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विकास में हरियाणा से पीछे है गुजरात: हुड्डा का दावा

हुड्डा सरकार का दावा है कि हरियाणा देश के दस शीर्ष विकसित राज्यों में भी शिखर पर है। इस दावे के बावजूद मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा की आंखों में एक सपना पल रहा है कि हरियाणा के युवक इतने शिक्षित और प्रशिक्षित हों कि राज्य में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के अति आधुनिक कारखानों में ही नहीं बल्कि देश विदेश में कहीं भी हर प्रकार की तकनीक पर वे काम कर सकें। फिलहाल ऐसा नहीं है। अति आधुनिक तकनीक के कारखाने बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने लगाए तो हैं हरियाणा में, लेकिन उनमें काम करने वाले अधिसंख्य युवक-युवतियों की संख्या दिल्ली सहित अन्य राज्यों की अधिक है। एक विशेष भेंट के दौरान हरियाणा के विकास की कहानी उदय इंडिया के कार्यकारी सम्पादक श्रीकान्त शर्मा को बताते हुए मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने अपने दिल का दर्द बताया कि गुडग़ांव हो या हरियाणा का अन्य शहर, औद्योगिक निवेश के लिए प्रदेश के वातावरण को अनुकूल पा कर अन्तर्राष्ट्रीय कम्पनियों ने आईटी समेत अन्य अत्याधुनिक तकनीक के कारखाने तो लगा दिए, लेकिन पूर्णतया प्रशिक्षित और शिक्षित न होने के कारण उन कारखानों में काम करने वाले कर्मचारियों में हरियाणा के युवकों की संख्या अधिक नहीं है। मुख्यमंत्री हुड्डा का सपना हरियाणा को शिक्षा का बड़ा केन्द्र बनाने का है जिससे निकट भविष्य अत्याधुनिक कारखानों में हरियाणा के युवक-युवतियों को अधिक से अधिक अवसर मिल सकें। श्रीकान्त शर्मा के साथ मुख्यमंत्री हुड्डा के साथ हुई बेबाक बातचीत के मुख्य अंश:विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि हुड्डा सरकार पूरे प्रदेश का नहीं, बल्कि कुछ क्षेत्र विशेष का ही विकास कर रही है? आप क्या कहेंगे?
सन् 2005 में हमने प्रदेश के हर क्षेत्र के विकास के संकल्प के साथ सत्ता संभाली थी। विकास के मामले में सरकार इंक्लुसिव ग्रोथ के सिद्धान्त को अपना रही है। मेरा तो एक ही नारा है: ‘समूचे प्रदेश का समूचा विकास’। पिछले आठ वर्षों में जो क्षेत्र विकास के मामले में ज्यादा पिछड़े हुए थे, उनकी ओर विशेष ध्यान दिया गया है। प्रदेश के हर क्षेत्र में सरकार ने विकास किया है और हर क्षेत्र में लगातार विकास हो रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, सिंचाई, इन्फ्रास्ट्रक्चर, उद्योग की बड़ी बड़ी परियोजनाएं हर जिले में लगी हैं। विकास का लाभ प्रदेश के हर वर्ग और हर क्षेत्र में पहुंच रहे हैं।
विकास के मामले में गुजरात और हरियाणा की तुलना की जाती है। कौन आगे है?
हरियाणा की गिनती देश के अग्रणी प्रगतिशील राज्यों में की जाती है। किसी भी प्रदेश की प्रगति के चार मापदंड होते हैं: प्रति व्यक्ति आय, प्रति व्यक्ति निवेश, प्रति व्यक्ति योजना खर्च और राजस्व संसाधनों की आपूर्ति। इन चारों मापदंडों में हरियाणा देश के अन्य सभी राज्यों से आगे है। इन चारों मापदंडों पर गुजरात, हरियाणा के मुकाबले काफी पीछे है। 11वीं पंचवर्षीय योजना अवधि में हरियाणा में राजस्व संसाधनों की आपूर्ति 192 प्रतिशत हुई, जबकि राष्ट्रीय औसत 95 प्रतिशत थी और गुजरात की 96.5 प्रतिशत थी। दिल्ली मैट्रो गुडग़ांव तक पहुंच गई है। अन्य क्षेत्रों के लोग भी इस तरह की सुविधा चाहते हैं। इस संबंध में सरकार क्या कदम उठा रही है?
