की संख्या में से वर्तमान में केवल 2 प्रतिशत लोगों को ही कौशल प्रशिक्षण प्राप्त है। भारत यदि कुशल कार्यबल (स्किल डेवलपमेन्ट) पर ध्यान दें तो विश्वभर की मांग को पूरा करने के लिए भारत सक्षम हो सकता है।

भारत के पास विश्वभर की भविष्य की मांगों को पूरा करने का एक महान अवसर है। कुशल कार्यबल के आधार पर भारत विश्वभर में आउटसोर्सिंग का हब बन सकता है। लेकिन दुर्भाग्य से, भारत सरकार ने हमारे युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने पर गंभीर विचार नहीं किया है। कौशल प्रशिक्षण द्वारा किसी भी मजदूर को विशेषज्ञ बनाया जा सकता है। इसके अलावा इससे देश में भारी बेरोजगारी के संकट को भी हल किया जा सकता हैं। भारत बड़े पैमाने पर कुशल मानव शक्ति का उत्पादन कर सकता है। वर्तमान यूपीए सरकार की कार्यशैली सबसे अधिक दयनीय स्थिति का सामना कर रही है। डॉ. मनमोहन सिंह की टीम घोटाले, कानून और व्यवस्था की बदतर स्थिति, प्रशासन आदि में विफलता के विपक्ष के आरोपों से उबरने में ही अपनी उर्जा बरबाद कर रही है। भारत की तुलना में चीनी सरकार ने हाल के वर्षों में युवा प्रतिभा के विकास की तरफ अभूतपूर्व ध्यान दिया है। चीन ने वर्तमान 114 मिलियन से वर्ष 2020 तक 180 मिलियन अत्यधिक कुशल श्रमिकों को तैयार करने का लक्ष्य तय किया है।

दुनिया कुशल श्रम की मांग और आपूर्ति के बीच एक लंबी खाई का सामना कर रही है। दुनिया की आबादी में वृद्धों की संख्या बढ़ रही है। 2050 तक, 1.3 अरब लोग 60 साल से ऊपर के होंगे। जिसका खास प्रभाव अमेरिका, जर्मनी और फ्रांस जैसे विकसित देशों पर पड़ेगा, क्योंकि युवा वर्ग की कमी के कारण मांग और आपूर्ति की खाई अधिक चौड़ी होती जायेगी। दूसरी ओर, भारत में अंग्रेजी जाननेवाले और टेक्नोलॉजी का उपयोग करनेवालों की संख्या विश्व के अन्य देशों की तुलना में बढ़ रही है। जिसका लाभ यह होगा की विश्व के अन्य देशों के साथ तालमेल करने में या व्यवसाय करने में उसे आसानी होगी। भारत में वर्ष 2020 के अंत तक करीब 2 अरब लोग अंग्रेजी भाषा को अच्छी तरह से जाननेवाले होंगे। इसका अर्थ यह होगा कि कार्यबल के प्रशिक्षण से भारत सेवा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निर्यातक बन सकता है। अनुमान है कि वर्ष 2022 तक, भारत 500 करोड़ कुशल श्रमिकों की मांग का सामना कर सकेगा। भारत की आबादी का 65 प्रतिशत से अधिक 35 साल से नीचे की उम्र का वर्ग है। उन्हें मजबूत कौशल प्रशिक्षण देकर प्रमाणीकरण करने का बीड़ा उठाना होगा। भारत लोगों को कुशल प्रशिक्षण देकर उन्हें तैयार करके विकसित देशों की मांगों को पूरा करने वाला विकसित देश
का दर्जा प्राप्त कर सकता है। लेकिन दुर्भाग्य से हमारी वर्तमान सरकार इस मुद्दे पर पूरा ध्यान नहीं दे रही है। यहां इस बात का उल्लेख करना जरूरी है कि 2008 में, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में, ‘कौशल विकास पर राष्ट्रीय परिषद’ गठित की गई थी, लेकिन अफसोस की बात है कि आज तक उसका कोई ठोस परिणाम नहीं आया है। आदर्श रूप से यदि कार्यान्वयन पर ध्यान दिया जाए तो अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक आयोजित करनी चाहिए। उदाहरण के लिए, गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कौशल विकास पर चीन के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए अपने राज्य में, ‘स्किल, स्पीड और स्केल’ पर जोर दिया है।
 

संगीता शुक्ला

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