गुडग़ांव पहले ही दिल्ली मैट्रो से जुड़ चुका है। लगभग 14.47 किलामीटर लम्बी इस परियोजना पर 1422 करोड़ रूपए खर्च हुए हैं। प्रदेश के औद्योगिक शहर फरीदाबाद को मैट्रो से जोडऩे का काम प्रगति पर है। दिल्ली मैट्रो का बदरपुर से बाईएमसीए चौक (फरीदाबाद) तक विस्तार किया जा रहा है। 13.875 किलामीटर लम्बी इस परियोजना पर 2494 करोड़ रूपए खर्च होंगे। यह कार्य अगस्त 2014 तक पूरा होने की संभावना है। दिल्ली मैट्रो का मुंडका से बहादुरगढ़ तक विस्तार किया जा रहा है। 4.875 किलोमीटर लम्बी इस परियोजना पर 787.96 करोड़ रूपए खर्च होंगे और इस परियोजना के मार्च 2016 तक पूरी होने की संभावना है।

आप अक्सर कहते हैं कि शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी प्रदेश ही विकास करता है। हरियाणा को शिक्षा का हब बनाने के लिए सरकार क्या प्रयास कर रही है?
हरियाणा एक एजुकेशन हब के रूप में उभर रहा है। राज्य में 2004-05 में केवल पांच सरकारी विश्वविद्यालय थे। आज इनकी संख्या बढ़कर 12 हो गई है। सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों को मिला कर राज्य में कुल 30 विश्वविद्यालय हैं। प्रदेश में केन्द्रीय विश्वविद्यालय, महिला विश्वविद्यालय, पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय, स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और आईआईएम जैसे उच्चकोटि के शिक्षण संस्थान खुले हैं। नेशनल डिफेंस यूनिविर्सिटी व विधि

विश्वविद्यालय भी स्थापित हो रहे हैं। राजीव गांधी एजुकेशन सिटी स्थापित हो रही है। सरकार की उदार नीतियों के कारण ही राज्य के कोने कोने में अनेक इंजीनियरिंग कॉलेज और दूसरे प्रोफेशनल कॉलेज स्थापित हुए हैं। आज प्रदेश का छोटा-बड़ा परिवार अपने बच्चों को मनपसंद शिक्षा अपने घर के नजदीक ही दिला सकता है। आने वाले समय में शिक्षा ग्रहण करने के लिए दूर दूर से बच्चे हरियाणा आया करेंगे।प्रधानमंत्री द्वारा आपकी अध्यक्षता में गठित कृषि कार्य दल की क्या रिपोर्ट है?
कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए मेरी अध्यक्षता में गठित मुख्यमंत्रियों के वर्किंग समूह ने किसानों को चार प्रतिशत की दर से ऋण उपलब्ध कराने और कृषि जिन्सों का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करते समय, उसमें कृषि उत्पादन की लागत के अतिरिक्त 50 प्रतिशत लाभ को शामिल किए जाने की सिफारिश की है।
खेलों के क्षेत्र में राज्य की क्या स्थिति है?
हरियाणा आज एजुकेशन हब के साथ ही खेल शक्ति के रूप में स्थापित हो चुका है। पिछले आठ वर्षों में हरियाणा ने ओलम्पिक से लेकर राष्ट्रमंडल खेलों, एशियाई खेलों,राष्ट्रीय खेलों की प्रतियोगिताओं में रिकॉर्ड पदक जीत कर हरियाणा और देश का नाम रोशन किया है। सरकार की उदार खेल नीति, खिलाडिय़ों को अच्छी खेल सुविधाओं एवं प्रोत्साहन, उत्तम खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर और खिलाडिय़ों की मेहनत से बेहतरीन नतीजे सामने आए हैं। सरकार की खेल नीति के तीन पहलू हैं: स्पेट योजना से प्रतिभाओं को पहचानना, उन्हें फेयर प्ले स्कॉलरशिप योजना के तहत छात्रवृत्ति दे कर प्रोत्साहित करना, प्रतिभाओं को तराशने के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराना और ‘पदक लाओ, पद पाओÓ नीति के तहत उन्हें भविष्य की चिन्ताओं से मुक्ति दिलाना शामिल है। राज्यों में स्टेडियमों का जाल फैला दिया गया है। राज्य में 21 जिला स्तरीय स्टेडियम हैं और 226 राजीव गांधी ग्रामीण खेल परिसर बनाए गए हैं। 232
ग्रामीण स्तरीय मिनी खेल स्टेडियम और 9 स्वीमिंग पूल, छह बहुद्देशीय हॉल, पांच एस्ट्रोटर्फ तथा तीन सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक्स हैं। ओलिम्पिक खेलों, एशियाई खेलों, कॉमनवेल्थ खेलों और विश्व कप जैसी प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाडिय़ों को दी जाने वाली इनाम राशि में भारी बढ़ोत्तरी की गई है। ओलिम्पिक खेलों में स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले हरियाणा के खिलाडिय़ों को अब पांच करोड़ रूपए, रजत पदक प्राप्त करने वाले खिलाडिय़ों को तीन करोड़ रूपए और कांस्य पदक प्राप्त करने वाले खिलाडिय़ों को सरकार दो करोड़ रूपए देती है।
हरियाणा में बेरोजगारी दूर करने के लिए सरकार की क्या योजनाएं हैं?
हरियाणा में वर्ष 2013 ‘उद्योग एवं रोजगार वर्ष’ के रूप में मनाया जा रहा है। हरियाणा के युवाओं को शिक्षित एवं कुशल बनाने के लिए उन्हें आधुनिक एवं तकनीकी शिक्षा एवं सुविधाएं उपलब्ध करवाने पर बल दिया जा रहा है। राज्य की 650 से अधिक तकनीकी संस्थाओं में एक लाख 50 हजार सीटें हैं। राज्य के 47 राजकीय महाविद्यालयों में भी रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं। सभी राजकीय महाविद्यालयों में प्लेसमेंट सेल स्थापित किए गए हैं। भारत सरकार की कौशल विकास योजना के तहत पब्लिक प्राइवेट-पार्टनरशिप योजना में 25 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान व 85 कौशल विकास केन्द्र खोलने की योजना है, जहां स्कूल की शिक्षा बीच में ही छोडऩे वाले छात्रों और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों की दक्षता का विकास होगा। नेशनल वोकेशनल एजुकेशन पब्लिकेशन्स फ्रेमवर्क से उन बच्चों को रोजगार प्राप्त करने में आसानी होगी जो स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद आगे पढ़ाई जारी नहीं रखना चाहते।
प्रदेश में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सरकार क्या कदम उठा जा रही है?
बिजली को विकास की धुरी मानते हुए प्रदेश में चार नए थर्मल पॉवर प्लांट लगाए गए हैं। इससे प्रदेश की अपनी स्थापित उत्पादन क्षमता बढ़ कर 5300.50 मेगावाट हो गई है। 2004-05 में यह क्षमता केवल 1,587 मेगावाट थी। प्रदेश में अब सभी संसाधनों से कुल उपलब्ध बिजली उत्पादन क्षमता 9,839.43 मेगावट है, जबकि 2004-05 में यह क्षमता केवल 4033.60 मेगावाट थी। यमुनानगर में 600 मेगावाट का दीनबंधु छोटूराम थर्मल पॉवर प्लांट लगाया गया है। यमुनानगर में 660 मेगावाट की एक और इकाई लगाने की मंजूरी दी गई है। 1200 मेगावाट का राजीव गांधी सुपर थर्मल पॉवर प्लांट, हिसार के खेदड़ में लगाया गया है। एनसीआर क्षेत्र में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए जिला झज्जर के झाड़ली में 1500 मेगावाट और खानपुर में 1320 मेगावाट का एक और पॉवर प्लांट लगाने की योजना है। जिला फतेहाबाद के गांव गोरखपुर में 2800 मेगावाट का परमाणु संयंत्र लगाया जा रहा है। इसके प्रथम चरण में 700-700 मेगावाट की दो इकाइयां स्थापित की जाएंगी। पड़ोसी देश भूटान में पनबिजली परियोजना लगाने के लिए भी वहां की सरकार के साथ एक समझौता किया गया है।
सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ने गरीबों, पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों, महिलाओं व बालिकाओं को सीधा लाभ पहुंचाने वाली अनेक योजनाएं शुरू की है। प्रदेश के हर परिवार को किसी न किसी रूप में सरकारी खजाने से हर महीने पैसा मिल रहा है। राज्य सरकार की उद्योग नीति क्या है?
हरियाणा में वर्ष 2013 को ‘उद्योग एवं रोजगार वर्ष’ के रूप में भी मनाया जा रहा है। हरियाणा 2005 में प्रति व्यक्ति निवेश के मामले में 14वें स्थान पर था, लेकिन आज इसका पहला स्थान है। 2011 में बनाई गई नई औद्योगिक एवं निवेश नीति में उद्योगों को प्रोत्साहन देने, रोजगार के नए अवसर पैदा करने, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा देने, आधारभूत संरचना के विकास तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम
उद्योगों के विकास पर विशेष जोर दिया गया है। कृषि आधारित उद्योगों पर विशेष बल दिया गया है। उन्हें रियायतें दी जा रही हैं। उद्योग हितैषी नीतियों के कारण हरियाणा देश विदेश के उद्यमियों की पहली पसंद बन गया है। बहुराष्ट्रीय कम्पनियां हरियाणा में अपने उद्योग स्थापित कर रही हैं। कृषि प्रधान राज्य से हट कर हरियाणा आज एक उन्नत औद्योगिक राज्य के रूप में भी जाना जाता है। 2005 से लेकर अब तक प्रदेश में 61 हजार करोड़ रूपए का निवेश हो चुका है और 97 हजार करोड़ रूपए का निवेश पाइपलाइन में है। 9,628 करोड़ रूपए का सीधा विदेशी पूंजी निवेश राज्य को प्राप्त हुआ है।पानी बचाने और जल संसाधनों के संरक्षण के लिए सरकार की क्या नीति है?
ड्रिप इरिगेशन और स्प्रिंकल इरिगेशन जैसी तकनीकों का राज्य में प्रयोग किया जा रहा है, जिससे कम पानी में अधिक सिंचाई हो सके। इन तकनीकों के लिए सरकार ऋण और सब्सिडी भी दे रही है। पानी की बूंद-बंूद का सदुपयोग किया जा रहा है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत सामुदायिक तालाब बनाने की योजना भी प्रदेश में लागू है, जिसके तहत किसानों के समूह को तालाब बनाने के लिए शत-प्रतिशत आर्थिक सहायता दी जाती है। पिछले सात सालों में 2816 तालाब बनाए गए हैं।

योजना आयोग ने वर्ष 2013-14 के लिए जो वार्षिक योजना हरियाणा के लिए मंजूर की है, उसमें आपकी सरकार किन-किन क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रही है?
योजना आयोग ने हरियाणा के लिए वर्ष 2013-14 की वार्षिक योजना 27072 करोड़ रूपए मंजूर की है, जो कि पिछली सरकार की वर्ष 2004-05 की वार्षिक योजना 2342 करोड़ रूपए के मुकाबले 11 गुणा अधिक है। हरियाणा की पिछले आठ वर्षों में आर्थिक विकास दर की औसत 9.3 प्रतिशत रही, जो कि राष्ट्रीय औसत से अधिक है। वर्ष 2013-14 की योजना में सामाजिक सेवा क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। दूसरे नंबर पर सिंचाई, बिजली, सड़क, परिवहन तथा आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज वाली परियोजनाओं को प्राथमिकता दी गई है।

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